Sanjay Singh
Sanjay Singh Mar 25, 2020

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कामेंट्स

🌹राजकुमार राठोड 🌹 Mar 26, 2020
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं।

madanpal singh Mar 26, 2020
jai Mata Diiiiiiiiii 🌹 Shubh parbhat jiiií Mata Rani ki karpa sadev AAP v aapka pariwar par bani rahe jiii 🌷 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹 🕉️🌹

Neha Sharma, Haryana Mar 26, 2020
🕉️ जय माता दी 🚩🥀🙏 शुभ गुरुवार माता रानी 👣 की असीम कृपा ✋ आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी 🙏🥀 आप सभी भाई-बहनों का हर पल शुभ व मंगलमय 🔯 हो जी 🙏🥀🙋

Dr.ratan Singh Mar 26, 2020
🌹🌿 ॐ विष्णु देवाय नमः🌿🌹 🚩👣जय माता दी वंदन भाई👣🚩 🎎आप और आपके पूरे परिवार पर मां ब्रह्मचारिणी देवी श्री व हरि विष्णु जी और साईं बाबा की कृपा दृष्टि सदा बनी रहे जी🙏 🎭आपका गुरुवार नवरात्रि का दूसरा दिन शुभ शांतिमयऔर मंगलमय व्यतीत हो जी 🙏 🍑🌲🌺ॐ साईं राम🌺🌲🍑

9⃣5⃣7⃣4⃣4⃣2⃣2⃣4⃣2⃣2⃣🔐 Mar 26, 2020
जय माता महालक्ष्मी माँ नमो नमः शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद अति सुन्दर 🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌🕉🌞

BIJAY PANDAY May 8, 2020

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ShubhAm SaiNi May 8, 2020

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🌹🙏जय माता दी 🌹🙏 *🔴भक्त और भगवान🙏* ************************ दो भक्त थे । एक भगवान् श्रीरामका भक्त था, दूसरा भगवान् श्रीकृष्ण का । दोनों अपने-अपने भगवान् (इष्टदेव)-को श्रेष्ठ बतलाते थे । एक बार वे जंगल में गये। वहाँ दोनों भक्त अपने-अपने भगवान को पुकारने लगे। उनका भाव यह था कि दोनों में से जो भगवान् शीघ्र आ जायँ वही श्रेष्ठ हैं। भगवान् श्रीकृष्ण शीघ्र प्रकट हो गये। इससे उनके भक्त ने उन्हें श्रेष्ठ बतला दिया। थोड़ी देर में भगवान् श्रीराम भी प्रकट हो गये। इसपर उनके भक्त ने कहा कि आपने मुझे हरा दिया; भगवान् श्रीकृष्ण तो पहले आ गये, पर आप देर से आये, जिससे मेरा अपमान हो गया ! ***** भगवान् श्रीराम ने अपने भक्तसे पूछा‒‘तूने मुझे किस रूप में याद किया था ?’ भक्त बोला ‘राजाधिराज के रूप में।’ तब भगवान् श्रीराम बोले‒‘बिना सवारी के राजाधिराज कैसे आ जायँगे। पहले सवारी तैयार होगी, तभी तो वे आयँगे !’ कृष्ण-भक्त से पूछा गया तो उसने कहा‒‘मैंने तो अपने भगवान् को गाय चराने वाले के रूप में याद किया था कि वे यहीं जंगलमें गाय चराते होंगे।’ इसीलिये वे पुकारते ही तुरन्त प्रकट हो गये। **** दुःशासन के द्वारा भरी सभा में चीर खींचे जाने के कारण द्रौपदी ने ‘द्वारकावासिन् कृष्ण’ कहकर भगवान् को पुकारा, तो भगवान् के आने में थोड़ी देर लगी। इस पर भगवान् ने द्रौपदी से कहा कि तूने मुझे ‘द्वारकावासिन्’ (द्वारका में रहने वाले) कहकर पुकारा, इसलिये मुझे द्वारका जाकर फिर वहाँ से आना पड़ा। यदि तुम कहती कि यहीं से आ जाओ तो मैं यहीं से प्रकट हो जाता। भगवान् सब जगह हैं। जहाँ हम हैं, वहीं भगवान् भी हैं। भक्त जहाँ से भगवान् को बुलाता है, वहीं से भगवान् आत हैं। भक्त की भावना के अनुसार ही भगवान् प्रकट होते हैं।

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kamlash May 8, 2020

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