Nayanaben Patel
Nayanaben Patel Apr 5, 2020

🌹Jay mata rani ki jay 🌹🙏 💐Jay Bhart vasi.. aaj aap log ne... sabit kar diya ke ham sab... aek sath... he... jay.. hind... 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🌹matarani aap sab કી raxa kare... aesi maa.. ke.. charno Me prathna.. 🥀🥀🥀🙏🙏🙏 🕉️🌼🕉️🌼🕉️🌼🕉️🌼🕉️🌼🕉️

🌹Jay mata rani ki jay 🌹🙏

💐Jay Bhart vasi.. aaj aap log ne... sabit kar diya ke ham sab... aek sath... he... jay.. hind... 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🌹matarani aap sab કી raxa kare... aesi maa.. ke.. charno 
Me prathna.. 🥀🥀🥀🙏🙏🙏

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🚩 *श्री गणेशाय नम:🚩* *🕉🌞गीताज्ञान🌞🕉* *जितात्मनः प्रशान्तस्य* *परमात्मा समाहितः।* *शीतोष्णसुखदुःखेषु* *तथा मानापमानयोः॥६-७॥* *👉सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख और मान-अपमान में जिसने स्वयं को जीता हुआ है, ऐसा पुरुष परमात्मा में सम्यक्‌ प्रकार से स्थित है॥7॥* 📜 *दैनिक-पंचांग* 📜 ☀ *11 - May - 2020* ☀ *पंचांग-श्रीमाधोपुर* 🔅 तिथि चतुर्थी 06:37:11 🔅 नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 28:10:32 🔅 करण : बालव 06:37:11 कौलव 18:10:10 🔅 पक्ष कृष्ण 🔅 योग साघ्य 26:40:22 🔅 वार सोमवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 05:41:03 🔅 चन्द्रोदय 23:19:59 🔅 चन्द्र राशि धनु 🔅 सूर्यास्त 19:07:11 🔅 चन्द्रास्त 09:00:00 🔅 ऋतु ग्रीष्म ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1942 शार्वरी 🔅 कलि सम्वत 5122 🔅 दिन काल 13:26:08 🔅 विक्रम सम्वत 2077 🔅 मास अमांत वैशाख 🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ ☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय 🔅 अभिजित 11:57:14 - 12:50:59 ☀ अशुभ समय 🔅 दुष्टमुहूर्त : 12:50:59 - 13:44:43 15:32:12 - 16:25:57 🔅 कंटक 08:22:16 - 09:16:01 🔅 यमघण्ट 11:57:14 - 12:50:59 🔅 राहु काल 07:21:49 - 09:02:35 🔅 कुलिक 15:32:12 - 16:25:57 🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:09:45 - 11:03:30 🔅 यमगण्ड 10:43:21 - 12:24:06 🔅 गुलिक काल 14:04:52 - 15:45:38 ☀ दिशा शूल 🔅 दिशा शूल पूर्व ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल 🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद ☀ चन्द्रबल 🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन 📜 *चौघडिया-मुहूर्त* 📜 🔅अमृत 05:41:03 - 07:21:49 🔅काल 07:21:49 - 09:02:35 🔅शुभ 09:02:35 - 10:43:21 🔅रोग 10:43:21 - 12:24:06 🔅उद्वेग 12:24:06 - 14:04:52 🔅चल 14:04:52 - 15:45:38 🔅लाभ 15:45:38 - 17:26:24 🔅अमृत 17:26:24 - 19:07:11 🔅चल 19:07:11 - 20:26:20 🔅रोग 20:26:20 - 21:45:29 🔅काल 21:45:29 - 23:04:39 🔅लाभ 23:04:39 - 24:23:48 🔅उद्वेग 24:23:48 - 25:42:57 🔅शुभ 25:42:57 - 27:02:07 🔅अमृत 27:02:07 - 28:21:16 🔅चल 28:21:16 - 29:40:26 *🕉🌞लग्न-तालिका🌞🕉* सूर्योदय का समय: 05:41:03 सूर्योदय के समय लग्न मेष चर 25°43′13″ 🔅 मेष चर शुरू: 04:18 AM समाप्त: 05:56 AM 🔅 वृषभ स्थिर शुरू: 05:56 AM समाप्त: 07:52 AM 🔅 मिथुन द्विस्वाभाव शुरू: 07:52 AM समाप्त: 10:07 AM 🔅 कर्क चर शुरू: 10:07 AM समाप्त: 12:26 PM 🔅 सिंह स्थिर शुरू: 12:26 PM समाप्त: 02:43 PM 🔅 कन्या द्विस्वाभाव शुरू: 02:43 PM समाप्त: 04:58 PM 🔅 तुला चर शुरू: 04:58 PM समाप्त: 07:17 PM 🔅 वृश्चिक स्थिर शुरू: 07:17 PM समाप्त: 09:35 PM 🔅 धनु द्विस्वाभाव शुरू: 09:35 PM समाप्त: 11:40 PM 🔅 मकर चर शुरू: 11:40 PM समाप्त: अगले दिन 01:24 AM 🔅 कुम्भ स्थिर शुरू: अगले दिन 01:24 AM समाप्त: अगले दिन 02:52 AM 🔅 मीन द्विस्वाभाव शुरू: अगले दिन 02:52 AM समाप्त: अगले दिन 04:18 AM 1⃣1⃣🌷0⃣5⃣🌷2⃣0⃣ *🕉🌞जयश्रीराम🌞🕉* *ज्योतिषशास्त्री:-सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास* *निवास:-श्री सीताराम बाबा बावड़ी आश्रम के पास वार्ड नं 8 श्रीमाधोपुर ☎9461044090* 🍏🌸🍏🌸🍏🌸🍏🌸

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Neha Sharma, Haryana May 10, 2020

*माफ़ करना🙏पोस्ट बड़ी है मगर आध्यात्मिकता, राष्ट्रीयता, आरोग्यता, ऐतिहासिकता, सभ्यता और संस्कृति का सार समेटे हुए 'All in One' अद्भुत प्रस्तुति*...*कमी जान पड़े तो काॅमैंट कर उचित मार्गदर्शन करने का कष्ट अवश्य करें... धन्यवाद।✍️✍️✍️ 🙏🦚🌹*जय श्री राधेकृष्णा*🌹🦚🙏* *शख्शियत अच्छी होगी तभी दुश्मन बनेंगे* *वरना बुरे की तरफ देखता ही कौन है* *पत्थर भी उसी पेड़ पर फेंके जाते है* *जो फलों से लदा होता है.* *🙏🌤🌹*शुभ प्रभात नमन*🌹🌤🙏* *।।आप सभी भाई-बहनों का दिन शुभ एवं मंगलमय हो।।* *मातृ दिवस पर विशेष!!!!! * सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी॥ *तनय मातु पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा॥ *भावार्थ:-हे माता! सुनो, वही पुत्र बड़भागी है, जो पिता-माता के वचनों का अनुरागी (पालन करने वाला) है। (आज्ञा पालन द्वारा) माता-पिता को संतुष्ट करने वाला पुत्र, हे जननी! सारे संसार में दुर्लभ है॥ *आज मातृ दिवस है, एक ऐसा दिन है, आज के दिन हमें संसार की समस्त माताओं का सम्मान और सत्कार करना चाहियें, वैसे माँ किसी के सम्मान की मोहताज नहीं होती, माँ शब्द ही सम्मान के परिपूर्ण होता है, मातृ दिवस मनाने का उद्देश्य पुत्र के उत्थान में उनकी महान भूमिका को महसूस करना है। *श्रीमद् भागवत गीता में कहा गया है कि माँ की सेवा से मिला आशीर्वाद सात जन्म के पापों को नष्ट करता है, यही माँ शब्द की महिमा है, असल में कहा जाए तो माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है, एक माँ आधे संस्कार तो बच्चे को अपने गर्भ मैं ही दे देती है यही माँ शब्द की शक्ति को दशार्ता है, वह माँ ही होती है जो प्रसव की पीडा सहकर अपने शिशु को जन्म देती है। *जन्म देने के बाद भी मॉं के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान होती है, इसलिए माँ को सनातन धर्म में भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है, ‘माँ’ शब्द से समस्त संसार का बोध होता है, जिसके उच्चारण मात्र से ही हर दुख दर्द का अंत हो जाता है, ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। *गीता में कहा गया है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है, कहा जाये तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है, क्योंकि माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है, जिस घर में माँ का सम्मान नहीं किया जाता है वो घर नरक से भी बदतर होता है। *भगवान श्रीरामजी माँ शब्द को स्वर्ग से बढकर मानते थे, क्योंकि संसार में माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ पाएगा, संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं है, संसार में माँ के समान कोई सहारा नहीं है, संसार में माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है, एक माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। *माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती, इसलिये एक माँ ही अपनी संतान की सबसे बडी रक्षक है, दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग मिलता है तो वो माँ के चरणों में मिलता है, जिस घर में माँ का अनादर किया जाता है, वहाँ कभी देवता वास नहीं करते। *एक माँ ही होती है जो बच्चे कि हर गलती को माफ कर गले से लगा लेती है, यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी, स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे, जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की तभी से सृष्टि की शुरूआत हुयीं। *बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार ये सब ही तो हर ‘माँ’ की मूल पहचान है, दुनियाँ की हर नारी में मातृत्व वास करता है, बेशक उसने संतान को जन्म दिया हो या न दिया हो, नारी इस संसार और प्रकृति की जननी है। *नारी के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की मूल पहचान माँ होती है, अगर माँ न हो तो संतान भी नहीं होगी और न ही सृष्टि आगे बढ पाएगी, इस संसार में जितने भी पुत्रों की मां हैं, वह अत्यंत सरल रूप में हैं, कहने का मतलब कि मां एकदम से सहज रूप में होती हैं, वे अपनी संतानों पर शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं। *माँ अपनी समस्त खुशियां अपनी संतान के लिए त्याग देती हैं, क्योंकि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पुत्री कुपुत्री हो सकती है, लेकिन माता कुमाता कभी नहीं हो सकती, एक संतान माँ को घर से निकाल सकती है लेकिन माँ हमेशा अपनी संतान को आश्रय देती है, एक माँ ही है जो अपनी संतान का पेट भरने के लिए खुद भूखी सो जाती है और उसका हर दुख दर्द खुद सहन करती है। *लेकिन आज के समय में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने मात-पिता को बोझ समझते हैं, और उन्हें वृध्दाआश्रम में रहने को मजबूर करते हैं, ऐसे लोगों को आज के दिन अपनी गलतियों का पश्चाताप करते हुयें अपने माता-पिताओं को जो वृध्द आश्रम में रह रहे हैं उनको घर लाने के लिए अपना कदम बढाना चाहियें, क्योंकि माता-पिता से बढकर दुनिया में कोई नहीं होता। *माता के बारे में कहा जायें तो जिस घर में माँ नहीं होती या माँ का सम्मान नहीं किया जाता वहाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का वास नहीं होता, हम नदियों को, अपनी धरती को, गाय को, गीता को, गायत्री को माता का दर्जा दे सकते हैं, तो अपनी जननी से वो हक क्यों छीन रहे हैं, और उन्हें वृध्दाआश्रम भेजने को मजबूर कर रहे है, यह सोचने वाली बात है। *माता के सम्मान का यह एक दिन नहीं होता, माता का सम्मान हमें 365 दिन करना चाहियें, लेकिन क्यों न हम इस मातृ दिवस से अपनी गलतियों का पश्चाताप कर उनसे माफी मांगें, और माता की आज्ञा का पालन करने और अपने दुराचरण से माता को कष्ट न देने का संकल्प लेकर मातृ दिवस को सार्थक बनायें, आज मातृ दिवस के पावन दिवस की पावन सुप्रभात् आप सभी भाई-बहनों के लिये मंगलमय् हो।जय माँ 🙏 🌷❤️मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं❤️🌷 *Happy Mother's Day ...!!!! *दुनिया में भगवान है या नहीं इस प्रश्न पर हमेशा से सवाल उठता रहा है और आगे भी उठेगा ... *पर दुनिया में ' माँ ' है , जो किसी भी भगवान से ऊपर है...!!!! *अपने माँ-बाप को प्यार दे , सेवा करें , उसके बाद किसी भगवान को खुश नहीं करना पड़ेगा !!!! *तेरे ही आंचल में निकला बचपन, *तुझ से ही तो जुड़ी हर धड़कन, *कहने को तो मां सब कहते *पर मेरे लिए तो है तु भगवान! " Love You Maa❤️ ❤️चीनी से भी स्वीट है मेरी मां , 🌷फूलों से भी सुंदर है मेरी मां ... ❤️आज पढ़ा कि मदर्स डे मां का दिन है , 🌷कौन बताएगा कि वो कौन सा दिन है, ❤️जो मां के बिन है ... ❤️रुके तो चांद जैसी, चले तो हवाओं जैसी , 🌷मां ही है इस दुनिया में भगवान जैसी, 🌹🙏🏼❤️🌷🙏🏼❤️🌷❤️🙏🏼🌷🙏🏼❤️ 🥀उसके रहते जीवन में कोई गम नहीं होता ❤️*दुनिया साथ दे ना दे पर; 🥀मां का प्यार कभी कम नहीं होता. 🌹❤️🙏🏼🌷❤️🌹🌷🙏🏼❤️🌹 🌷वह जमी मेरा वही आसमान है ; ❤️वह खुदा मेरा वही भगवान है; 🌷क्यों मैं जाऊं उसे कहीं छोड़कर ❤️मां के कदमों में सारा जहान है, 🌷रूह के रिश्तो की यह गहराइयां तो देखिए, ,❤️चोट लगती है हमें और चिल्लाती है मां, 🌷हम खुशियों में मां को भले ही भूल जाएं, ❤️जब मुसीबत आ जाए तो याद आती है मां, ❤️🌷❤️🌹❤️🌷❤️🥀❤️🌹❤️🌷 🌷*तेरे ही आंचल में निकला बचपन, ❤️तुझसे ही तो जुड़ी हर धड़कन, 🌷कहने को तो मां सब कहते पर, 🌹मेरे लिए तू है तू भगवान, ❤️रुके तो चांद जैसी है, 🌹चले तो हवाओं जैसी है, 🌷वह मा ही है, ❤️जो धूप में भी छांव जैसी है! ❤️❤️हैप्पी मदर्स डे❤️❤️ ❤️I love you मां🙏🏼❤️ ************************************************* 🙏😊 जिंदगी में रोने की वज़ह चाहे जो भी हो..🌹 😊 मुस्कुराने की वज़ह सिर्फ़ आप है..🌹. 💞 मेरे प्यारे राधा-माधव ..... 🌹*जय श्री राधेकृष्णा*🌹🙏 🙏 तू ही तू ...🌹 🙏 तू ही तू ...🌹 🙏 तू ही तू.....🌹 *जय श्री राधेकृष्णा*🌹🙏 ************************************************* *सनातन धर्म की जय"🙏🙏 *हिंदू ही सनातनी है..... *दधीचि ऋषि - हड्डियों का दान शस्त्र की महत्ता...!!* *दधीचि ऋषि ने देश के हित में अपनी हड्डियों का दान कर दिया था !* *उनकी हड्डियों से तीन धनुष बने- १. गांडीव, २. पिनाक और ३. सारंग !* *जिसमे से गांडीव अर्जुन को मिला था जिसके बल पर अर्जुन ने महाभारत का युद्ध जीता !* *सारंग नाम से भगवान विष्णु का प्रलयंकारी धनुष है ।* *और, पिनाक भगवान शिव जी के पास था जिसे तपस्या के माध्यम से खुश रावण ने शिव जी से मांग लिया था !* *परन्तु... वह उसका भार लम्बे समय तक नहीं उठा पाने के कारण बीच रास्ते में जनकपुरी में छोड़ आया था !* *इसी पिनाक की नित्य सेवा सीताजी किया करती थी ! पिनाक का भंजन करके ही भगवान राम ने सीता जी का वरण किया था !* *ब्रह्मर्षि दधिची की हड्डियों से ही "एकघ्नी नामक वज्र" भी बना था ... जो भगवान इन्द्र को प्राप्त हुआ था !* *इस एकघ्नी वज्र को इन्द्र ने कर्ण की तपस्या से खुश होकर उन्होंने कर्ण को दे दिया था! इसी एकघ्नी से महाभारत के युद्ध में भीम का महाप्रतापी पुत्र घतोत्कक्ष कर्ण के हाथों मारा गया था ! और भी कई अश्त्र-शस्त्रों का निर्माण हुआ था उनकी हड्डियों से !* *लेकिन ......... दधिची के इस अस्थि-दान का उद्देश्य क्या था ??????* *क्या उनका सन्देश यही था कि..... उनकी आने वाली पीढ़ी नपुंसकों और कायरों की भांति मुंह छुपा कर घर में बैठ जाए और शत्रु की खुशामद करे....??? नहीं..* *कोई ऐसा काल नहीं है जब मनुष्य शस्त्रों से दूर रहा हो..* *हिन्दुओं के धर्मग्रन्थ से ले कर ऋषि-मुनियों तक का एक दम स्पष्ट सन्देश और आह्वान रहा है कि....* *''हे सनातनी वीरो. शास्त्र केसाथ शस्त्र उठाओ और अन्याय तथा अत्याचार के विरुद्ध युद्ध करो *राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए अंततः बस एक ही मार्ग है !* *सशक्त बनो.* *⚔सशस्त्र बनो🏹* *_जनजागृति हेतु लेख का प्रसारण अवश्य करें ...🚩जगतजननी माँ जगदम्बे की जय,,_ *आपने महाभारत या रामायण में कहीं भी शहीद शब्द सुना है ?? यह शहीद शब्द इस्लामिक हैं, और इस्लाम में शहीद उन्हें कहा जाता है जो, इस्लामिक जिहाद करते हुए मारा जाता है। किन्तु अज्ञानवश हम लोग भी हमारी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त करने वाले जवानों को भी शहीद कहते हैं। जो धर्म राष्ट्र और वीर जवानों का भी अपमान है। इस प्रथा या शब्द प्रयोग को हमें बदलना होगा। अब कोई जवान शहीद हुआ है ऐसा न कहते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ है ऐसा कहें 🙏🏻 *मैं खुद जबसे इस शहीद शब्द का अर्थ समझा तब से मैं इस शब्द का प्रयोग करना छोड़ दिया है। *जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम्*🇮🇳🙏 ************************************************* *पैरों में सूजन होने के कारण*....... *अधिक वजन के कारण पैरों में सूजन होना*अधिक वजन होने के कारण अनेक प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं. अनेक बार अधिक वजन होने के कारण पैरों में भी सूजन आने लगती हैं. *ज्यादा देर तक बैठने या खड़े होने के कारण पैरों में सूजन होना* अनेक लोगों को अधिक देर तक बैठ के या खड़े होकर काम करना पड़ता है जिसके कारण उनके पैरों में सूजन आने लगती है. *बढ़ती उम्र होने के कारण पैरों में सूजन होना* अनेक बार बढ़ती उम्र के कारण लोगों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार पैरों में सूजन की समस्या आने लगती है. *सही से ना खाने-पीने के कारण पैरों में सूजन होना-*सही से खान-पान ना करने के कारण मानव शरीर में उचित पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते जिसके कारण अनेक समस्याएं होने लगती है. कभी-कभी पोषक तत्वों की कमी होने के कारण पैरों में सूजन भी आने लगती है. *पैरो की सूजन कम करने के उपाय* 👌पैरों की सिंकाई करें पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌पैरों की सूजन दूर करने के लिए पैरों की सिकाई करनी जरुरी होती है. इसके प्रयोग के लिए दो अलग-अलग टब में गर्म तथा ठंडा पानी रखें. अब अपने पैरों को करीब चार मिनट तक गर्म पानी में डालें. इसके बाद एक मिनट के लिए अपने पैरों को ठंडे पानी में डालें. इस विधि का प्रयोग करीब 20 बार करें. इससे पैरों की सूजन कम होने लगेगी. 👌पैरों की मसाज करें पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌अत्यधिक लोगों को पैर में सूजन की शिकायत रहती है. इस समस्या का अधिक असर जाड़ो के दिनों में देखने को मिलता है. इस समस्या से राहत पाने के लिए जैतून का या सरसों का तेल हल्का गर्म कर लें. तेल हाथों पर लेकर रब करें और 5 मिनट तक ऊपर की ओर पैरों की मसाज करें. इससे पैरों की सूजन कम होने लगती है. 👌अदरक के फायदे पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌अदरक भी पैरों की सूजन दूर करने में सहायक होता है. अपने पैरों की सूजन को दूर करने के लिए अदरक को छिल कर खाये या अदरक की चाय भी पी सकते हैं. 👌धनिए के बीज का उपयोग पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌धनिए के बीज पैरों की सूजन को दूर करने में बहुत फायदेमंद है. एक कप पानी में 2 से 3 चम्मच धनिए के डालें. इसको तब तक उबालें जब तक कप का पानी आधा ना हो जाए. जब यह काढ़ा तैयार हो जाए तो इसे दिन में दो बार पीए. इस काढ़े का सेवन जब तक पैरों की सूजन कम ना हो जाए करते रहे. 👌नींबू पानी है फायदेमंद पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌निम्बू पानी भी पैरों की सूजन दूर करने का एक अच्छा उपाय है. एक कप हल्के गर्म पानी में 2 टेबलस्पून लेमन जूस मिक्स करें और इसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं. अब इस निम्बू पानी का रोजाना सेवन करें. इससे पैरों की सूजन को आसानी से दूर किया जा सकता है. 👌एक्सएरसाइज भी है जरुरी पैरो की सूजन कम करने के लिए 👌पैरों की सूजन से राहत पाने के लिए प्रतिदिन एक्सरसाइज करनी चाहिए. एक्सरसाइज में आप स्विमिंग भी कर सकते हैं. सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 मिनट तक जॉगिंग या वॉकिंग करें. पैरों को स्ट्रेच करने वाली एक्सरसाइज करें और अपने रोजमर्रा के शूड्यूल में योगा करें. इससे पैरों की सूजन को आसानी से कम किया जा सकता है.👌 *टमाटर खाओ, डिप्रेशन से छुट्टी पाओ.!* * टमाटर हर सब्जी को जायकेदार बनाता है, यह तो सब जानते हैं लेकिन एक नए अध्ययन में इसके एक अन्य गुण का पता चला है कि यह डिप्रेशन से दूर रखने में भी सहायक है। * अनुसंधानकर्ताओं ने इसके लिए 70 अथवा उससे अधिक उम्र के करीब 1000 पुरुष और महिलाओं के भोजन की आदत और उनके मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि जो लोग एक हफ्ते में दो से छह बार टमाटर खाते हैं उन्हें उन लोगों की तुलना में डिप्रेशन से पीडि़त होने का खतरा 46 प्रतिशत कम होता है जो हफ्ते में केवल एक बार टमाटर खाते हैं अथवा नहीं खाते। * चीन और जापान के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि अन्य फलों और सब्जियों के सेवन से यह लाभ नहीं मिलता। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में गोभी, गाजर, प्याज और कद्दू बहुत कम लाभदायक हैं या बिल्कुल भी फायदेमंद नहीं हैं। टमाटर में एंटीआक्सीडेंट रसायन काफी होता है जो कुछ बीमारियों से बचाने में मददगार होता है। ************************************************* 🌞 🕉~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🕉🌞 *।। श्री हरि : ।।* ⛅ *दिनांक - 10 मई 2020* ⛅ *दिन - रविवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - ग्रीष्म* ⛅ *मास - ज्येष्ठ* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - सुबह 08:04 तक तृतीया* ⛅ *नक्षत्र - रात्रि 04:13 तक मूल* ⛅ *योग - सुबह 06:43 से सिद्ध* ⛅ *राहुकाल - शाम 05:17 से 06:55* ⛅ *सूर्योदय - 06:04* ⛅ *सूर्यास्त - 19:06* ⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय 10:26)* 💥 *विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌷 *गर्मी की बीमारियों की जड़ें काटनेवाला है पेठा* 🌷 🍈 *पका हुआ पेठा त्रिदोषशामक, विशेषत: पित्तशामक है, गर्मी से जो बीमारियाँ होती हैं यह उन सबकी जड़ें काटता है।* 🚶🏻 *पेठा थकान तो मिटाता है, साथ में नींद भी अच्छी लाता है, पका पेठा अमृत के समान है, पेठे के बीज भी बादाम के समान गुणकारी हैं ।* 🌷 *परेशानियां दूर करने के लिए* 🌷 🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार शिवजी की इच्छा से ही इस संपूर्ण सृष्टि की रचना ब्रह्माजी ने की है और इसका पालन भगवान विष्णु कर रहे हैं, इसलिए शिवजी की पूजा से बड़ी-बड़ी परेशानियां भी दूर हो सकती हैं, सोमवार शिवजी की पूजा के लिए श्रेष्ठ दिन माना जाता है, यहां जानिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शिव पूजा के 10 उपाय, इनमें से कोई 1 भी हर सोमवार को करेंगे तो शिवजी की कृपा से आपकी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं...* 1⃣ *अगर किसी व्यक्ति की शादी में बाधाएं आ रही हैं तो शिवलिंग पर केसर मिला कर दूध चढ़ाएं, माता पार्वती की भी पूजा करें।* 2⃣ *मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं, इस दौरान ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें, ये उपाय सोमवार से शुरू करें और इसके बाद रोज करें, इससे बुरा समय दूर हो सकता है।* 3⃣ *21 बिल्व पत्रों पर चंदन से ऊँ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, इससे शिवजी की कृपा मिलती है।* 4⃣ *शिवजी के वाहन नंदी यानी बैल को हरा चारा खिलाएं, इससे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और परेशानियाँ खत्म होती हैं।* 5⃣ *अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी, साथ ही पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।* 6⃣ *तांबे के लोटे में पानी लेकर काले तिल मिलाएं और शिवलिंग पर चढ़ाएं, ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें, इससे शनि के दोष दूर होते हैं।* 7⃣ *घर में पारद शिवलिंग लेकर आए और रोज इस शिवलिंग की पूजा करें, इससे आपकी आमदनी बढ़ाने के योग बन सकते हैं।* 8⃣ *आटे से 11 शिवलिंग बनाएं। 11 बार इनका जलाभिषेक करें, इस उपाय से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।* 9⃣ *शिवलिंग पर शुद्ध घी चढ़ाएं, फिर जल चढ़ाएं, इससे संतान संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं।* 1⃣0⃣ *भगवान शिव का अभिषेक करें। ऊँ नमः शिवाय मंत्र जप करें, शाम को शिव मंदिर में 11 घी के दीपक जलाएं। 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻 ************************************************ *कोरोना को lightly लेते हुए , Lockdown में बाहर निकलने वालों का हश्र... *एक दिन................... *अचानक बुख़ार आता है! *गले में दर्द होता है! *साँस लेने में कष्ट होता है! *Covid टेस्ट की जाती है! *3 दिन तनाव में बीतते हैं... *अब टेस्ट +ve आने पर-- *रिपोर्ट नगर निगम जाती है🙇 *रिपोर्ट से हॉस्पिटल तय होता है🤦‍♂️ *फिर एम्बुलेंस कॉलोनी में आती है💁‍♂️ *कॉलोनीवासी खिड़की से झाँक कर आपको देखते हैं🤦‍♀️ *कुछ एक की संवेदना आप के साथ है😌 *कुछ मन ही मन हँस रहे होते हैं💁‍♀️ *एम्बुलेंस वाले उपयोग के कपड़े रखने का कहते हैं...🙇 *बेचारे घरवाले आपको जी भर कर देखते हैं😓 *आपकी आँखों से आँसू बोल रहे होते हैं...😢 तभी... *"चलो जल्दी बैठो" आवाज़ दी जाती है, *एम्बुलेंस का दरवाजा बन्द... *सायरन बजाते रवानगी... *फिर कॉलोनी सील कर दी जाती है...🤷‍♂ *14 दिन पेट के बल सोने को कहा जाता है... *दो वक्त का जीवन जीने योग्य खाना मिलता है...🙇 *Tv, mobile सब अदृश्य हो जाते हैं... *सामने की दीवार पर अतीत, और भविष्य के दृश्य दिखने लगते *हैं... *अब *आप ठीक हो गए... तो ठीक... *वो भी जब 3 टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आ जाएँ... *तो घर वापसी... *लेकिन *इलाज के दौरान यदि आपके साथ कोई अनहोनी हो गई😢 तो... आपके शरीर को प्लास्टिक में रैप करके सीधे शवदाहगृह... *शायद अपनों को अंतिमदर्शन भी नहीं...😱 *कोई अंत्येष्टि क्रिया भी नहीं...🤷‍♂ *सिर्फ *परिजनों को एक डेथ सर्टिफिकेट💁‍♂️ *और....खेल खत्म🙆‍♂️🤷‍♂😒 *बेचारा चला गया... अच्छा था *इसीलिए, *बेवजह बाहर मत निकलिए... *घर में सुरक्षित रहिए... *'बाह्यजगत का मोह' और 'हर बात को हल्के में लेने' की आदतें त्यागिए... *जीवन अनमोल है....🙏🏻🙏🏻 ************************************************* *एक औरत, रोटी बनाते बनाते "ॐ भगवते वासूदेवाय नम: " का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही....* *एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर झांकी तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था, खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था। दौड़ कर नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। *अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर भगवान को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे कन्हैया क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा, जो मेरे ही बच्चे को *खैर डॉक्टर सा. मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया। चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई। *रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभुसत्ता को चुनौती दे रही थी। *उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..? उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती। *फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था। *उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी। *तभी टीवी पर ध्यान गया तो प्रवचन आ रहा था । प्रभु कहते हैं, "मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।" *उस औरत ने घर के मंदिर में झांक कर देखा, कन्हैया मुस्कुरा रहे थे। *मेरे कान्हा !! *तेरी आँखो में क्या खूब नूर होता है, *तेरी नजरों से कहां कोई दूर होता हैं! *एक बार रख दे कदम जो तेरी चौखट पर, *वो बार-बार आने को मजबूर होता है! *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🏻 *तुलसी के शब्दों में क्या ही सुन्दर चित्रण है...... *'ग्रह गृहीत पुनि वात वस, ता पुनि बीछी मार।* *ताहि पियाइय वारुणी, कहिय कहा उपचार॥* *अर्थात् एक तो बन्दर स्वभावतः चंचल, दूसरे उसे वातरोग (histeria), तीसरे उसे बिच्छू ने डंक मार दिया, चौथे उसे शराब भी पिला दी गयी। अब विचार करो, उस बन्दर की क्या दशा होगी? यही बात जीवों के विषय में भी है। एक तो अनादिकाल का पापमय जीव, दूसरे कुसंस्कार-जन्य कुप्रवृत्तियाँ, तीसरे कुसंग का बाह्य वातावरण, चौथे बुद्धि का तीनों ही गुणों के वशीभूत होकर नशे में हो जाना; अब इस बेचारे जीव रूपी बन्दर का भगवान् ही भला करे। किन्तु, घबड़ाने की बात नहीं; अभ्यास करते-करते सब ठीक हो जायेगा। एक महान् जंगली शेर भी बिजली के दण्ड ( हण्टर) के इशारे पर नाचता है। देखो, साधक सर्वप्रथम अपनी बुद्धि को ही ठीक करें, क्योंकि गीताकार के सिद्धान्तानुसार, *'बुद्धिनाशात् प्रणश्यति'* अर्थात् बुद्धि के विकृत होने से ही जीव का पतन होता है। हाँ, तो साधक ने अपनी बुद्धि को जब महापुरुष एवं भगवान के ही हाथ बेचा है, तब उसे अपनी बुद्धि को महापुरुष के आदेश से ही सम्बद्ध रखना चाहिये। लोक में भी देखो, एक कूपमण्डूक अत्यन्त मूर्ख ग्रामीण भी अपने मुकदमे में किसी व्युत्पन्न वकील के द्वारा प्रमुख कानूनी विषयों को अपनी बुद्धि में रखकर धुरन्धर वकील की जिरह में भी नहीं उखड़ता। *कुछ लोगों का कहना है कि इसमें क्या रखा है? यह तो अत्यन्त ही साधारण सी बात है। साधक मन-बुद्धि को निरन्तर भगवद्विषय में लगाये रहे तो बहिरंग, अन्तरंग दोनों ही कुसंग न व्याप्त होंगे। किन्तु निरन्तर भगवद्विषय में मन-बुद्धि का लगाव पूर्व में सहसा नहीं हो सकता। वह तो धीरे-धीरे अभ्यास के द्वारा ही होगा। तुलसी के शब्दों में *'कहत सुगम करनी अपार, जाने सोइ जेहि बनि आई।'* यह कुसंग भी कई प्रकार का होता है। एक तो भगवद्विषयों से विपरीत विषयों का पढ़ना, दूसरे सुनना, तीसरे देखना, चौथे सोचना आदि। किन्तु, इन सब में सबसे भयानक कुसंग सोचना ही है, क्योंकि अन्त में पढ़ने, सुनने एवं देखने आदि वाले कुसंग भी यहीं पर आ जाते हैं। फिर यहीं से कार्यवाही आरम्भ हो जाती है। सोचते-सोचते मनोवृत्तियाँ उसी के अनुकूल होती जाती हैं एवं बुद्धि भी मोहित हो जाती है, जिसका दुष्परिणाम यह होता है कि कुछ काल बाद मन पूर्णतया उन विपरीत विषयों में लीन हो जाता है। मुझे इस सम्बन्ध में गीता की अधोनिर्दिष्ट अर्धाली अत्यन्त ही प्रिय है- *ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।* (गीता 2-62) *अर्थात् जिस विषय का हम बार-बार चिन्तन करते हैं, उसी में हमारी आसक्ति हो जाती है। *किन्तु ध्यान में रखने की बात यह है कि चिन्तन तो पश्चात् होता है, पूर्व में तो भगवद्विपरीत विषयों को सुनना, पढ़ना आदि है । अतएव यदि पूर्व कारण से बचा जाय तो अत्यन्त ही सरलतापूर्वक कुसंग से निवृत्ति हो सकती है। यदि आग को लकड़ी न मिले तो अग्नि कैसे बढ़ेगी? फिर यदि साथ ही उस अन्तरंग कुसंग रूपी आग में श्रद्धायुक्त सत्संग रूपी जल भी छोड़ा जाय, तब तो आग धीरे-धीरे स्वयं ही बुझ जायगी। देखो, प्रायः हम लोग यह सब जानते हुए भी बहादुरी दिखाने का स्वांग रचते हैं, अर्थात् कुसंग की प्रारम्भिक अवस्था में ही सावधान न होकर यह कह देते हैं 'अरे, कुसंग हमारा क्या कर लेगा, हम सब कुछ समझते हैं ।' अरे भाई! विचार करो कि यद्यपि डॉक्टर यह समझता है कि अमुक विष कारक है, किन्तु यदि परिहास में भी पी लेता है तो उसका वह जानना थोड़े ही काम देगा, विष तो अपना मारक गुण दिखायेगा ही *अतएव साधारण कुसंग को भी साधारण न समझना चाहिये, वरन् इसे अत्यन्त महान् शत्रु समझकर तब तक इसे दूर रखना चाहिये, जब तक शुभ मुहूर्त न आ जाय । तुलसी के शब्दों में- *अब मैं तोहि जान्यो संसार।* *बाँधि न सकइ मोहि हरि के बल, प्रकट कपट आगार।* *सहित सहाय तहाँ बसु शठ जेहि, हृदय न नन्द कुमार॥* *अर्थात् हे संसार ! अब मैं तुझे भली भाँति समझ गया। अब तू मुझे किसी प्रकार नहीं बाँध सकता, क्योंकि मेरे पास श्रीकृष्ण का बल है। अरी माया! अब तू अपने दलबल को लेकर वहाँ जाकर अपना डेरा जमा, जिसके हृदय में नंदकुमार का वास न हो। यहाँ अब तेरी कुछ भी दाल न गल सकेगी। तात्पर्य यह है कि भगवत्प्राप्ति के पूर्व किसी भी जीव को यह दावा करने का अधिकार नहीं है कि कुसंग मेरा कुछ भी नहीं कर सकता। यह तो सिद्ध महापुरुषों के ही क्षेत्र की बात है कि उनके ऊपर कुसंग का प्रभाव नहीं पड़ सकता। *'चन्दन विष व्यापै नहीं, लिपटे रहत भुजंग'*, इस रहीम की उक्ति के अनुसार, सिद्ध महापुरुष रूपी चन्दन के वृक्ष पर ही कुसंग रूपी साँपों के विष का प्रभाव नहीं पड़ता। *जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु महाप्रभु जी। *इस पंक्ति को, एक बार जरूर पढ़े.....* *🌹 भावनाएं 🌹* *काम, क्रोध, लोभ, मोह,* *ईर्ष्या, प्रेम, अहंकार आदि, सभी भावनाएं, एक साथ एक द्वीप पर रहतीे थी;* *एक दिन समुद्र में एक तूफान आया और द्वीप डूबने लगा;* *हर भावना डर ​​गई और अपने अपने बचाव का रास्ता ढूंढने लगी;* *लेकिन प्रेम ने सभी को बचाने के लिए एक नाव बनायी;* *सभी भावनाओं ने प्रेम का आभार जताते हुए; शीघ्रातिशीघ्र नाव में बैठने का प्रयास किया;* *प्रेम ने अपनी मीठी नज़र से सभी को देखा कोई छूट न जाये;* *सभी भावनाएँ तो नाव मे सवार थी लेकिन अहंकार कहीं नज़र नहीं आया;* *प्रेम ने खोजा तो पाया कि, अहंकार नीचे ही था; ...* *नीचे जाकर प्रेम ने अहंकार को ऊपर लाने की बहुत कोशिश की,लेकिन अहंकार नहीं माना;* *ऊपर सभी भावनाएं प्रेम को पुकार रहीं थी;,"जल्दी आओ प्रेम तूफान तेज़ हो रहा है;,यह द्वीप तो निश्चय ही डूबेगा और इसके साथ साथ हम सभी की भी यंही जल समाधि बन जाएगी;। प्लीज़ जल्दी करो;"* *"अरे अहंकार को लाने की कोशिश कर रहा हूँ; यदि तूफान तेज़ हो जाय तो तुम सभी निकल लेना; मैं तो अहंकार को लेकर ही निकलूँगा" प्रेम ने नीचे से ही जवाब दिया; और फिर से अहंकार को मनाने की कोशिश करने लगा;* *लेकिन अहंकार कब मानने वाला था यहां तक कि वह अपनी जगह से हिला ही नहीं;* *अब सभी भावनाओं ने एक बार फिर प्रेम को समझाया कि अहंकार को जाने दो क्योंकि वह सदा से जिद्दी रहा है;* *लेकिन प्रेम ने आशा जताई,बोला, "मैं अहंकार को समझाकर राजी कर लूंगा तभी आऊगा;..!!"* *तभी अचानक तूफान तेज हो गया और नाव आगे बढ़ गई;* *अन्य सभी भावनाएं तो जीवित रह गईं;* *लेकिन........* *अन्त में उस अहंकार के कारण प्रेम मर गया;* *अहंकार के चलते हमेशा प्रेम का ही अंत होता है;* *आईये अहंकार का त्याग करते हुए प्रेम को अपने से जुदा न होने दें...!!!* *अरी सखी.... *इन्हें नज़र भर के क्या देखा... *नज़र के हर मोड़ पर एक यही नज़र आने लगे.... 🌴🌹🌴🌷 *जय श्री राधेकृष्णा*🥀🥀🙏🏻

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R.G.P.Bhardwaj May 10, 2020

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anita sharma May 10, 2020

करुणामई मां जगजननी आनंद मां दुर्गे देवी आज मदर्स डे है हे देवी आप की उत्पत्ति राक्षसों का अंत पापियों का नाश अपराधियों का सत्यानाश करने के लिए और मानव कल्याण की रक्षा के लिए हुआ था यह देवी इस भारत भूमि पर रहकर देश की प्रति जो गद्दारी करता है या फिर अपने परिवार के साथ में गद्दारी करते हैं या अपने यार दोस्तों के साथ में गद्दारी करता है या चलते राजगीर पर घात लगाकर उसके साथ में धोखा करते हैं यह वृद्धि व्यवसाय लूट चोरी डकैती करके मानव जाति को परेशान करते हैं ऐसे लोगों का सत्यानाश करना हे देवी जो आपकी भक्ति पूर्वक इस मातृभूमि के लिए परोपकारी और कल्याणकारी कार्य करते हैं ऐसे मानव को शक्ति देना उसको यश देना रूप देना शक्ति देना विजय देना ऐसे लोगों को आश्चर्य सौभाग्य आरोग्य संपत्ति देना और परोपकारी कार्य करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ जो गद्दारी करता है उनका सत्यानाश करना जय मां अंबे आपने जगदेव तो पर संकट आया तो कई प्रकार के राक्षसों का अंत कर दिया जो भारत भूमि पर जो गद्दारी करते हैं ऐसे राक्षसों का अंत करना जय मां🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹

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