मायमंदिर फ़्री कुंडली
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Jai shree krishna g🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏

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Kamlesh Rathore Jun 12, 2019
Jay Shri Radhe Krishna ji. Good afternoon ji 🙏🙏 Have nice day

anita sharma Jun 24, 2019

🔔भगवान को पाने का तरीका🔔 भगवान को पाना आसान भी नहीं है और मुश्किल भी नहीं है। कितना अच्छा होता ना की जैसे संसार में हमे कुछ लेना है तो रुपये देकर खरीद लेते हैं। काश! ऐसा ही भगवान के साथ भी हो जाये। सच कहूँ तो भगवान को बिकने के लिए तैयार है लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है। उनकी कीमत क्या है ? भगवान को पाने का सिर्फ एक और सिर्फ एक ही तरीका है। वो है प्रेम। जिसे आप भक्ति भी कह सकते हैं। प्रेम तीन प्रकार से होता है। व्यक्ति से, वस्तु से और परमात्मा से। व्यक्ति से तो आपने कभी ना कभी प्रेम किया होगा, और शायद करते भी होंगे। दूसरा वस्तु से, आजकल सभी करते हैं, अपने स्कूटर से, गाडी से, बाइक से और सबसे ज्यादा अपने स्मार्टफोन से। लेकिन ये सारा प्रेम बेकार हो जायेगा। आप परमात्मा से प्रेम कीजिये। आज जानते हैं प्रेम में कितनी ताकत हैं। शायद किसी भी चीज में नही हैं। श्री राधा रानी को आप देखिये। कृष्ण जी से प्रेम किया और भगवान आज राधा रानी के वश में हैं। अगर आप भगवान से प्रेम करते हैं तो आप सबसे प्रेम कीजिये। ऐसा प्रेम जिसमे कोई मांग नही हैं। जिसमे अपनी प्रेमी को सुख देना हैं सिर्फ। अपने सुख की कामना नहीं हैं। अगर अपने सुख की कामना हैं तो वह प्रेम नहीं हैं। वो स्वार्थ हैं। श्री राम चरितमानस में यही बात आती है, जो राम जी हैं ना उन्हें केवल प्रेम ही प्यारा है। जो जानना चाहता हो वो जान ले। एकदम सच बात है सबरी के बेर राम ने प्रेम में ही तो खाये थे। हमे कोई झूठे बेर खाने को दे तो क्या हम खाएंगे? कभी नही खाएंगे, लेकिन भगवान राम कुछ भी नही देखते यदि आपके अंदर प्रेमहै तो आप भगवान को आसानी से पा लोगे। एक बड़ी अच्छी बात आती है– हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥ भगवान सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं। और ये बात भगवान भोले नाथ ने रामचरितमानस में देवताओं को कही है!

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Gishi Harwansh Jun 24, 2019

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अंतरंग या साक्षात भजन ही श्रेष्ठ लक्ष्य एक है साक्षात भजन । अर्थात नवविधा भक्ति । और नवविधा भक्ति पूर्ण नाम हैत हैय । नाम जप या नाम संकीर्तन ही देखा जाए तो कलयुग का साक्षात भजन है ।क्योंकि नाम और नामी अभिन्न है । अपितु हरि से बड़ा हरि का नाम । कलौ केशव कीर्तनात । कुल मिलाकर नाम में निष्ठा । नाम जप । नाम संकीर्तन और यदि प्रभु कृपा करें तो धाम का वास । यह दो चीज हमे यदि प्राप्त हो गई तो समझिए बहुत कुछ प्राप्त हो गया अब प्रश्न उठता है कि इन दो चीजों के अलावा जो चीजें हैं वह क्या भजन नहीं है । नहीं ऐसा नहीं है जेसे यदि हम कहें कि हमारी तो डॉक्टरेट या ph D हो गयी तो इसका अर्थ यह स्वाभाविक ही है कि कक्षा 2 भी पास हो गई । कक्षा आठ भी पास हो गई । इंटर भी पास हो गया । b.a. भी पास हो गई ह । ये सारी भक्ति की अनुकूल क्रियाएं हैं । ज्यादातर हम लोग भक्ति की अनुकूल क्रियाओं में ही फंसे रह जाते हैं और उसे ही भक्ति मानने लग जाते हैं नाम भी करते तो हैं लेकिन प्राथमिकता उन्हीं बाह्य क्रियाओं पर रहती है और उन के चक्कर में कभी कभी हमारा नाम और मूल भजन छूट जाता है और धाम वास को भी हम सेकेंडरी कर देते हैं भक्ति की अनुकूल जो जो क्रियाएं हैं इनका निषेध बिल्कुल नहीं है । यह वैसे ही है जैसे इंटर करने के लिए आठवीं कक्षा पास करना । लेकिन आठवीं में ही रुके रहना या इन क्रियाओं में ही अटके रहना और नाम के प्रति निष्ठावान ना होना नाम का छूट जाना उचित नहीं । यह क्रियाएं हैं जीवो पर दया प्रचार शिष्य बनाना दैन्य विनम्रता प्रभात फेरी धार्मिक आयोजन वैष्णव सेवा गंगा यमुना स्नान तीर्थ यात्रा दीपदान परिक्रमा एवम् विभिन्न दर्शन यज्ञ लंगर छबील गोदान कर्मकांड पुन्य सदाचार आदि आदि यह सब क्रियाएं इसलिए हैं कि हमारी नाम में या साक्षात भक्ति में रुचि हो । निष्ठा हो । वृद्धि हो । यदि यह सब क्रियाएं हो रही हैं और नाम में निष्ठा व रूचि की वृद्धि नहीं हो रही है तो हमें सावधान होना चाहिए नाम में वृद्धि हो और यह सब छूट भी जाए तो भी कोई बात नहीं । ठीक वैसे जैसे इंटर में आने पर नवमी दशमी 11वीं कक्षा अपने आप छूट जाती है गुजरना जरूर वहां से पड़ता है । लेकिन वहां अटकना नहीं होता । हम चिंतन करें हम बढ़ रहे हैं ना । अटक तो नहीं गए इन बाह्य या सहायक क्रियाओं में ? समस्त वैष्णव जन को मेरा सादर प्रणाम जय श्री राधे जय निताई 🖋लेखक - दासाभास डॉ गिरिराज नांगिया LBW- Lives Born Works at Vrindaban

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Gishi Harwansh Jun 24, 2019

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anita sharma Jun 24, 2019

🔔भगवान को पाने का तरीका🔔 भगवान को पाना आसान भी नहीं है और मुश्किल भी नहीं है। कितना अच्छा होता ना की जैसे संसार में हमे कुछ लेना है तो रुपये देकर खरीद लेते हैं। काश! ऐसा ही भगवान के साथ भी हो जाये। सच कहूँ तो भगवान को बिकने के लिए तैयार है लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है। उनकी कीमत क्या है ? भगवान को पाने का सिर्फ एक और सिर्फ एक ही तरीका है। वो है प्रेम। जिसे आप भक्ति भी कह सकते हैं। प्रेम तीन प्रकार से होता है। व्यक्ति से, वस्तु से और परमात्मा से। व्यक्ति से तो आपने कभी ना कभी प्रेम किया होगा, और शायद करते भी होंगे। दूसरा वस्तु से, आजकल सभी करते हैं, अपने स्कूटर से, गाडी से, बाइक से और सबसे ज्यादा अपने स्मार्टफोन से। लेकिन ये सारा प्रेम बेकार हो जायेगा। आप परमात्मा से प्रेम कीजिये। आज जानते हैं प्रेम में कितनी ताकत हैं। शायद किसी भी चीज में नही हैं। श्री राधा रानी को आप देखिये। कृष्ण जी से प्रेम किया और भगवान आज राधा रानी के वश में हैं। अगर आप भगवान से प्रेम करते हैं तो आप सबसे प्रेम कीजिये। ऐसा प्रेम जिसमे कोई मांग नही हैं। जिसमे अपनी प्रेमी को सुख देना हैं सिर्फ। अपने सुख की कामना नहीं हैं। अगर अपने सुख की कामना हैं तो वह प्रेम नहीं हैं। वो स्वार्थ हैं। श्री राम चरितमानस में यही बात आती है, जो राम जी हैं ना उन्हें केवल प्रेम ही प्यारा है। जो जानना चाहता हो वो जान ले। एकदम सच बात है सबरी के बेर राम ने प्रेम में ही तो खाये थे। हमे कोई झूठे बेर खाने को दे तो क्या हम खाएंगे? कभी नही खाएंगे, लेकिन भगवान राम कुछ भी नही देखते यदि आपके अंदर प्रेमहै तो आप भगवान को आसानी से पा लोगे। एक बड़ी अच्छी बात आती है– हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥ भगवान सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं। और ये बात भगवान भोले नाथ ने रामचरितमानस में देवताओं को कही है!

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Ritu Sen Jun 25, 2019

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Ramesh Agarwal Jun 25, 2019

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Lakhi Jhunjhunwala Jun 26, 2019

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