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Shyama Saksena
Shyama Saksena Jun 17, 2019

🌼🌼🌼🌼Om namah shivaya Har har Mahadev🌿🌿🌿🌿🌸🌸🌷🌷🌷🌿🌿🌿 🌸🌸🌿🌿Shubh Prabhat💐💐🌿🌿🌺🌺

🌼🌼🌼🌼Om namah shivaya  Har har Mahadev🌿🌿🌿🌿🌸🌸🌷🌷🌷🌿🌿🌿
🌸🌸🌿🌿Shubh Prabhat💐💐🌿🌿🌺🌺

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कामेंट्स

R.K.Soni Jun 17, 2019
सुप्रभात जी🌹🌹शुभ सोमवार 🙏जय गणेश देवा जी🙏 🙏हर ह२ महादेव जी🙏 आप व आपके परिवार की महादेव हर संकट मे रक्षा 🌴🙏🙏🙏🙏🙏 मंगल कामना के साथ सु५भात🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🌹

Anjana Gupta Jun 17, 2019
om nmo shivay dear sister ji aap aur aapki family par mahadev ki kripa sda bani rahe Shubh dophar Vandan ji 🌹🙏

Anita Mittal Jun 17, 2019
हर हर महादेव जी महादेव का आशीर्वाद व स्नेह आपके साथ बना रहे जी

dheeraj patel Jun 17, 2019
🌹🌿 ऊँ नमः शिवाय🌿🌹 🌿🌹हर हर महादेव🌹🌿 🌹🌿श्री भोलेनाथ 🌿🌹आप की सभी मनोकामनाऐ पूर्ण करे भाई जी🙏🌹

Ritu Sen Jun 17, 2019
Har Har Mahadev Om Namah Shivaya good evening ji

🌷🌷🌷🌷भोला भैया🌷🌷🌷 Jun 18, 2019
जटाधारी देवों के देव महादेव की जय माता भवानी जगत कल्याणी रुद्र काली की जय जय श्री राधे माधव की बहिन का जीवन मंगलमय हो परमपिता आपको और आपके परिवार को हमेशा खुश रख्खे बहिन जय भारत माता की जय राधे माधव की

Preeti jain Jun 19, 2019
jai shree 🙏 Ganeshaya namah bappa ka Kripa sada aap aur aapki family pe bana rahe aap ka har pal shubh aur maglamye Ho shubh prabhat ji 🌱🌱🌲🙏🙏🌹🌹🌿

Kishor N Padshala Jun 22, 2019
🙏🌹🌹ॐ नमः शिवाय 🌹🌹🙏 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिताः।। नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमोनमः।। शुभ प्रभात स्नेह वंदन हर हर महादेव हर 🌹🌹🙏🙏

Dharma Saini Jun 22, 2019
जय भोले नाथ हर हर महादेव 🙏🙏🙏🙏🙏

Bindu singh Jul 6, 2019
Jai shree krishna ji Radhe Radhe ji good night ji v nice post Radhe Radhe ji 👌👌🌷🌷🙏🏼🙏🏼🚩🚩

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Pappu Shriwas Jul 20, 2019

हम सब जानते है देवतओं और दानवो ने सागर मंथन किया जिसमे अच्छी और बुरी दोनों चीजे निकली। उसी मंथन में हलाहल नाम का विष भी निकला और उस से समस्त विश्व विनाश की और बढ़ने लगा। किसी में इतनी शक्ति नहीं थी की उस विष के जानलेवा प्रभाव को रोक सके। विश्व को व...

(पूरा पढ़ें)
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Bal Krishan Jul 20, 2019

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जप में रुद्राक्ष या तुलसी की माला का प्रयोग करें, ये हैं 20 नियम जप के लिए हमेशा रुद्राक्ष और तुलसी की माला का प्रयोग होता। हम आप को बता रहे हैं जप में रुद्राक्ष और तुलसी माला प्रयोग के नियम, भक्ति मार्ग में जप या जाप का महत्व है। मंत्र का जप या परमात्मा के नाम का जप नित्य करते रहना चाहिए। जप के कुछ नियम है, जिन्हें जानना हर किसी के लिए जरूरी है। हम आपको बता रहे हैं कि जप किस तरह से करना चाहिए। 1) जहाँ तक सम्भव हो वहाँ तक गुरू द्वारा प्राप्त मंत्र की अथवा किसी भी मंत्र की अथवा परमात्मा के किसी भी एक नाम की 1 से 200 माला जप करो। 2) रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला का उपयोग करो। 3) माला फिराने के लिए दाएँ हाथ के अँगूठे और बिचली (मध्यमा) या अनामिका उँगली का ही उपयोग करो। 4) माला जपते समय भगवान के नाम, रूप, लीला, धाम चारों में से किसी एक का चिंतन करना चाहिए।  5) माला ढककर रखो, जिससे वह तुम्हें या अन्य के देखने में न आये। गौमुखी अथवा स्वच्छ वस्त्र का उपयोग करो। 6) एक माला का जप पूरा हो, फिर माला को घुमा दो। सुमेरू के मनके को लांघना नहीं चाहिए। 7) जहाँ तक सम्भव हो वहाँ तक मानसिक जप करो। यदि मन चंचल हो जाय तो जप जितने जल्दी हो सके, प्रारम्भ कर दो। 8) प्रातः काल जप के लिए बैठने के पूर्व या तो स्नान कर लो अथवा हाथ पैर मुँह धो डालो। मध्यान्ह अथवा सन्ध्या काल में यह कार्य जरूरी नहीं, परन्तु संभव हो तो हाथ पैर अवश्य धो लेना चाहिए। जब कभी समय मिले जप करते रहो। मुख्यतः प्रातःकाल, मध्यान्ह तथा सन्ध्याकाल और रात्रि में सोने के पहले जप अवश्य करना चाहिए। 9) जप के साथ या तो अपने आराध्य देव का ध्यान करो अथवा तो प्राणायाम करो। अपने आराध्यदेव का चित्र अथवा प्रतिमा अपने सम्मुख रखो। 10) जब तुम जप कर रहे हो, उस समय मंत्र के अर्थ पर विचार करते रहो। 11) मंत्र के प्रत्येक अक्षर का बराबर सच्चे रूप में उच्चारण करो। 12) मंत्र जप न तो बहुत जल्दी और न तो बहुत धीरे करो। जब तुम्हारा मन चंचल बन जाय तब अपने जप की गति बढ़ा दी। 13) जप के समय मौन धारण करो और उस समय अपने सांसारिक कार्यों के साथ सम्बन्ध न रखो। 14) पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुँह रखो। जब तक हो सके तब तक प्रतिदिन एक ही स्थान पर एक ही समय जप के लिए आसनस्थ होकर बैठो। मंदिर, नदी का किनारा अथवा बरगद, पीपल के वृक्ष के नीचे की जगह जप करने के लिए योग्य स्थान है। 15) भगवान के पास किसी सांसारिक वस्तु की याचना न करो। 16) जब तुम जप कर रहे हो उस समय ऐसा अनुभव करो कि भगवान की करुणा से तुम्हारा हृदय निर्मल होता जा रहा है और चित्त सुदृढ़ बन रहा है। 17) अपने गुरूमंत्र को सबके सामने प्रकट न करो। 18) जप के समय एक ही आसन पर हिले-डुले बिना ही स्थिर बैठने का अभ्यास करो। 19) जप का नियमित हिसाब रखो। उसकी संख्या को क्रमशः धीरे-धीरे बढ़ाने का प्रयत्न करो। 20) मानसिक जप को सदा जारी रखने का प्रयत्न करो। जब तुम अपना कार्य कर रहे हो, उस समय भी मन से जप करते रहो..।

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