🌷p kumar🌷
🌷p kumar🌷 Oct 21, 2021

🙏🌷सुप्रभात🌷🙏 🙏🌷जय श्री राम🌷🙏 🙏🌷जय हनुमान🌷🙏 🙏🌷जय माता की🌷🙏 🙏🌷ॐ नमः शिवाय🌷🙏 🙏🌷हर हर महादेव🌷🙏 🙏🌷जय श्री महाकाल🌷🙏 🙏🌷ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🌷🙏 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

+31 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 2 शेयर

कामेंट्स

Seemma Valluvar Oct 21, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏🌺🌺🌺🌺🚩, भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की कृपा सदा आप और आपके परिवार पर बना रहे भाईजी, जय श्री राधेकृष्णा 🙏🌺🌺🌺🌺🚩

Renu Singh Oct 21, 2021
Jai Shree Hari 🙏 Shubh Prabhat Vandan Bhai Ji Bhagwan Vishnu Avam Mata Laxmi Ji ki kripa Aap Sapriwar Pr Sadaiv Bni rhe Aàpka Din Shubh Avam Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Brajesh Sharma Oct 21, 2021
ॐ नमों भगवते वासुदेवाय ༺꧁जय श्री राधे कृष्णा जी꧂༻ ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव खुश रहें मस्त रहें मुस्कुराते रहें स्वस्थ रहें

madan pal 🌷🙏🏼 Oct 21, 2021
ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नम जी शूभ दोपहर वंदन जी लक्ष्मी नारायण जी की कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌹🌹🌹🌹👌🏼👌🏼

snehalata Mishra Jan 27, 2022

+12 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Thakur Sharma Billu Jan 27, 2022

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर

*🌹षटतिला एकादशी महिमा व कथा* ➡ *28 जनवरी 2021 रात्रि 02:17 AM से 28 जनवरी रात्रि 11:35 PM तक (यानी 28 जनवरी, शुक्रवार को पुरा दिन) एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 28 जनवरी, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *🌹इस दिन तिल से स्नान-होम करे, तिल का उबटन लगाये, तिल मिलाया हुआ जल पीये, तिल का दान करे और तिल को भोजन के काम में ले ।’* *🌹इस प्रकार छ: कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षटतिला’ कहलाती है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है ।* *🌹युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा: भगवन् ! माघ मास के कृष्णपक्ष में कौन सी एकादशी होती है? उसके लिए कैसी विधि है तथा उसका फल क्या है ? कृपा करके ये सब बातें हमें बताइये ।* *🌹श्रीभगवान बोले: नृपश्रेष्ठ ! माघ (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार पौष) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी ‘षटतिला’ के नाम से विख्यात है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है । मुनिश्रेष्ठ पुलस्त्य ने इसकी जो पापहारिणी कथा दाल्भ्य से कही थी, उसे सुनो ।* *🌹दाल्भ्य ने पूछा: ब्रह्मन्! मृत्युलोक में आये हुए प्राणी प्राय: पापकर्म करते रहते हैं । उन्हें नरक में न जाना पड़े इसके लिए कौन सा उपाय है? बताने की कृपा करें ।* *🌹पुलस्त्यजी बोले: महाभाग ! माघ मास आने पर मनुष्य को चाहिए कि वह नहा धोकर पवित्र हो इन्द्रियसंयम रखते हुए काम, क्रोध, अहंकार ,लोभ और चुगली आदि बुराइयों को त्याग दे । देवाधिदेव भगवान का स्मरण करके जल से पैर धोकर भूमि पर पड़े हुए गोबर का संग्रह करे । उसमें तिल और कपास मिलाकर एक सौ आठ पिंडिकाएँ बनाये । फिर माघ में जब आर्द्रा या मूल नक्षत्र आये, तब कृष्णपक्ष की एकादशी करने के लिए नियम ग्रहण करें । भली भाँति स्नान करके पवित्र हो शुद्ध भाव से देवाधिदेव श्रीविष्णु की पूजा करें । कोई भूल हो जाने पर श्रीकृष्ण का नामोच्चारण करें । रात को जागरण और होम करें । चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेघ आदि सामग्री से शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले देवदेवेश्वर श्रीहरि की पूजा करें । तत्पश्चात् भगवान का स्मरण करके बारंबार श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़े, नारियल अथवा बिजौरे के फल से भगवान को विधिपूर्वक पूजकर अर्ध्य दें । अन्य सब सामग्रियों के अभाव में सौ सुपारियों के द्वारा भी पूजन और अर्ध्यदान किया जा सकता है । अर्ध्य का मंत्र इस प्रकार है:* *कृष्ण कृष्ण कृपालुस्त्वमगतीनां गतिर्भव ।* *संसारार्णवमग्नानां प्रसीद पुरुषोत्तम ॥* *नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन ।* *सुब्रह्मण्य नमस्तेSस्तु महापुरुष पूर्वज ॥* *गृहाणार्ध्यं मया दत्तं लक्ष्म्या सह जगत्पते ।* *🌹‘सच्चिदानन्दस्वरुप श्रीकृष्ण ! आप बड़े दयालु हैं । हम आश्रयहीन जीवों के आप आश्रयदाता होइये । हम संसार समुद्र में डूब रहे हैं, आप हम पर प्रसन्न होइये । कमलनयन ! विश्वभावन ! सुब्रह्मण्य ! महापुरुष ! सबके पूर्वज ! आपको नमस्कार है ! जगत्पते ! मेरा दिया हुआ अर्ध्य आप लक्ष्मीजी के साथ स्वीकार करें ।’* *🌹तत्पश्चात् ब्राह्मण की पूजा करें । उसे जल का घड़ा, छाता, जूता और वस्त्र दान करें । दान करते समय ऐसा कहें : ‘इस दान के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण मुझ पर प्रसन्न हों ।’ अपनी शक्ति के अनुसार श्रेष्ठ ब्राह्मण को काली गौ का दान करें । द्विजश्रेष्ठ ! विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह तिल से भरा हुआ पात्र भी दान करे । उन तिलों के बोने पर उनसे जितनी शाखाएँ पैदा हो सकती हैं, उतने हजार वर्षों तक वह स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होता है । तिल से स्नान होम करे, तिल का उबटन लगाये, तिल मिलाया हुआ जल पीये, तिल का दान करे और तिल को भोजन के काम में ले ।’* *🌹इस प्रकार हे नृपश्रेष्ठ ! छ: कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षटतिला’ कहलाती है, जो सब पापों का नाश करनेवाली है ।* *🌹व्रत खोलने की विधि : द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए । ‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹

+3 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 1 शेयर

+8 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 2 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Anup Kumar Sinha Jan 27, 2022

+66 प्रतिक्रिया 22 कॉमेंट्स • 34 शेयर

+2 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB