M S MAMTA
M S MAMTA Oct 22, 2018

🌿🙏Suprabhat 🙏Suvichar 🙏🌿

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कामेंट्स

M S MAMTA Oct 22, 2018
Thnx to all my friends Omm namah shivaya 🙏🌿🙏🌿🌹🙏🌿

Ritika Oct 22, 2018
Omm namah shivaya Good morning ji

Jugal Patidar Oct 22, 2018
जय भोलेनाथ हर हर महादेव जी

Sharma S N Oct 22, 2018
om namah shivay har har mahadev🙏🙏aapka mangal kre🙏🙏🌿

अमरसिहं Oct 22, 2018
पोज बहुत-बहुत अच्छा लगा धन्यबाद

Harsh Mishra Oct 22, 2018
ॐ नमः शिवाय🌿🌿🌹🌹🙏🙏

I Love Gods Nov 5, 2018
jai radha Krishna, Jai premamaya paramanda. Prem hi Parmanand.

Swami Lokeshanand Apr 24, 2019

कौशल्याजी ने भरतजी को अपनी गोद में बैठा लिया और अपने आँचल से उनके आँसू पोंछने लगीं। कौशल्याजी को भरतजी की चिंता हो आई। दशरथ महाराज भी कहते थे, कौशल्या! मुझे भरत की बहुत चिंता है, कहीं राम वनवास की आँधी भरत के जीवन दीप को बुझा न डाले। राम और भरत मेरी दो आँखें हैं, भरत मेरा बड़ा अच्छा बेटा है, उन दोनों में कोई अंतर नहीं है। और सत्य भी है, संत और भगवान में मात्र निराकार और साकार का ही अंतर है। अज्ञान के वशीभूत होकर, अभिमान के आवेश में आकर, कोई कुछ भी कहता फिरे, उनके मिथ्या प्रलाप से सत्य बदल नहीं जाता कि भगवान ही सुपात्र मुमुक्षु को अपने में मिला लेने के लिए, साकार होकर, संत बनकर आते हैं। वह परमात्मा तो सर्वव्यापक है, सबमें है, सब उसी से हैं, पर सबमें वह परिलक्षित नहीं होता, संत में भगवान की भगवत्ता स्पष्ट झलकने लगती है। तभी तो जिसने संत को पहचान लिया, उसे भगवान को पहचानने में देरी नहीं लगी, जो सही संत की दौड़ में पड़ गया, वह परमात्मा रूपी मंजिल को पा ही गया। भरतजी आए तो कौशल्याजी को लगता है जैसे रामजी ही आ गए हों। भरतजी कहते हैं, माँ! कैकेयी जगत में क्यों जन्मी, और जन्मी तो बाँझ क्यों न हो गई ? कौशल्याजी ने भरतजी के मुख पर हाथ रख दिया। कैकेयी को क्यों दोष देते हो भरत! दोष तो मेरे माथे के लेख का है। ये माता तुम पर बलिहारी जाती है बेटा, तुम धैर्य धारण करो। यों समझते समझाते सुबह हो गई और वशिष्ठजी का आगमन हुआ। यद्यपि गुरुजी भी बिलखने लगे, पर उन्होंने भरतजी के माध्यम से, हम सब के लिए बहुत सुंदर सत्य सामने रखा। कहते हैं, छ: बातें विधि के हाथ हैं, इनमें किसी का कुछ बस नहीं है और नियम यह है कि अपरिहार्य का दुख नहीं मनाना चाहिए। "हानि लाभ जीवन मरण यश अपयश विधि हाथ"

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sompal Prajapati Apr 24, 2019

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🌹🌹🌹😊😀मुस्कान 😀😊🌹🌹🌹 होंठों की मुस्कान ही मनुष्य का वास्तविक परिधान है,,, रहिमन अपनी विपत्ति को जाय ना कहिये रोय, सुनते ही सब हँसेगे बाट ना लेईहै कोय,, हम जो नहीं कर पाए उसके लिए उदास क्यों होना, हम आज जो कर सकते हैं उस पर बीते दिनों का असर आखिर क्यों आने देना चाहिए। बीती बातों को भुलाकर अगर आज में ही अपनी उर्जा लगाई जाए तो बेहतर नतीजे हमें आगे बढ़ने को ही प्रेरित करेंगे। कल में अटके रहकर हम अपने आज को भी प्रभावित करते हैं और आने वाले कल को भी। थोड़ा संयम थोड़ा हौसले की जरूरत है हंसते रहे मन को किसी भी परिस्थिति में 😔 उदास ना होने दे,, कितना जानता है वह शख्स मेरे बारे में मेरे मुस्कराने पर भी पूंछ लिया तुम्हे तकलीफ क्या है हर हर महादेव जय शिव शंकर

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shikhashu Singh Apr 24, 2019

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