आक्रोश
आक्रोश Nov 12, 2017

शिव का रौद्र रूप है वीरभद्र!!

शिव का रौद्र रूप है वीरभद्र!!

यह अवतार तब हुआ था जब ब्रह्मा के पुत्र दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया लेकिन भगवान शिव को उसमें नहीं बुलाया। जबकि दक्ष की पुत्री सती का विवाह शिव से हुआ था। यज्ञ की बात ज्ञात होने पर सती ने भी वहां चलने को कहा लेकिन शिव ने बिना आमंत्रण के जाने से मना कर दिया। फिर भी सती जिद कर अकेली ही वहां चली गई। अपने पिता के घर जब उन्होंने शिव का और स्वयं का अपमान अनुभव किया तो उन्हें क्रोध भी हुआ और उन्होंने यज्ञवेदी में कूदकर अपनी देह त्याग दी। जब भगवान शिव को यह पता हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के पूर्वभाग से महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए।

शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है-

क्रुद्ध: सुदष्टष्ठपुट: स धूर्जटिर्जटां तडिद्व ह्लिस टोग्ररोचिषम्।

उत्कृत्य रुद्र: सहसोत्थितो हसन् गम्भीरनादो विससर्ज तां भुवि॥

ततोऽतिकाय स्तनुवा स्पृशन्दिवं। - श्रीमद् भागवत -4/5/1

अर्थात सती के प्राण त्यागने से दु:खी भगवान शिव ने उग्र रूप धारण कर क्रोध में अपने होंठ चबाते हुए अपनी एक जटा उखाड़ ली, जो बिजली और आग की लपट के समान दीप्त हो रही थी। सहसा खड़े होकर उन्होंने गंभीर अठ्ठाहस के साथ जटा को पृथ्वी पर पटक दिया। इसी से महाभयंकर वीरभद्र प्रगट हुए।

भगवान शिव के वीरभद्र अवतार का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। यह अवतार हमें संदेश देता है कि शक्ति का प्रयोग वहीं करें जहां उसका सदुपयोग हो। वीरों के दो वर्ग होते हैं- भद्र एवं अभद्र वीर।

राम, अर्जुन और भीम वीर थे। रावण, दुर्योधन और कर्ण भी वीर थे लेकिन पहला भद्र (सभ्य) वीर वर्ग और दूसरा अभद्र (असभ्य) वीर वर्ग है। सभ्य वीरों का काम होता है हमेशा धर्म के पथ पर चलना तथा नि:सहायों की सहायता करना। वहीं असभ्य वीर वर्ग सदैव अधर्म के मार्ग पर चलते हैं तथा नि:शक्तों को परेशान करते हैं। भद्र का अर्थ होता है कल्याणकारी। अत: वीरता के साथ भद्रता की अनिवार्यता इस अवतार से प्रतिपादित होती है।

~ आक्रोश........

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कामेंट्स

🙏🌹जय श्री महाकाल 🌹🙏
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का संध्या आरती श्रृंगार दर्शन
🔱21 अगस्त 2018 ( मंगलवार )🔱

Pranam Jyot Dhoop +144 प्रतिक्रिया 13 कॉमेंट्स • 64 शेयर

*एक लघु कथा*

दुनिया क्या कहेगी...

एक *साधू* किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!!

पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!!

तो पनिहारिन आईं तो एक ने कहा- *"आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया*...
*पत्थर का...

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Gopal Krishan Aug 21, 2018

*🙏🏻शिवाय 🔱 ॐ 🔥 नमः 🚩
*शिव को गुरु बनाने की विधि🙏🏻🚩🔱
*🙏🏻शंभू🔱 शंकर🔱 नमः🔱 शिवाय🚩*

1. आंखें बंद करके आराम से बैठ जायें.
भगवान शिव से कहें हे शिव मै आप को अपना गुरु बनने का आग्रह कर रहा हूं. आप मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करें.

2. द...

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Anju Mishra Aug 21, 2018

जब भगवान किसी पर कृपा करते है, तब उसके ऐश्वर्य का विनाश कर देते हैं | एक बार तो वह दुखी हो जाता है | इसी प्रकार जिसके सम्मान की वृद्धि हो जाती है, भगवान उसका अपमान करवा देते है, लज्जित कर देते है, जिससे वह मान-की माया से छूटकर भगवान की ओर बढ़े | ज...

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shivani Aug 21, 2018


http://gyanbhandar23.blogspot.com

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Gopal Krishan Aug 21, 2018

ये है मुरुदेश्वर मंदिर जो कि कर्नाटक मे कंडुका पहाड़ी पर बनाया गया है, जो कि तीनों तरफ से अरब सागर से घिरा हुआ है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अन्य सभी प्रमुख दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह मंदिर में 20 मंजिला गोपुरा बना हुआ है। यह 249 फुट...

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Anuradha Tiwari Aug 21, 2018

भोजन ,,,,,,,,,,,,
(मनुष्य योनि में जो भी सुखी है वो अपने कर्मों के द्वारा सुखी है, और जो दुखी है वो अपने कर्मों के द्वारा दुखी है ।)

एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा की प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने प्रारब्ध ...

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Aechana Mishra Aug 20, 2018

गीता का सार

• क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा ना पैदा होती है, न मरती है।

• जो हुआ, वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो। भविष...

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T.K Aug 20, 2018

🌿shubhratri🌿

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Rohan Bhardwaj Aug 21, 2018

Flower Jyot Water +8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर

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