क्या भारत में आर्य किसी दूसरे देश से आए हैं?

क्या भारत में आर्य किसी दूसरे देश से आए हैं?

मित्रों हम महाविद्यालय मे पढ़कर या सुनकर बहुत सारे गलत विचारका शिकार होते है। कुछ लोग अभ्यास करके सत्य ज्ञात कर लेतेही है। क्या आर्य (हिन्दू) भारत में कहीं बाहर (विदेश) से आए हैं ? इसी प्रश्न उचित उत्तर अभिरुणी झा ने ३० जनवरी २०१६ को अपने संदेश मे दिया है।

प्रख्यात भारतविद् प्रो. सूर्यकान्त बाली ने अपने ग्रन्थ ‘भारत गाथा’ में इस सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण बातें लिखी हैं जिनका मैं अक्षरसः उल्लेख कर रहा हूँ—

‘भारतीय शैली के इतिहास के स्मृति में मनु तो हैं, जिन्होंने मानव जाति को मानव बनाया। हमारी स्मृति में प्रलय भी है, जिसमें से मनु ने हमारी जाति को उबारा। हमारी स्मृति में पृथु भी हैं, जिनके नाम पर इस धरती का नाम ‘पृथिवी’ पड़ा।

हमारी स्मृति में प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र भरत भी हैं, जिनके नाम पर इस देश का नाम ‘भारतवर्ष’ पड़ा। हमारे जहन में इतनी सारी स्मृतियाँ हैं। परन्तु हम किसी और देश से, बाहर से अपने देश भारतवर्ष में आये— यह हमारी स्मृति में कहीं नहीं है। हमारी स्मृति में देव भी हैं। हमारी स्मृति में असुर भी हैं। हमारी स्मृति में देवासुर संग्राम भी है। हमारी स्मृति में यक्ष भी हैं, किन्नर भी हैं और गन्धर्व भी हैं। परन्तु हमारी स्मृति में वे आर्य नहीं हैं, जिन्हें कहीं बाहर से यहाँ आक्रमणकारी में रूप में आया बताया जा रहा है।

हमारी स्मृति में श्रेष्ठ के अर्थ में ‘आर्य’ शब्द है। दुराचारी के अर्थ में ‘अनार्य’ शब्द भी है। हमारी स्मृति में ‘पति’ अर्थ देनेवाला आर्य शब्द भी है; पर जातिवाची, नस्लवादी वह ‘आर्य’ शब्द हमारी स्मृति में कहीं है नहीं। जिस तरह से आर्य हमारे पूर्वज और कहीं बाहर से आये हुए बताए जा रहे हैं, वेद हों या ब्राह्मण-ग्रन्थ हों, आरण्यक-ग्रन्थ हों या उपनिषद्-ग्रन्थ हों, रामायण और महाभारत-जैसे प्रबन्धकाव्य (इतिहास-ग्रन्थ) हों या अठारह पुराण और अठारह उपपुराण हों, तमाम वैज्ञानिक साहित्य हो, समाजशास्त्रीय ग्रन्थ हों या ललित साहित्य हो, संस्कृत के ऐसे किसी भी ग्रन्थ में कोई एक परोक्ष, प्रत्यक्ष की तो बात ही क्या है, सन्दर्भ तक ऐसा नहीं जो हमारे बारे में कहता हो कि हम बाहर से आये।

ब्राह्मण-परम्परा के तमाम ग्रन्थ हों या श्रमण अर्थात् जैन-बौद्ध परम्परा के कोई ग्रन्थ हों, ऐसी कोई स्मृति कहीं अंकित नहीं, जो हमारे बारे में कहती हो कि हम बाहर से आए। भारत का पाली, प्राकृत, अपभ्रंश या आधुनिक भारतीय भाषाओं में लिखा साहित्य हो, हमारे देश के किसी भी कोने में गाया जानेवाला कोई लोकगीत हो, कोई झूठी-सच्ची अफवाह, कोरी गप्प या कोई बकवास हो, कहीं भी यह अंकित नहीं कि यह देश हमारा नहीं और हम कहीं बाहर से आये हैं।’

यह सर्वविदित तथ्य प्रमाणित करता है कि पाश्चात्य विद्वानों एवं उनके प्रभाव से प्रभावित भारतीय विद्वानों ने भारतीय इतिहास के प्रति कितना बड़ा षड्यंत्र किया है। यह जो अभिशाप किया है उसका प्रायश्चित भी उन्हें अवश्य इस काल के क्रम में करना ही पड़ेगा। हमें प्रयत्नपूर्वक भारतीय इतिहास-पद्धति को प्रतिष्ठित करना ही पड़ेगा। अन्य मार्ग नहीं है।

मित्रों विचार का स्वीकार स्वतः परीक्षण करके किजीयेगा। सही संदर्भद्वारा सत्य समझे। संस्कृत " ब्रह्मांड की कूंजी" से यह ज्ञान प्राप्त ।
जय श्री राम ।

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कामेंट्स

Kailash Chandra vyas Sep 14, 2017
The time has passed ,now who we can help our contaryso India will call",some ki cedhiya".

संस्कार Sep 15, 2017
Itihas Satya Nahi hota hai......Likha hua ku6 bhi Manusya ki Apne aap ke swabhaw de likha jata hai....... Manusya utna hi dekh skta hai jitna dekhna chahta hai jaisa uska vichar hote hai

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Shakti Sep 20, 2020

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🥀🥀 Sep 20, 2020

Heart touching post...Speechless 😔 *कुछ रह तो नहीं गया ?* *तीन* महीने के बच्चे को दाई के पास रखकर जॉब पर जाने वाली माँ को दाई ने पूछा... "कुछ रह तो नहीं गया...? पर्स, चाबी सब ले लिया ना...?" अब वो कैसे हाँ कहे... पैसे के पीछे भागते भागते... सब कुछ पाने की ख्वाईश में वो जिसके लिये सब कुछ कर रही है, *वह ही रह गया है...!* 😑 *शादी* में दुल्हन को बिदा करते ही शादी का हॉल खाली करते हुए दुल्हन की बुआ ने पूछा... "भैया, कुछ रह तो नहीं गया ना...? चेक करो ठीक से...!" बाप चेक करने गया तो दुल्हन के रूम में कुछ फूल सूखे पड़े थे। सब कुछ तो पीछे रह गया... 25 साल जो नाम लेकर जिसको आवाज देता था लाड़ से... वो नाम पीछे रह गया और उस नाम के आगे गर्व से जो नाम लगाता था, वो नाम भी पीछे रह गया अब... "भैया, देखा...? कुछ पीछे तो नहीं रह गया ?" बुआ के इस सवाल पर आँखों में आये आंसू छुपाते बाप जुबाँ से तो नहीं बोला.... पर दिल में एक ही आवाज थी... *सब कुछ तो यहीं रह गया...!* 😑 *बड़ी* तमन्नाओं के साथ बेटे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था और वह पढ़कर वहीं सैटल हो गया... पौत्र जन्म पर बमुश्किल 3 माह का वीजा मिला था और चलते वक्त बेटे ने प्रश्न किया... "सब कुछ चेक कर लिया ना...? कुछ रह तो नहीं गया...?" क्या जबाब देते कि... *अब छूटने को* *बचा ही क्या है...!* 😑 *सेवानिवृत्ति* की शाम पी.ए. ने याद दिलाया... "चेक कर लें सर...! कुछ रह तो नहीं गया...? " थोड़ा रूका और सोचा कि पूरी जिन्दगी तो यहीं आने-जाने में बीत गई... *अब और क्या रह गया होगा...?* 😑 *श्मशान* से लौटते वक्त बेटे ने एक बार फिर से गर्दन घुमाई एक बार पीछे देखने के लिए... पिता की चिता की सुलगती आग देखकर मन भर आया... भागते हुए गया पिता के चेहरे की झलक तलाशने की असफल कोशिश की और वापिस लौट आया। दोस्त ने पूछा... "कुछ रह गया था क्या...?" भरी आँखों से बोला... *नहीं कुछ भी नहीं रहा अब...* *और जो कुछ भी रह गया है...* *वह सदा मेरे साथ रहेगा...!* 😑 *एक* बार समय निकालकर सोचें, शायद... पुराना समय याद आ जाए, आंखें भर आएं और... *आज को जी भर जीने का* *मकसद मिल जाए...!* सभी दोस्तों से ये ही बोलना चाहता हूँ... *यारों क्या पता कब* *इस जीवन की शाम हो जाये...!* इससे पहले कि ऐसा हो सब को गले लगा लो, दो प्यार भरी बातें कर लो... *ताकि कुछ छूट न जाये...!!!* 🙏 🙏

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*मृत्यु के समय रावण की उम्र कितनी थी और रावण का गोत्र कौन सा था भगवान राम और हनुमान जी के विषय में भी जानिए* इसको समझने के लिए हमें अपना दिमाग थोड़ा खोलना होगा क्योंकि समय की जिस गणना की बात हम कर रहे हैं उसे आज का विज्ञान नही समझ सकता। पहली बात तो ये कि जब कोई कहता है कि रामायण 14000 वर्ष पहले की कथा है तो ये याद रखिये कि ये वैज्ञानिकों ने आधुनिक गणना के अनुसार माना है। अगर वैदिक गणना की बात करें तो रामायण का काल खंड बहुत पहले का है। आइये इसे समझते हैं। *🌺पहले तो इस बात को जान लीजिए कि रावण की वास्तविक आयु के बारे में किसी ग्रंथ में कोई वर्णन नही दिया गया है।* मैंने काफी जगह कई उत्तर देखे कि रावण तो 20 लाख वर्ष का था, किसी ने कहा वो 80 लाख वर्ष का था या कुछ और। एक बात समझ लें कि अगर कोई रावण की वास्तविक आयु बता रहा है तो वो झूठ बोल रहा है। रामायण में ना रावण की आयु और ना ही श्रीराम की आयु के बारे में कुछ कहा गया है। लेकिन इन दोनों के शासनकाल के विषय मे जानकारी दी गयी है जिससे हम इनकी आयु का केवल अंदाजा लगा सकते हैं। पर इससे पहले कि हम उनकी आयु के विषय मे जाने, बस सरसरी तौर पर पौराणिक काल गणना समझ लेते हैं क्योंकि विस्तार से तो इस लेख में बताना संभव नही। *🌷त्रेतायुग 3600 दिव्य वर्षों का था। एक दिव्य वर्ष 360 मानव वर्षो के बराबर होता है। इस हिसाब से त्रेतायुग का कुल काल हमारे समय के हिसाब से 3600 × 360 = 1296000 (बारह लाख छियानवे हजार)* *मानव वर्षों का था। इस गणना को याद रखियेगा ताकि आगे की बात समझ सकें।* *💐रावण त्रेतायुग के अंतिम चरण के मध्य में पैदा हुआ था और श्रीराम अंतिम चरण के अंत मे। त्रेता युग मे कुल तीन चरण थे। रामायण में ये वर्णन है कि रावण ने अपने भाइयों (कुम्भकर्ण एवं विभीषण) के साथ 11000 वर्षों तक ब्रह्माजी की तपस्या की थी। इसके पश्चात रावण और कुबेर का संघर्ष भी बहुत काल तक चला।* *इसके अतिरिक्त रावण के शासनकाल के विषय मे कहा गया है कि रावण ने कुल 72 चौकड़ी तक लंका पर शासन किया। एक चौकड़ी में कुल 400 वर्ष होते हैं। तो इस हिसाब से रावण ने कुल 72 × 400 = 28800 वर्षों तक लंका पर शासन किया।* *इसके अतिरिक्त रामायण में ये वर्णित है कि जब रावण महादेव से उलझा और महादेव ने उसके हाथ कैलाश के नीचे दबा दिए तब रावण 1000 वर्षों तक उनसे क्षमा याचना (उनकी तपस्या) करता रहा और उसी समय उसने शिवस्त्रोत्रतांडव की रचना की।* हालांकि ऐसा उसके लंका शासनकाल में ही हुआ इसीलिए इसे मैं अलग से नही जोड़ रहा। तो रावण के शासनकाल और तपस्या के वर्ष मिला दें तो 11000 + 28800 = 39800 वर्ष तो कहीं नही गए। तो इस आधार पर हम ये कह सकते हैं कि रावण की आयु कम से कम 40000 वर्ष तो थी ही (उससे भी थोडी अधिक हो सकती है)। अर्थात वो करीब 112 दिव्य वर्षों तक जीवित रहा। श्रीराम और माता सीता के विषय मे वाल्मीकि रामायण मे कहा गया है कि देवी सीता श्रीराम से 7 वर्ष 1 माह छोटी थी। श्रीराम विवाह के समय 25 वर्षों के थे तो इस हिसाब से माता सीता की आयु उस समय 18 वर्षों की थी। विवाह के पश्चात 12 वर्षों तक वे दोनों अयोध्या में रहे उसके बाद उन्हें वनवास प्राप्त हुआ। इस हिसाब से वनवास के समय श्रीराम 37 और माता सीता 30 वर्ष की थी। तत्पश्चात 14 वर्षों तक वे वन में रहे और वनवास के अंतिम मास में श्रीराम ने रावण का वध किया। अर्थात 51 वर्ष की आयु में श्रीराम ने 40000 वर्ष के रावण का वध किया। तत्पश्चात श्रीराम ने 11000 वर्षों तक अयोध्या पर राज्य किया। तो उनकी आयु भी हम तकरीबन 11100 वर्ष (30 दिव्य वर्ष) के आस पास मान सकते हैं। रावण का गोत्र उनके पितामह का गोत्र ही था अर्थात पुलत्स्य गोत्र। इस गणना के हिसाब से रावण के अतिरिक्त कुम्भकर्ण, मेघनाद, मंदोदरी इत्यादि की आयु भी बहुत होगी। विभीषण तो चिरंजीवी हैं तो आज भी जीवित होंगे। जाम्बवन्त तो सतयुग के व्यक्ति थे जो द्वापर के अंत तक जीवित रहे, तो उनकी आयु का केवल अनुमान ही लगा सकते हैं। महावीर हनुमान रावण से आयु में छोटे और श्रीराम से आयु में बहुत बड़े थे। वे भी चिरंजीवी हैं तो आज भी जीवित होंगे। परशुराम रावण से आयु में थोड़े छोटे और हनुमान से बड़े थे और वे भी चिरंजीवी हैं। कर्त्यवीर्य अर्जुन आयु में रावण से भी बड़े थे किंतु परशुराम ने अपनी युवावस्था में ही उनका वध कर दिया था। कुछ लोग ये सोच रहे होंगे कि किसी व्यक्ति की आयु इतनी अधिक कैसे हो सकती है। किंतु हमारे पुराणों में चारो युग के मनुष्यों की औसत आयु और कद का वर्णन है। और ये सभी मनुष्यों के लिए है, ना कि केवल रावण और श्रीराम जैसे विशिष्ट लोगों के लिए। हालांकि रावण जैसे तपस्वी और श्रीराम जैसे अवतारी पुरुष की आयु वर्णित आयु से अधिक होने का विवरण है। जैसे जैसे युग अपने अंतिम चरम में पहुंचता है, वैसे वैसे ही मनुष्यों की आयु और ऊंचाई घटती जाती है। अर्थात सतयुग के अंतिम चरण में जन्में लोगों की आयु और ऊंचाई सतयुग के ही प्रथम चरण में जन्में लोगों से कम होगी। आइये इसपर भी एक दृष्टि डाल लेते हैं: *सतयुग: आयु - 100000 वर्ष, ऊंचाई - 21 हाथ* *त्रेतायुग: आयु - 10000 वर्ष, ऊंचाई - 14 हाथ* *द्वापरयुग: आयु - 1000 वर्ष, ऊंचाई - 7 हाथ* *कलियुग: आयु - 100 वर्ष, ऊंचाई - 4 हाथ* *महाभारत में वर्णित है कि रेवती के पिता कुकुद्भि, जो सतयुग से थे, ब्रह्माजी के आदेश पर अपनी पुत्री का विवाह करवाने द्वापर आये। उन्होंने रेवती का विवाह बलराम से कर दिया किन्तु सतयुग की होने के कारण रेवती बलराम से 3–4 गुणा अधिक ऊंची थी। तब बलराम ने अपने हल के दवाब से रेवती की ऊंचाई स्वयं जितनी कर ली।* मैंने, जितना हो सकता था, इस उत्तर को सारगर्भित बनाने का प्रयास किया है। आशा है आपको पसंद आएगा। जय श्रीराम। 🚩 🚩👏🌺🌷💐🌺🌷💐🙏

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Ajay Verma Sep 20, 2020

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Anilkumar Tailor Sep 19, 2020

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