Babita Sharma
Babita Sharma Jan 11, 2018

षट्तिला एकादशी व्रत रखने से होता है पापों का नाश।जय श्री कृष्ण

षट्तिला एकादशी व्रत रखने से होता है पापों का नाश।जय श्री कृष्ण

षटतिला एकादशी: व्रत रखने से होता है पापों का नाश


हिंदू धर्म में माघ का महीना पवित्र माना जाता है। इस माह में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को षट्तिला कहते हैं। षट्तिला एकादशी के दिन मनुष्य को भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखना चाहिए। पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन उपवास करके तिलों से ही स्नान, दान, तर्पण और पूजा की जाती है। इस दिन तिल का इस्तेमाल स्नान, प्रसाद, भोजन, दान, तर्पण आदि सभी चीजों में किया जाता है। तिल के कई प्रकार के उपयोग के कारण ही इस दिन को षटतिला एकादशी कहते हैं।

भक्त शट तिल एकादशी पर धार्मिक उपवास रखते हैं और पूरे दिन खाते-पीते नहीं है। यदि आप पूरी तरह से व्रत रखने में सक्षम नहीं है तो आप आंशिक उपवास भी रख सकते है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सख्त उपवास नियमों की तुलना में भगवान से प्यार अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो सभी को एकादशी के दिन नहीं खाना चाहिए जैसे की अनाज, चावल और दालें।

भगवान विष्णु शट तिला एकादशी के मुख्य देवता हैं। भगवान की मूर्ति को पंचमृत से स्नान कराया जाता है। जिसमें तिल के बीज निश्चित रूप से मिश्रित करने चाहिए। बाद में भगवान विष्णु को खुश करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रसाद तैयार किये जाते हैं।

शट तिला एकादशी पर भक्त पूरी रात जागते रहते हैं और भगवान विष्णु की भक्ति करते हैं। कुछ स्थानों पर, भक्त इस सम्मानित दिन यज्ञ भी आयोजित करते हैं। इस व्रत के करने से अनेक प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं।

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कामेंट्स

prakash Sharma Jan 12, 2018
बहुत बढ़िया जानकरी दी है आपने आपका धन्यवाद जय माता दी

Mani Rana Jan 12, 2018
radhe radhe g good morning g nice g

suman batham Jan 12, 2018
हैप्पी षट्तिला एकादशी, दीदी सुप्रभात

Brijmohan pachapandey Jan 12, 2018
Jayshree Mahakal ji good post thanks Didi.aapko.A.D.Vans.shubh.kamna.MAKAR.sakranty.ki. Jayshree Krishna ji Radhey Radhey ji

prakash Sharma Jan 12, 2018
धन्यवाद जी जय श्री क्रुष्णा जय माता दी

Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

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Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

*जय श्री शनिदेव की जय वीर बजरंग बली की* 🌹🙏🌹*शुभ प्रभात् वंदन*🌹🙏🌹 🌹🙏🌹*शुभ शनिवार*🌹🙏🌹 *शास्त्रों में वर्णन है कि एक बार हनुमान जी को भी शनि का प्रकोप सहना पड़ा था। जब किसी को शनि की साढ़ेसाती लगती है या जन्म कुंडली में शनि देव प्रताडि़त करते हैं तो अक्सर ज्योतिषाचार्य उस व्यक्ति को हनुमान जी की शरण में जाने को कहते हैं ताकि वह उपाय द्वारा शनि का प्रकोप शांत कर सके, परन्तु एक बार संयोग से हनुमान जी शनि के काबू आ गए।* *भ्रमण करते शनि की हनुमान जी से भेंट हो गई। दोनों के मध्य भागवत चर्चा होने लगी। उस समय बात पाप-पुण्य की होने लगी। तब शनि देव हनुमान जी से कहने लगे, ‘‘मैं सब प्राणियों को उनके द्वारा किए गए कर्मों का शुभ-अशुभ फल तोल कर बराबर कर देता हूं। जीवन में प्रत्येक प्राणी पर कभी न कभी अपना प्रभाव अवश्य डालता हूं क्योंकि सृष्टि में प्राणी से कई बार जाने-अनजाने ही कुछ पाप हो जाते हैं जिसका उसे फल भोगना पड़ता है।’’* *शनि देव की यह बात सुनकर हनुमान जी कहने लगे, ‘‘शनिदेव कहीं अनजाने में मेरे द्वारा कोई पाप तो नहीं हो गया जिसके लिए मुझे उसका प्रायश्चित करना पड़े।’’* *शनि देव तुरन्त बोले, ‘‘अवश्य मारुति नंदन पवन पुत्र। मैं आपके पास इसी प्रयोजन से आया हूं क्योंकि मैं आपकी राशि में प्रवेश करने जा रहा हूं। आप सावधान रहें, मैं आपको शीघ्र ही पीड़ित करूंगा।’’* *शनि के ये वाक्य सुनकर हनुमान जी आश्चर्य में पड़ गए तथा बोले, ‘‘मैंने तो अपना सारा जीवन ब्रह्मचारी रहते हुए भगवान श्रीराम की सेवा में अर्पित कर दिया है। उनके भजन के अलावा कोई काम ही नहीं किया तो आप मेरी राशि में क्यों प्रवेश करना चाहते हैं। कृपया मेरे द्वारा किए गए बुरे कर्म या अपराध के बारे में अवश्य बतलाएं।’’* *तब शनि देव कहने लगे, ‘‘हनुमान जी आपने राम-रावण युद्ध में मेघनाद द्वारा किए जा रहे यज्ञ को भंग किया था, आपने धर्म कार्य किए हैं इसीलिए मैं आपकी राशि पर अढ़ाई या 7 वर्ष के लिए नहीं मात्र एक दिन के लिए आऊंगा।’’* *इतना सुनकर हनुमान जी ने शनि को एक दिन आने के लिए अनुमति दे दी तथा शनि को सावधान किया कि आपने आना ही है तो अपनी पूर्ण तैयारी करके आना।* *अगले दिन हनुमान जी ने अपने ईष्ट प्रभु भगवान श्री राम का स्मरण किया तथा विशाल पहाड़ उठा कर शनि के आने की प्रतीक्षा करने लगे तथा मन ही मन विचार करने लगे कि जब शनि देव आएंगे तो विशाल पहाड़ ही उन पर दे मारूंगा। पूरा दिन विशाल पहाड़ उठाकर हनुमान जी शनि की प्रतीक्षा करने लगे पर शाम तक शनि नहीं आए। शाम होने पर हनुमान जी ने विशाल पहाड़ को रख दिया तभी अचानक शनि देव प्रकट हुए। उन्हें देखकर हनुमान जी ने शनि से कहा, ‘‘सुबह से ही मैं आपकी प्रतीक्षा कर रहा था परन्तु आप आए नहीं।’’* *तभी शनि देव बोले, ‘‘हे पवन पुत्र रुद्रावतार हनुमान जी मैं तो सुबह ही आ गया था अब तो मैं लौट रहा हूं। मेरा प्रयोजन सफल रहा।’’* *तब हनुमान जी बोले, ‘‘आपके दर्शन तो अब हो रहे हैं शनि देव। आपके प्रकोप का क्या हुआ। तभी शनि देव मुस्करा कर बोले-मेरे प्रभाव के कारण ही तो आप सुबह से विशाल पहाड़ उठा कर खड़े रहे। मेरी वक्र दृष्टि के कारण ही आप आज सारा दिन पीड़ित रहे हैं। मैंने सुबह ही आपको विशाल पहाड़ उठवा दिया तथा शाम तक आपको दंडित किया इसलिए मेरा प्रयोजन सफल रहा। आप राम भक्त हैं, सदैव राम नाम का जाप करते हैं इसीलिए आपको दंड का कष्ट कम महसूस हुआ। आपको सुबह से शाम तक पहाड़ तो मेरे प्रकोप के कारण ही उठाना पड़ा है।’’* *शनि देव की ये बातें सुन कर हनुमान जी मुस्करा उठे। शनिदेव अपना कार्य समाप्त करके हनुमान जी से विदा लेकर शनि लोक रवाना हो गए। शनि के जन्म के समय पिता सूर्य को ग्रहण लगा था तभी उसकी शक्ति का सूर्य देव को ज्ञान हो गया था।*

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kamlesh sharma Dec 14, 2019

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Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

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