shivpratapsingh
shivpratapsingh Apr 16, 2021

0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Harvinder Kr Aligadh May 17, 2021

+27 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 106 शेयर
Ravita Devi May 17, 2021

+17 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 15 शेयर

मन ही मन भगवान से क्या बातें करें...क्या मांगे. 1.हे मेरे स्वामी.मेरी इच्छा कभी पूर्ण न हो सदैव आपकी ही इच्छा पूर्ण हो.क्योंकि मेरे लिए क्या सही है ये मुझसे बेहतर आप जानते हैं. 2.हे नाथ!मेरे मन,कर्म और वचन से कभी किसी को भी थोड़ा सा भी दुःख न पहुँचे यह कृपा बनाये रखे. 3.हे नाथ!मैं कभी न पाप करूँ, न होता देखूं सुनू और न ही कभी किसी के पाप का बखान करूँ. 4.हे नाथ!शरीर के सभी इन्द्रियों से आठो पहर केवल आपके प्रेम भरी लीला का ही आस्वादन करता रहूँ. 5.हे नाथ!प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थिति में भी आपके मंगलमय विधान देख सदैव प्रसन्न रहूँ. 6.हे नाथ!अपने ऊपर महान से महान विपत्ति आने पर भी दूसरों को सदैव सुख ही दिया करू. 7.हे नाथ! अगर कभी किसी कारणवश मेरे वजह से किसी को दुःख पहुँचे तो उसी समय उससे हाथ जोड़कर क्षमा माँग लू. 8.हे नाथ!आठो पहर रोम रोम से केवल आपके नाम का ही जप होता रहे. 9.हे नाथ मेरे आचरण श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस के अनुकूल हो. 10.हे नाथ!हर एक परिस्थिति में मुझे आपके ही दर्शन हो। सांवरिया प्रेम सुधा रस।

+46 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 74 शेयर
Meena Sharma May 17, 2021

+24 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 35 शेयर
Manju_chuahan_ May 17, 2021

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 20 शेयर
Soni Mishra May 17, 2021

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 16 शेयर
rajni sharma May 17, 2021

Radhy radhy ji Aap sab ko parnam 🙏 वैशाख के महीने में श्री श्री तुलसी जल दान का महत्व वैशाख के महीने में क्योंकि सूर्य के ताप में वृद्धि हो जाती है, इसलिए विष्णु के भक्त गणों को जल दान करने से श्रीहरि अत्यंत अत्यंत प्रसन्न होते हैं। भगवान श्री हरि कृपा करके उनसे अभिन्न तुलसी वृक्ष को जल दान का एक सुयोग अथवा शुभ अवसर प्रदान करते हैं। लेकिन तुलसी को जल दान क्यों करना चाहिए ? तुलसी श्रीकृष्ण की प्रेयसी हैं, उनकी कृपा के फल से ही हम भगवान श्री कृष्ण के सेवा का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। तुलसी देवी के संबंध में कहा गया है तुलसी के दर्शन मात्र से ही संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं , जल दान करने से यम भय दूर हो जाता है, रोपण करने से यानी उनको बोने से उनकी कृपा से कृष्ण भक्ति वृद्धि होती है और श्रीहरि के चरण में तुलसी अर्पण करने से कृष्ण प्रेम प्राप्त होता है । पद्मपुराण के सृष्टि खंड में वैष्णव श्रेष्ठ श्री महादेव अपने पुत्र कार्तिक को कहते है " सर्वेभ्य पत्र पुस्पेभ्य सत्यमा तुलसी शीवा सर्व काम प्रदत्सुतधा वैष्णवी विष्णु सुख प्रिया " समस्त पत्र और पुष्प में तुलसी सर्वश्रेष्ठ हैं। तुलसी सर्व कामना प्रदान करने वाली, मंगलमय, श्रुधा, शुख्या, वैष्णवी, विष्णु प्रेयसी एवं सभी लोको में परम शुभाय है। भगवान शिव कहते हैं , "यो मंजरी दलरे तुलस्या विष्णु मर्त्ये तस्या पुण्य फलम कर्तितुम नैव शक्तते तत्र केशव सानिध्य यात्रस्ती तुलसी वनम तत्रा ब्रह्म च कमला सर्व देवगने " हे कार्तिक! जो व्यक्ति भक्ति भाव से प्रतिदिन तुलसी मंजरी अर्पण कर भगवान श्रीहरि की आराधना करता है , यहां तक कि मैं भी उसके पुण्य का वर्णन करने में अक्षम हूं। जहां भी तुलसी का वन होता है भगवान श्री गोविंद वही वास करते हैं और भगवान गोविंद की सेवा के लिए लक्ष्मी ब्रह्मा और सारे देवता वही वास करते हैं। मूलतः भगवान श्री कृष्ण ने जगत में बध जीव गणों को उनकी सेवा करने का शुभ अवसर प्रदान करने के लिए , भगवान श्री कृष्ण ही तुलसी रूप में आविर्भूत हुए है, एवं उन्होंने तुलसी पौधे को सर्वाधिक प्रिय रूप में स्वीकार किया है । पताल खंड में यमराज ब्राह्मण को तुलसी की महिमा का वर्णन करते हैं वैशाख में तुलसी पत्र द्वारा श्री हरि की सेवा के प्रसंग में वह कहते हैं कि जो व्यक्ति संपूर्ण वैशाख मास में अनन्य भक्ति भाव से तुलसी द्वारा त्री संध्या भगवान श्रीकृष्ण की अर्चना करता है उस व्यक्ति का और पुनर्जन्म नहीं होता । तुलसी देवी की अनंत महिमा अनंत शास्त्रों में अनंत शास्त्रों में वर्णित है लेकिन यह महिमा असीमित है अनंत है-‐-----//

+22 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Vandana Singh May 17, 2021

+7 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 2 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB