कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े , जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े । 👏👏👏👏👏★★👏👏👏

भक्तवत्सल भगवान की लीला महिमा अपरंपार है।देखिये कितना सुन्दर भजन प्रस्तुत कियि है भजन गायक ने उनको मेंरा नमन ...।

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गिरीश पाण्डे, Apr 7, 2018
सुधीरकुमार जी,अरूण कुमार जी, आपके द्वारा उत्सासवर्धन के लिये कोटिशः साधुवाद। प्रभु सभी का मंगल करें व रक्षा करें शुभ रात्रि!

P. Tiwari May 10, 2020

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Dr Munish Sharma May 10, 2020

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Chandrashekhar Karwa May 10, 2020

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Chandrashekhar Karwa May 10, 2020

*(1) प्रभु का सच्चा भक्त कभी भी मूर्ति शब्द का प्रयोग नहीं करता क्योंकि वह मूर्ति के रूप में साक्षात प्रभु के ही दर्शन करता है ।* *(2) जब कोई भक्त प्रभु की प्रतिमा की सेवा करता है तो वहाँ भगवत तत्व जागृत हो जाता है । इसलिए घर की ठाकुरबाड़ी में नित्य सेवा करते रहना चाहिए जिससे वहाँ भगवत तत्व की जागृति हो जाये ।* *(3) जो प्रभु का रूप भक्त को प्रिय है उसमें आने हेतु भक्‍त प्रभु को बाध्य कर देता है । यहाँ तक कि प्रभु को नया रूप धारण करने के लिए भी बाध्य कर देता है । यह सिर्फ भक्ति का सामर्थ्‍य है।* *(4) भक्त प्रभु को रूप बदलने हेतु भी बाध्य कर देता है । गोस्वामी श्री तुलसीदासजी ने प्रभु को श्रीकृष्णरूप त्यागकर श्रीरामरूप में आने हेतु बाध्य किया । उन्होंने प्रणाम नहीं किया और जिद पर अड़ गये कि जब तक श्रीरामरूप में आप नहीं आयेंगे तब तक प्रणाम नहीं करूंगा । यह मौज सिर्फ भक्तों की होती है । यह हक सिर्फ भक्ति के बल पर ही संभव होता है ।* www.bhaktivichar.in GOD GOD & only GOD

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