🙏🌷 सफला एकादशी 🌷🙏 ➡ 13 दिसम्बर 2017 बुधवार को सफला एकादशी हैं।

🙏🌷 सफला एकादशी 🌷🙏   ➡ 13 दिसम्बर 2017 बुधवार को सफला एकादशी हैं।

🌷 सफला एकादशी 🌷

➡ 13 दिसम्बर 2017 बुधवार को सफला एकादशी है ।

🙏🏻 युधिष्ठिर ने पूछा : स्वामिन् ! पौष मास के कृष्णपक्ष (गुज., महा. के लिए मार्गशीर्ष) में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है? उसकी क्या विधि है तथा उसमें किस देवता की पूजा की जाती है ? यह बताइये ।

🙏🏻 भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजेन्द्र ! बड़ी बड़ी दक्षिणावाले यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है । पौष मास के कृष्णपक्ष में ‘सफला’ नाम की एकादशी होती है । उस दिन विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए । जैसे नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़ तथा देवताओं में श्रीविष्णु श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण व्रतों में एकादशी तिथि श्रेष्ठ है ।

🙏🏻 राजन् ! ‘सफला एकादशी’ को नाम मंत्रों का उच्चारण करके नारियल के फल, सुपारी, बिजौरा तथा जमीरा नींबू, अनार, सुन्दर आँवला, लौंग, बेर तथा विशेषत: आम के फलों और धूप दीप से श्रीहरि का पूजन करे । ‘सफला एकादशी’ को विशेष रुप से दीप दान करने का विधान है । रात को वैष्णव पुरुषों के साथ जागरण करना चाहिए । जागरण करनेवाले को जिस फल की प्राप्ति होती है, वह हजारों वर्ष तपस्या करने से भी नहीं मिलता ।

🙏🏻 नृपश्रेष्ठ ! अब ‘सफला एकादशी’ की शुभकारिणी कथा सुनो । चम्पावती नाम से विख्यात एक पुरी है, जो कभी राजा माहिष्मत की राजधानी थी । राजर्षि माहिष्मत के पाँच पुत्र थे । उनमें जो ज्येष्ठ था, वह सदा पापकर्म में ही लगा रहता था । परस्त्रीगामी और वेश्यासक्त था । उसने पिता के धन को पापकर्म में ही खर्च किया । वह सदा दुराचारपरायण तथा वैष्णवों और देवताओं की निन्दा किया करता था । अपने पुत्र को ऐसा पापाचारी देखकर राजा माहिष्मत ने राजकुमारों में उसका नाम लुम्भक रख दिया। फिर पिता और भाईयों ने मिलकर उसे राज्य से बाहर निकाल दिया । लुम्भक गहन वन में चला गया । वहीं रहकर उसने प्राय: समूचे नगर का धन लूट लिया । एक दिन जब वह रात में चोरी करने के लिए नगर में आया तो सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया । किन्तु जब उसने अपने को राजा माहिष्मत का पुत्र बतलाया तो सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया । फिर वह वन में लौट आया और मांस तथा वृक्षों के फल खाकर जीवन निर्वाह करने लगा । उस दुष्ट का विश्राम स्थान पीपल वृक्ष बहुत वर्षों पुराना था । उस वन में वह वृक्ष एक महान देवता माना जाता था । पापबुद्धि लुम्भक वहीं निवास करता था ।

🙏🏻 एक दिन किसी संचित पुण्य के प्रभाव से उसके द्वारा एकादशी के व्रत का पालन हो गया । पौष मास में कृष्णपक्ष की दशमी के दिन पापिष्ठ लुम्भक ने वृक्षों के फल खाये और वस्त्रहीन होने के कारण रातभर जाड़े का कष्ट भोगा । उस समय न तो उसे नींद आयी और न आराम ही मिला । वह निष्प्राण सा हो रहा था । सूर्योदय होने पर भी उसको होश नहीं आया । ‘सफला एकादशी’ के दिन भी लुम्भक बेहोश पड़ा रहा । दोपहर होने पर उसे चेतना प्राप्त हुई । फिर इधर उधर दृष्टि डालकर वह आसन से उठा और लँगड़े की भाँति लड़खड़ाता हुआ वन के भीतर गया । वह भूख से दुर्बल और पीड़ित हो रहा था । राजन् ! लुम्भक बहुत से फल लेकर जब तक विश्राम स्थल पर लौटा, तब तक सूर्यदेव अस्त हो गये । तब उसने उस पीपल वृक्ष की जड़ में बहुत से फल निवेदन करते हुए कहा: ‘इन फलों से लक्ष्मीपति भगवान विष्णु संतुष्ट हों ।’ यों कहकर लुम्भक ने रातभर नींद नहीं ली । इस प्रकार अनायास ही उसने इस व्रत का पालन कर लिया । उस समय सहसा आकाशवाणी हुई: ‘राजकुमार ! तुम ‘सफला एकादशी’ के प्रसाद से राज्य और पुत्र प्राप्त करोगे ।’ ‘बहुत अच्छा’ कहकर उसने वह वरदान स्वीकार किया । इसके बाद उसका रुप दिव्य हो गया । तबसे उसकी उत्तम बुद्धि भगवान विष्णु के भजन में लग गयी । दिव्य आभूषणों से सुशोभित होकर उसने निष्कण्टक राज्य प्राप्त किया और पंद्रह वर्षों तक वह उसका संचालन करता रहा । उसको मनोज्ञ नामक पुत्र उत्पन्न हुआ । जब वह बड़ा हुआ, तब लुम्भक ने तुरंत ही राज्य की ममता छोड़कर उसे पुत्र को सौंप दिया और वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के समीप चला गया, जहाँ जाकर मनुष्य कभी शोक में नहीं पड़ता ।

🙏🏻 राजन् ! इस प्रकार जो ‘सफला एकादशी’ का उत्तम व्रत करता है, वह इस लोक में सुख भोगकर मरने के पश्चात् मोक्ष को प्राप्त होता है । संसार में वे मनुष्य धन्य हैं, जो ‘सफला एकादशी’ के व्रत में लगे रहते हैं, उन्हीं का जन्म सफल है । महाराज! इसकी महिमा को पढ़ने, सुनने तथा उसके अनुसार आचरण करने से मनुष्य राजसूय यज्ञ का फल पाता है ।
🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🙏🏻🌷🌼🍀🌹🌻🌺🌸💐🙏🏻

Pranam Belpatra Flower +106 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 125 शेयर

कामेंट्स

MANOJ VERMA Dec 13, 2017
राधे राधे ll राधे राधे 🚩

am Nevada post Vijayapura Jila Dec 13, 2017
Har Har Mahadev Jai Shri Ram Radhe Radhe jai mata di Hari Om Hari Om Narayan Narayan Om Namo shri Ganeshaya namah Om Namo bhagwate vasudevay Namah Jai Shree Ram

Jagdish Prasad.Delhi 110040 Dec 13, 2017
@manojverma2 🕉 जय श्री गणेश जी।।🔯 🕉जय श्री राम जी ।।🌞 🕉जय श्री राधे कृष्ण जी।।🐚 🕉जय माता दी ।।🌺 🙏मधुर स्वप्नों के साथ शुभ रात्रि वंदन जी।।🙏

Jagdish Prasad.Delhi 110040 Dec 13, 2017
@abdheshkumar1 🕉 जय श्री गणेश जी।।🔯 🕉जय श्री राम जी ।।🌞 🕉जय श्री राधे कृष्ण जी।।🐚 🕉जय माता दी ।।🌺 🙏मधुर स्वप्नों के साथ शुभ रात्रि वंदन जी।।🙏

Jagdish Prasad.Delhi 110040 Dec 13, 2017
@mukeshkumarrana 🕉 जय श्री गणेश जी।।🔯 🕉जय श्री राम जी ।।🌞 🕉जय श्री राधे कृष्ण जी।।🐚 🕉जय माता दी ।।🌺 🙏मधुर स्वप्नों के साथ शुभ रात्रि वंदन जी।।🙏

Jagdish Prasad.Delhi 110040 Dec 13, 2017
@babbu.dixit 🕉 जय श्री गणेश जी।।🔯 🕉जय श्री राम जी ।।🌞 🕉जय श्री राधे कृष्ण जी।।🐚 🕉जय माता दी ।।🌺 🙏मधुर स्वप्नों के साथ शुभ रात्रि वंदन जी।।🙏

Jagdish Prasad.Delhi 110040 Dec 13, 2017
@pawanwankhadehr 🕉 जय श्री गणेश जी।।🔯 🕉जय श्री राम जी ।।🌞 🕉जय श्री राधे कृष्ण जी।।🐚 🕉जय माता दी ।।🌺 🙏मधुर स्वप्नों के साथ शुभ रात्रि वंदन जी।।🙏

Anuradha Tiwari Dec 15, 2018

कष्टों और संकटो से मुक्ति पाने के लिए विष्णु जी ने मनुष्य के कर्मो को ही महत्ता दी है। उनके अनुसार आपके कर्म ही आपके भविष्य का निर्धारण करते हैं। भाग्य के भरोसे बैठे रहने वाले लोगों का उद्धार होना संभव नहीं है। भाग्य और कर्म को अच्छे से समझने के ल...

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🌹🌹जय लक्ष्मी नारायण की🌹🌹

एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी से बोले, “लोगो में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते हैं !”

तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!, मुझे पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!”

तो भगवान बोले, “लोग “लक्ष्...

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SHRI BAHGVAN Dec 14, 2018

🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Like +1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर

"शिव गायत्री मंत्र- ।। ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात ।।

शिव नमस्कार मंत्र

पूजा से पूर्व इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान शिव का ध्यान करें: “नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शन्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ...

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Narayan Tiwari Dec 16, 2018

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श्री शिव जी के सिर पर चन्द्र कैंसे पहुंचे-:--:- शि‌व पुराण के अनुसार चन्द्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। यह कन्‍याएं 27 नक्षत्र हैं। इनमें चन्द्रमा रोहिणी से विशेष स्नेह करते थे। इसकी शिकायत जब...

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Kamal Kumar Varshney Dec 16, 2018

Pranam +5 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 14 शेयर
sanjay vishwakarma Dec 16, 2018

राधे राधे जी🌺🌺🌺🌺🌺🌺
सुप्रभात जी🙏🙏🙏🙏🙏

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