Jay Shree Krishna
Jay Shree Krishna Apr 19, 2019

#सुन्दरकाण्ड_का_इतना_माहात्म्य_क्यों_है? तुलसीदासजी रामकथा लिख रहे थे। हनुमानजी भगवान श्रीराम को अपने आत्मज से ज़्यादा प्रिय थे। प्रभु ने सोचा कि भक्त के मान में मेरा सम्मान है। हनुमानजी के माहात्म्य से संसार को परिचित कराने का ऐसा अवसर कहाँ मिलेगा! प्रभु ने अपना प्रभाव दिखाया। रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड को लिखते-लिखते तुलसी हनुमानजी को श्रीराम के समान सामर्थ्यवान लिख गए। तुलसीबाबा जितनी भी रामकथा लिखते उसे हनुमानजी को सौंप देते। कथा देखने के बाद हनुमानजी अनुमोदन करते थे। कहते हैं सुंदरकांड बजरंग बली भड़क गए कि भक्त को स्वामी के सामान प्रतापी कैसे लिख दिया? आगबबूले होकर वह इसे फाड़ने ही वाले थे कि श्रीराम ने उन्हें दर्शन दिए और कहा- यह अध्याय मैंने स्वयं लिखा है पवनपुत्र, क्या मैं मिथ्या कहूँगा? इस विप्र का क्या दोष? हनुमानजी नतमस्तक हो गए- प्रभु आप कह रहे हैं तो यही सही है। मुझे मानस में सुंदरकांड सर्वाधिक प्रिय रहेगा। इसलिए सुंदरकांड के पाठ का इतना माहात्म्य है। सुन्दरकाण्ड का पाठ करने वाले के कष्ट हरने को तत्पर रहते हैं श्रीहनुमान। यदि रोज़ संभव न हो तो कम से कम मंगलवार या शनिवार को इसका पाठ अवश्य करना चाहिए। ।। जय सियाराम ।। ।। जय जय हनुमान ।।

#सुन्दरकाण्ड_का_इतना_माहात्म्य_क्यों_है?
 
तुलसीदासजी रामकथा लिख रहे थे। हनुमानजी भगवान श्रीराम को अपने आत्मज से ज़्यादा प्रिय थे। प्रभु ने सोचा कि भक्त के मान में मेरा सम्मान है। हनुमानजी के माहात्म्य से संसार को परिचित कराने का ऐसा अवसर कहाँ मिलेगा! प्रभु ने अपना प्रभाव दिखाया। रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड को लिखते-लिखते तुलसी हनुमानजी को श्रीराम के समान सामर्थ्यवान लिख गए। तुलसीबाबा जितनी भी रामकथा लिखते उसे हनुमानजी को सौंप देते। कथा देखने के बाद हनुमानजी अनुमोदन करते थे। कहते हैं सुंदरकांड बजरंग बली भड़क गए कि भक्त को स्वामी के सामान प्रतापी कैसे लिख दिया? आगबबूले होकर वह इसे फाड़ने ही वाले थे कि श्रीराम ने उन्हें दर्शन दिए और कहा- यह अध्याय मैंने स्वयं लिखा है पवनपुत्र, क्या मैं मिथ्या कहूँगा? इस विप्र का क्या दोष? हनुमानजी नतमस्तक हो गए- प्रभु आप कह रहे हैं तो यही सही है। मुझे मानस में सुंदरकांड सर्वाधिक प्रिय रहेगा। इसलिए सुंदरकांड के पाठ का इतना माहात्म्य है। सुन्दरकाण्ड का पाठ करने वाले के कष्ट हरने को तत्पर रहते हैं श्रीहनुमान। यदि रोज़ संभव न हो तो कम से कम मंगलवार या शनिवार को इसका पाठ अवश्य करना चाहिए।

 ।।        जय सियाराम             ।। 
।।         जय जय हनुमान         ।।

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कामेंट्स

Renu Singh Apr 19, 2019
Ram Ram ji Jai hanuman ji 🙏 Shubh ratri vandan Sister ji God bless u and your family be happy Sister ji 🙏 🌸 🙏

Anita Mittal May 21, 2019

🏵🏵मत कर चिंता कुछ न मिलेगा , चिंता चित जलाये नाम सुमिर ले राम का , ये बिगड़े काम बनाये 🏵🏵 🌹🌹जय श्री राम 🌹🌹 🌻🌻गुरु वशिष्ठ का विचित्र संकल्प 🌻🌻 '''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''' श्री रामचंद्र ने अश्वमेध यज्ञ किया , जिसमें उन्होंने सर्वस्व दान कर दिया । उन्होंने घोषणा की कियदि कोई अयोध्या का राज्य , कौस्तुभ मणि , पुष्पक विमान , कामधेनु गाय अथवा सीता को भी माँगेगा , तो मैं सहर्ष दे दूँगा । वशिष्ठ जी ने कुछ सोचकर राम से कहा , यह गोदान क्या कर रहे हो ! यदि देना ही है , तो सर्वालंकारमंडिता सीता को ही दान करो । यह सुनकर जनता में हाहाकार मच गया । कुछ लोग कहने लगे कि क्या गुरु वशिष्ठ पागल हो गये हैं ? जबकि कुछ ने माना कि मुनि केवल विनोद कर रहे हैं । इस बीच श्रीराम जी ने हँसकर सीता जी को बुलाया । उनका हाथ पकड़ कर मुनि वशिष्ठ जी से कहने लगे , आप स्त्री दान का मंत्र बोलें , मैं सीता को दान कर रहा हूँ । वशिष्ठ जी ने यथा विधि यह काम सम्पन्न किया । वशिष्ठ जी ने सीता को अपने पीछे बैठने को कहा । फिर श्रीराम ने मुनि से कहा , अब कामधेनु गाय भी ले लीजिए । इसपर मुनि वशिष्ठ बोले , राम ! मैने केवल तुम्हारे औदार्य प्रदर्शन के लिये यह कौतूहल रचा था । अब सीता का आठ गुना सोना तोलकर तुम इन्हें वापिस ले लो और आज से कामधेनु , सीता , कौस्तुभ मणि , पुष्पक विमान तथा संपूर्ण राज्य किसी को देने का नाम मत लेना । भगवान ने वैसा ही किया और निरलंकार केवल दो वस्त्रों के साथ सीता को लौटा लिया । आकाश से पुष्पवृष्टि होने लगी । जयजयकार की ध्वनि से दशों दिशायें भर गयी । 🌻🌻रामजी का कृपाप्रसाद आपके साथ बना रहे जी 🌻🌻 🌹🌹जय श्री राम जी 🌹🌹 🌹🌹जय हनुमानजी 🌹🌹

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