मैं इस समय रंग्दिमता मंदिर (Gandhinagar) में हूँ।

मैं इस समय रंग्दिमता मंदिर (Gandhinagar) में हूँ।

+8 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 1 शेयर

कामेंट्स

Sandhya Nagar May 18, 2019
🙏🏼दीनदयाल नाम का एक व्यक्ति था जिसके रूई के बहुत बड़े-बड़े कारखाने थे और उसकी रूई इतनी कोमल होती थी कि दूर-दूर से लोग उसकी रुई के लिए अपने घर के लिए बिछाने वाले गद्दे तकिए सब उसकी रुई से बनाते थे उसको अपनी रूई के कोमल होने का बहुत ही अभिमान था इससे ज्यादा कोमल दुनिया में कोई भी चीज़ नहीं है मेरी रूई सबसे अच्छी है उस देश का राजा था जो उसके महल में जो भी बिछोने बिछे हुए थे वह भी इस के कारखाने की रूई से ही बनते थे और राजा के दूसरे नगर में राजा रहते थे वह भी इसकी रुई से ही अपने घर के बिछोनऔर गद्दे बनाते थे दीनदयाल की पत्नी जोकि किशोरी जी और ठाकुर जी की बहुत ही भक्त थीउनके घर में किशोरी जी और ठाकुर जी की इकट्ठी बैठी हुई मुद्रा में एक बहुत ही सुंदर प्रतिमा थी उस प्रतिमा के नीचे भी उन्होंने उसी रुई के बिछोने को बिछायाहुआ था दीनदयाल को इस बात का बहुत घमंड था कि उसके कारखाने की रूईो से जो चीज बनती है वह बहुत ही सुकोमल होती है और बड़ा व्यापारी होने के कारण उसकी राजा से भी अच्छी सांठगांठ थी राजा भी उसको बहुत ही मान देता था जिसके कारण दीनदयाल की शहर में बहुत ही धाक थी दीनदयाल का काम इतना चलता था कि उसको बहुत ही घमंड हो चला था लेकिन घर में आते ही वह एक नरम हृदय का व्यक्ति बन जाता था और ठाकुर जी और किशोरी जी की खूब सेवा किया करता था वह आए दिन अपने घर में आने वाले महात्माओं की भी खूब से सेवा करता था एक दिन उसके घर में एक बहुत ही सिद्ध महात्मा आए तो उसकी पत्नी ने उसको घर के अंदर सबसे अच्छे वाले भी बिछोने पर बिठाया तभी दीनदयाल भी आ गया और आकर महात्मा जी के चरण छू कर कहने लगा महात्मा जी इस बिछोने पर बैठकर आपको कैसा लगा महात्मा जी कुछ नहीं बोले फिर दीनदयाल जी ने दोबारा पूछा कि महात्मा जी यह सबसे सुकोमल दुनिया में सबसे कोमल बिछौना है इससे ऊपर कुछ भी नहीं है इस पर बैठकर आपको कैसा लगा तो महात्मा जी आंखें बंद करके बोलने लगे सुकोमल तो बस फिर थोड़ा रुक कर बोले सुकोमल तो बस इसके आगे कुछ ना बोले और आंखों में आंसू भरकर बस यही बोलते रहे सुकोमल तो बस इससे ज्यादा और कोई नहीं हो सकता और आंखें बंद करके यही बोलते रहे लेकिन दीनदयाल पूछता रहा कि बोलो महात्मा जी कैसा लगा लेकिन वह महात्मा जी तो बस आंखें बंद करके आंखों में आंसू बहा कर यही कहने लगे सुकोमल तो बस वही है तो दीनदयाल को इतना गुस्सा आया कि मेरी जो रुई से बना भी बिछोना है इससे अधिक सुकोमल तो कुछ दुनिया में है ही नहीं तो उसको आग बबूला हो उठा और गुस्से में महात्मा जी को उठाकर धक्के मारता हुआ बाहर ले गया और फिर पूछता रहा महात्मा जी बोलो क्या यही सबसे कोमल है ना तो महात्मा जी कुछ ना बोले बस यही बोल तेरे आंखे बंद करके कि कोमल तो बस कोमल तो बस यही करते रहे तो वो राजा के पास उसको उसको ले गया और कहने लगा राजा जी क्या जो मैं आपके लिए आपके महल के लिए भी रूई से बने बिछोने लाता हूं उसे कोमल दुनिया में और कुछ है तो राजा कहता ना आना इस सारी दुनिया में कोमल कुछ नहीं हो सकता है लेकिन जो महात्मा जी थे वह तो यही बोलते रहे कोमल तो बस कोमल तो बस यही करते रहे तो दीनदयाल नेअपना अपमान समझा ओ राजा जी को बोला कि राजा जी देखो ना ही आप का अपमानकर रहा है मेरा भी अपमान कर रहा है राजा को भी इस बात का बहुत गुस्सा आया और उसने उसको धक्के मार कर शहर के बाहर फेंक दिया लेकिन उस महात्मा को कुछ नहीं पता वह आंखें बंद करके अपनी ही धुन में मगन बस यही बोलता रहा सुकोमल तो बस सुकोमल आगे की बात किसी ने नहीं सुनी इससे अधिक क्या है उधर किशोरी जी अपने भक्तों की ऐसी दशा देखकर आंखों में आंसू लेकर और मुख पर करुणा की बजाय मुख पर तड़प थी तो उनको देखकर ठाकुर जी भागे भागे आये और कहने लगे राधीके क्या हुआ आज क्या हुआ तुम्हारे मुंह पर करुणा की जगह पीड़ा क्यों है तो कहने लगे देखो मेरे भक्ता का क्या हाल कर रहे हैं वह तो बस यही कहना चाहता है कि सुकोमल तो बस मेरी किशोरी जी के चरण ही है लेकिन उसका क्या हाल कर रहे हैं तो ठाकुर जी ने कहा कि तुम फिर कुछ करती क्यों नहीं अपने भक्तों के लिए लेकिन किशोरी जी कुछ ना बोली तभी उसीही दिन मंदिर मे जो दीनदयाल ने जो घर के मंदिर में जयोत जलाई हुई थी हुई थी और तेज आंधी चलने लगी आंधी के कारण वह जयोत थी वह वह बिछोने पर गिर पड़ी और भी बिछोने को आग लग गई और ऐसे तेज आंधी के कारण और हवा चलने के कारण आग सारे घर में फैल गई ऐसे ही सारा घर जलकर स्वाहा हो गया जब तक दीनदयाल घर पहुंचा तब तक सारा घर जलकर स्वाहा हो गया था अब आंधी बंद होने के बाद तेज बारिश होने लगी और बारिश कितनी ज्यादा हुई थी उसके कारखाने में रखी हुई हुई जो सारी रूई भीग गई और कारखाना पानी में डूब गया कारखाने और घर की ऐसी दशा देखकर दीनदयाल जोर जोर से विलाप करने लगा और उसकी पत्नी और बच्चे भी सड़क पर बैठकर जोर जोर से विलाप करने लगे हमारे घर और कारखाने को क्या हो गया और दीनदयाल भागा भागा राजा के पास गया और कहने लगा कि देखो राजा जी मेरे कारखाने का भी बुरा हाल है और मेरे घर को भी आग लग गई है तो राजा आग बबूला होकर बोला तू यह बता कि तूने कैसी रूई के बिछोने बनाए थे देखो यह मेरी पत्नी बच्चों और राजकुमार और राजकुमारी का क्या हाल हो गया है इनको तो देखो इसी के कारण शरीर पर जैसे एक अलग सी खुजली जैसी बीमारी हो गई है और राजा ने उसको मार कर वहां से भगा दिया तो वह रोता हुआ फिर घर की तरफ गया और घर में जाकर और जोर से दहाड़े मार कर रोने लगा कि मेरे घर को क्या हो गया तभी उसका ध्यान है मंदिर में पड़ी ठाकुर जी और किशोरी जी प्रतिमा पर पडा वह उनके चरणों में गिर पड़ा उसका हाथ किशोरी जी के चरणों के चरणो में लग गया और ऐसी कोमल वस्तु पर हाथ लगते ही को एकदम से दंग रह गया और कहने लगा यह रुई से करोड़गुणा ज्यादा * सुकोमल चीज क्या है तो उसने ध्यान से देखा ही तो किशोरी जी के चरण है तभी उसके दिमाग में महात्मा जी की कही बात याद आ गई कि महात्मा यही कहना चाहता था कि किशोरी जी के चरणों से कोमल कुछ नहीउसको बहुत ही पछतावा हुआ और वह जोर-जोर से विलाप करने लगा और किशोरी जी ठाकुर जी की मूर्ति को लेकर जोर से भागने लगा और शहर के बाहर पहुंच गया जहां पर वह महात्मा जी अभी भी आंखें बंद करके किशोरी जी का ध्यान करके यही कह रहे थे कोमल तो बस कोमल तो बस यही कह रहा था और जाकर दीनदयाल उस महात्मा के चरणों में गिर पड़ा और कहने लगा हां हां महात्मा जी मैं समझ गया ए सुकोमल तो बस मेरी किशोरी जी मेरी लाडली जो मेरी करुणामई मेरी लाडो के चरणों से कोमल दुनिया में और कुछ नहीं है मेरे से बहुत बड़ी गलती हो गई है कृपया आप मुझे क्षमा करें और किशोरी जी से प्रार्थना आप ही कर दे कि वह मेरी भूल क्षमा करें मैं जान गया हूं कि दुनिया में किशोरी जी के चरणों से कोमल और कोई नहीं है महात्मा जी कृपया किशोरी जी को कहो कि मुझे क्षमा कर दें मैं तो नादान हूं तब वह तो करूणामयी है महात्मा जी बोले कि वह तो सब की सुनती है तू एक बार बस उसको सच्चे मन से पुकार कर देखो वो किशोरी जी के कोमल चरणों का ध्यान करके बस यही बोलने लगा किशोरी तेरे चरणों की रज चाहू बैठा रहूं कुंजन के कोना श्याम राधिका गाऊं किशोरी तेरे चरणों की रज पाऊं बस निरंतर आंसू बहाता हुआ उस किशोरी जी को याद करता हुआ और वही बैठ महात्मा जी के साथ किशोरी जी के बरसाने धाम को चल पड़ा किशोरी जी ऐसी करुणामई है जो उसके भक्तों को कष्ट देता है उसको भी अपनी शरण में ले लेती है और जो और अपने भक्तों की भी पूरी रक्षा करती है बोलो करुणामई सरकार की जय राधा रानी की जय हो मेरी लाडली सरकार की जय हो

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB