माँ बगलामुखी- सूक्ष्म परिचय।

माँ बगलामुखी- सूक्ष्म परिचय।

🙏🏽🙏🏽🙏🏽 माँ बगलामुखी- सूक्ष्म परिचय🙏🏽🙏🏽🙏🏽

मैं, यति नरसिंहानंद सरस्वती,आज जो कुछ भी थोड़ा बहुत संघर्ष अपने जीवन में कर पाया तो उसका कारण मेरा कोई अपना गुण नहीँ था बल्कि केवल और केवल माँ बगलामुखी की मुझ पर कृपा थी।मेरी इच्छा है कि प्रत्येक सनातन धर्मी युवक माँ की पूजा करके धन धान्य,सद्बुद्धि और पराक्रम अर्जित करें और अपने धर्म और अपने वंश की रक्षा करे।

माँ बगलामुखी की पूजा करने वालो को कभी धन की कमी नही रहती और कोई भी शत्रु उनका कुछ नही बिगाड़ सकता।माँ बगलामुखी की शरण मे जाकर व्यक्ति अपने परिवार को बीमारी और अकाल मृत्यु से मुक्ति दिला सकता है।

देवाधिदेव भगवान महादेव शिव की दस महाशक्ति जिन्हें हम दस महाविद्या के रूप में जानते है,उनमें आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी हैं।इन्हें सद्बुद्धि,विजय और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है।इनकी पूजा करने वाला व्यक्ति कभी निर्धन नहीँ हो सकता और उसका कोई भी शत्रु उसे पराजित नहीँ कर सकता।सर्वप्रथम माँ बगलामुखी की पूजा भगवान विष्णु,उनके बाद ब्रह्मा जी ने की थी इसीलिये माँ को वैष्णवी भी कहते हैं।तंत्र में इन्हें भी ब्रह्मास्त्र माना जाता है।

मानव रूप में सबसे पहले भगवान परशुराम ने माँ बगलामुखी की साधना और उपासना की।माँ की कृपा से ही वो अजेय और अमर हुए।
भगवान परशुराम के बाद रावण और इंद्रजीत मेघनाथ माँ बगलामुखी के महान उपासक हुए।भगवान परशुराम ने ही राम जन्म का प्रयोजन समझने के बाद भगवान श्रीराम को रावण वध के लिये माँ बगलामुखी उपासना की शिक्षा दी।
योगेश्वर श्रीकृष्ण,आचार्य द्रोण,पितामह भीष्म,दानवीर कर्ण और अर्जुन आदि सभी वीरों ने माँ बगलामुखी की साधना से ही अतुलित बल और पराक्रम अर्जित किया।तबसे आज तक जो भी योद्धा माँ की शरण लेता है,वो अपने जीवन मे हमेशा हमेशा के लिये अपने शत्रुओं को पराजित करके धन,संपत्ति,संतान, सुख,स्वास्थ्य और ऐश्वर्य अर्जित करता है और जीवन के बाद स्वर्ग प्राप्त करता है।

माँ बगलामुखी की उपासना के कुछ लाभ निम्नलिखित हैं:-
1.जो व्यक्ति किसी सुयोग्य गुरु के दीक्षा लेकर प्रतिदिन माँ के मंत्र का जाप करता है और यदा कदा माँ के हवनात्मक यज्ञ में भाग लेता है, उस पर किसी भी भूत,प्रेत या बुरी शक्ति का कोई दुष्प्रभाव नहीँ पड़ता और उसकी बुद्धि सदैव उसे सही रास्ता दिखाती है।
2.जो व्यक्ति एक वर्ष में एक लाख मंत्रो का जाप और ग्यारह हजार आहुतियों का हवन करता है,उसे उस वर्ष में सामान्य शत्रुओं का भय नहीँ रहता और किसी भी मुकदमे या झगड़े में उसे जेल का भय नहीँ रहता।ऐसे साधक को कभी धन की हानि नहीँ होती।
3.जो व्यक्ति अपने जीवन मे ग्यारह लाख माँ के मंत्रो का जाप और सवा लाख आहुतियों का हवन कर लेता है,उसके जीवन मे उसे अखण्ड लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है और उसका परिवार अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाता है।
4.जो व्यक्ति अपने जीवन मे एक करोड़ माँ के मंत्रो का जाप कर लेता है और ग्यारह लाख आहुतियों का यज्ञ करता है तो वह दानवीर कर्ण और अर्जुन की तरह विश्व विजेता और अखण्ड यश का अधिकारी हो जाता है।
5.जो व्यक्ति अपने जीवन मे सवा करोड़ मंत्रो का जप और सवा करोड़ आहुतियों का हवन कर लेता है,उस व्यक्ति को पितामह भीष्म की तरह इच्छा मृत्यु की शक्ति प्राप्त होती है अन्यथा लंकापति रावण की तरह स्वयं परमात्मा को उसकी मुक्ति के लिये अवतरित होना पड़ता है।

ये तो केवल कुछ बाते हैं अन्यथा माँ बगलामुखी की पूजा के अनन्त फल हैं।पर इसके लिये सदैव ये सावधानी रखनी चाहिये कि सारी पूजा किसी साधक को ही गुरु बना कर करनी चाहिये।

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कामेंट्स

S.B. Yadav Sep 1, 2017
JAI MAA JAGDAMBE JAI BHAWANI JAI MAHAKAALI JAI JAI MAA

navin thakkar Sep 1, 2017
बहूत सुंदर जानकारी माँ की 🙏शुभम जी क्या आप भी माँ पूजा करते हे ?

Lokesh Kumar Singh Sep 3, 2017
🙏🏽🙏🏽🙏🏽 माँ बगलामुखी- सूक्ष्म परिचय🙏🏽🙏🏽🙏🏽 मैं, यति नरसिंहानंद सरस्वती,आज जो कुछ भी थोड़ा बहुत संघर्ष अपने जीवन में कर पाया तो उसका कारण मेरा कोई अपना गुण नहीँ था बल्कि केवल और केवल माँ बगलामुखी की मुझ पर कृपा थी।मेरी इच्छा है कि प्रत्येक सनातन धर्मी युवक माँ की पूजा करके धन धान्य,सद्बुद्धि और पराक्रम अर्जित करें और अपने धर्म और अपने वंश की रक्षा करे। माँ बगलामुखी की पूजा करने वालो को कभी धन की कमी नही रहती और कोई भी शत्रु उनका कुछ नही बिगाड़ सकता।माँ बगलामुखी की शरण मे जाकर व्यक्ति अपने परिवार को बीमारी और अकाल मृत्यु से मुक्ति दिला सकता है। देवाधिदेव भगवान महादेव शिव की दस महाशक्ति जिन्हें हम दस महाविद्या के रूप में जानते है,उनमें आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी हैं।इन्हें सद्बुद्धि,विजय और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है।इनकी पूजा करने वाला व्यक्ति कभी निर्धन नहीँ हो सकता और उसका कोई भी शत्रु उसे पराजित नहीँ कर सकता।सर्वप्रथम माँ बगलामुखी की पूजा भगवान विष्णु,उनके बाद ब्रह्मा जी ने की थी इसीलिये माँ को वैष्णवी भी कहते हैं।तंत्र में इन्हें भी ब्रह्मास्त्र माना जाता है। मानव रूप में सबसे पहले भगवान परशुराम ने माँ बगलामुखी की साधना और उपासना की।माँ की कृपा से ही वो अजेय और अमर हुए। भगवान परशुराम के बाद रावण और इंद्रजीत मेघनाथ माँ बगलामुखी के महान उपासक हुए।भगवान परशुराम ने ही राम जन्म का प्रयोजन समझने के बाद भगवान श्रीराम को रावण वध के लिये माँ बगलामुखी उपासना की शिक्षा दी। योगेश्वर श्रीकृष्ण,आचार्य द्रोण,पितामह भीष्म,दानवीर कर्ण और अर्जुन आदि सभी वीरों ने माँ बगलामुखी की साधना से ही अतुलित बल और पराक्रम अर्जित किया।तबसे आज तक जो भी योद्धा माँ की शरण लेता है,वो अपने जीवन मे हमेशा हमेशा के लिये अपने शत्रुओं को पराजित करके धन,संपत्ति,संतान, सुख,स्वास्थ्य और ऐश्वर्य अर्जित करता है और जीवन के बाद स्वर्ग प्राप्त करता है। माँ बगलामुखी की उपासना के कुछ लाभ निम्नलिखित हैं:- 1.जो व्यक्ति किसी सुयोग्य गुरु के दीक्षा लेकर प्रतिदिन माँ के मंत्र का जाप करता है और यदा कदा माँ के हवनात्मक यज्ञ में भाग लेता है, उस पर किसी भी भूत,प्रेत या बुरी शक्ति का कोई दुष्प्रभाव नहीँ पड़ता और उसकी बुद्धि सदैव उसे सही रास्ता दिखाती है। 2.जो व्यक्ति एक वर्ष में एक लाख मंत्रो का जाप और ग्यारह हजार आहुतियों का हवन करता है,उसे उस वर्ष में सामान्य शत्रुओं का भय नहीँ रहता और किसी भी मुकदमे या झगड़े में उसे जेल का भय नहीँ रहता।ऐसे साधक को कभी धन की हानि नहीँ होती। 3.जो व्यक्ति अपने जीवन मे ग्यारह लाख माँ के मंत्रो का जाप और सवा लाख आहुतियों का हवन कर लेता है,उसके जीवन मे उसे अखण्ड लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है और उसका परिवार अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाता है। 4.जो व्यक्ति अपने जीवन मे एक करोड़ माँ के मंत्रो का जाप कर लेता है और ग्यारह लाख आहुतियों का यज्ञ करता है तो वह दानवीर कर्ण और अर्जुन की तरह विश्व विजेता और अखण्ड यश का अधिकारी हो जाता है। 5.जो व्यक्ति अपने जीवन मे सवा करोड़ मंत्रो का जप और सवा करोड़ आहुतियों का हवन कर लेता है,उस व्यक्ति को पितामह भीष्म की तरह इच्छा मृत्यु की शक्ति प्राप्त होती है अन्यथा लंकापति रावण की तरह स्वयं परमात्मा को उसकी मुक्ति के लिये अवतरित होना पड़ता है। ये तो केवल कुछ बाते हैं अन्यथा माँ बगलामुखी की पूजा के अनन्त फल हैं।पर इसके लिये सदैव ये सावधानी रखनी चाहिये कि सारी पूजा किसी साधक को ही गुरु बना कर करनी चाहिये।

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