।।श्रीमते रामानुजाय नमः।। श्री राम और राममन्त्र : तात्पर्य

।।श्रीमते रामानुजाय नमः।। श्री राम और राममन्त्र : तात्पर्य

।।श्रीमते रामानुजाय नमः।।

श्री राम और राममन्त्र : तात्पर्य
-------------------------------------

वास्तव में राम अनादि ब्रह्म ही हैं। अनेकानेक संतों ने निर्गुण राम को अपने आराध्य रूप में प्रतिष्ठित किया है। राम नाम के इस अत्यंत प्रभावी एवं विलक्षण दिव्य बीज मंत्र को सगुणोपासक मनुष्यों में प्रतिष्ठित करने के लिए दाशरथि राम का पृथ्वी पर अवतरण हुआ है। कबीरदास जी ने कहा है – आत्मा और राम एक है-

' आतम राम अवर नहिं दूजा।'

राम नाम कबीर का बीज मंत्र है। राम नाम को उन्होंने अजपाजप कहा है। यह एक चिकित्सा विज्ञान आधारित सत्य है कि हम 24 घंटों में लगभग 21600 श्वास भीतर लेते हैं और 21600 बाहर निकालते हैं। इसका संकेत कबीरदास जी ने इस उक्ति में किया है–

' सहस्र इक्कीस छह सै धागा, निहचल नाकै पोवै।'

मनुष्य 21600 धागे नाक के सूक्ष्म द्वार में पिरोता रहता है। अर्थात प्रत्येक श्वास - प्रश्वास में वह राम का स्मरण करता रहता है।

राम शब्द का अर्थ है – 'रमंति इति रामः' जो रोम-रोम में रहता है, जो समूचे ब्रह्मांड में रमण करता है वही राम हैं।
इसी तरह कहा गया है –

'रमन्ते योगिनो यस्मिन स रामः'

अर्थात् योगीजन जिसमें रमण करते हैं वही राम हैं।

इसी तरह ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है –

' राम शब्दो विश्ववचनो, मश्वापीश्वर वाचकः'

अर्थात् ‘रा’ शब्द परिपूर्णता का बोधक है और ‘म’ परमेश्वर वाचक है। चाहे निर्गुण ब्रह्म हो या दाशरथि राम हो, विशिष्ट तथ्य यह है कि राम शब्द एक महामंत्र है। वैज्ञानिकों के अनुसार मंत्रों का चयन ध्वनि विज्ञान को आधार मानकर किया गया है।

राम मन्त्र का अर्थ
---------------

' राम ' स्वतः मूलतः अपने आप में पूर्ण मन्त्र है।

'र', 'अ' और 'म', इन तीनों अक्षरों के योग से 'राम' मंत्र बनता है। यही राम रसायन है। 'र' अग्निवाचक है। 'अ' बीज मंत्र है। 'म' का अर्थ है ज्ञान। यह मंत्र पापों को जलाता है, किंतु पुण्य को सुरक्षित रखता है और ज्ञान प्रदान करता है। हम चाहते हैं कि पुण्य सुरक्षित रहें, सिर्फ पापों का नाश हो। 'अ' मंत्र जोड़ देने से अग्नि केवल पाप कर्मो का दहन कर पाती है और हमारे शुभ और सात्विक कर्मो को सुरक्षित करती है। 'म' का उच्चारण करने से ज्ञान की उत्पत्ति होती है। हमें अपने स्वरूप का भान हो जाता है। इसलिए हम र, अ और म को जोड़कर एक मंत्र बना लेते हैं-राम। 'म' अभीष्ट होने पर भी यदि हम 'र' और 'अ' का उच्चारण नहीं करेंगे तो अभीष्ट की प्राप्ति नहीं होगी।

'राम' सिर्फ एक नाम नहीं अपितु एक सम्पूर्ण मंत्र है, जिसका नित्य स्मरण करने से सभी दु:खों से मुक्ति मिल जाती है। 'राम' शब्द का अर्थ है – मनोहर, विलक्षण, चमत्कारी, पापियों का नाश करने वाला व भवसागर से मुक्त करने वाला। रामचरित मानस के बालकांड में एक प्रसंग में लिखा है –
नहिं कलि करम न भगति बिबेकू।
राम नाम अवलंबन एकू।।
अर्थात कलयुग में न तो कर्म का भरोसा है, न भक्ति का और न ज्ञान का। सिर्फ राम नाम ही एकमात्र सहारा है।

स्कंदपुराण में भी राम नाम की महिमा का गुणगान किया गया
है –
रामेति द्वयक्षरजप: सर्वपापापनोदक:।
गच्छन्तिष्ठन् शयनो वा मनुजो रामकीर्तनात्।।
इड निर्वर्तितो याति चान्ते हरिगणो भवेत्।
–स्कंदपुराण/नागरखंड

अर्थात यह दो अक्षरों का मंत्र(राम) जपे जाने पर समस्त पापों का नाश हो जाता है। चलते, बैठते, सोते या किसी भी अवस्था में जो मनुष्य राम नाम का कीर्तन करता है, वह यहां कृतकार्य होकर जाता है और अंत में भगवान विष्णु का पार्षद बनता है।

"राम रामेति रामेति रमे रामे
मनोरमे ।
सहस्र नाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने ।।"



–जय श्रीमन्नारायण।

Like Flower Modak +141 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 87 शेयर

कामेंट्स

S.B. Yadav Oct 31, 2017
OM NAMO BHAGWATE VASUDEVAY JAI SHRI RAM

👉श्री ललिता सहस्रनामावली
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
१. ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्रीमात्रे नमः
२. श्रीमहाराज्ञै नमः
३. श्रीमत्सिंहासनेश्वर्यै नमः
४. चिदग्निकुण्डसंभूतायै नमः
५. देवकार्यसमुद्यतायै नमः
६. ॐ उद्यद्भानुसहस्राभायै नमः
७. चतुर्बाहुसमन्वितायै नमः
८. ...

(पूरा पढ़ें)
Flower Jyot Pranam +4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 17 शेयर
Sanjay Nagpal Oct 15, 2018

गायत्री मन्त्र के जाप के लिये पहले गुरु से दिक्षा ओर यज्ञोपवित संस्कार करवाना होगा। बिना यज्ञोपवित के कोइ भी मंत्र जपने फायदा नहीं होगा ।

ब्रह्म गायत्री मंत्र :--
ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो योन: प्रचोदयात ।

इस मूल...

(पूरा पढ़ें)
0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Aechana Mishra Oct 15, 2018

Jyot Like Pranam +150 प्रतिक्रिया 45 कॉमेंट्स • 792 शेयर

Pranam Like Flower +66 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 747 शेयर
Mahesh Bhargava Oct 15, 2018

आप सभी लोगो को सुचित किया जाता है कि दुर्गा पूजा में मेला या पंडाल में अपने बच्चों को साथ ले जाते समय एक पेपर पे अपना नाम और मोबाइल नंबर लिख उस बच्चे के पॉकेट में रख दें।जिससे गुम हुए बच्चे आसानी से आपके पास तक पहुंच जाएंगे। अगर मेरा सुझाव आपको अच...

(पूरा पढ़ें)
Like Fruits Sindoor +155 प्रतिक्रिया 46 कॉमेंट्स • 464 शेयर
T.K Oct 15, 2018

🍁 शुभरात्रि🍁

Jyot Bell Modak +26 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 309 शेयर

Like Dhoop Flower +16 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 126 शेयर

Pranam Like Flower +27 प्रतिक्रिया 19 कॉमेंट्स • 307 शेयर

Pranam Like Jyot +24 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 137 शेयर
T.K Oct 15, 2018

🍁good morning🍁

Flower Pranam Lotus +8 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 32 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB