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गंगा सप्‍तमी: जानिए कौन से ऋषि के कान से निकली थीं गंगा? हिंदू धर्म में जिस नदी को मां के समान दर्जा प्राप्‍त है, वह हैं मां गंगा और गंगा सप्‍तमी को गंगोत्‍पत्ति पर्व के रूप में मनाते हैं। इस वर्ष गंगा सप्‍तमी 11 मई दिन शनिवार को पड़ रही है। वैशाख मास के शुक्‍ल पक्ष की सप्‍तमी को गंगा सप्‍तमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मां गंगा के द्वितीय जन्‍म की तिथि के रूप में मनाया जाता है। ज‍बकि धरती पर पहली बार गंगा का अवतरण ज्‍येष्‍ठ शुक्‍ल दशमी अर्थात दशहरे के दिन हुआ था। जिसे गंगा दशहरे के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं गंगा सप्‍तमी पर क्‍या करना चाहिए और क्‍या है पौराणिक कथा… 1/7स्‍नान दान का विशेष महत्‍व गंगा सप्‍तमी के दिन मां गंगा पवित्र जल में डुबकी लगाने का पौराणिक महत्‍व है। पुराणों में बताया गया है कि गंगा सप्‍तमी के दिन गंगा स्‍नान करने से मनुष्‍य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मनुष्‍य को दुखों से भी मुक्ति मिलती है। 2/7भगीरथ जी की पूजा इस दिन गंगा को धरती पर लाने वाले भगीरथजी की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है। उसके बाद लोगों में प्रसाद वितरित किया जाता है। भक्‍तों के लिए खुले केदारनाथ के कपाट, इस दीप के दर्शन का रहता है श्रद्धालुओं को इंतजार 3/7गंगा सप्‍तमी पर क्‍या करें गंगा सप्‍तमी को कई स्‍थानों पर गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्‍नान का विशेष महत्‍व होने की वजह से हो सके तो किसी एक तीर्थस्‍थान पर अवश्‍य जाना चाहिए। अगर ऐसा संभव न हो पाए तो घर में गंगाजल की कुछ बूंदें नहाने के जल में मिलाकर स्‍नान करना चाहिए। 4/7शिव की आराधना भगवान शिव की आराधना भी इस दिन शुभ फलदायी मानी जाती है। इसके अलावा गंगा को अपने तप से पृथ्वी पर लाने वाले भगीरथ की पूजा भी कर सकते हैं। गंगा पूजन के साथ-साथ दान-पुण्य करने का भी फल मिलता है। इस दिन किसी गरीब जरूरतमंद को अनाज, फल और मिष्‍ठान का दान करना चाहिए। हो सके तो कुछ दक्षिणा भी देनी चाहिए। 5/7गंगा सप्‍तमी की कथा गंगा सप्‍तती के विषय में जो कथा पुराणों में मिलती है वह इस प्रकार है कि जब गंगा ने जह्नु ऋषि के कमंडल आदि बहा दिए थे, तो वह क्रोधित हो गए थे और उन्‍होंने पूरी गंगा को ही पी लिया था। फिर भगीरथ ऋषि के प्रार्थना करने पर जह्नु ऋषि ने अपने कान से गंगा को निकाला था। उस दिन वैशाख शुक्‍ल सप्‍तमी की तिथि थी। इसलिए यह तिथि गंगा मैय्या के द्वितीय जन्‍म की तिथि मानी जाती है। तुलसी के पास भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें, आने लगती है दरिद्रता 6/7राधा-कृष्ण हो गए जल पुराणों में बताया गया है कि गंगा सप्‍तमी का ही दिन था कि ब्रह्मलोक में भगवान कृष्‍ण और राधा रास करते हुए इतना लीन हो गए कि दोनों मिलकर जल बन गए और उसी जल को ब्रह्माजी ने अपने कमंडल में भर लिया। 7/7भगवान शिव ने जटाओं में भरा स्‍वर्ग में बह रही मां गंगा जब भगीरथ जी के आग्रह पर धरती पर आने को तैयार हुईं तो उनका वेग कम करने के लिए भगवान शिव ने उन्‍हें अपनी जटाओं में भर लिया। इसके बाद कैलाश से बहते हुए फिर धराधाम पर आई। आप व आपके पूरे परिवार को गंगा सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएं

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कामेंट्स

G.SHARMA May 11, 2019
जय मां गंगे शुभ प्रभात वंदन जी आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो राधे राधे जी

Babita Sharma May 11, 2019
राधे राधे भाई 🙏 गंगा सप्तमी की शुभकामनाएं 🌹 हर हर गंगे 🙏

B. L. Soni. vns. May 11, 2019
Har Har Mahadev shambhu shree kashi Vishavnath ganga Mata parvti 🌹🙏🌹

Anita Mittal May 11, 2019
जय माँ गंगा जी माता रानी की कृपा व स्नेह आपके साथ बना रहे भाईजी आपका हर फर मंंगलमय व सर्वशुभदायी हो जी

sumitra May 11, 2019
Bhut Achi jankari bhai ji Aapka din shubh v mnglmay ho bhaiji Shnidev ji ki kripya Aap or aapke priwar pr hmesha BNI rhe bhaiji🙏🌹

Sandhya Nagar May 11, 2019
*🌸 एक अत्यन्त रोचक कथा जब साक्षी बनकर ठाकुरजी स्वयं गवाही देने आये👇🏻🌸💐👏🏻* *🌸 "साक्षी गोपाल" 🌸* ईश्वर है या नहीं इस विषय पर आज भी तर्क-वितर्क होते रहते हैं। जो मानते हैं कि ईश्वर है उनके लिए उनका निराकार रूप भी उतना ही महत्व रखता है, जितना कि ईश्वर का साकार रूप। इसलिए ईश्वर को हर हाल में मानने वालों को आस्तिक और उन्हें न मानने वालों को नास्तिक कहते हैं। ऐसे कुछ आस्तिक भक्तों का मत है कि जब कभी हम विपदा में होते हैं ईश्वर हमारी सहायता जरूर करने आते हैं। पुराणों में भक्त और ईश्वर के अटूट प्रेम से संबंधित बहुत सी कहानियाँ आज भी लोकप्रिय है। ऐसी ही एक कहानी आज हम आपकों बता रहे हैं जिसके द्वारा आपको भक्त और भगवान का रिश्ता कितना अटूट है पता चल जाएगा। हमारे देश में साक्षी गोपाल नामक एक मन्दिर है। एक बार दो ब्राह्मण वृंदावन की यात्रा पर निकले जिनमें से एक वृद्ध था और दूसरा जवान था। यात्रा काफी लम्बी और कठिन थी जिस कारण उन दोनों यात्रियों को यात्रा करने में कई कष्टों का सामना करना पड़ा उस समय रेलगाड़ियों की भी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। वृद्ध व्यक्ति ब्राह्मण युवक का अत्यन्त कृतज्ञ था क्योंकि उसने यात्रा के दौरान वृद्ध व्यक्ति की सहायता की थी। वृंदावन पहुँचकर उस वृद्ध व्यक्ति ने कहा," हे युवक ! तुमने मेरी अत्यधिक सेवा की है। मैं तुम्हारा अत्यन्त कृतज्ञ हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी इस सेवा के बदले में मैं तुम्हे कुछ पुरस्कार दूँ।" उस ब्राह्मण युवक ने उससे कुछ भी लेने से इन्कार कर दिया पर वृद्ध व्यक्ति हठ करने लगा। फिर उस वृद्ध व्यक्ति ने अपनी जवान पुत्री का विवाह उस ब्राह्मण युवक से करने का वचन दिया। ब्राह्मण युवक ने वृद्ध व्यक्ति को समझाया कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि आप बहुत अमीर हैं और मैं तो बहुत ही गरीब ब्राह्मण हूँ। यह वार्तालाप मन्दिर में भगवान गोपाल कृष्ण के श्रीविग्रह समक्ष हो रहा था लेकिन वृद्ध व्यक्ति अपनी हठ पर अड़ा रहा और फिर कुछ दिन तक वृंदावन रहने के बाद दोनों घर लौट आये। वृद्ध व्यक्ति ने सारी बातें घर पर आकर बताई कि उसने अपनी बेटी का विवाह एक ब्राह्मण से तय कर दिया है पर पत्नी को यह सब मंजूर नहीं था। उस वृद्ध पुरुष की पत्नी ने कहा, "यदि आप मेरी पुत्री का विवाह उस युवक से करेंगे तो मैं आत्महत्या कर लूँगी।" कुछ समय व्यतीत होने के बाद ब्राह्मण युवक को यह चिंता थी कि वृद्ध अपने वचन को पूरा करेगा या नहीं। फिर ब्राह्मण युवक से रहा न गया और उसने वृद्ध पुरुष को उसका वचन याद करवाया। वह वृद्ध पुरुष मौन रहा और उसे डर था कि अगर वह अपनी बेटी का विवाह इससे करवाता है तो उसकी पत्नी अपनी जान दे देगी और वृद्ध पुरुष ने कोई उत्तर न दिया। तब ब्राह्मण युवक उसे उसका दिया हुआ वचन याद करवाने लगा और तभी वृद्ध पुरुष के बेटे ने उस ब्राह्मण युवक को ये कहकर घर से निकाल दिया कि तुम झूठ बोल रहे हो और तुम मेरे पिता को लूटने के लिए आए हो। ब्राह्मण युवक ने उसके पिता द्वारा दिया गया वचन याद करवाया। ब्राह्मण युवक ने कहा कि यह सारे वचन तुम्हारे पिता जी ने श्रीविग्रह के सामने दिए थे तब वृद्ध व्यक्ति का ज्येष्ठ पुत्र जो भगवान को नहीं मानता था युवक को कहने लगा अगर तुम कहते हो भगवान इस बात के साक्षी है तो यही सही। यदि भगवान प्रकट होकर यह साक्षी दें कि मेरे पिता ने वचन दिया है तो तुम मेरी बहन के साथ विवाह कर सकते हो। तब युवक ने कहा, "हाँ, मैं भगवान श्रीकृष्ण से कहूँगा कि वे साक्षी के रूप में आयें। उसे भगवान श्रीकृष्ण पर पूरा विश्वास था कि भगवान श्रीकृष्ण उसके लिए वृंदावन से जरूर आयेंगे। फिर अचानक वृंदावन के मन्दिर की मूर्ति से आवाज सुनाई दी कि मैं तुम्हारे साथ कैसे चल सकता हूँ मैं तो मात्र एक मूर्ति हूँ, तब उस युवक ने कहा, "कि अगर मूर्ति बात कर सकती है तो साथ भी चल सकती है।" तब भगवान श्रीकृष्ण ने युवक के समक्ष एक शर्त रख दी कि "तुम मुझे किसी भी दिशा में ले जाना मगर तुम पीछे पलटकर नहीं देखोगे तुम सिर्फ मेरे नूपुरों की ध्वनि से यह जान सकोगे कि मैं तुम्हारे पीछे आ रहा हूँ।" युवक ने उनकी बात मान ली और वह वृंदावन से चल पड़े और जिस नगर में जाना था वहाँ पहुँचने के बाद युवक को नूपुरों की ध्वनि आना बन्द हो गयी और युवक ने धैर्य न धारण कर सकने के कारण पीछे मुड़ कर देख लिया और मूर्ति वहीं पर स्थिर खड़ी थी अब मूर्ति आगे नहीं चल सकती थी क्योंकि युवक ने पीछे मुड़ कर देख लिया था। वह युवक दौड़कर नगर पहुँचा और सब लोगों को इक्ट्ठा करके कहने लगा कि देखो भगवान श्रीकृष्ण साक्षी रूप में आये हैं। लोग स्तंभित थे कि इतनी बड़ी मूर्ति इतनी दूरी से चल कर आई है। उन्होंने श्रीविग्रह के सम्मान में उस स्थल पर एक मन्दिर बनवा दिया और आज भी लोग इस मन्दिर में साश्री गोपाल की पूजा करते हैं। "जय जय श्री राधे"🙏🏻💫 *****************************

kailash mali Jul 18, 2019

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Krishna Singh Jul 17, 2019

क्‍या है ॐ के उच्‍चारण का सही तरीका और समय क्‍या आपको पता है कि ओम या ॐ शब्‍द का सही उच्‍चारण और उच्‍चारण करने का सही समय क्‍या है? ॐ, इस शब्‍द को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और धार्मिक माना गया है। हिंदू धर्म और शास्‍त्र में कुछ बिना ॐ शब्‍द के अधूरा माना गया है। पूजा किसी भी देवी या देवता की हो ॐ शब्‍द का उच्‍चारण सबसे पहले किया जाता है। हिंदू धर्म में हर पवित्र मंत्र में ॐ शब्‍द का प्रयोग जरूर किया गया है। शास्‍त्रों के अनुसार ॐ शब्‍द को भगवान शिव का अति प्रिय माना गया है। विज्ञान ने भी इस शब्‍द को मेडिकेटेड माना है। ओम शब्‍द के उच्‍चारण मात्र से निकलने वाली ध्‍वनि आपके मन को शांत करती है और आपको कई रोगों से मुक्‍त करती है। इस शब्‍द में बहुत शक्ति है। तो चलिए जानते हैं कि ओम शब्‍द का उच्‍चारण करने का सही तरीका क्‍या है? और इस शब्‍द को किस समय बोलने से इसका अच्‍छा असर होता है। कैसे करें ॐ का उच्‍चारण  सबसे पहले यह जान लें कि ॐ अपने आप में एक सम्‍पूर्ण मंत्र है। यह मंत्र छोटा और आसान नजर आता है उतना ही मुश्किल इसका उच्‍चारण होता है। अमूमन लोग ॐ का गलत उच्‍चारण करते हैं। गौरतलब है कि हिंदू धर्म (हिंदू धर्म में इस मंत्र का क्‍यों है महत्‍व)में किसी भी मंत्र का गलत उच्‍चारण करने से इसका बुरा असर पड़ता है। तो चलिए हम बाताते हैं कि आप जब ओम मंत्र का जाप करें तो इसका उच्‍चारण कैसे करें। ओम शब्‍द तीन अक्षरों से मिल कर बना है। यह अक्षर है अ, उ और म। इसमें अ का अर्थ है उत्‍पन्‍न करना, उ का मतलब है उठाना और म का अर्थ है मौन रहना। यानि जब यह तीनों शब्‍द मिलते हैं तो उसका आश्‍य होता है ब्रह्मलीन होजाना। इसलिए आप जब भी ॐ का उच्‍चारण करें तो इन तीन अक्षरों को ध्‍यान में रख कर करें।  ॐ शब्‍द का उच्‍चारण करते वक्‍त एक विशेष ध्‍वनि उत्‍पन्‍न होती है। जिससे शरीर के अलग-अलग भाग में कंपन होता है। जब आप उ बोलते हैं तो आपके शरीर के मध्‍य भाग में कंपन होता है। इससे आपके सीने , फेफड़ों और पेट पर बहुत अच्‍छा असर पड़ता है। वहीं जब आप म बोलते हैं तो इसकी ध्‍वनि से मस्तिस्‍क में कंपन होता है। इससे दिमाग की सारी नसे खुल जाती हैं। शरीर के महत्‍वपूर्ण ऑर्गेंस इन्‍हीं दोनों हिस्‍सों में होते हैं। ॐ के स्‍वर से जो कंपन होता है वह शरीर को अंदर से शुद्ध करता है। इतना ही नहीं यह आपकी स्‍मरण शक्ति और ध्‍यान लगाने की क्षमता को सुधारता है। ॐ के उच्‍चारण से आपको मानसिक शांति मिलती है। इस शब्‍द का स्‍वर इतना पवित्र होता है कि यदि आप तनव में हैं तो वह भी दूर हो जाता है। यह शब्‍द आपके सोचने समझने के तरीके को बदलता है और आपको छोटी-छोटी परेशानियों से बाहर निकलने का रास्‍ता बताता है। (इस मंत्र को बोलने से आप हो सकती हैं रोग मुक्‍त ) ॐ को बोलने का सही समय  हर चीज को करने का एक सही समय होता है। किसी भी मंत्र के उच्‍चारण का भी एक समय होता है। अगर आप किसी भी मंत्र को बेटाइम ही बोलना शुरू कर देंगे तो शायद इसका अच्‍छा नहीं बुरा असर पड़े। इसी तरह ॐ मंत्र को बोलने का एक सही समय होता है। अगर आप ॐ का उच्‍चारण करना चाहती हैं और इसके लाभ उठाना चाहती हैं तो आपको सुबह सूर्य उदय होने से पूर्व किसी शांत जगह पर सुखासन मूद्रा में बैठ कर ॐ का उच्‍चारण करना चाहिए। ध्‍यान रहे कि जब आप ॐ का उच्‍चारण करें तो इसकी संख्‍या 108 होनी चाहिए। (सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है ॐ) जब आप ॐ शब्‍द का उच्‍चारण करें तो आपको केवल इस शब्‍द पर ही पूरा फोकस करना है। इस शब्‍द बालते वक्‍त आपको इसे अंदर से महसूस करना है। इस शब्‍द के उच्‍चारण के समय आपको ध्‍यान लगाने के साथ-साथ इस शब्‍द को देखना भी हैं मगर मन की आंखों से। इसके लिए आपको आंखें बंद कर के ॐ का उच्‍चारण करना चाहिए। इससे आप पूरे ध्‍यान और मन के साथ इस मंत्र का जाप कर पाएंगी।

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raj kumar Jul 17, 2019

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Ashok Verma Jul 17, 2019

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Kumarpal Shah Jul 17, 2019

🕉namah shivya ✅🚩🚩 @ 🤔 *स्वयंपाकाची आवड आहे? मग सादर आहे खास टिप्स!* *LetsUp | Tips & Tricks* बऱ्याचदा स्वयंपाक उत्तम येत असतो. मात्र कधी-कधी काहीतरी चूक होते आणि ती सुधारण्यासाठी आपल्याला मार्गच सापडत नाही. म्हणून चूक होऊच नये यासाठी काही खास टिप्स जाणून घेऊयात... 🍅 *टोमॅटो पल्प काढण्यासाठी* : टोमॅटोचा पल्प पटकन काढण्यासाठी कुकरमध्ये मीठ व पाण्यात उकळावे त्यानंतर त्याची साल पटकन् काढता येते. याचा उपयोग टोमॅटो सूप, ग्रेव्ही व ज्युससाठी करता येतो. 😋 *कुरकुरीत पुऱ्या बनवण्यासाठी* : कुरकुरीत पुऱ्या बनवण्यासाठी कणकेत 2 चमचे गरम केलेले तेल घाला. 🍋 *लिंब ताजे ठेवण्यासाठी* : लिंब बाजारातून आणल्यावर ते लवकरच कडक होवून चवहीन होतात. त्यासाठी लिंबं निट धूवून व नंतर पुसून त्यांना नारळाचे तेल लावल्यास व फ्रिजमध्ये ठेवल्यास ते बरेच दिवस ताजे राहतात. 🥥 *नारळाचे दोन समान भाग करण्यासाठी* : जर तुम्हाला नारळाचे समान दोन भाग करायचे असतील तर त्यावर आपले बोट ठेवून जेथून तोडायचे आहे तेथे बोट ठेवावे त्याला पाण्याची रेघ अर्ध्यातून ओढून नंतर जोरात आपटावे, नारळ तेथूनच तुटेल. 🍚 *नरम व मोकळ्या भातासाठी* : तांदुळ शिजवतांना कुकरमध्ये शिजवावा त्याने भात नरम होतो. त्यात 1 चमचा लिंबू रस घातल्यास भात मोकळा होतो. 🎯 *

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