Sachin Patel
Sachin Patel Dec 24, 2016

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Radhe Krishna Apr 16, 2021

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NARESHBAJAJ Apr 16, 2021

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Braj Kishor Dwivedi Apr 16, 2021

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Radhe Krishna Apr 16, 2021

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Bhagat ram Apr 16, 2021

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Acharya Rajesh Apr 16, 2021

☀️ *धारावाहिक लेख:- नवदुर्गा, भाग-5* चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से माॅ दुर्गा भवानी के परम पावन वासंतीय नवरात्रो का आंरभ होता है, इसका आंरभ नौ नवरात्रो से होता है । इन नौ नवरात्रो की क्रमशः नौ देवियाॅ होती है । जो कि क्रम से इस प्रकार है  । पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघण्टा, चौथी कूष्माडा, पांचवीं स्कंदमाता, छठी कात्यायनी, सातवी कालरात्रि, आठवी महागौरी तथा नवी माता का नाम सिद्धिदात्री है । नवरात्रो के पांचवे दिन "माता स्कंदमाता देवी" का दिन है । *पंचम देवी:- स्कंदमाता* देवी भगवती का छठा स्वरुप स्कंदमाता का  है । स्कंदमाता को ही पार्वती, महेश्वरी, और गौरी कहते है । स्कंदकुमार की माता होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पडा ।  परम सौभाग्य की देवी परम वैभवमयी तथा असुरो का नाश करने वाली है । देवी पर्वत राज की पुत्री होने से पार्वती कहलाती हैं । महादेव की पत्नी होने से माहेश्वरी कहलाती हैं और अपने गौर वर्ण के कारण देवी गौरी के नाम से भी पूजी जाती हैं । एक बार महाअसुर तारकासुर ने तप करके ब्रह्मा जी से अक्षत जीवन का वचन ले लिया । उसने ब्रह्माजी से वचन लिया कि यदि उसकी मृत्यु हो तो भगवान शिव के पुत्र के हाथो से हो । अब तारकासुर ने सोचा कि न तो शंकर जी कभी विवाह करेगे, न ही उनके कभी पुत्र होगा और न ही कभी मेरी मौत होगी । तारकासुर ने अपने को अजेय मानकर जगत मे हाहाकार मचाना शुरु कर दिया । तब देवगण भागे-२ शकंरजी के पास गये, बहुत अनुनय विनय के बाद उन्होने साकार रुप धारण कर पार्वतीजी से विवाह रचाया । शिव और पार्वती जी के पुत्र के रुप मे कार्तिकेय या स्कंदकुमार ने तारकासुर का वध करके जगत को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई । यह देवी असुरो का दमन करने वाली और सभी का कल्याण करने वाली है । स्कंदमाता के स्वरुप के साथ ही माता और पुत्र के संबध की नीव पडी । स्कंदकुमार को पहला शुक्रोत्पन्न प्राणी क्हा जाता है । माता को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है अत: मां को अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है । जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान स्नेह करती हैं । *स्कन्दमाता का स्वरूप* देवी स्कन्दमाता की चार भुजाएं हैं, माता की दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पकडा हुआ है। और एक भुजा में भगवान स्कन्द या कुमार कार्तिकेय को सहारा देकर अपनी गोद में लिये बैठी हैं । मां का चौथा हाथ भक्तो को आशीर्वाद देने की मुद्रा मे है । माँ का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है । सिह के आसन पर विराजमान तथा कमल के पुष्प से सुशोभित यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी है। *कुण्डलिनी चक्र* इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं, जिससे साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है । यह अलौकिक प्रभामंडल प्रति क्षण उसके योगक्षेम का निर्वाहन करता है । एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग भी सुलभ होता है । *स्कंदमाता का भोग:-* पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को भी देना चाहिए, ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है । *बिमारियों से रक्षा* वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए और माता को अलसी चढ़ाकर प्रसाद में रूप में ग्रहण करना चाहिए *स्कंदमाता की अराधना मंत्र है:-* *1.या देवी सर्वभूतेषु मातृ रुपेण संस्थिता ।* *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥* *2.सिहांसनगता नित्यं पद्माश्रित करद्वया ।* *शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी ।।* *स्तोत्र* *नमामि स्कन्धमातास्कन्धधारिणीम्।* *समग्रतत्वसागरमपारपारगहराम्॥* *शिप्रभांसमुल्वलांस्फुरच्छशागशेखराम्।* *ललाटरत्‍‌नभास्कराजगतप्रदीप्तभास्कराम्॥* *महेन्द्रकश्यपाíचतांसनत्कुमारसंस्तुताम्।* *सुरासेरेन्द्रवन्दितांयथार्थनिर्मलादभुताम्॥* *मुमुक्षुभिíवचिन्तितांविशेषतत्वमूचिताम्।* *नानालंकारभूषितांकृगेन्द्रवाहनाग्रताम्।।* *सुशुद्धतत्वातोषणांत्रिवेदमारभषणाम्।* *सुधाíमककौपकारिणीसुरेन्द्रवैरिघातिनीम्॥* *शुभांपुष्पमालिनीसुवर्णकल्पशाखिनीम्।* *तमोअन्कारयामिनीशिवस्वभावकामिनीम्॥* *सहस्त्रसूर्यराजिकांधनज्जयोग्रकारिकाम्।* *सुशुद्धकाल कन्दलांसुभृडकृन्दमज्जुलाम्॥* *प्रजायिनीप्रजावती नमामिमातरंसतीम्।* *स्वकर्मधारणेगतिंहरिप्रयच्छपार्वतीम्॥* *इनन्तशक्तिकान्तिदांयशोथमुक्तिदाम्।* *पुन:पुनर्जगद्धितांनमाम्यहंसुराचिताम्॥* *जयेश्वरित्रिलाचनेप्रसीददेवि पाहिमाम्॥* *कवच* *ऐं बीजालिंकादेवी पदयुग्मधरापरा।* *हृदयंपातुसा देवी कातिकययुता॥* *श्रींहीं हुं ऐं देवी पूर्वस्यांपातुसर्वदा।* *सर्वाग में सदा पातुस्कन्धमातापुत्रप्रदा॥* *वाणवाणामृतेहुं फट् बीज समन्विता।* *उत्तरस्यातथाग्नेचवारूणेनेत्रतेअवतु॥* *इन्द्राणी भैरवी चैवासितांगीचसंहारिणी।* *सर्वदापातुमां देवी चान्यान्यासुहि दिक्षवै॥* *(क्रमशः)* *लेख के छठे भाग में कल षष्ठ "माता कात्यायनी देवी" के विषय मे लेख ।* _________________________ *आगामी लेख:-* *1. 23 अप्रैल को "कामदा" एकादशी पर लेख ।* *2. 24 अप्रैल को "वैशाख मास" विषय पर लेख ।* *3. शीघ्र ही हनुमान जयंती पर लेख ।* _________________________ ☀️ *जय श्री राम* *आज का पंचांग 🌹🌹🌹* *शनिवार,17.4.2021* *श्री संवत 2078* *शक संवत् 1943* *सूर्य अयन- उत्तरायण, गोल-उत्तर गोल* *ऋतुः- वसन्त-ग्रीष्म ऋतुः ।* *मास- चैत्र मास।* *पक्ष- शुक्ल पक्ष ।* *तिथि- पंचमी तिथि 8:34 pm तक* *चंद्रराशि- चंद्र वृष राशि मे 1:09 pm तक तदोपरान्त मिथुन राशि ।* *नक्षत्र- मृगशिरा अगले दिन 2:33 am तक* *योग- शोभन योग 7:17 pm तक (शुभ है)* *करण- बव करण 7:23 am तक* *सूर्योदय 5:54 am, सूर्यास्त 6:47 pm* *अभिजित् नक्षत्र- 11:55 am से 12:46 pm* *राहुकाल - 9:07 am से 10:44 am* (अशुभ कार्य वर्जित,दिल्ली )* *दिशाशूल- पूर्व दिशा ।* *अप्रैल माह -शुभ दिन:-* शुभ दिन : 17, 18, 19, 20 (12 pm उपरांत), 21, 22, 23 (11 am तक), 24, 25, 26 (1 pm तक), 28 (सायंकाल 5 उपरांत), 29 (12 pm तक), 30 (12 pm उपरांत) *अप्रैल माह-अशुभ दिन:-* 27 ______________________ *विशेष:- जो व्यक्ति दिल्ली से बाहर अथवा देश से बाहर रहते हो, वह ज्योतिषीय परामर्श हेतु paytm या Bank transfer द्वारा परामर्श फीस अदा करके, फोन द्वारा ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त कर सकतें है* ________________________ *आगामी व्रत तथा त्यौहार:-*21 अप्रैल:- राम नवमी। 22 अप्रैल:- चैत्र नवरात्रि पारण। 23 अप्रैल:- कामदा एकादशी। 24 अप्रैल:- शनि प्रदोष। 26 अप्रैल:- चैत्र पूर्णिमा। 30 अप्रैल:- संकष्टी चतुर्थी आपका दिन मंगलमय हो . 💐💐💐 *आचार्य राजेश ( रोहिणी, दिल्ली )* *9810449333, 7982803848*

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Braj Kishor Dwivedi Apr 16, 2021

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