https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1454487594718738&id=100004725333374?sfnsn=wiwspmo&extid=qbeyGcsPslRcANtd

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Amit sharma Apr 3, 2020

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 3 शेयर
G.s.rawat Sad Apr 3, 2020

+4 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Rahul Saklani Apr 3, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
AARYAM Apr 3, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
sushila Apr 3, 2020

+36 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 7 शेयर
padmannabs Apr 3, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

आज का श्लोक: श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप अध्याय 16 : दैवी और आसुरी स्वभाव श्लोक--06 ❁ *श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप* ❁ *सभी के लिए सनातन शिक्षाएं* *आज* *का* *श्लोक* -- 16.06 *अध्याय 16 : दैवी और आसुरी स्वभाव* द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च | दैवो विस्तरशः प्रोक्त आसुरं पार्थ मे श्रृणु || ६ || द्वौ- दो; भूत-सर्गौ - जीवों की सृष्टियाँ; लोके - संसार में; अस्मिन् - इस;दैवः - दैवी; आसुरः - आसुरी; एव - निश्चय ही; च - तथा;दैवः - दैवी;विस्तरशः - विस्तार से;प्रोक्तः- कहा गया; आसुरम् - आसुरी; पार्थ- हे पृथापुत्र; मे - मुझसे; शृणु - सुनो । हे पृथापुत्र! इस संसार में सृजित प्राणी दो प्रकार के हैं - दैवी तथा आसुरी । मैं पहले ही विस्तार से तुम्हें दैवी गुण बतला चुका हूँ । अब मुझसे आसुरी गुणों के विषय में सुनो । तात्पर्य : अर्जुन को यह कह कर कि वह दैवी गुणों से उत्पन्न होकर जन्मा है, भगवान् कृष्ण अब उसे आसुरी गुण बताते हैं । इस संसार में बद्ध जीव दो श्रेणियों में बँटे हुए हैं । जो जीव दिव्य गुणों से सम्पन्न होते हैं, वे नियमित जीवन बिताते हैं अर्थात् वे शास्त्रों तथा विद्वानों द्वारा बताये गये आदेशों का निर्वाह करते हैं । मनुष्य को चाहिए कि प्रामाणिक शास्त्रों के अनुसार ही कर्तव्य निभाए, यह प्रकृति दैवी कहलाती है । जो शास्त्र विहित विधानों को नहीं मानता और अपनी सनक के अनुसार कार्य करता है, वह आसुरी कहलाता है । शास्त्र के विधिविधानों के प्रति आज्ञा भाव ही एकमात्र कसौटी है, अन्य नहीं । वैदिक साहित्य में उल्लेख है कि देवता तथा असुर दोनों ही प्रजापति से उत्पन्न हुए, अन्तर इतना ही है कि एक श्रेणी के लोग वैदिक आदेशों को मानते हैं और दूसरे नहीं मानते । ************************************ *प्रतिदिन भगवद्गीता का एक श्लोक* प्राप्त करने हेतु, इस समूह से जुड़े । कृपया एक समूह से ही जुड़े, सभी समूहों में वही श्लोक भेजा जाएगा।🙏🏼 https://chat.whatsapp.com/CX2JoLf0kW15B3hDhSRAX6

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB