Uma Jaiswal
Uma Jaiswal Jan 22, 2021

Jai Shree Krishna 🙏🙏🌺🌺

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Ashwinrchauhan Mar 2, 2021

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Smt Neelam Sharma Mar 2, 2021

*🌳जय श्री राधे श्याम 🦚🌳* *💐💐मन को वश में करना*💐💐* *मन को वश करके प्रभु चरणों में लगाना बड़ा ही कठिन है। शुरुआत में तो यह इसके लिये तैयार ही नहीं होता है । लेकिन इसे मनाएं कैसे?* *एक शिष्य थे । किन्तु उनका मन किसी भी भगवान की साधना में नही लगता था। साधना करने की इच्छा भी मन मे थी । वे गुरु के पास गये और कहा कि गुरुदेव मन लगता नहीं और साधना करने का मन होता है । कोई ऐसी साधना बताएं जो मन भी लगे और साधना भी हो जाये ।* *गुरु ने कहा तुम कल आना ।* *दुसरे दिन वह गुरु के पास पहुँचा तो गुरु ने कहा । सामने रास्ते में कुत्ते के छोटे बच्चे हैं उनमे से दो बच्चे उठा ले आओ और उनकी हफ्ताभर देखभाल करो । गुरु के इस अजीब आदेश को सुनकर वह भक्त चकरा गया लेकिन क्या करे, गुरु का आदेश जो था।* *वह 2 पिल्लों को पकड़ कर लाया लेकिन जैसे ही छोड़ा वे भाग गये।वह फिरसे पकड़ लाया लेकिन वे फिर भागे । अब उसने उन्हें पकड़ लिया और दूध रोटी खिलायी ।अब वे पिल्ले उसके पास रमने लगे।* *हप्ताभर उन 🐶 की ऐसी सेवा यत्न पूर्वक की कि अब वे उसका साथ छोड़ नही रहे थे ।वह जहाँ भी जाता पिल्ले उसके पीछे-पीछे भागते। यह देख गुरु ने दूसरा आदेश दिया कि इन पिल्लों को भगा दो।भक्त के लाख प्रयास के बाद भी वह पिल्ले नहीं भागे । तब गुरु ने कहा देखो बेटा !शुरुआत मे ये बच्चे तुम्हारे पास रुकते नहीं थे । लेकिन जैसेही तुमने उनके पास ज़्यादा समय बिताया ये तुम्हारे बिना रहनें को तैयार नहीं हैं। ठीक इसी प्रकार खुद जितना ज़्यादा वक्त भगवान के पास बैठोगे, मन धीरे-धीरे भगवान की सुगन्ध,आनन्द से उनमें रमता जायेगा।* *हम अक्सर चलती-फिरती पूजा करते है,तो भगवान में मन कैसे लगेगा? जितनी ज्यादा देर ईश्वर के पास बैठोगे उतना ही मन ईश्वर रस का मधुपान करेगा और एक दिन ऐसा आएगा कि उनके बिना आप रह नही पाओगे ।* *शिष्य को अपने मन को वश में करने का मर्म समझ में आ गया और वह गुरु आज्ञा से भजन सुमिरन करने चल दिया।* 🌹 जय श्री राधे कृष्ण हरे 🌹

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Gd Bansal Mar 2, 2021

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आज का श्लोक:      श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप             अध्याय 02 :                     गीता का सार                            श्लोक--65 ❁ *श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप* ❁ *सभी के लिए सनातन शिक्षाएं* *आज* *का* *श्लोक* -- 02.65 *अध्याय 02 : गीता का सार* प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते | प्रसन्नचेतसो ह्याश्रु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते || ६५ || प्रसादे– भगवान् की अहैतुकी कृपा प्राप्त होने पर; सर्व– सभी; दुःखानाम्– भौतिक दुखों का; हानिः– क्षय, नाश; अस्य– उसके; उपजायते– होता है; प्रसन्न-चेतसः– प्रसन्नचित्त वाले की; हि– निश्चय ही; आशु– तुरन्त; बुद्धिः– बुद्धि; परि– पर्याप्त; अवतिष्ठते– स्थिर हो जाती है | इस प्रकार कृष्णभावनामृत में तुष्ट व्यक्ति के लिए संसार के तीनों ताप नष्ट हो जाते हैं और ऐसी तुष्ट चेतना होने पर उसकी बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है | ************************************ *प्रतिदिन भगवद्गीता का एक श्लोक* प्राप्त करने हेतु, इस समूह से जुड़े । 🙏🏼 https://telegram.me/DailyBhagavadGita

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