Amit Singh
Amit Singh Dec 24, 2017

रविवार की कथा 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯

रविवार की कथा  🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯

प्राचीन काल में एक बुढ़िया थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती थी।
रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर बुढ़िया स्नानादि से निवृत्त होकर, आंगन को गोबर से लीपकर, स्वच्छ करती तदोपरांत सूर्य भगवान की पूजा करती तथा कथा सुनकर सूर्य भगवान को भोग लगाकर दिन में एक समय भोजन करती। इसी तरह रविवार का व्रत करती। सूर्य भगवान की कृपा से बुढ़िया को किसी प्रकार की कोई चिन्ता व कष्ट नहीं था। उसका घर धन-धान्य से भरा हुआ था। उस बुढ़िया को सुखी देख उसकी पड़ोसन उससे बहुत जलती। बुढ़िया रोजाना पड़ोसन के आंगन में बंधी गाय का गोबर लाती और अपना घर लीपती।
शनिवार के दिन रात को पड़ोसन ने अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया ताकि बुढ़िया अपना घर न लीप सके। रविवार को गोबर न मिलने से बुढ़िया अपना आंगन नहीं लीप सकी। आंगन न लीप पाने के कारण उस बुढ़िया ने सूर्य भगवान को भोग भी नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया। सूर्यास्त होने पर बुढ़िया भूखी-प्यासी सो गई। रात्रि में सूर्य भगवान ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और व्रत न करने तथा उन्हें भोग न लगाने का कारण पूछा। बुढ़िया ने बहुत ही करुण स्वर में पड़ोसन के द्वारा घर के अन्दर गाय बांधने और गोबर न मिल पाने की बात बोली।
सूर्य भगवान ने अपनी अनन्य भक्त बुढ़िया की परेशानी का कारण जानकर उसके सब दु:ख दूर करते हुए कहा, हे माता, तुम प्रत्येक रविवार को मेरी पूजा और व्रत करती हो। मैं तुमसे अति प्रसन्न हूं और तुम्हें ऐसी गाय प्रदान करता हूं जो तुम्हारे घर-आंगन को धन-धान्य से भर देगी। तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूरी होगी। स्वप्न में उस बुढ़िया को ऐसा वरदान देकर सूर्य भगवान अंतरध्यान हो गए। प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उस बुढ़िया की आंख खुली तो वह अपने घर के आंगन में सुन्दर गाय और बछड़े को देखकर हैरान हो गई।
गाय को आंगन में बांधकर उसने जल्दी से उसे चारा लाकर खिलाया। पड़ोसन ने उस बुढ़िया के आंगन में बंधी सुन्दर गाय और बछड़े को देखा तो वह उससे और अधिक जलने लगी। तभी गाय ने सोने का गोबर किया। गोबर को देखते ही पड़ोसन की आंखें फट गईं। पड़ोसन ने उस बुढ़िया को आसपास न पाकर तुरन्त उस गोबर को उठाया और अपने घर ले गई तथा अपनी गाय का गोबर वहां रख आई। सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिनों में धनवान हो गई। गाय प्रति दिन सूर्योदय से पूर्व सोने का गोबर करती और बुढ़िया के उठने के पहले ही पड़ोसन उस गोबर को उठाकर ले जाती। बहुत दिनों तक बुढ़िया को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता ही नहीं चला। बुढ़िया पहले की तरह हर रविवार को भगवान सूर्यदेव का व्रत करती रही और कथा सुनती रही।
सूर्य भगवान को जब पडोसन की चालाकी का पता चला तो उन्होंने एक दिन तेज आंधी चलाई। आंधी का प्रकोप देखकर बुढ़िया ने अपनी गाय को घर के भीतर बाँध दिया। अब पडोसन सोने का गोबर न ले जा सकी। सुबह उठकर बुढ़िया ने सोने का गोबर देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उस दिन के बाद बुढ़िया गाय को घर के भीतर बाँधने लगी। सोने के गोबर से कुछ ही दिनों में वह बुढ़िया बहुत धनी हो गई।
बुढ़िया के धनी होने से पडोसन और बुरी तरह जल-भुनकर राख हो गई। अबकी बार उसने अपने पति को नगर के राजा के पास भेजा और बुढ़िया के पास सोने का गोबर देने वाली गाय के बारे में बताया। राजा ने अपने सैनिक भेजकर बुढ़िया की गाय लाने का आदेश दे दिया।
सैनिक बुढ़िया के घर पहुँचे। उस समय बुढ़िया सूर्य भगवान को भोग लगाकर स्वयं भोजन ग्रहण करने वाली थी। राजा के सैनिक जबर्दस्ती गाय और बछडे को महल की ओर ले चले। बुढ़िया ने प्रार्थना की, बहुत रोई-चिल्लाई लेकिन राजा के सैनिक नहीं माने। गाय व बछडे के चले जाने से बुढ़िया को बहुत दु:ख हुआ। उस दिन उसने कुछ नहीं खाया और भूखी-प्यासी सारी रात सूर्य भगवान से गाय व बछडे को लौटाने के लिए प्रार्थना करती रही।
गाय देखकर राजा बहुत खुश हुआ। सुबह जब राजा ने सोने का गोबर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उधर सूर्य भगवान को भूखी-प्यासी बुढ़िया को इस तरह प्रार्थना करते देख उस पर बहुत दया आई। उसी रात सूर्य भगवान ने राजा को स्वप्न में कहा- राजन्! बुढ़िया की गाय व बछडा तुरंत लौटा दो, नहीं तो तुम पर विपत्तियों का पहाड टूट पडेगा। तुम्हारे राज्य में भूकम्प आएगा। तुम्हारा महल नष्ट हो जाएगा।
सूर्य भगवान के स्वप्न से बुरी तरह भयभीत राजा ने प्रात: उठते ही गाय और बछडा बुढ़िया को लौटा दिया। राजा ने अपनी तरफ से भी बहुत-सा धन देकर बुढ़िया से अपनी गलती के लिए क्षमा माँगी। राजा ने पडोसन और उसके पति को उनकी इस दुष्टता के लिए दंड भी दिया।
इसके बाद राजा ने राज्य में घोषणा करवाई कि सभी स्त्री-पुरुष रविवार का व्रत करें। जनता ने भी ऐसा ही किया। रविवार का व्रत करने से सभी लोगों के घर धन-धान्य से भर गए। चारों ओर खुशहाली छा गई।

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कामेंट्स

Mani Rana Dec 24, 2017
. nice ji Radhe Radhe ji good afternoon ji

Babbu Dixit Dec 25, 2017
जय माता दी रविवार व्रत कथा की जय

Amit Singh Dec 25, 2017
@babbu.dixit सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

Amit Singh Dec 25, 2017
@fateshkumarthaiyat सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

Amit Singh Dec 25, 2017
@ulavahitesh सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

Amit Singh Dec 25, 2017
@manirana सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

Pranam Bell Tulsi +75 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 568 शेयर

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RACHNA JERATH Dec 10, 2018

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pari singh piya Dec 10, 2018

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Laxmi Chhaya Dec 10, 2018

खूब पानी पियें, खूब स्वस्थ रहें
राधे राधे राधे राधे राधे राधे

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Sunil Jhunjhunwala Dec 10, 2018

Goodnight : Sunil Jhunjhunwala
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pari singh piya Dec 10, 2018

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kavita sharma Dec 10, 2018

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