S.B. Yadav
S.B. Yadav Aug 26, 2017

JAI SHRI MAHAKAAL JI OM NAMAH SHIVAY HAR HAR MAHADEV

JAI SHRI MAHAKAAL JI OM NAMAH SHIVAY HAR HAR MAHADEV

+53 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 0 शेयर

कामेंट्स

S.B. Yadav Aug 31, 2017
HAR HAR MAHADEV OM NAMAH SHIVAY JAI SHRI MAHAKAAL JI KI

Aneeta bajpai Sep 6, 2017
ऊँ नम: शिवाय....राधे राधे जी

+13 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 9 शेयर
vishal chawla Apr 3, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Suresh Pandey Apr 3, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 2 शेयर
Narayan Tiwari Apr 3, 2020

शक्तिशाली-शक्तिपीठ माँ कालिका धाम,पावागढ़ (गुजरात)🚩 """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""““"""""""“"""" पावागढ़ माता का मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि पावागढ़ में मां के दाएं पैर का अंगूठा गिरा था, इस कारण इस जगह का नाम पावागढ़ हुआ। मां के इस धाम में माता की चुनरी का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। कहा जाता है जिसे भी यहां की चुनरी या मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वह बहुत ही भाग्यशाली होता है! यह मंदिर बड़ोदरा से करीब 50 कि.मी.की दूरी पर स्थित है!यह गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित है।शक्ति के उपासकों के लिए माता का यह मंदिर अत्यंत सिद्ध स्थान है। इस मंदिर में मां काली की दक्षिणमुखी प्रतिमा विराजमान है जिनकी पूजा तंत्र-मंत्र से होती है। माता के इस मंदिर को शत्रुंजय मंदिर भी कहा जाता है। मान्यता है कि माता की इस भव्य मूर्ति की स्थापना स्वयं विश्वामित्र मुनि ने की थी। चूंकि काली माता की मूर्ति दक्षिणमुखी है, ऐसे में इसकी साधना-अराधना का विशेष महत्व है। यहां पर शत्रु, रोग आदि पर विजय पाने की कामना लिए हजारों-हजार भक्त पहुंचते हैं। देश के विभिन्न शक्तिपीठों की तरह यहां पर भी माता को अन्य प्रसाद सामग्री के साथ लाल रंग की चुनरी चढ़ाई जाती है। जिसे भक्तगण माता से मिले आशीर्वाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं..!! विश्वामित्र ने की थी काली की तपस्या:-🚩 पावागढ़ की पहाड़ी का संबंध गुरु विश्वामित्र से भी रहा है। मान्यता है कि गुरु विश्वामित्र ने यहां माता काली की तपस्या की थी और उन्होंने ही मूर्ति को स्थापित किया था। यहां बहने वाली नदी का नाम भी उन्हीं के नाम पर विश्वामित्री पड़ा। माता के दरबार में पैदल पहुंचने वाले भक्तों को तकरीबन 250 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि माता के दर्शन को पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा भी है। पावागढ़ धाम की कहानी:-🚩 पावागढ़ के नाम के पीछे भी एक कहानी प्रचलित है। जिसके अनुसार कहा जाता है कि पावागढ़ पर्वत पर चढ़ाई करना किसी के लिए भी संभव नहीं था। मंदिर के चारों तरफ घने जंगल और खाइयां थी। इन गहरी खाइयों से मंदिर के घिरे होने के कारण हवा का वेग भी चारों ओर से था। यही कारण है की इस शक्तिपीठ का नाम पावागढ़ पड़ा। पावागढ़ का अर्थ- ऐसी जगह कहा गया जहां हमेशा पवन यानी हवा का वास हो,यहाँ हर मनोकामना पूरी होती है..!! 🙏 || ऊँ क्रीं कालिकायै नम: ||🙏 🚩|| जय मांई की ||🚩

+9 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Rajkumar Agarwal Apr 3, 2020

+2 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Rajkumar Agarwal Apr 3, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Amit sharma Apr 3, 2020

+17 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 4 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB