murlidhargoyal39
murlidhargoyal39 Aug 14, 2017

जन्माष्टमी विशेष:-४

जन्माष्टमी विशेष:-४

#कृष्णजन्माष्टमी
प्रथम दर्शन से ही प्रभु ने सभी का मन अपनी ओर खींच लिया। एक
गोपी ने यशोदाजी से कहा–मां ! आज जो मैं माँगूं वह आप दें। यशोदाजी ने कहा–मांग लो, तुम जो मांगोगी, वह मैं दूंगी। गोपी ने कहा–मां, दो मिनट के लिए लाला को मेरी गोद में दीजिए। यशोदाजी ने गोपी की गोद में लाला को दे दिया। हजारों वर्षों से जीव ईश्वर से बिछड़ गया था, वह आज मिला है। जीव और परमात्मा का मिलन हुआ है। गोपी ने अति आनंद में अपनी देह का होश गंवा दिया है। वह कहती है–आज तक नंद-यशोदा हमें आनंद देते थे, आज परमानंद उनके घर आया है। आज गोपी के हाथ में लक्ष्मीपति आए हैं। अति आनंद में गोपी नाचती-गाती है–
नंद घर आनंद भयौ, जय कन्हैयालाल की।
हाथी, घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की।।
जहाँ मधुर रागात्मिका प्रीति है, वहीं असीमित आनन्द-समूह उमड़ता है। नन्दालय में वही समुद्र उमड़ा।

इसलिए समस्त व्रजवासी हर्षित होकर उद्घोष कर रहे हैं–‘नंद घर आनन्द भयौ जय कन्हैयालाल की’

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कामेंट्स

Naresh Tiwari Aug 15, 2017
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे

Anuradha Kumari Dec 16, 2019

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🙏🏽 जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏🏽 "सच्चाई का फल" 🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀 किसी नगर में एक बूढ़ा चोर रहता था। सोलह वर्षीय उसका एक लड़का भी था। चोर जब ज्यादा बूढ़ा हो गया तो अपने बेटे को चोरी की विद्या सिखाने लगा। कुछ ही दिनों में वह लड़का चोरी विद्या में प्रवीण हो गया। दोनों बाप बेटा आराम से जीवन व्यतीत करने लगे। एक दिन चोर ने अपने बेटे से कहा-- ”देखो बेटा, साधु-संतों की बात कभी नहीं सुननी चाहिए। अगर कहीं कोई महात्मा उपदेश देता हो तो अपने कानों में उंगली डालकर वहाँ से भाग जाना, समझे ! ”हां बापू, समझ गया!“ एक दिन लड़के ने सोचा, क्यों न आज राजा के घर पर ही हाथ साफ कर दूँ। ऐसा सोचकर उधर ही चल पड़ा। थोड़ी दूर जाने के बाद उसने देखा कि रास्ते में बगल में कुछ लोग एकत्र होकर खड़े हैं। उसने एक आते हुए व्यक्ति से पूछा,-- ”उस स्थान पर इतने लोग क्यों एकत्र हुए हैं ?“ उस आदमी ने उत्तर दिया- ”वहां एक महात्मा उपदेश दे रहे हैं !“ यह सुनकर उसका माथा ठनका। ‘इसका उपदेश नहीं सुनूँगा ऐसा सोचकर अपने कानों में उंगली डालकर वह वहाँ से भाग निकला। जैसे ही वह भीड़ के निकट पहुँचा एक पत्थर से ठोकर लगी और वह गिर गया। उस समय महात्मा जी कह रहे थे, ”कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। जिसका नमक खाएँ उसका कभी बुरा नहीं सोचना चाहिए। ऐसा करने वाले को भगवान सदा सुखी बनाए रखते हैं।“ ये दो बातें उसके कान में पड़ीं। वह झटपट उठा और कान बंद कर राजा के महल की ओर चल दिया। महल पहुंचकर जैसे ही अंदर जाना चाहा कि उसे वहाँ बैठे पहरेदार ने टोका,- ”अरे कहां जाते हो ? तुम कौन हो ?“ उसे महात्मा का उपदेश याद आया, ‘झूठ नहीं बोलना चाहिए।’ चोर ने सोचा, आज सच ही बोल कर देखें। उसने उत्तर दिया- ”मैं चोर हूँ, चोरी करने जा रहा हूँ।“ ”अच्छा जाओ।“ उसने सोचा राजमहल का नौकर होगा। मजाक कर रहा है। चोर सच बोलकर राजमहल में प्रवेश कर गया। एक कमरे में घुसा। वहाँ ढे़र सारा पैसा तथा जेवर देख उसका मन खुशी से भर गया। एक थैले में सब धन भर लिया और दूसरे कमरे में घुसा, वहाँ रसोई घर था। अनेक प्रकार का भोजन वहाँ रखा था। वह खाना खाने लगा। खाना खाने के बाद वह थैला उठाकर चलने लगा कि तभी फिर महात्मा का उपदेश याद आया, ‘जिसका नमक खाओ, उसका बुरा मत सोचो।’ उसने अपने मन में कहा, ‘खाना खाया उसमें नमक भी था। इसका बुरा नहीं सोचना चाहिए।’ इतना सोचकर, थैला वहीं रख वह वापस चल पड़ा। पहरेदार ने फिर पूछा-- ”क्या हुआ, चोरी क्यों नहीं की ?“ देखिए जिसका नमक खाया है, उसका बुरा नहीं सोचना चाहिए। मैंने राजा का नमक खाया है, इसलिए चोरी का माल नहीं लाया। वहीं रसोई घर में छोड़ आया।“ इतना कहकर वह वहाँ से चल पड़ा। उधर रसोइए ने शोर मचाया- ”पकड़ो, पकड़ों चोर भागा जा रहा है।“ पहरेदार ने चोर को पकड़कर दरबार में उपस्थित किया। राजा के पूछने पर उसने बताया कि एक महात्मा के द्वारा दिए गए उपदेश के मुताबिक मैंने पहरेदार के पूछने पर अपने को चोर बताया क्योंकि मैं चोरी करने आया था। आपका धन चुराया लेकिन आपका खाना भी खाया, जिसमें नमक मिला था। इसीलिए आपके प्रति बुरा व्यवहार नहीं किया और धन छोड़ दिया। उसके उत्तर पर राजा बहुत खुश हुआ और उसे अपने दरबार में नौकरी दे दी। वह दो-चार दिन घर नहीं गया तो उसके बाप को चिंता हुई कि बेटा पकड़ लिया गया- लेकिन चार दिन के बाद लड़का आया तो बाप अचंभित रह गया अपने बेटे को अच्छे वस्त्रों में देखकर। लड़का बोला- ”बापू जी, आप तो कहते थे कि किसी साधु संत की बात मत सुनो, लेकिन मैंने एक महात्मा के दो शब्द सुने और उसी के मुताबिक काम किया तो देखिए सच्चाई का फल। सच्चे संत की वाणी में अमृत बरसता है, आवश्यकता आचरण में उतारने की है। "जय जय श्री राधे" 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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Vinod Kumar Kamra Dec 16, 2019

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Ashok singh sikarwar Dec 16, 2019

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Ashok singh sikarwar Dec 16, 2019

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Anju Dec 16, 2019

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Dhananjay Khanna Dec 16, 2019

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Virandra kr sharma Dec 16, 2019

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Harilal Prajapati Dec 16, 2019

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