PRAVEEN KUMAR JAIN
PRAVEEN KUMAR JAIN Aug 18, 2017

पयुर्षण का महत्व ।

#जयजिनेंद्र
पर्युषण क्यों ?
एक अच्छा किसान जैसे वर्षा के पूर्व अपने खेत को बीज बोने लायक बना लेता है,
वैसे ही एक धार्मिक अपने आत्मा के खेत को पर्युषण का बीज बोने लायक बना लेता है |
पर्युषण का त्यौहार तो हजारों, लाखों वर्ष पहले भी आया था और बाद में भी आता रहेगा,
बात है केवल ' जागने ' की |
सूरज घर में आये और व्यक्ति न् जागे तो दुर्भाग्य अपना है |
वह तो अपनी गति से अपने समय पर आता है और चला जाता है |
जागना तो आपको है |
उसके जाने के बाद भी घर में अंधेरा नहीं होने देना |
जिम्मेदारी घर के मालिक की होती है, काम करने वाले की नहीं |
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पर्युषण पर्व नहीं, महापर्व है |
यह सामान्य त्योहारों की तरह आता है,
किन्तु यह आत्मशुद्धि का पर्व है ,
इसलिए महापर्व है |
कुछ पर्व सभी जातियों, धर्मों के द्वारा मनाए जाते है,
पर यह केवल जैनों का एकमात्र विशिष्टतम पर्व है |
दुसरे पर्व शरीर और शरीर-सुख की सामग्री जुटाते हैं,
पर यह भौतिक पर्व नहीं है |
कुछ पर्व तात्कालिक होते है,
पर यह पर्व शाश्वत है,
इसलिए इसे पर्वाधिराज भी कहते हैं |
मानव-मन को नया दिशा-बोध देता है |

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