Nand kishor Dhaker ने बद्रीनाथ मंदिर में यह पोस्ट की।

#ज्ञानवर्षा #मंदिर

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XYZ Jul 22, 2017
जय बद्रीविशाल जी की

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Anita Sharma May 8, 2021

एक गाँव में एक बढ़ई रहता था। वह शरीर और दिमाग से बहुत मजबूत था। एक दिन उसे पास के गाँव के एक अमीर आदमी ने फर्नीचर बनवाने के लिए अपने घर पर बुलाया। जब वहाँ का काम खत्म हुआ तो लौटते वक्त शाम हो गई तो उसने काम के मिले पैसों की एक पोटली बगल मे दबा ली और ठंड से बचने के लिए कंबल ओढ़ लिया। वह चुपचाप सुनसान रास्ते से घर की और रवाना हुआ। कुछ दूर जाने के बाद अचानक उसे एक लुटेरे ने रोक लिया। डाकू शरीर से तो बढ़ई से कमजोर ही था पर उसकी कमजोरी को उसकी बंदूक ने ढक रखा था। अब बढ़ई ने उसे सामने देखा तो लुटेरा बोला, 'जो कुछ भी तुम्हारे पास है सभी मुझे दे दो नहीं तो मैं तुम्हें गोली मार दूँगा।' यह सुनकर बढ़ई ने पोटली उस लुटेरे को थमा दी और बोला, ' ठीक है यह रुपये तुम रख लो मगर मैं घर पहुँच कर अपनी बीवी को क्या कहुंगा। वो तो यही समझेगी कि मैने पैसे जुए में उड़ा दिए होंगे। तुम एक काम करो, अपने बंदूक की गोली से मेरी टोपी मे एक छेद कर दो ताकि मेरी बीवी को लूट का यकीन हो जाए।' लुटेरे ने बड़ी शान से बंदूक से गोली चलाकर टोपी में छेद कर दिया। अब लुटेरा जाने लगा तो बढ़ई बोला, 'एक काम और कर दो, जिससे बीवी को यकीन हो जाए कि लुटेरों के गैंग ने मिलकर मुझे लूटा है । वरना मेरी बीवी मुझे कायर ही समझेगी। तुम इस कंबल मे भी चार- पाँच छेद कर दो।' लुटेरे ने खुशी खुशी कंबल में भी कई गोलियाँ चलाकर छेद कर दिए। इसके बाद बढ़ई ने अपना कोट भी निकाल दिया और बोला, 'इसमें भी एक दो छेद कर दो ताकि सभी गॉंव वालों को यकीन हो जाए कि मैंने बहुत संघर्ष किया था।' इस पर लुटेरा बोला, 'बस कर अब। इस बंदूक में गोलियां भी खत्म हो गई हैं।' यह सुनते ही बढ़ई आगे बढ़ा और लुटेरे को दबोच लिया और बोला, 'मैं भी तो यही चाहता था। तुम्हारी ताकत सिर्फ ये बंदूक थी। अब ये भी खाली है। अब तुम्हारा कोई जोर मुझ पर नहीं चल सकता है। चुपचाप मेरी पोटली मुझे वापस दे दे वरना ..... यह सुनते ही लुटेरे की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई और उसने तुरंत ही पोटली बढई को वापिस दे दी और अपनी जान बचाकर वहाँ से भागा। आज बढ़ई की ताकत तब काम आई जब उसने अपनी अक्ल का सही ढंग से इस्तेमाल किया। इसलिए कहते है कि मुश्किल हालात मे अपनी अक्ल का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए तभी आप मुसीबतों से आसानी से निकल सकते हैं।हिम्मत न हारे क्योंकि डर के आगे जीत है.........

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Amar jeet mishra May 8, 2021

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*🔹 आज का प्रेरक प्रसंग 🔹* *!! सुंदरता !!* Garima एक कौआ सोचने लगा कि पंछियों में मैं सबसे ज्यादा कुरूप हूँ। न तो मेरी आवाज ही अच्छी है, न ही मेरे पंख सुंदर हैं। मैं काला-कलूटा हूँ। ऐसा सोचने से उसके अंदर हीनभावना भरने लगी और वह दुखी रहने लगा। एक दिन एक बगुले ने उसे उदास देखा तो उसकी उदासी का कारण पूछा। कौवे ने कहा – तुम कितने सुंदर हो, गोरे-चिट्टे हो, मैं तो बिल्कुल स्याह वर्ण का हूँ। मेरा तो जीना ही बेकार है। बगुला बोला – दोस्त मैं कहाँ सुंदर हूँ। मैं जब तोते को देखता हूँ, तो यही सोचता हूँ कि मेरे पास हरे पंख और लाल चोंच क्यों नहीं है। अब कौए में सुन्दरता को जानने की उत्सुकता बढ़ी। वह तोते के पास गया। बोला – तुम इतने सुन्दर हो, तुम तो बहुत खुश होते होगे ? तोता बोला- खुश तो था लेकिन जब मैंने मोर को देखा, तब से बहुत दुखी हूँ, क्योंकि वह बहुत सुन्दर होता है। कौआ मोर को ढूंढने लगा, लेकिन जंगल में कहीं मोर नहीं मिला। जंगल के पक्षियों ने बताया कि सारे मोर चिड़ियाघर वाले पकड़ कर ले गये हैं। कौआ चिड़ियाघर गया, वहाँ एक पिंजरे में बंद मोर से जब उसकी सुंदरता की बात की, तो मोर रोने लगा। और बोला – शुक्र मनाओ कि तुम सुंदर नहीं हो, तभी आजादी से घूम रहे हो वरना मेरी तरह किसी पिंजरे में बंद होते। *शिक्षा:-* दूसरों से तूलना करके दुःखी होना बुद्धिमानी नहीं है। असली सुन्दरता हमारे अच्छे कार्यों से आती है। Garima *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

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Anita Sharma May 7, 2021

अद्भुत बाल लीला... एक बार जब मेरे प्रभु लीला कर रहे तो ब्रम्हा , इंद्र , शिव , ये सब देवता ठाकुर जी के निकट आए और इन्होंने क्या देखा की ठाकुर जी अपने पीछे कुछ छुपा रहे है तब देवता बोले की प्यारे आप क्या छुपा रहे हो ? तो भगवान चुपचाप खड़े है , हाथ में एक पात्र रखा है और उसको पीछे छुपा रखा है । देवताओ ने फिर पूछो प्रभु आप क्या छुपा रहे हो तो भगवान धीरे से बोले की देखो आप किसी को बताना नहीं ये जो पात्र है ना यामे बड़ी मुश्किल से आज में कहीं से छाछ लेकर आयो हूँ तो देवता बोले की फिर प्रभु छुपा क्यों रहे हो क्या ये बहुत कीमती है ? भगवान बोले अब इसकी कीमत में क्या बताऊँ ? तो देवता बोले की प्रभु जब आप , जो अनंत कोटि ब्रम्हाण्ड नायक है ,आप इस छाछ को छुपा रहे है तो ये तो अनमोल होगी तो प्यारे एक घूंट हमे भी मिल जाए , आप कृपा कर दो ताकि एक घूंट हम भी पी सके तो भगवान बोले की नहीं-नहीं देवताओ ये छाछ तुम्हारे सौभागय में नहीं है ,तुम स्वर्ग का अमृत पी सकते हो पर ब्रजवासियो की छाछ तो में ही पिऊँगा ,तुम जाओ यहाँ से स्वर्ग का अमृत पीओ पर ये छाछ में आपको नहीं दे सकता हूँ तो देवता बोले प्रभु ऐसी कौनसी अनमोल बात है इस छाछ में जो हम नहीं पी सकते है , आप कह रहे हो की हम अमृत पिये तो क्या ये छाछ अमृत से भी बढ़कर है ? अरे छाछ तो छाछ है इसमें क्या बड़ी बात है तो ठाकुर जी आँखों में आँसू भरकर बोले की देवताओ तुम्हे नाय पतो या छाछ कू पाने के लिए मोए गोपिन की सामने नृत्य करनो पड़े है , जब में नाचूँ हूँ तब मोकुं ये छाछ मिले है " की ताहि अहीर की छोहरियाँ छछिया भर छाछ पर नाच नचावे " तो कुछ तो बात होगी ही ना क्योंकि इसे पाने के लिए ठाकुर जी को नाचना पडता है ।

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