Krishna Singh
Krishna Singh Oct 11, 2017

जब जब भी धरती पर पापीयों का पाप बढ़ता है

जब जब भी धरती  पर पापीयों का पाप  बढ़ता है

.................जब जब भी धरती पर पापीयों का पाप बढता ह तब तब में किसी ना किसी रूप में आकर पापीयों का संहार करता हूँ!
.हर पल में पृथवी पर हर एक मनुष्य के अंदर वाश करता हूँ तभी तो सब कहते है कि ये इंसान नहीं दैवता है वो उस इंसान के रूप में ही आता हूँ!
हर भगत कि ऱक्षा करना और हर पापी का संहार करना समय से पहले नहीं करता और वक्त आने पर में कभी एक पल कि भी देर नहीं करता!
.पर फिर भी मनुष्य मुझे क्यों भुल जाता है और जब पुण्य खत्म हो जाते ह और पापो कि सज़ा मिलती ह तब फिर मुझे याद करता है पर पापों कि सजा जब मिलती ह तब मुझे याद करता है। और कहता है मुझे छमा करो मे आपकी शरण आया हूँ!
.पर ये कभी नहीं कहता कि मैं मोहमाया में सब कुछ भुलकर केवल पापों को ही गले लगाया मे खुद को ही ईश्वर समझ बैठा और जो आत्मा मे विराज मान ईश्वर को भुल बैठा!
हर एक कर्म की सजा मिलती है चाहे वो अच्छा हो या बुरा मेरी अदालत मनुष्यो के कर्मो से चलती है पापीयों का संहार और भक्तों की रक्षा करना ये धर्म है और ये सृष्टि का नियम है ।

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कामेंट्स

*लखपत बालोठिया* Oct 12, 2017
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे

Jagdish Koshti Oct 12, 2017
Radhey Radhey shyam 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌲🌲🌲🌲🌲

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