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🥀🥀 Apr 8, 2021

श्री राधेय्य्य्य्य्य..❣️ जीवन मिलना भाग्य की बात है मृत्यु होना समय की बात है पर मृत्यु के बाद भी लोगो के दिलों में जीवित रहना ये ""कर्मों"" की बात है !! ┅•••⊰❉!!श्री!!❉⊱•••┅ ༺🌹Զเधे Զเधे🌹༻

श्री राधेय्य्य्य्य्य..❣️

जीवन मिलना भाग्य की  बात है 
मृत्यु  होना समय की बात है
पर मृत्यु के बाद भी लोगो के
दिलों में जीवित रहना 
ये ""कर्मों"" की बात है !!

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༺🌹Զเधे Զเधे🌹༻

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कामेंट्स

Devendra Tiwari Apr 8, 2021
🙏🌹Jai Shree Radhe Krishna🌹 Subh Ratri Bandan ji 🌹Sweet Dreams 💐💐🙏🙏

Ramesh Soni.33 May 7, 2021

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🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️ 🎛️ *बोलना एक कला है*🎛️ 🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️🎛️ एक राजा भगवान का बड़ा भक्त तथा प्रजा वत्सल था। उनके बहुत बड़ा परिवार था। एक बार राजा को सपना आया। स्वपन में राजा ने देखा सामने पीपल का वृक्ष है उसके सारे पत्ते गिर गए। केवल एक पत्ता रह गया। दूसरे दिन राजा ने एक विद्वान ब्राह्मण से इस स्वपन का क्या अर्थ है के विषय में पूछा। वह ब्राह्मण विद्वान तो था लेकिन ज्ञानी नहीं था। ज्ञानी और विद्वान में फर्क रहता है। उसने अपने प्रश्न लग्न के अनुसार राजा के प्रश्न का उत्तर दिया ~"हे राजन आपका समस्त परिवार मर जाएगा केवल आप ही बचेंगे।" राजा को इस बात पर बड़ा गुस्सा आया, उसने उस ब्राह्मण को कैद में डाल दिया। दूसरे दिन एक दूसरे ब्राह्मण को बुलवा करके अपने सपने की बात का उत्तर पूछा ।वह ब्राह्मण विद्वान के साथ-साथ ज्ञानी भी था ।किस समय किस आदमी के साथ कैसी बात करनी चाहिए वहअच्छी तरह से जानता था । .उस पंडित जी ने कहा *ओहो महाराज आप बहुत बड़े भाग्यशाली हैं आपके परिवार में सबसे लंबी आयु के आप ही हैं*। राजा ने मंत्री से कहा इस ब्राह्मण को मुंह मांगा इनाम दे दो। ब्राह्मण ने कहा महाराज आप यदि मुंह मांगा इनाम ही देना चाहते हैं तो कल जिस ब्राह्मण को आप ने जेल में डाला था उसको मुक्त कर दीजिए ।क्योंकि वही बात मैंने कही है। आपके परिवार में सबसे लंबी आयु के आप ही हैं इसका मतलब आपके परिवार में सब मर जाएंगे केवल आप ही बचेंगे यानी कि आपकी ही लंबी आयु है। प्रिय सज्जनों बात वही है लेकिन कहने का तरीका अलग से है *बोलना एक कला है* ओरछा के राजा छत्रसाल के राज कवि केशवदास। एक बार केशवदास ने *रामचंद्रिका* नामक ग्रंथ की रचना करके राजा को भेंट में दिया । राजा ने राज कवि को प्रसन्न होकर के एक लाख रुपए दिए और कहा कविराज प्रसन्न हो गए हो ना। केशव दास जी ने मन में विचार किया राजा को अहंकार आ गया कि मैं ही सबसे बड़ा दानी हूं। केशव दास ने कहा महाराज आपने एक लाख देकर के कौन सी बड़ी बात कर दी। इस पुस्तक में ऐसी ऐसी बातें हैं है एक एक बात का एक ₹ एक एक लाख मिलता है। राजा ने कहा कि इसका प्रमाण दो तभी कवि ने कहा कि मेरे पीछे आप अपने विश्वसनीय दो जासूस लगा दीजिए मैं किस व्यक्ति से क्या बात करूं ? इसकी सूचना आपको देते रहें । राजा ने वैसा ही किया ।राज कवि केशवदास जी वहां से आगरा पहुंचते हैं। एक भाग में रुक कर के अपने दूत को अकबर बादशाह के पास भेजा। वह दूत बादशाह से कहता है कि "ओरछा के राजकवि केशव दास जी आए हैं और थोड़ी देर के लिए ही ठहरेंगे" बादशाह अकबर ने बीरबल को इस बात का पता लगाने के लिए भेजा कि वह कवि कितना इनाम पाने का हकदार है। बीरबल कवि की अगवानी करने के लिए पहुंचा। बीरबल को केशव दास जी ने दूर से ही झुक कर देखने की एक्टिंग करते हुए देखा। ज्यूं ही बीरबल पास में आया केशव दास जी ने अपना मुंह फेर लिया। बीरबल ने कहा - कविराज मैं इतना गया बीता नहीं हूं कि आप मेरी शक्ल ही नहीं देखना चाहते हो । *कविराज ने कहा नहीं नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मैंने तो सुना था कि जो बीरबल का एक बार ही मुंह देख लेता है उसकी दरिद्रता उसी क्षण भाग जाती है मैं अपनी दरिद्रता को पीछे मुड़ कर देख रहा था कि वह कितनी दूर भाग गई*। इस एक ही बात से बीरबल बहुत ही~ बहुत ही प्रसन्न हो गया । और बादशाह से बोला- महाराज यह कवि महान कवि है इनको ₹2लाख और एक हाथी भेंट में दिया जाए। प्रिय सज्जनों बोलना एक कला है रेल की यात्रा में पास में बैठी हुई महिला से बोलता है माताजी थोड़े से आप दूर खिसक जाए तो मैं भी बैठ जाऊं ।यहां *माताजी* शब्द का अर्थ तो यही होता है न कि "मेरे बाप की औरत" लेकिन ऐसा क हने पर जूते पड़ने लग जाते हैं। महाराज छत्रसाल के विश्वसनीय दूतों ने सारी बात राजा को बताई वाणी घाव भी कर देती है और मल्हम भी लगा देती है । *मिट जाएगा घाव तलवार का बोली का घाव भरे नहीं*। महारानी द्रौपदी ने दुर्योधन को जब वह पानी को सुखी जगह समझकर उस में गिर जाता है तब "अंधों का बेटा अंधा ही होता है" ऐसा कह दिया था । इस एक ही वाक्य से भयंकर महाभारत का युद्ध हुआ। वाणी की देवता सरस्वती है हम अपने मुंह से गंदे शब्द निकाल कर के मां सरस्वती का महान अपराध करते हैं। संसार में जितने भी शब्द मुंह से निकलते हैं वह कभी समाप्त नहीं होते और आकाश में समा जाते हैं ।दूरवचन दुष्प्रभाव डालते हैं। और सद्वचन सत प्रभाव डालते हैं ।इसलिए कभी भी किसी भी हालत में मुंह से गंदे शब्द नहीं निकालना चाहिए। संसार में जितने कितने भी शब्द हैं वह सब के सब शब्द ब्रह्म का कोई न कोई अंग ही तो है *इसलिए गंदे शब्दों से शब्दब्रह्म का अपमान होता है* इसलिए हमारे शास्त्रों में लिखा है *प्रिय वाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यंति जंतुवा:* । *तस्मात् एव वद:वचने का दरिद्रता* *सत्यम ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात न ब्रूयाद् सत्यमप्रियम* । *प्रियम्चनानृतं ब्रूयात् एष धर्म सनातन* । *कागा किसका धन हरे कोयल किसको देय*। *जीभडल्यांउ इमारत बसें जुगअपना कर लेय।* *ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोए* *औरन को शीतल करे आप हो शीतल होय* प्रिय सज्जनों अपनी वाणी के द्वारा हम किसी के गुणों का बखान करें, किसी की प्रशंसा करें तो हमें पुण्य लाभ तो मिलता ही है इसके साथ-साथ वह व्यक्ति भी और उसके साथ वाले व्यक्ति भी हमसे प्रसन्न रहते हैं। इसलिए ऐसा बोलें कि सामने वाला यह कह दे वाह भाई वाह इस व्यक्ति से तो थोड़ी देर और बात करें तो अच्छा लगता है। धन्यवाद जय सियाराम

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Ravita Devi May 9, 2021

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Dheeraj Shukla May 9, 2021

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🔴RAMA🔴 May 9, 2021

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Ila Sinha May 9, 2021

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Sarita Choudhary May 9, 2021

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