Yogesh Gupta
Yogesh Gupta Aug 13, 2017

एक सुंदर कहानी

#ज्ञानवर्षा
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*राम के फरिश्ते*
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एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था,उस पर मोटे मारकर से लिखा हुआ था.....!!
*"घर मे कोई नही है,मेरी बूढ़ी माँ बीमार है,मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना,दवा और टायलट कराने के लिए घर जाना पड़ता है,अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ी से फल तौल ले और पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें,साथ ही रेट भी लिखे हुये हैं"*
और अगर आपके पास पैसे नही हो तो मेरी तरफ से ले लेना,इजाजत है..!!
मैंने इधर उधर देखा,पास पड़े तराजू में दो किलो सेब तोले,दर्जन भर केले लिए,बैग में डाले,प्राइज लिस्ट से कीमत देखी,पैसे निकाल कर गत्ते को उठाया वहाँ सौ पच्चास और दस दस के नोट पड़े थे,मैंने भी पैसे उसमे रख कर उसे ढक दिया।बैग उठाया और अपने फ्लैट पे आ गया,रात को खाना खाने.के.बाद मैं और भाई उधर निकले तो देखा एक कमज़ोर सा आदमी,दाढ़ी आधी काली आधी सफेद,मैले से कुर्ते पजामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर बस जाने ही वाला था ,वो हमें देख कर मुस्कुराया और बोला "साहब! फल तो खत्म हो गए
नाम पूछा तो बोला सीताराम ..
फिर हम सामने वाले ढाबे पर बैठ गए...
चाय आयी,कहने लगा "पिछले तीन साल से मेरी माता बिस्तर पर हैं,कुछ पागल सी भी हो गईं है,और अब तो फ़ालिज भी हो गया है,मेरी कोई संतान नही है,बीवी मर गयी है,सिर्फ मैं हूँ और मेरी माँ.! माँ की देखभाल करने वाला कोई नही है इसलिए मुझे हर वक़्त माँ का ख्याल रखना पड़ता है"
एक दिन मैंने माँ का पाँव दबाते हुए बड़ी नरमी से कहा, *माँ ! तेरी सेवा करने को तो बड़ा जी चाहता है। पर जेब खाली है और तू मुझे कमरे से बाहर निकलने नही देती,कहती है तू जाता है तो जी घबराने लगता है,तू ही बता मै क्या करूँ?"*
अब क्या गले से खाना उतरेगा? न "मेरे पास.कोई जमा पूंजी है
ये सुन कर माँ ने हाँफते काँपते उठने की कोशिश की,मैंने तकिये की टेक लगवाई,उन्होंने झुर्रियों वाला चेहरा उठाया अपने कमज़ोर हाथों को ऊपर उठाया मन ही मन राम जी की स्तुति की फिर बोली...
*"तू रेहड़ी वहीं छोड़ आया कर हमारी किस्मत हमे इसी कमरे में बैठ कर मिलेगा"*
"मैंने कहा माँ क्या बात करती हो,वहाँ छोड़ आऊँगा तो कोई चोर उचक्का सब कुछ ले जायेगा, आजकल कौन लिहाज़ करता है? और बिना मालिक के कौन खरीदने आएगा?"
कहने लगीं "तू राम का नाम लेने के बाद बाद रेहड़ी को फलों से भरकर छोड़ कर आजा बस,ज्यादा बक बक नही कर,शाम को खाली रेहड़ी ले आया कर, अगर तेरा रुपया गया तो मुझे बोलियो"
*ढाई साल हो गए है भाई! सुबह रेहड़ी लगा आता हूँ शाम को ले जाता हूँ,लोग पैसे रख जाते है फल ले जाते हैं,एक धेला भी ऊपर नीचे नही होता,* बल्कि कुछ तो ज्यादा भी रख जाते है,कभी कोई माँ के लिए फूल रख जाता है,कभी कोई और चीज़! परसों एक बच्ची पुलाव बना कर रख गयी साथ मे एक पर्ची भी थी "अम्मा के लिए"
एक डॉक्टर अपना कार्ड छोड़ गए पीछे लिखा था माँ की तबियत नाज़ुक हो तो मुझे काल कर लेना मैं आजाऊँगा,कोई खजूर रख जाता है , रोजाना कुछ न कुछ मेरे हक के साथ मौजूद होता है।
*न माँ हिलने देती है न मेरे राम कुछ कमी रहने देता है माँ कहती है तेरा फल मेरा राम अपने फरिश्तों से बिकवा देता है।*

आखिर में इतना ही कहूँगा की अपने *मां बाप की खिदमत करो ,और देखो दुनिया की कामयाबियाँ कैसे हमारे कदम चूमती है ।*





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कामेंट्स

Manju Manju Aug 14, 2017
बहुत सुंदर दिल को छू लेने वाली कहानी है

Sadhana Srivastava Aug 14, 2017
वाह! अति सुंदर राम जी की महिमाअपरमपार है।

शिव son May 22, 2019

वरदान:-

सदा अलर्ट रह सर्व की आशाओं को पूर्ण करने वाले मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता भव

अब सभी बच्चों में यह शुभ संकल्प इमर्ज होना चाहिए कि सर्व की आशाओं को पूर्ण करें। सबकी इच्छा है कि जन्म-मरण से मुक्त हो जाएं, तो उसका अनुभव कराओ। इसके लिए अपने...

(पूरा पढ़ें)
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Prakash Preetam May 21, 2019

_*जरूर पढ़ें, माँ का सम्मान🙏*_ *------------------* *एक वृद्ध माँ रात को 11:30 बजे रसोई में बर्तन साफ कर रही है, घर में दो बहुएँ हैं, जो बर्तनों की आवाज से परेशान होकर अपने पतियों को सास को उल्हाना देने को कहती हैं* *वो कहती है आपकी माँ को मना करो इतनी रात को बर्तन धोने के लिये हमारी नींद खराब होती है साथ ही सुबह 4 बजे उठकर फिर खट्टर पट्टर शुरू कर देती है सुबह 5 बजे पूजा* *आरती करके हमे सोने नही देती ना रात को ना ही सुबह जाओ सोच क्या रहे हो जाकर माँ को मना करो* *बड़ा बेटा खड़ा होता है और रसोई की तरफ जाता है रास्ते मे छोटे भाई के कमरे में से भी वो ही बाते सुनाई पड़ती जो उसके कमरे हो रही थी वो छोटे भाई के कमरे को खटखटा देता है छोटा भाई बाहर आता है* *दोनो भाई रसोई में जाते हैं, और माँ को बर्तन साफ करने में मदद करने लगते है , माँ मना करती पर वो नही मानते, बर्तन साफ हो जाने के बाद दोनों भाई माँ को बड़े प्यार से उसके कमरे में ले जाते है , तो देखते हैं पिताजी भी जागे हुए हैं* *दोनो भाई माँ को बिस्तर पर बैठा कर कहते हैं, माँ सुबह जल्दी उठा देना, हमें भी पूजा💐 करनी है, और सुबह पिताजी के साथ योगा भी करेंगे* *माँ बोली ठीक है बच्चों, दोनो बेटे सुबह जल्दी उठने लगे, रात को 9:30 पर ही बर्तन मांजने लगे, तो पत्नियां बोलीं माता जी करती तो हैं आप क्यों कर रहे हो बर्तन साफ, तो बेटे बोले हम लोगो की शादी करने के पीछे एक कारण यह भी था कि माँ की सहायता हो जायेगी पर तुम लोग ये कार्य नही कर रही हो कोई बात नही हम अपनी माँ की सहायता कर देते है* *हमारी तो माँ है इसमें क्या बुराई है , अगले तीन दिनों में घर मे पूरा बदलाव आ गया बहुएँ जल्दी बर्तन इसलिये साफ करने लगी की नही तो उनके पति बर्तन साफ करने लगेंगे साथ ही सुबह भी वो भी पतियों के साथ ही उठने लगी और पूजा आरती में शामिल होने लगी* *कुछ दिनों में पूरे घर के वातावरण में पूरा बदलाव आ गया बहुएँ सास ससुर को पूरा सम्मान देने लगी ।* 🙏🌹🙏🌹🙏 *कहानी का सार* *माँ का सम्मान तब कम नही होता जब बहुवे उनका सम्मान नही करती , माँ का सम्मान तब कम होता है जब बेटे माँ का सम्मान नही करे या माँ के कार्य मे सहयोग ना करे ।* 🙏🙏🙏 *जन्म का रिश्ता हैं* *माता पिता पहले आपके हैं* 🎈🌹🎈🌹🎈🌹🎈 ●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬● *______________________*      *😅😅सदैव प्रसन्न रहें😊😊*

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​जय श्रीराम जय हनुमान मित्रों मृत्यु के बाद भी पुण्य कमाने के 7 (सात) आसान उपाय । (1)= किसी को धार्मिक ग्रन्थ भैंट करे जब भी कोई उसका पाठ करेगा आप को पुण्य मिलेगा । (2)= एक व्हीलचेयर किसी अस्पताल मे दान करे जब भी कोई मरीज उसका उपयोग करेगा पुण्य आपको मिलेगा। (3)= किसी अन्नक्षेत्र के लिये मासिक ब्याज वाली एफ. डी बनवादे जब भी उसकी ब्याज से कोई भोजन करेगा आपको पुण्य मिलेगा (4)=किसी पब्लिक प्लेस पर वाटर कूलर लगवाएँ हमेशा पुण्य मिलेगा। (5)= किसी अनाथ को शिक्षित करो वह और उसकी पीढ़ियाँ भी आपको दुआ देगी तो आपको पुण्य मिलेगा। (6)= अपनी औलाद को परोपकारी बना सके तो सदैव पुण्य मिलता रहेगा। ( 7)= सबसे आसान है कि आप ये बाते औरों को बताये, किसी एक ने भी अमल किया तो आपको पुण्य मिलेगा...!

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Geeta Sharma May 22, 2019

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Priti Agarwal May 23, 2019

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Prakash Preetam May 20, 2019

----- #सौतेली_माँ ----- बचपन से परिवार वालों से सुनता आया हूँ कि मेरी असली माँ को टी ० बी० हो गई थी उस समय टी० बी० पूर्णतः ठीक होना मुश्किल था। अतः पापा ने इलाज तथा सेवा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी । मम्मी के मामले में दादी पर भी विश्वास नहीं किया ।सब काम खुद ही करते लेकिन माँ को बचा नहीं सके। मेरे तीसरे जन्मदिन पर मम्मी ने अपनी सहेली को बुलाया और पापा के हाथ में उसका हाथ थमाकर सदा के लिए गहरी नींद में सो गई। फिर कई महीने पापा खामोश रहे। बस जैसे हमारे लिए ही जिंदा थे। फिर उनकी दशा देखकर दादी ने मम्मी की सहेली से शादी करवा दी। अपनी माँ तो मुझे याद नहीं लेकिन मेरी नई मम्मी मुझे इतना प्यार करती थी कि मैं उनके बगैर एक पल नहीं रहता था। अनजान लोग हमारे परिवार को देखकर अंदाजा तक नहीं लगा सकते थें कि वह सौतेली माँ है। उनके परिवार वाले कहते “ ,नीरा! एक बच्चा अपनी कोख से भी पैदा करना चाहिए। बुढ़ापे में कोई नहीं पूछेगा ; अपने जायो पर ही लोग भरोसा नहीं करते हैं तुम हो कि इन बच्चों के पीछे पागल हो।” “ मम्मी कहती ,” दुनिया में , सुखी जीवन के लिए एक बेटा और एक बेटी होनी चाहिए , भगवान ने मुझे दोनों पहले ही दे दी हैं फिर बिना वजह पलटन बढ़ाने का क्या फायदा।” अब मैं इक्कीस साल से ऊपर हो चुका हूँ। पापा की ब्रेन हैमरेज से मृत्यु हो गई। अंतिम संस्कार के लिए गाँव लाया गया : तेरहवीं पर सब रिश्तेदार आए। सभी मुझे बड़ी सहानुभूति दिखा रहे थे। सभी मुझे अकेले में ले जाते और कहते ,” बेटा मकान, दुकान अपने नाम करवाने के लिए कह देना सबके सामने। वर्ना सब कुछ इस औरत के नाम हो जाएगा। इस औरत की अपनी संतान तो है नहीं। सब बेचकर यह भाग गई तो तुम ! बहन -भाई क्या करोगे ?” जिस परिवार ने दुख सुख में कभी भी नहीं पूछा आज सब इतने हितैषी कैसे हो गए ? मेरी समझ से बाहर था। कोई गाँव की जमीन के विषय में पट्टी पढ़ाने का प्रयास करता तो कोई माँ से नाता तोड़ने के लिए। आखिर पगड़ी रस्म के समय मैंने कहा ,” जिस औरत को तुम सब मेरी सौतेली माँ बता रहे हो , वास्तव में मैं उसे माँ नहीं मानता। सबके चेहरे खिल उठे तब मैंने कहा ,” मैं उन्हें अपना भगवान अपनी देवी और आज से अपना पापा मानता हूँ। आज के बाद मेरे सामने मेरी माँ की बुराई अर्थात मुझसे संबंध समाप्त समझना। “ पाँच सौ से अधिक आदमियों के बीच मैंने माँ को गले से लगाया और माँ ने मेरे विशाल कंधों पर सिर टिका दिया तो सबकी आँखें नम हो गई। -

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