🌺 श्रीमद्भागवत कथा 🌺 दिनांक: 6 से 12 मार्च 2021 स्थान : बालूमाथ ,जिला- लातेहार ,#झारखंड कथाव्यास : देवी दीक्षा अवस्थी (श्रीधामवृंदावन) #जयश्रीराधारमण , #devidikshaawasthi

🌺 श्रीमद्भागवत कथा 🌺
दिनांक: 6 से 12 मार्च 2021 
स्थान : बालूमाथ ,जिला- लातेहार ,#झारखंड
कथाव्यास : देवी दीक्षा अवस्थी (श्रीधामवृंदावन)
#जयश्रीराधारमण , #devidikshaawasthi

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कामेंट्स

dhruv wadhwani Feb 25, 2021
ओम साईं राम जी नमः शुभ संध्या जी

Niranjanpal Feb 25, 2021
जय श्री राधे कृष्णा

Ravi Kumar Taneja Feb 25, 2021
प्रभु कृपा से आप हमेशा खुश रहे...🙏स्वस्थ रहे...🙏 हरि ॐ🔯🌸🔯🌸🔯 🌹🌹🌹ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः🌹🌹🌹 शुभ संध्या वंदन🌹🌹🌹

Vinay Mishra Apr 10, 2021

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Vinay Mishra Apr 10, 2021

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Neeta Trivedi Apr 10, 2021

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vineeta tripathi Apr 10, 2021

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प्रेम से बड़ कर कुछ नहीं _*एक दिन एक औरत अपने घर के बाहर आई और उसने तीन संतों को अपने घर के सामने देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी। औरत ने कहा* –_ _*“कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।”*_ _*संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?”*_ _*औरत ने कहा – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।”*_ _*संत बोले – “हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर हों।”*_ _*शाम को उस औरत का पति घर आया और औरत ने उसे यह सब बताया।*_ _*औरत के पति ने कहा –*_ _*“जाओ और उनसे कहो कि मैं घर आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।”*_ _*औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के लिए कहा।*_ _*संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ नहीं जाते।”*_ _*“पर क्यों?” – औरत ने पूछा।*_ _*उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है” फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा – “इन दोनों के नाम*_ _*सफलता और प्रेम हैं। हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”*_ _*औरत ने भीतर जाकर अपने पति को यह सब बताया। उसका पति बहुत प्रसन्न हो गया और बोला –*_ “ _*यदि ऐसा है तो हमें धन को आमंत्रित करना चाहिए। हमारा घर खुशियों से भर जाएगा।”*_ _*लेकिन उसकी पत्नी ने कहा – “मुझे लगता है कि हमें सफलता को आमंत्रित करना चाहिए।”*_ _*उनकी बेटी दूसरे कमरे से यह सब सुन रही थी। वह उनके पास आई और बोली –*_ “ _*मुझे लगता है कि हमें प्रेम को आमंत्रित करना चाहिए। प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।”*_ _*“तुम ठीक कहती हो, हमें प्रेम को ही बुलाना चाहिए” –*_ _*उसके माता-पिता ने कहा।*_ _*औरत घर के बाहर गई और उसने संतों से पूछा*_ – _*“आप में से जिनका नाम प्रेम है वे कृपया घर में प्रवेश कर भोजन गृहण करें।”*_ _*प्रेम घर की ओर बढ़ चले। बाकी के दो संत भी उनके पीछे चलने लगे।*_ _*औरत ने आश्चर्य से उन दोनों से पूछा – “मैंने तो सिर्फ़ प्रेम को आमंत्रित किया था। आप लोग भीतर क्यों जा रहे हैं?”*_ *उनमें से एक ने कहा _– “यदि आपने धन और सफलता में से किसी एक को आमंत्रित किया होता तो केवल वही*_ _*भीतर जाता। आपने प्रेम को आमंत्रित किया है। प्रेम कभी अकेला नहीं जाता। प्रेम जहाँ-जहाँ जाता है, धन और सफलता उसके पीछे जाते हैं।*_ 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾 जय श्री कृष्णा जय जगन्नाथ

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