Deepak
Deepak Aug 12, 2020

शुक्र अस्त

शुक्र अस्त

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पत्नी के प्रति प्रेम " नवलेस तुम अपनी बीबी से इतना क्यों डरते हो? "मैने अपने साथ मे काम करने वाले कर्मचारी से पुछा।। "मै डरता नही साहब *उसकी कद्र करता* हूँ उसका *सम्मान* करता हूँ।"उसने जबाव दिया। मैं हंसा और बोला-" ऐसा क्या है उसमें। ना सुरत ना पढी लिखी।" जबाव मिला-" कोई फरक नही पडता साहब कि वो कैसी है पर *मुझे सबसे प्यारा रिश्ता उसी का* लगता है।" "जोरू का गुलाम।"मेरे मुँह से निकला।" और सारे रिश्ते कोई मायने नही रखते तेरे लिये।"मैने पुछा। उसने बहुत इत्मिनान से जबाव दिया- "साहब जी माँ बाप रिश्तेदार नही होते। वो भगवान होते हैं।उनसे रिश्ता नही निभाते उनकी पूजा करते हैं। भाई बहन के रिश्ते जन्मजात होते हैं , दोस्ती का रिश्ता भी मतलब का ही होता है। आपका मेरा रिश्ता भी जरूरत और पैसे का है पर, *पत्नी बिना किसी करीबी रिश्ते के होते हुए भी हमेशा के लिये हमारी हो जाती है* *अपने सारे रिश्ते को पीछे छोडकर।* और हमारे हर सुख दुख की सहभागी बन जाती है *आखिरी साँसो तक।"* मै अचरज से उसकी बातें सुन रहा था। वह आगे बोला-"साहब जी, पत्नी अकेला रिश्ता नही है, बल्कि वो पुरा *रिश्तों की भण्डार है।* जब वो हमारी सेवा करती है हमारी देख भाल करती है , हमसे दुलार करती है तो *एक माँ जैसी होती है।* जब वो हमे जमाने के उतार चढाव से आगाह करती है,और मैं अपनी सारी कमाई उसके हाथ पर रख देता हूँ क्योकि जानता हूँ वह हर हाल मे मेरे घर का भला करेगी तब *पिता जैसी होती है।* जब हमारा ख्याल रखती है हमसे लाड़ करती है, हमारी गलती पर डाँटती है, हमारे लिये खरीदारी करती है तब *बहन जैसी होती है।* जब हमसे नयी नयी फरमाईश करती है, नखरे करती है, रूठती है , अपनी बात मनवाने की जिद करती है तब *बेटी जैसी होती है।* जब हमसे सलाह करती है मशवरा देती है ,परिवार चलाने के लिये नसीहतें देती है, झगडे करती है तब एक *दोस्त जैसी होती है।* जब वह सारे घर का लेन देन , खरीददारी , घर चलाने की जिम्मेदारी उठाती है तो एक *मालकिन जैसी होती है*। *और जब वही सारी दुनिया को यहाँ तक कि अपने बच्चो को भी छोडकर हमारे बाहों मे आती है तब वह *पत्नी,* *प्रेमिका,* *प्रेयसी, अर्धांगिनी , हमारी प्राण और आत्मा होती है जो अपना सब कुछ सिर्फ हमपर न्योछावर करती है।"* मैं *उसकी इज्जत करता हूँ तो क्या गलत करता हूँ साहब ।"* मैं उसकी बात सुकर अवाक रह गया।। एक सीमित साधनो मे जीवन निर्वाह करनेवाले से जीवन का यह अनुभव सुनकर मुझे एक नया अनुभव हुआ ! 🙏*हर अच्छी पत्नी को समर्पित* नारी शक्ति को कोटि कोटि प्रणाम करते हैं,,,

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Sarvagya Shukla Sep 25, 2020

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🚩🙏 यह विचार उचित है , और ये सत्य घटनाक्रम है *( यह लेख किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं है आप अपना विचार एवं मार्गदर्शन दे सकते हैं )* एक काल में देवराज इन्द्र ने देवगुरु बृहस्पति से असहमति जताई और देवकार्य सम्पन्न कराने के लिए उन्होंने विश्वरूप जी को पुरोहित पद पर नियुक्ति किया। लेकिन विश्वरूप जी जब भी देवताओं को बल देने वाले हवि का भाग आहुतियां प्रदान करते तो उसका कुछ भाग देवताओं को न मिल कर दैत्यों को मिलने लगा क्योंकि विश्वरूप जी दैत्यों के हितैषी थे , जब ये बात देवराज इन्द्र को पता चली तो उन्होंने उसी क्षण विश्वरूप जी का सिर काट डाला जिसके कारण उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा । जिसे बाद में बृक्षों , जल , स्त्रियों और पृथ्वी में बांट दिया गया । वृक्ष पर जो गोंद निकलता है वह उसी का भाग है , पानी में जो झाग बनता और काई है ये उनका ही भाग है , स्त्रियों को जो ऋतु धर्म होता है ये उसी ब्रह्म हत्या का भाग है , और भूमि पर जो बरसात में कुकुरमुत्ते होते हैं और बंजर भूमि है ये उसी का भाग है । इसके पीछे का भाव यह है कि पुरोहित को अपने यजमान के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए । जैसा कि पुरोहित होने पर विश्वरूप जी ने किया है । आप सबको को जानकर आश्चर्य होगा कि दिव्य नारायण कवच को धारण करने की विद्या देवराज इन्द्र को विश्वरूप जी से ही प्राप्त हुई । इसलिए ऐसे कृत्य करने वाले पुरोहितों की वेद , पुराण, स्मृति निन्दा करते हैं ।। शेष आदरणीय विद्वतजनों से मार्गदर्शन की अपेक्षा है। सभी प्रभु प्रेमियों को जय माता दी ।। 🚩👏🌺🌷💐🙏🌺🌷💐

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Sarvagya Shukla Sep 25, 2020

एक बार अर्जुन ने कृष्ण से पूछा- माधव.. ये 'सफल जीवन' क्या होता है ? कृष्ण अर्जुन को पतंग उड़ाने ले गए। अर्जुन कृष्ण को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था. थोड़ी देर बाद अर्जुन बोला- माधव.. ये धागे की वजह से पतंग अपनी आजादी से और ऊपर की ओर नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें ? ये और ऊपर चली जाएगी| कृष्ण ने धागा तोड़ दिया .. पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई... तब कृष्ण ने अर्जुन को जीवन का दर्शन समझाया... पार्थ.. 'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं.. हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं; जैसे :* घर परिवार अनुशासन माता-पिता गुरू-और समाज और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं... वास्तव में यही वो धागे होते हैं - जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं.. इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा, जो बिन धागे की पतंग का हुआ...' अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.." धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन कहते हैं.."

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Sunil Sharma Sep 25, 2020

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🚩 *_श्री गणेशाय नम:🚩_* *_💝🔸सुभाषितम्🔸💝_* *_विद्यां ददाति विनयं_* *_विनयाद् याति पात्रताम्।_* *_पात्रत्वात् धनमाप्नोति_* *_धनात् धर्मं ततः सुखम्॥_* *_विद्या विनय देती है; विनय से पात्रता प्राप्त होती है, पात्रता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म की प्राप्ति होती है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।_* *_📜 दैनिक पंचांग 📜_* ☀ *_26 - 09 - 2020_* ☀ *_श्रीमाधोपुर-पंचांग_* 💝 _*तिथि* दशमी 19:01:49_ 💝 _*नक्षत्र* उत्तराषाढ़ा 19:26:03_ 💝 *_करण_* _तैतिल 06:49:37_ _गर 19:01:49_ 💝 _*पक्ष* शुक्ल_ 💝 _*योग* अतिगंड 19:46:49_ 💝 _*वार* शनिवार_ ☀ *_सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ_* 💝 _सूर्योदय 06:18:02_ 💝 _चन्द्रोदय 15:15:00_ 💝 _चन्द्र राशि मकर_ 💝 _सूर्यास्त 18:19:01_ 💝 _चन्द्रास्त 25:57:59_ 💝 _ऋतु शरद_ ☀ *_हिन्दू मास एवं वर्ष_* 🔸 _शक सम्वत 1942 शार्वरी_ 🔸 _कलि सम्वत 5122_ 🔸 _दिन काल 12:00:58_ 🔸 _विक्रम सम्वत 2077_ 🔸 _मास अमांत आश्विन (अधिक)_ 🔸 _मास पूर्णिमांत आश्विन (अधिक)_ ☀ *_शुभ और अशुभ समय_* ☀ *_शुभ समय_* 🔥 _अभिजित 11:54:30 - 12:42:34_ ☀ *_अशुभ समय_* 🔥 _दुष्टमुहूर्त :_ _06:18:02 - 07:06:06_ _07:06:06 - 07:54:10_ 🔥 _कंटक 11:54:30 - 12:42:34_ 🔥 _यमघण्ट 15:06:46 - 15:54:50_ 🔥 _राहु काल 09:18:17 - 10:48:25_ 🔥 _कुलिक 07:06:06 - 07:54:10_ 🔥 _कालवेला या अर्द्धयाम 13:30:38 - 14:18:42_ 🔥 _यमगण्ड 13:48:39 - 15:18:47_ 🔥 _गुलिक काल 06:18:02 - 07:48:10_ ☀ *_दिशा शूल_* 🔥 _दिशा शूल पूर्व_ ☀ *_चन्द्रबल और ताराबल_* ☀ *_ताराबल_* 🔥 _भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती_ ☀ *_चन्द्रबल_* 🔥 _मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन_ *_📜 चौघडिया-मुहूर्त 📜_* 🏕️ *_काल06:18:02-07:48:10_* 🏕️ *_शुभ07:48:10-09:18:17_* 🏕️ *_रोग09:18:17-10:48:25_* 🏕️ *_उद्वेग10:48:25-12:18:32_* 🏕️ *_चल12:18:32-13:48:39_* 🏕️ *_लाभ13:48:39-15:18:47_* 🏕️ *_अमृत15:18:47-16:48:54_* 🏕️ *_काल16:48:54-18:19:01_* 🏕️ *_लाभ18:19:01-19:48:58_* 🏕️ *_उद्वेग19:48:58-21:18:54_* 🏕️ *_शुभ21:18:54-22:48:50_* 🏕 *_अमृत22:48:50-24:18:46_* 🏕️ *_चल24:18:46-25:48:42_* 🏕️ *_रोग25:48:42-27:18:38_* 🏕️ *_काल27:18:38-28:48:34_* 🏕️ *_लाभ28:48:34-30:18:30_* *_🌼लग्न-तालिका🌼_* _सूर्योदय का समय: 06:18:02_ _सूर्योदय के समय लग्न कन्या द्विस्वाभाव_ _158°38′29″_ 🏕️ *_कन्या द्विस्वाभाव_* _शुरू: 05:39 AM समाप्त: 07:54 AM_ 🏕️ *_तुला चर_* _शुरू: 07:54 AM समाप्त: 10:13 AM_ 🏕️ *_वृश्चिक स्थिर_* _शुरू: 10:13 AM समाप्त: 12:31 PM_ 🏕️ *_धनु द्विस्वाभाव_* _शुरू: 12:31 PM समाप्त: 02:36 PM_ 🏕️ *_मकर चर_* _शुरू: 02:36 PM समाप्त: 04:19 PM_ 🏕️ *_कुम्भ स्थिर_* _शुरू: 04:19 PM समाप्त: 05:48 PM_ 🏕️ *_मीन द्विस्वाभाव_* _शुरू: 05:48 PM समाप्त: 07:15 PM_ 🏕️ *_मेष चर_* _शुरू: 07:15 PM समाप्त: 08:51 PM_ 🏕️ *_वृषभ स्थिर_* _शुरू: 08:51 PM समाप्त: 10:48 PM_ 🏕️ *_मिथुन द्विस्वाभाव_* _शुरू: 10:48 PM समाप्त: अगले दिन 01:02 AM_ 🏕️ *_कर्क चर_* _शुरू: अगले दिन 01:02 AM समाप्त: अगले दिन 03:22 AM_ 🏕️ *_सिंह स्थिर_* _शुरू: अगले दिन 03:22 AM समाप्त: अगले दिन 05:39 AM_ 2️⃣6️⃣💝0️⃣9️⃣💝2️⃣0️⃣ *_🏕️🔸जयश्रीकृष्णा🔸🏕️_* *_ज्योतिषशास्त्री:-सुरेन्द्र कुमार चेजारा,व्याख्याता,राउमावि होल्याकाबास_* *_निवास:-श्रीसीताराम बाबा बावडी आश्रम के पास,वार्ड नं.8,श्रीमाधोपुर_* ➿➿➿➿➿➿➿➿ --------------------------------------------

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संभलने की जरूरत है 〰️〰️🌼🌼〰️〰️ 1. चोटियां छोड़ी , 2. टोपी, पगड़ी छोड़ी , 3. तिलक, चंदन छोड़ा , 4. कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी , 5. यज्ञोपवीत छोड़ा , 6. संध्या वंदन छोड़ा , 7. रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा , 8. महिलाओं, लड़कियों ने साड़ी छोड़ी, बिछिया छोड़े, चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी, मांग बिन्दी छोड़ी, 9. पैसे के लिये, बच्चे छोड़े , 10. संस्कृत छोड़ी, हिन्दी छोड़ी, 11. श्लोक छोड़े, लोरी छोड़ी , 12. बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े , 13. सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी , 14. पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छूना छोड़े , 15. घर परिवार छोड़े (अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)। अब कोई रीति या परंपरा बची है? ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो या कुछ और हो कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैंने ऐसे जीवित रखा है। जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे। बौद्धों ने कभी सर मुंड़ाना नहीं छोड़ा! सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया! मुसलमानों ने न दाढ़ी छोड़ी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना! ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है! फिर हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ? कहाँ लुप्त हो गयी- गुरुकुल की शिखा, यज्ञ, शस्त्र-शास्त्र, नित्य मंदिर जाने का संस्कार ? हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं। अपनी पहचान बनाओ! अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ!!! 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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