Ganesh jangid
Ganesh jangid Sep 15, 2020

https://youtu.be/z0v-__unekQ

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Ganesh jangid Sep 22, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Amit Kumar Sep 20, 2020

आज की कहानी मै पढ़िए की स्त्री घर को स्वर्ग बनाती है, कितना भी दुख की स्थिति क्यों ना हो वो हर स्थिति से निकलना और अपनों को निकालना बखूबी जानती है, पढ़िए सभी की कैसे एक गरीब घर मै ब्याही नवयुवती ने अपने ससुराल की स्थिति को देखते हुए अपना धर्म निभाया और सुंदर से सुंदर बनाया सभी पढ़े और शिक्षा लेे एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये और जमींदार के घर नौकरी में लगते गये। सब मजदूरों को शाम को मजूरी मिलती। जग्गू और उसके लड़के चना और गुड़ लेते थे। चना भून कर गुड़ के साथ खा लेते थे। बस्ती वालों ने जग्गू को बड़े लड़के की शादी कर देने की सलाह दी। उसकी शादी हो गई और कुछ दिन बाद गौना भी आ गया। उस दिन जग्गू की झोंपड़ी के सामने बड़ी बमचक मची। बहुत लोग इकठ्ठा हुये नई बहू देखने को। फिर धीरे धीरे भीड़ छंटी। आदमी काम पर चले गये। औरतें अपने अपने घर। जाते जाते एक बुढ़िया बहू से कहती गई – पास ही घर है। किसी चीज की जरूरत हो तो संकोच मत करना, आ जाना लेने। सबके जाने के बाद बहू ने घूंघट उठा कर अपनी ससुराल को देखा तो उसका कलेजा मुंह को आ गया। जर्जर सी झोंपड़ी, खूंटी पर टंगी कुछ पोटलियां और झोंपड़ी के बाहर बने छ चूल्हे (जग्गू और उसके सभी बच्चे अलग अलग चना भूनते थे)। बहू का मन हुआ कि उठे और सरपट अपने गांव भाग चले। पर अचानक उसे सोच कर धचका लगा – वहां कौन से नूर गड़े हैं। मां है नहीं। भाई भौजाई के राज में नौकरानी जैसी जिंदगी ही तो गुजारनी होगी। यह सोचते हुये वह बुक्का फाड़ रोने लगी। रोते रोते थक कर शान्त हुई। मन में कुछ सोचा। पड़ोसन के घर जा कर पूछा – अम्मां एक झाड़ू मिलेगा? बुढ़िया अम्मा ने झाड़ू, गोबर और मिट्टी दी। साथ में अपनी पोती को भेज दिया। जग्गू और उसके लड़के जब लौटे तो एक ही चूल्हा देख भड़क गये। चिल्लाने लगे कि इसने तो आते ही सत्यानास कर दिया। अपने आदमी का छोड़ बाकी सब का चूल्हा फोड़ दिया। झगड़े की आवाज सुन बहू झोंपड़ी से निकली। बोली – आप लोग हाथ मुंह धो कर बैठिये, मैं खाना निकालती हूं। सब अचकचा गये! हाथ मुंह धो कर बैठे। बहू ने पत्तल पर खाना परोसा – रोटी, साग, चटनी। मुद्दत बाद उन्हें ऐसा खाना मिला था। खा कर अपनी अपनी कथरी ले वे सोने चले गये। सुबह काम पर जाते समय बहू ने उन्हें एक एक रोटी और गुड़ दिया। चलते समय जग्गू से उसने पूछा – बाबूजी, मालिक आप लोगों को चना और गुड़ ही देता है क्या? जग्गू ने बताया कि मिलता तो सभी अन्न है पर वे चना-गुड़ ही लेते हैं। आसान रहता है खाने में। बहू ने समझाया कि सब अलग अलग प्रकार का अनाज लिया करें। देवर ने बताया कि उसका काम लकड़ी चीरना है। बहू ने उसे घर के ईंधन के लिये भी कुछ लकड़ी लाने को कहा। बहू सब की मजूरी के अनाज से एक एक मुठ्ठी अन्न अलग रखती। उससे बनिये की दुकान से बाकी जरूरत की चीजें लाती। जग्गू की गृहस्थी धड़ल्ले से चल पड़ी। एक दिन सभी भाइयों और बाप ने तालाब की मिट्टी से झोंपड़ी के आगे बाड़ बनाया। बहू के गुण गांव में चर्चित होने लगे। जमींदार तक यह बात पंहुची। वह कभी कभी बस्ती में आया करता था। आज वह जग्गू के घर उसकी बहू को आशीर्वाद देने आया। बहू ने पैर छू प्रणाम किया तो जमींदार ने उसे एक हार दिया। हार माथे से लगा बहू ने कहा कि मालिक यह हमारे किस काम आयेगा। इससे अच्छा होता कि मालिक हमें चार लाठी जमीन दिये होते झोंपड़ी के दायें बायें, तो एक कोठरी बन जाती। बहू की चतुराई पर जमींदार हंस पड़ा। बोला – ठीक, जमीन तो जग्गू को मिलेगी ही। यह हार तो तुम्हारा हुआ। तो मेरे प्यारे औरत चाहे घर को स्वर्ग बना दे, चाहे नर्क! मुझे लगता है कि देश, समाज, और आदमी को औरत ही गढ़ती है । कल उत्तर की जांच मै हमे suresh debi जी के उत्तर से प्रेरणा मिली की स्त्री ही वास्तविकता मै संबंधो की नींव रखती है।

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 25 शेयर
Manoj Kumar Aggarwal Sep 22, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
AJAY BARNWAL Sep 22, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

मन्दिर महादेव मारूफ शिवाला कांधला धर्मार्थ ट्रस्ट (रजिस्टर्ड) अंदोसर मंदिर नई बस्ती कांधला द्वारा अध्यक्ष कुमारी शालिनी कौशिक एडवोकेट व महासचिव डॉ शिखा कौशिक ने मन्दिर महादेव मारूफ शिवाला कांधला में 21 और 22 सितंबर को अखंड रामायण के पाठ का आयोजन किया. बार एसोसिएशन कैराना के पूर्व अध्यक्ष बाबू खडक सिंह चौहान एडवोकेट, सुप्रसिध्द मंच संचालक गुलशन खन्ना, कांधला व्यापार मंडल के अध्यक्ष ईश्वर कंसल आदि द्वारा रामायण पाठ किया गया. रामायण पाठ के उपरांत कैराना की शिवम गोयल एंड पार्टी द्वारा सुमधुर भजन संध्या का संचालन किया गया. कार्यक्रम में शरद गोयल, धर्म सिंह, अलका गोयल, पंडित राधेश्याम, अमन मित्तल, विवेक अग्रवाल आदि का अविस्मरणीय योगदान रहा.

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+14 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 38 शेयर

+3 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Ganesh jangid Sep 21, 2020

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Ganesh jangid Sep 21, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB