Krishna Singh
Krishna Singh Jan 4, 2018

श्रीखंड में शिवजी का शिवलिंग, जाने पौराणिक मान्यता

श्रीखंड में शिवजी का शिवलिंग, जाने पौराणिक मान्यता

दुनिया की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शुमार कुल्लू श्रीखंड यात्रा विश्व पटल पर उभर रही है। कई साल से देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यात्रा में पहुंच रहे हैं। यात्रा अगस्त तक चलेगी।


श्रीखंड यात्रा के लिए 25 किलोमीटर की सीधी चढाई श्रद्धालुओं के लिए अग्नि परीक्षा सरीखी होती है। कई बार तो इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत भी हो चुकी है। 18 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड यात्रा के दौरान सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की भी कमी पडती है। श्रीखंड जाते समय करीब एक दर्जन धार्मिक स्थल व देव शिलाएं हैं। श्रीखंड में भगवान शिव की शिवलिंग हैं। श्रीखंड से करीब 50 मीटर पहले पार्वती, गणेश व कार्तिक स्वामी की प्रस्तर प्रतिमाएं हैं।
कैसे पहुंचे श्रीखंड: श्रीखंड जाने के लिए शिमला से रामपुर 130 किलोमीटर व रामपुर से बागीपुल 35 किलोमीटर दूर है। निरमंड के बागीपुल से जावं तक सात किलोमीटर वाहन योग्य सडक है। उसके बाद फिर 25 किलोमीटर की सीधी चढाई शुरू होती है। सिंहगाड, थाचरू, कालीकुंड, भीमडवारी, पार्वती बाग,नयनसरोवर व भीमबही आदि स्थान आते हैं। सिंहगाड यात्रा का बेस कैंप है। जहां से नाम दर्ज करने के बाद श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाती है। श्रीखंड सेवा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए हर पडाव पर लंगर की व्यवस्था होती है। श्रीखंड जाते समय प्राकृतिक शिव गुफा, निरमंड में सात मंदिर, जावों में माता पार्वती सहित नौ देवियां, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, सिंहगाड, जोतकाली, ढंकद्वार, बकासुर बध, ढंकद्वार व कुंषा आदि स्थान आते हैं।
पौराणिक मान्यता: श्रीखंड की पौराणिक मान्यता है कि भस्मासुर राक्षस ने अपनी तपस्या से शिव से वरदान मांगा था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रखेगा तो वह भस्म होगा। राक्षसी भाव होने के कारण उसने माता पार्वती से शादी करने की ठान ली। इसलिए भस्मापुर ने शिव के ऊपर हाथ रखकर उसे भस्म करने की योजना बनाई लेकिन भगवान विष्णु ने उसकी मंशा को नष्ट किया। विष्णु ने माता पार्वती का रूप धारण किया और भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए राजी किया। नृत्य के दौरान भस्मासुर ने अपने सिर पर ही हाथ रख लिया और भस्म हो गया। आज भी वहां की मिट्टी व पानी दूर से लाल दिखाई देते हैं

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कामेंट्स

JAI SHRI KRISHNA Dec 9, 2018

श्री केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?
दो मिनट की ये कहानी रोंगटे खड़े कर देगी..... !!
एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदा...

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Jyot Milk Fruits +239 प्रतिक्रिया 48 कॉमेंट्स • 205 शेयर
Amar Jeet Mishra Dec 9, 2018

Pranam Lotus Like +36 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 312 शेयर
Har Har Mahadev Dec 9, 2018

Om jai jai

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kavita sharma Dec 9, 2018

Pranam Like Belpatra +138 प्रतिक्रिया 127 कॉमेंट्स • 364 शेयर
RenuSuresh Dec 9, 2018

Flower Dhoop Like +84 प्रतिक्रिया 46 कॉमेंट्स • 325 शेयर
Narayan Tiwari Dec 9, 2018

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यह एक बात समझ लेंगे तो नहीं करना पड़ेगा दुखों का सामना:🚩
श्लोक-नास्ति तृष्णासमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्।
सर्वान् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते।।
अर्थात-भगवान शिव मनुष्यो को एक चेतावनी देते हुए कहते हैं क...

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Dhoop Belpatra Tulsi +227 प्रतिक्रिया 47 कॉमेंट्स • 33 शेयर
sumitra Dec 9, 2018

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Sudarshan Parik Dec 9, 2018

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