Prakash Singh Rathore
Prakash Singh Rathore Jan 22, 2019

जय श्री कृष्णा हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे राम हरे राम आज का श्लोक: श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप अध्याय 6 : ध्यानयोग श्लोक--27 *हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।* *हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ।।* 🙌🏼🙌🏼 आज का श्लोक : श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप -- 6.27 अध्याय 6 : ध्यानयोग प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम् | उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम् || २७ || प्रशान्त – कृष्ण के चरणकमलों में स्थित; मनसम् – जिसका मन; हि – निश्चय ही; एनम् – यह; योगिनम् – योगी; सुखम् – सुख; उत्तमम् – सर्वोच्च; उपैति – प्राप्त करता है; शान्त-रजसम् – जिसकी कामेच्छा शान्त हो चुकी है; ब्रह्म-भूतम् – परमात्मा के साथ अपनी पहचान द्वारा मुक्ति; अकल्मषम् – समस्त पूर्व पापकर्मों से मुक्त | जिस योगी का मन मुझ में स्थिर रहता है, वह निश्चय ही दिव्यसुख की सर्वोच्च सिद्धि प्राप्त करता है | वह रजोगुण से परे हो जाता है, वह परमात्मा के साथ अपनी गुणात्मक एकता को समझता है और इस प्रकार अपने समस्त विगत कर्मों के फल से निवृत्त हो जाता है | तात्पर्य : ब्रह्मभूत वह अवस्था है जिसमें भौतिक कल्मष से मुक्त होकर भगवान् की दिव्यसेवा में स्थित हुआ जाता है | मद्भक्तिं लभते पराम् (भगवद्गीता १८.५४) | जब तक मनुष्य का मन भगवान् के चरणकमलों में स्थिर नहीं हो जाता तब तक कोई ब्रह्मरूप में नहीं रह सकता | स वै मनः कृष्णपदारविन्दयोः | भगवान् की दिव्य प्रेमभक्ति में निरन्तर प्रवृत्त रहना या कृष्णभावनामृत में रहना वस्तुतः रजोगुण तथा भौतिक कल्मष से मुक्त होना है | 🙏🏽 *।श्री राधारमणाय समर्पण।* 🙏🏽 🙌🏼 *जय जय राधा रमण हरि बोल।* 🙌🏼 ************************************ प्रतिदिन *भगवद्गीता का हिंदी में एक श्लोक* प्राप्त करने हेतु, इस ग्रुप को join करें 🙏🏼 https://chat.whatsapp.com/IDgftfLn548B4AdvpdvUML ********************************** To receive daily *ONE shloka of Bhagavad Gita in English*, join below group:🙏🏼 https://chat.whatsapp.com/Bjx2K7CHftX5gnCsEuxeOr

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