जय श्रीकृष्ण

जय श्रीकृष्ण

#ज्ञानवर्षा
तेरे लिए "शास्त्र ही प्रमाण है" !!!

यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम्‌॥

जो मनुष्य शास्त्र के विधान को, अर्थात कर्तव्य-अकर्तव्य के ज्ञान का कारण जो विधि-निषेध-बोधक आदेश है उसको छोड़ कर कामना से प्रयुक्त हुआ बर्त्तता है, वह न तो सिद्धि को - पुरुषार्थ के योग्यता को पाता है और न परम गति को अर्थात स्वर्ग या मोक्ष को ही पाता है।

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।
ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि॥

कर्त्तव्य और अकर्त्तव्य की व्यवस्था में तेरे लिए शास्त्र ही प्रमाण है, अर्थात ज्ञान प्राप्त करने का साधन है। अतः शास्त्र - विधान से कही हुई बात को समझ कर यानी आज्ञा का नाम विधान है। शास्त्र द्वारा जो ऐसी आज्ञा दी जाए कि "यह कार्य कर, यह मत कर" वह शास्त्र विधान है, उससे बताए हुए स्वकर्म को जानकर तुझे इस कर्म क्षेत्र में कार्य करना उचित है। 'इह' शब्द जिस भूमि में कर्मों का अधिकार है उसका लक्ष्य कराने वाला है।

(श्रीमद्भगवद्गीता ; अध्याय - १६, श्लोक - २३, २४)

शास्त्र के विरुद्ध किए जाने वाले कर्म का नाम 'विकर्म' है। यदि हम ध्यानपूर्वक विचार करें तो पाएंगे की हम सबों के द्वारा किया जाने वाला प्रत्येक कर्म कामनाओं द्वारा ही संपन्न हो रहा है। हम सब का यही मानना है कि "कामनाएं होंगी तभी कर्म संपन्न होगा". भगवान् को हमारा यह मानना स्वीकार नहीं है। यदि ऐसा है तो हम जिस कर्म को उचित कर्म समझ रहे हैं और इन कर्मों को करने वाले को 'कर्मयोगी'की उपाधि दे रहे हैं वे सब के सब तो विकर्म हैं और समस्त कर्मों को संपन्न करने वाले सभी के लिए उचित शब्द "विकर्मयोगी" है। मोक्ष तो दूर की बात है ; विकर्मयोगी को प्राप्त होने वाला फल 'पुरुषार्थ की योग्यता' और 'स्वर्ग की प्राप्ति' के विपरीत है।

प्रमाण किसे कहते हैं ? जो सिद्ध है उसका नाम प्रमाण है। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है। कोई कहता है - "नहीं, सूर्य पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है यह तो प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है और जो प्रत्यक्ष है वही तो प्रमाण है" लेकिन हम सबको ज्ञात है कि इसका विपरीत ही सत्य है। उस व्यक्ति के यह मान लेने से कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा रहा है - सूर्य पृथ्वी के चारों ओर चक्कर नहीं लगाने लगेगा। ऐसा मानने वाले के द्वारा रखा गया सभी सिद्धांत निश्चित ही गलत होगा। फलतः सिद्धि कदापि नहीं मिलने वाली है। अतः शास्त्र प्रमाण का अर्थ हुआ कि शास्त्र सिद्ध है। और जो सिद्ध है उसमें कोई फेर-फार संभव नहीं है। बल्कि, सिद्ध सत्य है और सत्य कभी नहीं बदलता है। अतः यदि कोई कहे,"पहले की बात और थी, अब तो समय भी बदल गया है और जमाना भी बदल गया है" तो उसका ऐसा कहना सर्वथा गलत सिद्ध होता है।

आज्ञा का नाम विधान है। अतः शास्त्र - विधान यानी शास्त्र - आज्ञा यानी शास्त्र की आज्ञा। संविधान यानी शासन की आज्ञा। शासन की आज्ञा है, रास्ते में बाएँ से चलना है। बाईं ओर भीड़ अधिक है, दाईं ओर रास्ता खाली है ऐसा सोंच कर यदि कोई दाईं ओर से गाड़ी चलाए तो निश्चित ही या तो प्रशासन उसे पकड़ेगी या ऐसी दुर्घटना घटेगी कि बिल्कुल मारा जाएगा। ठीक उसी प्रकार शास्त्र की आज्ञा के उलंघन के फलस्वरूप विनाश निश्चित है।

स्वकर्म क्या है ? जिसमें सत्वगुण प्रधान और रजोगुण गौण है, उस ब्राह्मण के शम, दम, तप इत्यादि कर्म हैं I जिसमें सत्वगुण गौण और रजोगुण प्रधान है, उस क्षत्रिय के शूरवीरता, तेज प्रभृति कर्म हैं I जिसमें तमोगुण गौण और रजोगुण प्रधान है, ऐसे वैश्य के कृषि आदि कर्म है I तथा जिसमें रजोगुण गौण और तमोगुण प्रधान है, उस शूद्र का केवल सेवा ही कर्म है I शोक-मोह आदि दोषों से चित्त के घिर जाने से स्वकर्म का त्याग और निषिद्ध कर्मों का सेवन स्वतः ही होता है। मैं ने ब्राह्मणों को शूद्र की सेवा करते देखा है। मैं ने ब्राह्मणों को व्यापार करते देखा है। मैं ने क्षत्रियों को रक्षा की गुहार लगाते देखा है। मैं ने वैश्यों को सेवक के रूप में देखा है। मैं ने शूद्रों को राजा के भेस में देखा है। निश्चित ही आपने भी देखा है। यह सब शास्त्र की आज्ञा के विपरीत है।

हम सब ने भी संभवतः उस मार्ग में कदम रख दिया है जो "नर्क" नाम वाले दरवाजे तक पहुँचती है। अतः हमें आज और अभी से शास्त्र - आज्ञा के अनुसार बरतना है। भगवान् ने स्पष्ट कहा है, "तेरे लिए शास्त्र ही प्रमाण है" !!!

जय श्री कृष्ण !!

+108 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 38 शेयर

कामेंट्स

Indu Bhatia Aug 23, 2017
JAI SHREE KRISHNA 🌿🍃🌿🍃🌿🍃 Good Evening DOSTO

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 40 शेयर

+653 प्रतिक्रिया 98 कॉमेंट्स • 222 शेयर

+56 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 35 शेयर

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 14 शेयर
Anilkumar Tailor Sep 23, 2020

+11 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 15 शेयर

+33 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 26 शेयर
Sarvagya Shukla Sep 23, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 8 शेयर

+25 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 16 शेयर
संकल्प Sep 22, 2020

+22 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 10 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB