Ashish Singh
Ashish Singh Sep 25, 2017

Maa katyayani namo namah

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BISHAMBER MEHRA May 30, 2020

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😀😀खुश खबर 😀😀😀 मन्दिर परिवार के सभी आदरणीय भाइयों एवं सम्मानीय बहनो को सादर प्रणाम नमस्कार 🙏🙏🌀🌀🌀🌀🌀🌀🌀 बहुत खुशी की बात है मन्दिर टीम ने हम भाई बहनो की भावनाओं को समझा है और मन्दिर को आज बंद करने की बजाय 15 जून को मन्दिर बंद करने का निर्णय लिया है 👉👉👉मन्दिर परिवार के सभी भाई बहनों की तरफ से माय मंदिर टीम को बहुत बहुत धन्यावाद देना चाहता हूँ और हम सभी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं हमारी आस्था का केंद्र हमारा मन्दिर कभी बंद नहीं हो 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 सभी भाई बहनों से अनुरोध है अभी हमारे पास 15 दिन शेष है खूब दिल खोलकर पोस्ट कीजिये 🙏⚓⚓⚓⚓⚓⚓⚓ 👉👉👉आपका अपना भाई 🙏🙏🙏 ⚓⚓⚓भारत राठौर 9926060905 ⚓

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jawahar May 30, 2020

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Manoj manu May 30, 2020

🚩🙏🌺राधे राधे जी 🌺🌿🙏 आत्म चिंतन :- इस धरा पर और संपूर्ण बृंह्मड में, कही न कहीं नव सृजन चलता ही रहता है,यह एक चक्रीय क्रम है, प्रतेक शुरुआत का पहला कदम उठता है ,और वही कदम नयी मंज़िल तक के सफ़र को पूरा करने बाला भी होता है, महत्व पूर्ण यह नहीं कि अंत सुखद हुआ या दुखद ,वरन् महत्व पूर्ण यह है कि उस अंत होने की प्रक्रिया में हमने क्या और कितना प्राप्त किया और अपनाया, अर्थात प्ररेक अंत ही एक नये सृजन का जन्म दाता होता है, चाहे वो एक किसान की भूमि हो, या फिर हमारी किन्हीं क्रियाओं के परिणाम , एकदम चक्रकीय क्रम में , किसी साधक के लिए किसी भी प्रकार के ज्ञान की प्राप्ति के लिए उसके अपने चुनाव होते हैं -अपने साधन होते हैं , पर ज्ञान तो अनंत है,कभी बाहरी तो कभी आँतरिक, अब प्रश्न सामने आता है कि हम कैसे बाहरी और आंतरिक ज्ञान प्राप्त करें, कैसे अपने जीवन को सार्थक करें, -पहली बात तो यह कि हमें वर्तमान की स्वयं के मन भावों एवं क्षमताओं को समझना होगा, -फिर अपनी प्राथमिकतायें तय करनी होंगी , -अब इनकी प्राप्ति के लिए उचित समय पर उचित साधन के साथ जुड़ना होगा, -वह अपने आराध्य अपने गुरु या फिर कोई मंत्र या फिर कोई भाव या कोई क्रिया भी हो सकता है, -किसी भी प्रकार के भ्रम से बाहर आना होगा, -वास्तविक स्थिति और सत्य को हर हाल में स्वीकारना करके आगे बढना होगा, -अब आगे बढ़ने की बात आती है तो -किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह बहुत महत्व पूर्ण है कि हमको स्वयं के साथ -साथ अपने साधन पर पूर्ण विश्वास रखना होगा, -निरंतरता रखना और पूर्ण समर्पण करना होगा, -केवल अपनी क्रिया अपने कर्म पर ध्यान रखना होगा, -किभी उपलब्धि की प्राप्ति के लिए हर हाल में धैर्य रखना होगा , -अपने मन की संकल्प की शक्ति को -निरंतन स्वयं के द्धारा चुनौती देते रहने होगी, -निरंतन स्वयं से मिलना होगा -अपने मन से -अपने भावों से,आत्म मंथन करते रहना होगा, -न्यूनतम में अधिकतन की प्राप्ति को वरीयता देनी होगी, अनावश्यक चीज़ों को छोड़ना होगा , इस समस्त प्रकिया में जो ज्ञान की प्राप्ति होगी वही हमें आगे की राह भी दिखाती जायेगी, और हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पायेंगे,🌺🌿 🙏🌺जय जय श्री राधे जी 🌺🙏

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mukesh kumar May 30, 2020

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Bapu.N.D May 30, 2020

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guruji May 30, 2020

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विनयo May 30, 2020

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