rajni chandra
rajni chandra Apr 5, 2020

राधेश्याम राधेश्याम बिलकुल सही कहा आपने हिन्दुस्तान में सब बटे बटे से है सीखना हो तो आपलोगों से सीखें एकता व धर्म भक्ति को कैसे बचाए रखना है सभी मिल कर कैसे एक हो कर धर्म बचाए रखना है इनसे हमारे धर्म देश को बहुत ज्यादा खतरा हैं हमारा धर्म सब सभी एक है फिर भी एक दूसरे को नीचा दिखाने मैं लगे होते है हर बात अपनी जगह है पर धर्म को आगे बढ़ाने के लिए सभी को धर्म के महान व्यक्तित्व के स्वामी को एक दूसरे का दोषों को कभी आगे नही लाना चाहिए सभी महान व्यक्तित्व के स्वामी को धर्म को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए न की एक दूसरे को छोटा दिखाना चाहिए गलती को क्षमा करें 🌺🌺

+21 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 31 शेयर

कामेंट्स

rajni chandra Apr 5, 2020
राधेश्याम राधेश्याम

+88 प्रतिक्रिया 20 कॉमेंट्स • 23 शेयर
RaM DeeWaNa May 28, 2020

+40 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 5 शेयर
ramkumarverma May 28, 2020

+12 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Manoj Sharma May 28, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Minakshi Tiwari May 28, 2020

🌹जय श्री कृष्ण 🌹 आज माय मंदिर मैं मेरी यह आखिरी पोस्ट है । ओर यह.पोस्ट माय मंदिर के मित्र भाई बहिनों ने. हम सभी ने एक दुसरे को समपिर्त कि हैं ।और माय मंदिर के आदरणीय संचालको का धन्यवाद करते हैं। जिनहोने हम सभी को एक धार्मिक मंच दिया हमारे सभी के दिलों मैं आसथा का दिया जलाया बहुत कुछ सीखने को मिला धर्म संस्कृति हमारे संसकार धार्मिक संथान से अवगत कराया कभी सोचा नहीं था कि माय मंदिर बंद होगा पर माय मंदिर कभी बंद नही होगा कयोंकि हम सभी के दिलों मैं बस गया हैं। जो बस जाता है । वो हमसे अलग नहीं हो सकता है। माय मंदिर के सभी भाई बहनों को 🙏राधे राधे जी 🙏 👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧👨‍👩‍👧‍👧

+106 प्रतिक्रिया 27 कॉमेंट्स • 12 शेयर
Ajay Bandewar May 28, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 5 शेयर
lalit mohan jakhmola May 28, 2020

****मेरा देश, मेरा मुल्क, मेरा गांव महान*** @*मैं गाँव हूँ!!* *मैं वहीं गाँव हूँ जिसपर ये आरोप है* *कि यहाँ रहोगे तो भूखे मर जाओगे।* *मैं वहीं गाँव हूँ जिस पर आरोप है कि यहाँ अशिक्षा रहती है!* *मैं वहीं गाँव हूँ जिस पर असभ्यता और जाहिल गवाँर का भी आरोप है!* *हाँ मैं वहीं गाँव हूँ जिस पर आरोप लगाकर मेरे ही बच्चे मुझे छोड़कर दूर बड़े-बड़े शहरों में चले गए।* *जब मेरे बच्चे मुझे छोड़कर जाते हैं मैं रात भर सिसक सिसक कर रोता हूँ ,फिर भी मरा नही।मन में एक आश लिए आज भी निर्निमेष पलकों से बांट जोहता हूँ शायद मेरे बच्चे आ* *जायँ ,देखने की ललक में सोता भी नहीं हूँ*😢😭 *लेकिन हाय!जो जहाँ गया वहीं का हो गया।* *मैं पूछना चाहता हूँ अपने उन सभी बच्चों से क्या मेरी इस दुर्दशा के जिम्मेदार तुम नहीं हो?😢* *अरे मैंने तो तुम्हे कमाने के लिए शहर भेजा था और तुम मुझे छोड़ शहर के ही हो गए।मेरा हक कहाँ है?* *क्या तुम्हारी कमाई से मुझे घर,मकान,बड़ा स्कूल, कालेज,इन्स्टीट्यूट,अस्पताल,आदि बनाने का अधिकार नहीं है?ये* *अधिकार मात्र शहर को ही क्यों ? जब सारी कमाई शहर में दे दे रहे हो तो मैं कहाँ जाऊँ?मुझे मेरा हक क्यों नहीं मिलता?* *इस कोरोना संकट में सारे मजदूर गाँव भाग रहे हैं,गाड़ी नहीं तो सैकड़ों मील पैदल बीबी बच्चों के साथ चल दिये* *आखिर क्यों?जो लोग यह कहकर मुझे छोड़ शहर चले गए थे,कि गाँव में रहेंगे तो भूख से मर जाएंगे,वो किस आश विश्वास पर पैदल ही गाँव लौटने लगे?मुझे तो लगता है* *निश्चित रूप से उन्हें ये विश्वास है कि गाँव पहुँच जाएंगे तो जिन्दगी बच जाएगी,भर पेट भोजन मिल जाएगा, परिवार बच जाएगा।सच तो यही है कि गाँव कभी किसी को* *भूख से नहीं मारता ।* *😢*आओ मुझे फिर से सजाओ,मेरी* *गोद में फिर से चौपाल लगाओ,मेरे* *आंगन में चाक के पहिए घुमाओ,मेरे खेतों में अनाज* *उगाओ,खलिहानों में बैठकर ,खुद भी खाओ दुनिया को* *खिलाओ,महुआ ,पलास के पत्तों को बीनकर पत्तल बनाओ,गोपाल बनो,मेरे नदी ताल तलैया,बाग,बगीचे गुलजार करो,बच्चू बाबा की पीस पीस कर प्यार भरी गालियाँ,रामजनम काका के उटपटांग डायलाग, पंडिताइन की अपनापन वाली खीज और* *पिटाई,दशरथ साहू की आटे की मिठाई हजामत और मोची की दुकान,भड़भूजे की सोंधी महक,लईया, चना* *कचरी,होरहा,बूट,खेसारी सब आज भी तुम्हे पुकार रहे है।* *😢मैं तनाव भी कम करने का कारगर उपाय हूँ।मैं प्रकृति के गोद में जीने का प्रबन्ध कर सकता हूँ।मैं सब कुछ कर सकता हूँ !बस तू समय समय पर आया कर मेरे पास,अपने बीबी* *बच्चों को मेरी गोद में डाल कर निश्चिंत हो जा,दुनिया की कृत्रिमता को त्याग दें।फ्रीज का नहीं घड़े का पानी पी,त्यौहारों समारोहों में पत्तलों में खाने और* *कुल्हड़ों में पीने की आदत डाल,अपने मोची के जूते,और दर्जी के सिरे कपड़े पर इतराने की आदत डाल,हलवाई की मिठाई,खेतों की हरी सब्जियाँ,फल फूल,गाय का दूध ,बैलों की खेती पर विस्वास रख कभी संकट में नहीं पड़ेगा।हमेशा खुशहाल जिन्दगी चाहता है तो मेरे लाल मेरी गोद में आकर कुछ दिन खेल लिया कर तू भी खुश और मैं भी खुश।* *मैं गाँव हूँ!!* *मैं वहीं गाँव हूँ जिसपर ये आरोप है* *कि यहाँ रहोगे तो भूखे मर जाओगे।*😢🌴☔ *अपना गांव*** शुभ रात्रि वन्दन जी सादर***

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 4 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB