NEha sharma 💞💞
NEha sharma 💞💞 Mar 31, 2020

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कामेंट्स

Neha Sharma, Haryana Mar 31, 2020
*जय श्री राधेकृष्णा 🥀🙏 बहनाजी* *जय मां कालरात्रि*👣🙏*जय हनुमान*🚩🙏*शुभ रात्रि नमन*🌹🙏 माता रानी 🐚🙏 और हनुमान जी आप सभी भाई-बहनों की मनोकामना पूर्ण करें🌹🙏

Shivsanker Shukala Mar 31, 2020
जय माता दी शुभ रात्रि विद्या जय माता दी

A. A Mar 31, 2020
Jai shree Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe my dear sis shubh ratri Vandan u always be happy and healthy my lovely lovely sis 🙏🙏🕉️🕉️🔔🔔🚩🚩🚩🚩🚩🔱🔱👣👣

Manoj Gupta Mar 31, 2020
Radhe Krishna Ji 🌷🌸💐🌀 good night ji 🙏🙏🌷🌸

ramakantpandey Mar 31, 2020
जय माता दी जय माता रानी

Amit Bhai Mar 31, 2020
Good night Meri Sistar Ji Aap Hmesha Khushi Rho Ji Aap Ki Har Mnokamna Puri Kare Mata Rani Ji 💠🎄💠

GANESH Mar 31, 2020
जय श्री राधे कृष्णा। शुभ रात्रि जी। ओम् जय जगदीश हरे 💐💐🌺🌸🙏

[email protected] Mar 31, 2020
मेरी प्रार्थना को ऐसे स्वीकार करो, हे ईश्वर, कि.. जब-जब मेरा "सर" झुके, मुझसे जुड़े हर "रिश्ते" की जिंदगी संवर जाए! "जय श्री कृष्णा"🙏🙏

[email protected] Mar 31, 2020
🌷🌿🌻🌷🌿🌻🌷 अनमोल वचनः हमेशा यह याद रहे कि आत्मा का रूप ज्योति बिन्दू है परमपिता परमात्मा शिव का रूप भी ज्योति बिन्दू है। न आत्मा को देख सकते है न परमात्मा को देख सकते है। इसका अनुभव केवल मेडिटेशन, ध्यान के द्वारा किया जा सकता है। 🙏 ओम् शान्ति 🙏 🌸आपको और आपके पूरे परिवार को सप्तम नवरात्रे की हार्दिक बधाईयॉं हो जी🌸 🌷🌿🌻🌷🌿🌻

Amit Solanki Apr 1, 2020
Jay Mata di Good Morning ji Jay Shree Krishna ji

Champatlal mali Apr 1, 2020
CL माली💐💐जय माता दी💐सुप्रभात जी 8th नवरात्रि का आज का दिन माँ का अष्टम स्वरूप जय महागौरी दुर्गा माता का आश्रीवाद बना रहे श्री गणेश जी आपकी हर मनोकामना पूरी करें दुर्गा अष्टमी व कन्या पूजा की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं घर पर ही रहे और माँ को याद करे माँ की पूजा का सौभाग्य मिला है ये शुभ अवशर बार बार नही मिलते।।।।।।।।। माँ ही इस महामारी बीमारी का एक मात्र इलाज ह घर पर रह कर पूजा करे बाहर न जाये।।।।।। जय माता दी

Amit Bhai Apr 1, 2020
Good Morning Sistar Ji Aap Hmesha Khushi Rho Ji Aap Ki Har Mnokamna Puri Kare Mata Rani Ji 💠🎄💠

*प्राचीनकाल में गोदावरी नदी के किनारे वेदधर्म मुनि का आश्रम था। एक दिन गुरुजी ने अपने शिष्यों से कहा की- शिष्यों! अब मुझे कोढ़ निकलेगा और मैं अंधा भी हो जाऊँगा, इसिलिए काशी में जाकर रहूँगा। है कोई शिष्य जो मेरे साथ रह कर सेवा करने के लिए तैयार हो ? सब चुप हो गये। उनमें संदीपनी ने कहा- गुरुदेव! मैं आपकी सेवा में रहूँगा। गुरुदेव ने कहा इक्कीस वर्ष तक सेवा के लिए रहना होगा। संदीपनी बोले इक्कीस वर्ष तो क्या मेरा पूरा जीवन ही अर्पित है आपको। वेदधर्म मुनि एवं संदीपन काशी में रहने लगे । कुछ दिन बाद गुरु के पूरे शरीर में कोढ़ निकला और अंधत्व भी आ गया । शरीर कुरूप और स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया । संदीपनी के मन में लेशमात्र भी क्षोभ नहीं हुआ । वह दिन रात गुरु जी की सेवा में तत्पर रहने लगा । गुरु को नहलाता, कपड़े धोता, भिक्षा माँगकर लाता और गुरुजी को भोजन कराता । गुरुजी डाँटते, तमाचा मार देते... किंतु संदीपनी की गुरुसेवा में तत्परता व गुरु के प्रति भक्तिभाव और प्रगाढ़ होता गया।* *गुरु निष्ठा देख काशी के अधिष्ठाता देव विश्वनाथ संदीपनी के समक्ष प्रकट होकर बोले- तेरी गुरुभक्ति देख कर हम प्रसन्न हैं । कुछ भी वर माँग लो । संदीपनी गुरु से आज्ञा लेने गया और बोला भगवान शिवजी वरदान देना चाहते हैं, आप आज्ञा दें तो आपका रोग एवं अंधेपन ठीक होने का वरदान मांग लूँ ? गुरुजी ने डाँटा,बोले- मैं अच्छा हो जाऊँ और मेरी सेवा से तेरी जान छूटे यही चाहता है तु ? अरे मूर्ख ! मेरा कर्म कभी-न-कभी तो मुझे भोगना ही पड़ेगा । संदीपनी ने भगवान शिवजी को वरदान के लिए मना कर दिया। शिवजी आश्चर्यचकित हो गये और गोलोकधाम पहुंच के श्रीकृष्ण से पूरा वृत्तान्त कहा। श्रीकृष्ण भी संदीपनी के पास वर देने आये। संदीपनी ने कहा- प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप मुझे यही वर दें कि गुरुसेवा में मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे।* *एक दिन गुरुजी ने संदीपनी को कहा कि- मेरा अंत समय आ गया है। सभी शिष्यों से मिलने की इच्छा है । संदीपनी ने सब शिष्यों को सन्देश भेज दिया। सारे शिष्य उनके दर्शन के लिए आये। गुरुजी ने सभी शिष्यों कुछ न कुछ दिया । किसी को पंचपात्र, किसी को आचमनी , किसी को आसन किसी को माला दे दी । जब संदीपनी का आये तो सभी वस्तुएं समाप्त हो चुकी थी । गुरुजी चुप हो गए,फिर बोले कि मैं तुम्हे क्या दूँ ? तुम्हारी गुरूभक्ति के समान मेरे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है । मैं तुम्हें यह वर देता हूँ कि- त्रिलोकी नाथ का अवतार होने वाला है, वह तुम्हारे शिष्य बनेंगे । संदीपनी के लिए इससे बड़ी भेंट और क्या होती । उन्होंने गुरूजी की अंत समय तक सेवा की। जब श्रीकृष्ण अवतार हुआ तो गुरुजी के दिए उस वरदान को फलीभूत करने के लिए स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दूर उज्जैन में स्थित संदीपनी ऋषि के आश्रम में भ्राता बलराम जी के साथ आए और संदीपनी ऋषि के शिष्य बने... ऐसी है गुरुभक्ति की शक्ति। इसिलिए गुरुभक्ति ही सार है... राधे राधे...संगृहीत कथा*🙏🚩

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Sanjay Singh May 10, 2020

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Meena Dubey May 10, 2020

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Sanjay Singh May 9, 2020

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Sanjay Singh May 9, 2020

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Radhe Chouhan May 9, 2020

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Sanjay Singh May 8, 2020

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Radhe Chouhan May 8, 2020

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Meena Dubey May 8, 2020

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