मायमंदिर फ़्री कुंडली
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युगल रूप ~~~~~ एक सखी बहुत सुंदर पायल लेकर स्वामिनी जू की सेवा में जाती है। मन में यही भाव आहा ! आज तो मेरे अहोभाग्य मुझे श्री जू के चरण छूने का सुअवसर मिल रहा । श्री जू के कोमल चरणों को छू पाऊँगी मैं। कहीँ मेरे स्पर्श से कोमलांगी श्री किशोरी जू को कष्ट तो न होगा। मन में यही भाव लिए श्री जू की और चलती है। हृदय में स्वामिनी जू का नाम ही ध्वनित हो रहा है। राधा राधा राधा ........ मार्ग में उसे कान्हा रोक लेते हैँ और उसे कान्हा भी आज श्री जू दिखाई पड़ते हैँ। राधा जू मैं तो आपके पास ही आ रही थी। आज मुझे आपके चरणों को छूने का सौभाग्य मिला है। ये पायल मुझे आपके चरणों में अर्पित करनी है। अरे बाँवरी ! तुझे क्या हुआ है मैं तुझे राधा दीख रहा हूँ । ये क्या लाई है तू राधा जू के लिए। सखी कहती है स्वामिनी जू ये पायल आपके लिए ही तो लाई हूँ । कान्हा उसके हाथ से पायल पकड़ लेते हैँ तो सखी कहती है प्यारी जू मुझे अपने चरण न छूने दोगी । लाओ मैं पहना दूँ । कान्हा कहते हैँ बाँवरी तू आज भर्मित जान पड़ती है। यहां बैठ जा। तभी कान्हा अपनी बाँसुरी निकालकर बजाने लगते हैँ। कान्हा की बांसुरी तो एक ही नाम पुकारती है राधा राधा राधा ......... देख मैं कान्हा हूँ । सखी कहती है अच्छा कान्हा हो । कान्हा कान्हा कान्हा ....... यही बोलते हुए उठकर श्री जू के सन्मुख पहुंच जाती है। श्री जू के पास जाकर उनसे कहने लगती है कान्हा ! मुझे फिर से बांसुरी सुनाओ ना । तुम बाँसुरी में प्यारी जू का नाम लेते हो तो मन करता है तुम्हारी बांसुरी सदा बजती ही रहे। श्री जू उस सखी को पकड़ कर हिलाती हैँ। श्री जू कहती हैँ तुझे आज क्या हो गया मैं कान्हा नहीं हूँ बांसुरी तो कान्हा के पास है। श्री जू के छूने से जाने क्या हो जाता है। सखी उनके चरणों को पकड़ लेती है और कहती है कान्हा एक बार और सुनाओ मुझे बांसुरी में प्यारी जू का नाम। तभी वहां कान्हा आ जाते हैँ । राधा और कान्हा एक दूसरे को देख देख आनन्दित होने लगते हैँ। ये उन्हीं का ही तो प्रेम है जो सखी उनको अभिन्न देख रही है। कान्हा को प्यारी जू और प्यारी जू को राधा देख रही है। ये वास्तव में युगल प्रेम ही है जहाँ एक क्षण को भी प्रिया प्रियतम का वियोग ही नहीं है। इस अद्भुत प्रेम की जय हो। जय जय श्री राधे

युगल रूप
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एक सखी बहुत सुंदर पायल लेकर स्वामिनी जू की सेवा में जाती है। मन में यही भाव आहा ! आज तो मेरे अहोभाग्य मुझे श्री जू के चरण छूने का सुअवसर मिल रहा । श्री जू के कोमल चरणों को छू पाऊँगी मैं। कहीँ मेरे स्पर्श से कोमलांगी श्री किशोरी जू को कष्ट तो न होगा। मन में यही भाव लिए श्री जू की और चलती है। हृदय में स्वामिनी जू का नाम ही ध्वनित हो रहा है। राधा राधा राधा ........

     मार्ग में उसे कान्हा रोक लेते हैँ और उसे कान्हा भी आज श्री जू दिखाई पड़ते हैँ। राधा जू मैं तो आपके पास ही आ रही थी। आज मुझे आपके चरणों को छूने का सौभाग्य मिला है। ये पायल मुझे आपके चरणों में अर्पित करनी है। अरे बाँवरी ! तुझे क्या हुआ है मैं तुझे राधा दीख रहा हूँ । ये क्या लाई है तू राधा जू के लिए। सखी कहती है स्वामिनी जू ये पायल आपके लिए ही तो लाई हूँ । कान्हा उसके हाथ से पायल पकड़ लेते हैँ तो सखी कहती है प्यारी जू मुझे अपने चरण न छूने दोगी । लाओ मैं पहना दूँ । कान्हा कहते हैँ बाँवरी तू आज भर्मित जान पड़ती है। यहां बैठ जा। तभी कान्हा अपनी बाँसुरी निकालकर बजाने लगते हैँ। कान्हा की बांसुरी तो एक ही नाम पुकारती है राधा राधा राधा ......... देख मैं कान्हा हूँ । सखी कहती है अच्छा कान्हा हो । कान्हा कान्हा कान्हा ....... यही बोलते हुए उठकर श्री जू के सन्मुख पहुंच जाती है। 

श्री जू के पास जाकर उनसे कहने लगती है कान्हा ! मुझे फिर से बांसुरी सुनाओ ना । तुम बाँसुरी में प्यारी जू का नाम लेते हो तो मन करता है तुम्हारी बांसुरी सदा बजती ही रहे। श्री जू उस सखी को पकड़ कर हिलाती हैँ। श्री जू कहती हैँ तुझे आज क्या हो गया मैं कान्हा नहीं हूँ बांसुरी तो कान्हा के पास है। श्री जू के छूने से जाने क्या हो जाता है। सखी उनके चरणों को पकड़ लेती है और कहती है कान्हा एक बार और सुनाओ मुझे बांसुरी में प्यारी जू का नाम। तभी वहां कान्हा आ जाते हैँ । 

     राधा और कान्हा एक दूसरे को देख देख आनन्दित होने लगते हैँ। ये उन्हीं का ही तो प्रेम है जो सखी उनको अभिन्न देख रही है। कान्हा को प्यारी जू और प्यारी जू को राधा देख रही है। ये वास्तव में युगल प्रेम ही है जहाँ एक क्षण को भी प्रिया प्रियतम का वियोग ही नहीं है। 

   इस अद्भुत प्रेम की जय हो। 

       जय जय श्री राधे

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कामेंट्स

Gulshan Kumar Jul 12, 2019
jai Shri Radha sachidand Thakur ji 🙏🕉 Hare Krishna 🙏 shubh Ekadshi 🕉

Jay,,, mhadevji 🙏 Jul 19, 2019

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shukla. ji Jul 19, 2019

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shukla. ji Jul 19, 2019

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Dheerendra Gupta Jul 19, 2019

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Mukesh chechani Jul 19, 2019

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Jay Lalwani Jul 19, 2019

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jpshrivastava Jul 19, 2019

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