मायमंदिर फ़्री कुंडली
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Smt Neelam Sharma
Smt Neelam Sharma Jun 11, 2019

👌👌 *Nice* 💖 *Lines* 👌👌​ *कोई वादा ना कर* *कोई इरादा ना कर* *ख्वाहिशों में खुद को आधा ना कर* *ये देगी उतना ही जितना लिख दिया* *है रब ने* *इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर* *जिन्दगी की हर सुबह*😊😊😊 *कुछ शर्ते लेके आती है* *और जिन्दगी की हर शाम* *कुछ तर्जुबे देके जाती है* *​जय श्री राधे गोविंद...* 👏

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कामेंट्स

🌷🌷🌷mukseh nagar🌷🌷🌷 Jun 11, 2019
#❋━━❥आज का चिंतन❋━━❥ हमारे घर के हाॅल में दो पंखे लगे हैं, जिनमें एक ही अक्सर चलता है..और वही धूल लगकर गंदा हो जाता है.....! जबकि जो नही चलता वह साफ रहता है, बाहर से आने वाले उसी साफ दिखने वाले पंखे की तारीफ करते हैं जो नही चलता और कहते हैं... कि उसी की तरह इस पंखे को साफ रखा करो, क्या जवाब दूं......? उन्हें कैसे समझाऊं कि जो जिम्मेदारी लेता है वही गंदा होता हैं.....🤔 मशहूर हुए वो जो कभी क़ाबिल ना थे और तो और कमबख़्त मंजिल भी उन्हें मिली जो दौड़ में कभी शामिल ना थे....😔

,OP JAIN (RAJ) Jun 11, 2019
श्री राधे राधे दीदी शुभ संध्या वंदन दीदी श्री राम और श्री हनुमान जी की कृपा सदा आप और आपके परिवार पर बनी रहे जय श्री राम

Mohan.mira.nigam Jun 11, 2019
JayRadhe.KrishnaJi Radhe.Krishna Ji Radhe.Krishna Ji Radhe.KrishnaHanuman.ji I Jay shri Radhe.Krishna ji

adya mishra Jun 11, 2019
jai jai Shri Krishna Radhe Radhe ji good night shubh Ratri ji Radhe Radhe

Sangeeta Lal Jun 11, 2019
Jay shree Radhe Krishna ji shubh ratri ji 🙏🙏

🙏🌹🌹🌹❤️❤️❤️🌹🌹🌹🙏 🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹🌹🙏 🙏कृष्ण जी का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा ? भगवान श्रीकृष्ण के कई नाम हैं, श्याम, मोहन, बंसीधर, कान्हा और न जाने कितने, लेकिन इनमें से एक प्रसिद्ध नाम है लड्डू गोपाल। क्या आपको पता है भगवान कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल क्यों पड़ा। ब्रज भूमि में बहुत समय पहले श्रीकृष्ण के परम भक्त रहते थे.. कुम्भनदास जी । उनका एक पुत्र था रघुनंदन । कुंम्भनदास जी के पास बाँसुरी बजाते हुए श्रीकृष्ण जी का एक विग्रह था, वे हर समय प्रभु भक्ति में लीन रहते और पूरे नियम से श्रीकृष्ण की सेवा करते। वे उन्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाते थे, जिससे उनकी सेवा में कोई विघ्न ना हो। एक दिन वृन्दावन से उनके लिए भागवत कथा करने का न्योता आया। पहले तो उन्होंने मना किया, परन्तु लोगों के ज़ोर देने पर वे जाने के लिए तैयार हो गए कि भगवान की सेवा की तैयारी करके वे कथा करके रोज वापिस लौट आया करेंगे व भगवान का सेवा नियम भी नहीं छूटेगा। अपने पुत्र को उन्होंने समझा दिया कि भोग मैंने बना दिया है, तुम ठाकुर जी को समय पर भोग लगा देना और वे चले गए। रघुनंदन ने भोजन की थाली ठाकुर जी के सामने रखी और सरल मन से आग्रह किया कि ठाकुर जी आओ भोग लगाओ । उसके बाल मन में यह छवि थी कि वे आकर अपने हाथों से भोजन करेगें जैसे हम खाते हैं। उसने बार-बार आग्रह किया, लेकिन भोजन तो वैसे ही रखा था.. अब उदास हो गया और रोते हुए पुकारा की ठाकुरजी आओ भोग लगाओ। ठाकुरजी ने बालक का रूप धारण किया और भोजन करने बैठ गए और रघुनंदन भी प्रसन्न हो गया। रात को कुंम्भनदास जी ने लौट कर पूछा कि भोग लगाया था बेटा, तो रघुनंदन ने कहा हाँ। उन्होंने प्रसाद मांगा तो पुत्र ने कहा कि ठाकुरजी ने सारा भोजन खा लिया। उन्होंने सोचा बच्चे को भूख लगी होगी तो उसने ही खुद खा लिया होगा। अब तो ये रोज का नियम हो गया कि कुंम्भनदास जी भोजन की थाली लगाकर जाते और रघुनंदन ठाकुरजी को भोग लगाते। जब प्रसाद मांगते तो एक ही जवाब मिलता कि सारा भोजन उन्होंने खा लिया। कुंम्भनदास जी को अब लगने लगा कि पुत्र झूठ बोलने लगा है, लेकिन क्यों.. ?? उन्होंने उस दिन लड्डू बनाकर थाली में सजा दिये और छुप कर देखने लगे कि बच्चा क्या करता है। रघुनंदन ने रोज की तरह ही ठाकुरजी को पुकारा तो ठाकुरजी बालक के रूप में प्रकट हो कर लड्डू खाने लगे। यह देख कर कुंम्भनदास जी दौड़ते हुए आये और प्रभु के चरणों में गिरकर विनती करने लगे। उस समय ठाकुरजी के एक हाथ मे लड्डू और दूसरे हाथ का लड्डू मुख में जाने को ही था कि वे जड़ हो गये । उसके बाद से उनकी इसी रूप में पूजा की जाती है और वे ‘लड्डू गोपाल’ कहलाये जाने लगे..!! 🙏🌹🌹बोलिये लड्डू गोपाल की जय हो...🌹🌹🙏

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Nathulal Sharma Jun 26, 2019

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saniya8 Jun 26, 2019

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Shama Malhotra Jun 26, 2019

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Ravi shanker Jun 25, 2019

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