Dr. Ratan Singh
Dr. Ratan Singh Dec 5, 2018

🌸गरुड़ पुराण🌸 – नवाँ अध्याय 🌋मरणासन्न व्यक्तियों के निमित्त किये जाने वाले कृत्य🔥 💠गरुड़ उवाच💠 🎎गरुड़जी बोले – हे प्रभो! आपने आतुरकाल

🌸गरुड़ पुराण🌸 – नवाँ अध्याय 🌋मरणासन्न व्यक्तियों के निमित्त किये जाने वाले कृत्य🔥 💠गरुड़ उवाच💠 🎎गरुड़जी बोले – हे प्रभो! आपने आतुरकाल

🌸गरुड़ पुराण🌸 – नवाँ अध्याय

🌋मरणासन्न व्यक्तियों के निमित्त किये जाने वाले कृत्य🔥

💠गरुड़ उवाच💠

🎎 गरुड़जी बोले – हे प्रभो! आपने आतुरकालिक दान के संदर्भ में भली भाँति कहा। अब म्रियमाण (मरणासन्न) व्यक्ति के लिए जो कुछ करना चाहिए, उसे बताइए।

🌹श्रीभगवानुवाच:-

🎎 श्रीभगवान ने कहा – हे तार्क्ष्य ! जिस विधान से मनुष्य मरने पर सद्गति प्राप्त करते हैं, शरीर त्याग करने की उस विधि को मैं कहता हूँ, सुनो। कर्म के संबंध से जब प्राणी अपना शरीर छोड़ने लगता है तो उस समय तुलसी के समीप गोबर से एक मण्डल की रचना करनी चाहिए।

वहाँ उस मण्डल के ऊपर तिल बिखेरकर कुशों को बिछाए, तदनन्तर उनके ऊपर श्वेत वस्त्र के आसन पर शालिग्राम शिला को स्थापित करें। जहाँ पाप, दोष और भय को हरण करने वाली शालग्राम-शिला विद्यमान है, उसके संनिधान में मरने से प्राणी की मुक्ति सुनिश्चित है। जहाँ जगत के ताप का हरण करने वाली तुलसी वृक्ष की छाया है, वहाँ मरने से सदैव मुक्ति ही होती है, जो मुक्ति दानादि कर्मों से दुर्लभ है।

🍀 जिसके घर में तुलसी वृक्ष के लिए स्थान बना हुआ है, वह घर तीर्थ स्वरुप ही है, वहाँ यम के दूत प्रवेश नहीं करते। तुलसी की मंजरी से युक्त होकर जो प्राणी अपने प्राणों का परित्याग करता है, वह सैकड़ों पापों से युक्त हो तो भी यमराज उसे देख नहीं सकते। तुलसी के दल को मुख में रखकर तिल और कुश के आसन पर मरने वाला व्यक्ति पुत्रहीन हो तो भी नि:संदेह विष्णुपुर को जाता है। तीनों प्रकार के तिल काले, सफेद और भूरे, कुश और तुलसी – ये सब म्रियमाण प्राणी को दुर्गति से बचा लेते हैं। यत: मेरे पसीने से तिल पैदा हुए हैं, अत: वे पवित्र हैं। असुर, दानव और दैत्य तिल को देखकर भाग जाते हैं, हे तार्क्ष्य ! मेरे रोम से पैदा हुए दर्भ (कुश) मेरी विभूति हैं इसलिए उनके स्पर्श से ही मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

🌹 कुश के मूल में ब्रह्मा, कुश के मध्य में जनार्दन और कुश के अग्रभाग में शंकर – इस प्रकार तीनों देवता कुश में स्थित रहते हैं। इसलिए कुश, अग्नि, मन्त्र, तुलसी, ब्राह्मण और गौ – ये बार-बार उपयोग किये जाने पर भी निर्माल्य नहीं होते। पिण्डदान में उपयोग किये दर्भ, प्रेत के निमित्त भोजन करने वाले ब्राह्मण, नीच के मुख से उच्चरित मन्त्र, नीच संबंधी गाय और तुलसी तथा चिता की आग – ये सब निर्माल्य अर्थात अपवित्र होते हैं।

🌷गोबर से लीपी हुई और कुश बिछाकर संस्कार की हुई पृथ्वी पर आतुर (मरणासन्न व्यक्ति) को स्थापित करना चाहिए। अन्तरिक्ष का परिहार करना चाहिए अर्थात चौकी आदि पर नहीं रखना चाहिए। ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र तथा अन्य सभी देवता और हुताशन (अग्नि) – ये सभी मण्डल पर विराजमान रहते हैं, इसलिए मण्डल की रचना करनी चाहिए। जो भूमि लेपरहित होती है अर्थात मल-मूत्र आदि से रहित होती है, वह सर्वत्र पवित्र होती है किंतु जो भूमि भाग कभी लीपा जा चुका है या मल-मूत्र आदि से दूषित है वहाँ पुन: लीपने पर उसकी शुद्धि हो जाती है। बिना लीपी हुई भूमि पर और चारपाई आदि पर या आकाश में (भूमि की सतह से ऊपर) राक्षस, पिशाच, भूत, प्रेत और यमदूत प्रविष्ट हो जाते हैं। इसलिए भूमि पर मण्डल बनाए बिना अग्निहोत्र, श्राद्ध, ब्राह्मण-भोजन, देव-पूजन और आतुर व्यक्ति का स्थापन नहीं करना चाहिए। इसलिए लीपी हुई भूमि पर आतुर व्यक्ति को लिटाकर उसके मुख में स्वर्ण और रत्न का प्रक्षेप करके शालग्राम स्वरुपी भगवान विष्णु का पादोदाक देना चाहिए।

🎭जो शालग्राम-शिला के जल को बिन्दुमात्र भी पीता है वह सभी पापों से मुक्त हो वैकुण्ठ लोक में जाता है। इसलिए आतुर व्यक्ति को महापातक को नष्ट करने वाले गंगा जल को देना चाहिए। गंगा जल का पान सभी तीर्थों में किये जाने वाले स्नान-दानादि के पुण्यरूपी फल को प्रदान करने वाला है। जो शरीर को शुद्ध करने वाले चान्द्रायण व्रत को एक हजार बार करता है और जो एक बार गंगा जल का पान करता है, वे दोनों समान फल वाले रहते हैं। हे तार्क्ष्य ! अग्नि के संबंध से जैसे रूइ की राशि नष्ट हो जाती है, उसी प्रकार गंगाजल से पातक भस्मसात हो जाते हैं।

🔥 जो सूर्य की किरणों से संतप्त गंगा के जल का पान करता है, वह सभी योनियों से छूटकर हरि के धाम को प्राप्त होता है। अन्य नदियाँ मनुष्यों को जलावगाहन (स्नान) करने पर पवित्र करती हैं, किंतु गंगाजी तो दर्शन, स्पर्श, दान अथवा “गंगा” इस नाम का कीर्तन करने मात्र से सैकड़ों, हजारों पुण्यरहित पुरुषों को भी पवित्र कर देती हैं। इसलिए संसार से पार लगा देने वाले गंगा जल को पीना चाहिए।

🎎 जो व्यक्ति प्राणों के कण्ठगत होने पर ‘गंगा-गंगा’ ऎसा कहता है वह विष्णु लोक को प्राप्त होता है और पुन: भूलोक में जन्म नहीं लेता। प्राणोत्क्रमण (प्राणों के निकलने) के समय जो पुरुष श्रद्धायुक्त होकर मन से गंगा काा चिन्तन करता है वह भी परम गति को प्राप्त होता है। अत: गंगा का ध्यान, गंगा को नमन, गंगा का संस्मरण करना चाहिए और गंगा जल का पान करना चाहिए। इसके बाद मोक्ष प्रदान करने वाली श्रीमद्भागवत की कथा को जितना सम्भव हो उतना श्रवण करना चाहिए। जो व्यक्ति अन्त समय में श्रीमद्भागवत के एक श्लोक, आधे श्लोक अथवा एक पाठ का भी पाठ करता है, वह ब्रह्मलोक को प्राप्त होकर पुन: संसार में कभी नहीं आता।

🎭 ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को मरण काल में वेद और उपनिषदों का पाठ तथा शिव व विष्णु की स्तुति से मुक्ति प्राप्त होती है। हे खग ! प्राण त्याग के समय मनुष्य को अनशन व्रत अर्थात अन्न तथा जल का त्याग करना चाहिए और यदि वह विरक्त द्विजन्मा हो तो उसे आतुर सन्यास लेना चाहिए। प्राणों के कण्ठ में आने पर जो प्राणी “मैंने सन्यास ले लिया है” – ऎसा कहता है, वह मरने पर विष्णु लोक को प्राप्त होता है। पुन: पृथ्वी पर उसका जन्म नहीं होता। इस प्रकार हे खग ! जिस धार्मिक पुरुष के आतुरकालिक पूर्वोक्त कार्य सम्पादित किये जाते हैं, उसके प्राण ऊपर के छिद्रों से सुखपूर्वक निकलते हैं। मुख, दोनों नेत्र, दोनों नासिकारन्ध्र तथा दोनों कान – ये सात (ऊपर के) द्वार (छिद्र) हैं, इनमें से किसी द्वार से सुकृती (पुण्यात्मा) – के प्राण निकलते हैं और योगियों के प्राण तालुरन्ध्र से निकलते हैं। अपान से मिले हुए प्राण जब पृथक हो जाते हैं तब प्राणवायु सूक्ष्म होकर शरीर से निकलता है।

🏵 प्राणवायु रूपी ईश्वर के निकल जाने पर काल से आहत शरीर निराधार वृक्ष की भाँति गिर पड़ता है। प्राण से मुक्त होने के बाद शरीर तुरंत चेष्टाशून्य, घृणित, दुर्गन्धयुक्त, अस्पृश्य और सभी के लिए निन्दित हो जाता है। इस शरीर की कीड़ा, वीष्ठा तथ भस्मरूप – ये तीन अवस्थाएँ होती हैं, इसमे कीड़े पड़ते हैं, यह विष्ठा के समान दुर्गन्धयुक्त हो जाता है अथवा अन्तत: चिता में भस्म हो जाता है। इसलिए क्षण मात्र में नष्ट हो जाने वाले इस देह के लिए मनुष्यों के द्वारा गर्व क्यों किया जाए। पंचभूतों से निर्मित इस शरीर का पृथ्वी तत्व पृथ्वी में लीन हो जाता है, जलतत्व जल में, तेजस्तत्त्व तेज में और वायुतत्व वायु में लीन हो जाता है, इसी प्रकार आकाश तत्व भी आकाश में लीन हो जाता है। सभी प्राणियों के देह में स्थित रहने वाला, सर्वव्यापी, शिवस्वरुप, नित्य मुक्त और जगत्साक्षी आत्मा अजर-अमर है।

🎎 सभी इन्द्रियों से युक्त और शब्द आदि विषयों से युक्त (मृत व्यक्ति की देह से निकला) जीव कर्म-कोश से समन्वित तथा काम और रोगादि के सहित – पुण्य की वासना से युक्त होकर अपने कर्मों के द्वारा निर्मित नवीन शरीर में उसी प्रकार प्रवेश करता है जैसे घर के जल जाने पर गृहस्थ दूसरे नवीन घर में प्रवेश करता है। तब किंकिणी जाल की मालाओं से युक्त विमान लेकर सुन्दर चामरों से सुशोभित देवदूत आते हैं।
धर्म के तत्व को जानने वाले, बुद्धिमान, धार्मिक जनों के प्रिय वे देवदूत कृतकृत्य इस जीव को विमान से स्वर्ग ले जाते हैं। सुन्दर, दिव्य देह धारण करके निर्मल वस्त्र और माल्य धारण करके, सुवर्ण और रत्नादि के आभरणों से युक्त होकर वह महानुभाव जीव दान के प्रभाव से देवताओं से पूजित होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है।

#🎎प्रेणादायक # 🌹हरि ॐ

।।इस प्रकार गरुड़ पुराण के अन्तर्गत सारोद्धार में “म्रियमाणकृत्यनिरुपण” नामक नवाँ अध्याय पूरा हुआ।।

!! 🌷ॐ विष्णुदेवाय नमः🌷 !!
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कामेंट्स

Mohan Patidar Dec 6, 2018
RadheeRadhee Ji 🎇 Good Afternoon Ji 🎇 Have a nice day Ji 🎇

R.K.Soni Dec 6, 2018
🙏radhe radhe ji🙏 🙏jai shree krishna🙏 aap ka privar khush rhe ji.🌲🌷🌲🌷🌲🌷 have you nice day

R.K.Soni Dec 6, 2018
🙏radhe radhe ji🙏 🙏jai shree krishna🙏 aap ka privar khush rhe ji.🌲🌷🌲🌷🌲🌷 have you nice day

Dr. Ratan Singh Dec 6, 2018
@malkhansingh 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

Dr. Ratan Singh Dec 6, 2018
@anjumishra 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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@ramkumaryadav11 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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@madanpalsingh 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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@yogendrasharmapandit 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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@rhbhatt 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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@namrata 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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Dr. Ratan Singh Dec 6, 2018
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@कैलाशरघुवंशी9977793945mp 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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@surendrakhodia 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

Dr. Ratan Singh Dec 6, 2018
@sumitrasoni2 same to you 🌹शुभसंध्या वन्दन दीदी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

Dr. Ratan Singh Dec 6, 2018
@sonydevel 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

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@mohanpatidar6 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

Dr. Ratan Singh Dec 6, 2018
@rajendrakumarsoni3 🌹शुभसंध्या वन्दन जी🌹 *********************** 🌷 प्रभु श्री हरि विष्णु जी की 🌷 👏 कृपा सदा आप पर बनी रहे 🌸 🎡आपका संध्या शान्तिमय शुभ🎡 🎭आनन्दमय और मंगलमय हो🙏 ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ 🌷🐚ॐ विष्णुदेवाय नमः🐚🌷 ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: 👏🔥नमस्कार जी🔥👏

S.r. Malviya Dec 11, 2018

गणेश जी के टूटे दांत की कहानी
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जब महर्षि वेदव्यास महाभारत लिखने के लिए बैठे, तो उन्हें
एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो
उनके मुख से निकले हुए महाभारत की
कहानी को लिखे। इस कार्य के लिए उन्होंने
श्री गणेश जी को चुना। गणेश
जी भी इ...

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Anita Mittal Dec 11, 2018

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एक बार महात्मा बुद्ध काशी में एक किसान के घर भिक्षा माँगने गये । उन्होंने भिक्षा पात्र आगे बढ़ाया । किसान ने एक पल को उन्हें ऊपर से नीचे तक देखा । शरीर पूर्णांग था । वह किसान कर्म पूजक...

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" केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी "

एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ क...

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श्रीरामचरितमानस सप्तम सोपान
(उत्तरकाण्ड) षष्ठ दिवस
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वेदस्तुति, शिवस्तुति

छंद :

जय सगुन निर्गुन रूप रूप अनूप भूप सिरोमने।
दसकंधरादि प्रचंड निसिचर प्रबल खल भुज बल हने॥
अवतार नर संसार भार बिभंजि दारुन दुख दहे।
जय प...

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।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।।

मैत्रेय उवाच
इती ते वर्णितः क्षत्तः कालाख्यः परमात्मनः।
महिमा वेदगर्भोऽथ यथास्राक्षीन्निबोध मे॥1॥
श्रीमैत्रेय जी ने कहा — विदुर जी! यहाँ तक मैंने आपको भगवान् की कालरूप महिमा सुनायी। अब जिस प्रकार ब्रह्मा जी ने जगत्...

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Jayshree Shah Dec 10, 2018

माँ का तोहफ़ा

एक दंपत्ती दिवाली की खरीदारी करने को हड़बड़ी में था! पति ने पत्नी से कहा- जल्दी करो मेरे पास" टाईम" नहीं है... कह कर रूम से बाहर निकल गया सूरज तभी बाहर लॉन मे बैठी "माँ" पर नजर पड़ी,,,
कुछ सोचते हुए वापिस रूम में आया।....शालू तुमने मा...

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RAJESH kumar raushan Dec 11, 2018

Flower Pranam Jyot +12 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 55 शेयर

श्रीरामचरितमानस सप्तम सोपान
(उत्तरकाण्ड) पंचम दिवस
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चौपाई :

प्रभु जानी कैकई लजानी।
प्रथम तासु गृह गए भवानी॥
ताहि प्रबोधि बहुत सुख दीन्हा।
पुनि निज भवन गवन हरि कीन्हा॥

अर्थ:-(शिवजी कहते हैं-) हे भवानी! प्रभु ने...

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Pranam Tulsi Lotus +10 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 14 शेयर

विनायक चतुर्थी हर महीने मनाई जाती है और गणेश चतुर्थी की तरह ही इसमें भी दस दिनों तक भगवान गणेश जी की पूजा की जाती हैं। पूरा देश गणेश उत्सव मनाता हैं परन्तु भारत वर्ष के महाराष्ट्र राज्य में गणेश जी का एक विशेष स्थान हैं।

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Flower Pranam Jyot +37 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 15 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

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