माता यशोदा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं माता यशोदा सबका कल्याण करो

माता यशोदा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
माता यशोदा सबका कल्याण करो

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dhruv wadhwani Mar 4, 2021
ओम भगवते वासुदेवाय नमः शुभ रात्रि जी

JAI MAA VAISHNO Mar 4, 2021
JAI MAA VAISHNO DEVI KIRPA KARO MAA VAISHNO DEVI KIRPA KARO MAA

JAI MAA VAISHNO Mar 4, 2021
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Jai Mata Di Apr 9, 2021

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Rajeev Thapar Apr 9, 2021

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Shanti Pathak Apr 11, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन * 👌 *दानवीर राजा हरिश्चंद्र का दान* 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏 *राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए✊ हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी 😞नज़रें नीचे झुका लेते थे।* *ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये राजा कैसे दानवीर हैं। ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है।* *ये बात जब तुलसीदासजी तक पहुँची तो उन्होंने राजा को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था* - *ऐसी देनी देन जु* *कित सीखे हो सेन।* *ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ* *त्यों त्यों नीचे नैन।।* *इसका मतलब था कि राजा तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं?* *राजा ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो राजा का कायल हो गया।* *इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया।* *राजा ने जवाब में लिखा* - *देनहार कोई और है* *भेजत जो दिन रैन।* *लोग भरम हम पर करैं* *तासौं नीचे नैन।।* *मतलब, देने वाला तो कोई और है वो ही मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ राजा दे रहा है। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं।* *वो ही करता और वो ही करवाता है, क्यों बंदे तू इतराता है,* *एक साँस भी नही है तेरे बस की, वो ही सुलाता और वो ही जगाता है.........✍️🙏* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 सुतीक्ष्ण भक्त की कथा किसी ने कहा है की भगवान को भोलापन पसन्द होता है भगवान भोले भक्तो के वशीभूत रहते हैं अगर भक्त अपने सच्चे मन से भगवान को पुकारता है तो वो हाजिर होते है और इस बात का उदाहरण हम सुतीक्ष्ण मुनि की कथा से ले सकते है आज हम आपको त्रेता युग के भोले भक्त सुतीक्ष्ण की कथा सुनाने जा रहे है सुतीक्ष्ण भक्त के गुरु का नाम सुतीक्ष्ण भक्त ऋषि अगस्त्य के शिष्य थे और ऋषि अगस्त्य के आश्रम में ही रहते थे और शिक्षा ग्रहण करते थे मगर अध्यन में कमजोर थे उन्हें शिक्षा से ज्यादा अच्छा गाय चराना लगता था क्योंकि बहुत भोले थे और साफ मन के थे मगर गुरु भक्ति उनके मन में कुट कूट के भरी हुई थी एक रोज़ अगस्त्य ऋषि ने उनकी परीक्षा लेनी चाही उन्होने सुतीक्ष्ण से कहा शिष्य तुम्हारी शिक्षा पूर्ण हो चुकी है अब तुम यहां से जा सकते हो तो सुतीक्ष्ण ने कहा आपको में गुरु दक्षिणा क्या दू कुछ आज्ञा कीजिए ? तो अगस्त्य ऋषि ने कहा तुम्हारे जैसे गुरु भक्त शिष्य ही मेरी गुरुदक्षिना है सुतीक्ष्ण ने कहा गुरुदेव बिना गुरु दक्षिणा के शिक्षा का सही समय पर सदुपयोग नहीं क्या जा सकता है इसलिए कुछ तो अज्ञा कीजिए तो अगस्त्य ऋषि ने कहा कि सुतीक्ष्ण अगर तुम गुरु दक्षिणा ही देना चाहते हो तो प्रभु श्री राम को जानकी सहित आश्रम में ला दो ! सुतीक्ष्ण ने कहा ठीक है गुरुदेव में जरुर ये गुरु दक्षिणा दूंगा ओर यह कह कर आश्रम से चले गए और भगवान की भक्ति करने लगे समय बीतता गया उनकी तपस्या इतनी सघन हो गई की उनको किसी का भी अभाश नहीं होता था जब भगवान अपने वनवास के समय चित्रकूट पर्वत से पंचवटी की ओर जा रहे थे तब उन्होंने सुतीक्ष्ण भक्त को देखा और उन्हें जगाने की कोशिश करने लगे मगर वो नहीं जागे अंत में श्री राम ने उनको चतुर्भुज रूप दिखाया तब वे जागे ! कहते है की भगवान श्री राम ने रामायण में दो ही बार अपना चतुर्भुज रूप दिखाया था एक माता कोशल्या को ओर एक सुतीक्ष्ण भक्त को तो जैसे ही सुतीक्ष्ण भक्त ने चतुर्भुज रूप में भगवान को देखा तो वो खुश हो गए और अगस्त्य ऋषि के आश्रम पर भगवान श्री राम लक्ष्मण और माता सीता को लेकर चले गए और उन्हें द्वार के बाहर बैठा कर आश्रम में जाकर अपने गुरु से कहा गुरुदेव आज में आपको आपकी गुरु दक्षिणा देने आया हूं अगस्त्य ऋषि भी खुश हो गए उन्होंने भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता का पूजन और सतकार किया ओर सुतीक्ष्ण भक्त से कहा कि में तुम्हारे जैसा शिष्य पाकर धन्य हो गया |

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Archana Singh Apr 11, 2021

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Mamta Chauhan Apr 11, 2021

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आप सभी उदास ना हों , बहुत ही जल्दी सब ठीक होगा.. और फिर से ज़िंदगी की उड़ान शुरू होगी , अभी के दौर के लिए कुछ पंक्तियाँ ... आज सलामत रहे , तो कल की सहर देखेंगे... आज पहरे मे रहे तो कल का पहर देखेंगें । सासों के चलने के लिए , कदमों का रुकना ज़रूरी है... घरों में बंद रहना दोस्तों हालात की मजबूरी है । अब भी न संभले तो बहुत पछताएँगे.. सूखे पत्तों की तरह हालात की आँधी में बिखर जाएँगे । यह जंग मेरी या तेरी नहीं , हम सब की है.. इस की जीत या हार भी हम सब की है । अपने लिए नहीं , अपनों के लिए जीना है... यह जुदाई का ज़हर दोस्तों , घूँट- घूँट पीना है । आज महफूज़ रहे , तो कल मिल के खिलखिलाएँगे.. गले भी मिलेंगे , और हाथ भी मिलाएँगे। शुभ रात्रि 💐💐🌹🌹🙏

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Renu Singh Apr 11, 2021

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