Nand kishor Dhaker ने बद्रीनाथ मंदिर में यह पोस्ट की।

#ज्ञानवर्षा #मंदिर

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कामेंट्स

XYZ Jul 22, 2017
जय बद्रीविशाल जी की

M.S.Chauhan Feb 26, 2021

*शुभ रात्रि वंदन* *जय श्रीकृष्ण गोविंद* *जय श्री राधे राधे* *आपका हर पल शुभ हो* *बहुत सुन्दर पोस्ट है* *एक बार जरूर पढ़ें जी* *भागवत रहस्य- गोपी* *गोपियों के दो मुख्य भेद बताये हैं* - *(१) नित्यसिध्धा गोपियाँ और (२) साधनसिध्धा गोपियाँ।* 👉 *(१) नित्यसिध्धा गोपियाँ* वह हैं, जो श्रीकृष्ण के साथ गोलोक से आईं हैं... ललिता, विशाखा,चंपकलता,चित्रा,रंगदेवी, सुदेवी, इंदुलेखा, तुंगविद्या इत्यादि... 👉 *(२) साधनसिध्धा गोपियाँ* के कई भेद हैं - 💞 *(१) श्रुतिरूपा गोपियाँ -* वेद के मन्त्र गोपी बनकर आये हैं। वेदों ने ईश्वर का वर्णन तो बहुत किया है फिर भी उन्हें अनुभव नहीं हो पाया। ईश्वर केवल वाणी का नहीं... स्मरण,चिंतन का विषय है... संसार का विस्मरण हुए बिना ईश्वर से साक्षात्कार नहीं हो पाता । तभी तो वेदभिमानी रुचायें गोकुल में गोपी बनकर आईं हैं। 💞 *(२)ऋषिरूपा गोपियाँ -* जीव का सबसे बड़ा शत्रु काम है। काम से लोभ या क्रोध उत्पन्न होता है। ऋषियों ने वर्षो तक तपश्चर्या की - फिर भी मन में से काम नहीं गया। इस काम को श्रीकृष्ण को अर्पण करने के पश्चात गोपियों का रूप लेकर आये हैं। दंडकारण्य के ऋषियों ने गोपी बनकर आये... भगवान श्रीराम जी ने दंडकारण्य के ऋषियों को ये वरदान दिया था कि- त्रेतायुग में मैं एक पत्नीव्रत धारी हुं...द्वापर युग में हम सब मिलेंगें... तब मैं सबको प्रेमदान दुंगा... 💞 *(३)संकीर्णरूपा गोपियाँ -* ईश्वर के मनोहर स्वरुप को निहारने और उन्हें पाने की इच्छा वाली स्त्रियाँ गोपियाँ बनकर आई हैं। ये भी बहुत बडे भक्त हैं...जनकपुर के नारीयां जो श्रीराम जी को देखते ही सुधबुध खो बैठे...मन ही मन पाने की इच्छा रखने वाली नारीयां गोपी बनकर आयीं...कुछ देवकन्याएं भी गोपी बन कर आयीं... जो श्रीकृष्ण भक्ति किये थे... 💞 *(४)अन्यपूर्वा गोपियाँ -* संसार के सुख भुगतने के बाद जब संसार सुख से विरक्त हो गये और प्रभु को पाने की इच्छा जाग्रत हुआ,और श्रीकृष्ण का भक्ति निष्काम भाव से करने वाले भक्तगण गोपियाँ बनकर आई हैं। 💞 *(५) अनन्यपूर्वा गोपियाँ -* जन्म से ही प्रभु से प्रेम,पूर्ण वैरागी भक्त गोपियाँ बनकर आये हैं। अनेक भोग भुगतने के पश्चात भी श्रीकृष्ण निष्काम हैं - उन्हें भोगो में तनिक भी आसक्ति नहीं है। वो तो आसक्ति मिटाने वाले हैं। श्रीकृष्ण का ध्यान करने वाला व्यक्ति स्वयं निष्काम हो जाता है। कामभाव से भी जो श्रीकृष्ण का चिंतन करता है... भक्ति करता है... परिणाम स्वरूप वह भी निष्कामी बनता है। *चीरहरण लीला के समय श्रीकृष्ण ने गोपियों से प्रतिज्ञा किया था कि योग्य समय आने पर वे रासलीला में मिलेंगे*। *जिसे भगवान अपनाते हैं, अंगीकार करते हैं उसे ही रासलीला में प्रवेश मिलता है*। *गोकुल की सभी गोपियाँ रासलीला में गई नहीं हैं। जो अधिकारी थे, उनको रासलीला में प्रवेश मिला... शरदपूर्णिमा ही वो रात्रि थी,जब गोपीयों को महारास रस मिला...प्रेमदान मिला... इसमें भगवान शंकर जी... माता पार्वती जी भी गोपी बनकर महारास रस प्राप्त किये..*. *राधे राधे*🙏🚩 🌷💐🌿🙏🌿💐🌷

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गोत्र क्या है? सनातन धर्म के अंतर्गत वर्ण के साथ-साथ गोत्र को भी बेहद महत्वपूर्ण दर्जा दिया गया है। जहां एक ओर समान वर्ण में विवाह करने को मान्यता प्रदान की गई है वहीं इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी बताया है कि वर-वधु का गोत्र समान ना हो.... ऐसी मानयता है कि अगर समान गोत्र वाले स्त्री-पुरुष विवाह बंधन में बंध जाते हैं तो उनकी होने वाली संतान को रक्त संबंधित समस्याएं आ सकती हैं। कई बार गोत्र के विषय में पढ़ा और सुना है..... लेकिन गोत्र क्या है ?इसके विषय में हम जानते हैं? शायद नहीं.... बहुत ही कमलोग इस बात से अवगत होंगे कि आखिर गोत्र है और इसका निर्धारण कैसे होता है। आज हम इसी सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गोत्र का शाब्दिक अर्थ बेहद व्यापक है... जिसकी समय-समय पर व्याखाया भी की जाती रही है। गोत्र शब्द की संधि विच्छेद पर ध्यान दें तो यह ‘गो’ यानि इन्द्रियां और ‘त्र’ यानि रक्षा करना से मिलकर बना है... अर्थात इन्द्रियों पर आघात से रक्षा करने वाला....जिसे “ऋषि” कहा जाता है। सनातन धर्म से संबंधित दस्तावेजों पर नजर डालें तो प्राचीनकाल में चार ऋषियों के नाम से गोत्र परंपरा की शुरुआत हुई, जिनके नाम ऋषि अंगिरा, ऋषि कश्यप, ऋषि वशिष्ठ और ऋषि भृगु हैं... कुछ समय पश्चात इनमें ऋषि जमदग्नि, ऋषि अत्रि, ऋषि विश्वामित्र और ऋषि अगस्त्य भी इसमें जुड़ गए। प्रैक्टिकल तौर पर देखा जाए तो गोत्र का आशय पहचान से है... यानि कौनसा व्यक्ति किस ऋषि का वंशज है। सामाजिक तौर पर देखा जाए तो 'गोत्र' की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ‘एकत्रीकरण’ से संबंध रखता है। ॐ गं गणपतये नमः 👏 ॐ नम :शिवाय ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री भोलेनाथ ॐ सूर्याय नमः 🌅 👏 🌹 🚩 फेब्रुवारी महिने का आखरी दिवस 28 शुभ 🌅 रविवार जय श्री सुर्य नारायण 🌅 👣 💐 👏 ॐ नमो नारायणाय नमस्कार 🙏 🚩

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Anita Sharma Feb 27, 2021

*अदभुत गणितज्ञ "श्री.तुलसीदासजी"* ... से एक भक्त ने पूछा कि... महाराज आप श्रीराम के इतने गुणगान करते हैं , क्या कभी खुद श्रीराम ने आपको दर्शन दिए हैं ?.. तुलसीदास बोले :- " हां " भक्त :- महाराज क्या आप मुझे भी दर्शन करा देंगे ??? तुलसीदास :- " हां अवश्य " ....तुलसीदास जी ने ऐसा मार्ग दिखाया कि एक गणित का विद्वान भी चकित हो जाए !!! *तुलसीदास जी ने कहा , ""अरे भाई यह बहुत ही आसान है !!! तुम श्रीराम के दर्शन स्वयं अपने अंदर ही प्राप्त कर सकते हो.""* *हर नाम के अंत में राम का ही नाम है.* इसे समझने के लिए तुम्हे एक *"सूत्रश्लोक "* बताता हूं . यह सूत्र किसी के भी नाम में लागू होता है !!! भक्त :-" कौनसा सूत्र महाराज ?" *तुलसीदास* :- यह सूत्र है ... *||"नाम चतुर्गुण पंचतत्व मिलन तासां द्विगुण प्रमाण || || तुलसी अष्ट सोभाग्ये अंत मे शेष राम ही राम || "* इस सूत्र के अनुसार ★ *अब हम किसी का भी नाम ले और उसके अक्षरों की गिनती करें*... *१)उस गिनती को (चतुर्गुण) ४ से गुणाकार करें*. *२) उसमें (पंचतत्व मिलन) ५ मिला लें.* *३) फिर उसे (द्विगुण प्रमाण) दुगना करें.* *४)आई हुई संख्या को (अष्ट सो भागे) ८ से विभाजित करें .* *"" संख्या पूर्ण विभाजित नहीं होगी और हमेशा २ शेष रहेगा!!! ... *यह २ ही "राम" है। यह २ अंक ही " राम " अक्षर हैं*... ★विश्वास नहीं हों रहा है ना??? चलिए हम एक उदाहरण लेते हैं ... आप एक नाम लिखें , अक्षर कितने भी हों !!! ★ उदा. ..निरंजन... ४ अक्षर १) ४ से गुणा करिए ४x४=१६ २)५ जोड़िए १६+५=२१ ३) दुगने करिए २१×२=४२ ४)८ से विभाजन करने पर ४२÷८= ५ पूर्ण अंक , शेष २ !!! *शेष हमेशा दो ही बचेंगे,यह बचे २ अर्थात् - "राम" !!!* *विशेष यह है कि सूत्रश्लोक की संख्याओं को तुलसीदासजी ने विशेष महत्व दिया है*!!! ★1) *चतुर्गुण* अर्थात् *४ पुरुषार्थ* :- *धर्म, अर्थ, काम,मोक्ष* !!! ★2) *पंचतत्व* अर्थात् ५ *पंचमहाभौतिक* :- *पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु , आकाश*!!! ★3) *द्विगुण प्रमाण* अर्थात् २ *माया व ब्रह्म* !!! ★4) *अष्ट सो भागे* अर्थात् ८ * *आठ प्रकार की लक्ष्मी* (आग्घ, विद्या, सौभाग्य, अमृत, काम, सत्य, भोग आणि योग लक्ष्मी ) अथवा तो अष्ठधा प्रकृति. ★अब यदि हम सभी अपने नाम की जांच इस सूत्र के अनुसार करें तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि हमेशा शेष २ ही प्राप्त होगा ... इसी से हमें श्री तुलसीदास जी की बुद्धिमानी और अनंत रामभक्ति का ज्ञान होता है !!! 🙏🏻 *जय श्रीराम* 🙏🏻(साभार फेसबुक)

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RAJ RATHOD Feb 26, 2021

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Garima Gahlot Rajput Feb 27, 2021

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कालभैरव के बारे में आपने भी जरूर सुना होगा। इनकी पूजा भारत के साथ साथ नेपाल, श्रीलंका, तिब्बत आदि में की जाती है। लेकिन इन्हे अलग अलग जगहों पर अलग अलग नामों से जाना जाता है। महाराष्ट्र में खंडोबा के नाम से पूजा अर्चना होती है, वहीं दक्षिण भारत में भैरव का नाम शाश्ता है। ये काल के देवता है। माना जाता है कि भगवान शिव के तम गण हैं – भूत, प्रेत, पिशाच, पूतना, कोटरा और रेवती आदि। विपत्ति, रोग और मृत्यु के समस्त दूत और देवता उनके सैनिक हैं और इन सभी गणों के अधिनायक है बाबा काल भैरव। काल भैरव के बारे में शिवपुराण में बताया गया है। एक एक बार तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु, महेश मे विवाद पैदा हो गया कि तीनों में श्रेष्ठ कौन है। तब ब्रह्मा ने शिव की निंदा कर दी। इससे क्रोधित हुए शिव ने रौद्र रूप धारण कर लिया और इसी रौद्र रूप से काल भैरव का जन्म हुआ। काल भैरव ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए ब्रह्मा के पांचवे सिर को काट दिया। इससे भैरव पर ब्रह्म हत्या का दोष लग गया। ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति हेतु काल भैरव ने प्रायश्चित स्वरूप त्रिलोक का भ्रमण किया। लेकिन काशी पहुंचने के बाद वे ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो सके। भैरव को दंड पाणी भी कहा जाता है जिसका अर्थ है पापियों को दंड देने वाले। इसीलिए उनका अस्त्र डंडा और त्रिशूल है। कालभैरव की पूजा करने से ये समस्याएं होती है दूर 1. काल भैरव की पूजा से बड़े से बड़े शत्रु शांत हो जाते हैं। 2. काल भैरव की उपासना का मंत्र ॐ काल भैरवाय नमः है। 3. यदि आप कर्ज में डूबे हैं तो हर बुधवार को कम या ज्यादा काली मिठाई गरीबों में बांटे। 4. यदि मानसिक परेशानियां समाप्त न हो रही हों, नींद न आती हो,डर लगता हो तो पुरोहित जी से भैरव के चरणों में रखा पानी वाला नारियल ले आएं और उसे सिरहाने रखकर सोएं। इस से मन शांत रहेगा। जय श्री कालभैरवाय नम :🌹 👏 नमस्कार शुभ प्रभात वंदन 🌅 👣 👏 शुभ शनिवार जय जय रघुवीर समर्थ जय श्रीराम 👏 🌹 🚩 ॐ गं गनपतये नमः 👏 ॐ नम :शिवाय ॐ निलांजन समाभासं रविपूत्रं यमाग्रजं छाया मार्तण्डं संभूतं तं नमामि शनैश्चरं नमस्कार शुभप्रभात 🌅 शुभ शनिवार जय जय बजरंग बली 👏 🚩 🐚 🌹 नमस्कार 🙏 🚩

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