Amit Singh
Amit Singh Dec 24, 2017

रविवार की कथा 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯

रविवार की कथा  🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯

प्राचीन काल में एक बुढ़िया थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती थी।
रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर बुढ़िया स्नानादि से निवृत्त होकर, आंगन को गोबर से लीपकर, स्वच्छ करती तदोपरांत सूर्य भगवान की पूजा करती तथा कथा सुनकर सूर्य भगवान को भोग लगाकर दिन में एक समय भोजन करती। इसी तरह रविवार का व्रत करती। सूर्य भगवान की कृपा से बुढ़िया को किसी प्रकार की कोई चिन्ता व कष्ट नहीं था। उसका घर धन-धान्य से भरा हुआ था। उस बुढ़िया को सुखी देख उसकी पड़ोसन उससे बहुत जलती। बुढ़िया रोजाना पड़ोसन के आंगन में बंधी गाय का गोबर लाती और अपना घर लीपती।
शनिवार के दिन रात को पड़ोसन ने अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया ताकि बुढ़िया अपना घर न लीप सके। रविवार को गोबर न मिलने से बुढ़िया अपना आंगन नहीं लीप सकी। आंगन न लीप पाने के कारण उस बुढ़िया ने सूर्य भगवान को भोग भी नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया। सूर्यास्त होने पर बुढ़िया भूखी-प्यासी सो गई। रात्रि में सूर्य भगवान ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और व्रत न करने तथा उन्हें भोग न लगाने का कारण पूछा। बुढ़िया ने बहुत ही करुण स्वर में पड़ोसन के द्वारा घर के अन्दर गाय बांधने और गोबर न मिल पाने की बात बोली।
सूर्य भगवान ने अपनी अनन्य भक्त बुढ़िया की परेशानी का कारण जानकर उसके सब दु:ख दूर करते हुए कहा, हे माता, तुम प्रत्येक रविवार को मेरी पूजा और व्रत करती हो। मैं तुमसे अति प्रसन्न हूं और तुम्हें ऐसी गाय प्रदान करता हूं जो तुम्हारे घर-आंगन को धन-धान्य से भर देगी। तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूरी होगी। स्वप्न में उस बुढ़िया को ऐसा वरदान देकर सूर्य भगवान अंतरध्यान हो गए। प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उस बुढ़िया की आंख खुली तो वह अपने घर के आंगन में सुन्दर गाय और बछड़े को देखकर हैरान हो गई।
गाय को आंगन में बांधकर उसने जल्दी से उसे चारा लाकर खिलाया। पड़ोसन ने उस बुढ़िया के आंगन में बंधी सुन्दर गाय और बछड़े को देखा तो वह उससे और अधिक जलने लगी। तभी गाय ने सोने का गोबर किया। गोबर को देखते ही पड़ोसन की आंखें फट गईं। पड़ोसन ने उस बुढ़िया को आसपास न पाकर तुरन्त उस गोबर को उठाया और अपने घर ले गई तथा अपनी गाय का गोबर वहां रख आई। सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिनों में धनवान हो गई। गाय प्रति दिन सूर्योदय से पूर्व सोने का गोबर करती और बुढ़िया के उठने के पहले ही पड़ोसन उस गोबर को उठाकर ले जाती। बहुत दिनों तक बुढ़िया को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता ही नहीं चला। बुढ़िया पहले की तरह हर रविवार को भगवान सूर्यदेव का व्रत करती रही और कथा सुनती रही।
सूर्य भगवान को जब पडोसन की चालाकी का पता चला तो उन्होंने एक दिन तेज आंधी चलाई। आंधी का प्रकोप देखकर बुढ़िया ने अपनी गाय को घर के भीतर बाँध दिया। अब पडोसन सोने का गोबर न ले जा सकी। सुबह उठकर बुढ़िया ने सोने का गोबर देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उस दिन के बाद बुढ़िया गाय को घर के भीतर बाँधने लगी। सोने के गोबर से कुछ ही दिनों में वह बुढ़िया बहुत धनी हो गई।
बुढ़िया के धनी होने से पडोसन और बुरी तरह जल-भुनकर राख हो गई। अबकी बार उसने अपने पति को नगर के राजा के पास भेजा और बुढ़िया के पास सोने का गोबर देने वाली गाय के बारे में बताया। राजा ने अपने सैनिक भेजकर बुढ़िया की गाय लाने का आदेश दे दिया।
सैनिक बुढ़िया के घर पहुँचे। उस समय बुढ़िया सूर्य भगवान को भोग लगाकर स्वयं भोजन ग्रहण करने वाली थी। राजा के सैनिक जबर्दस्ती गाय और बछडे को महल की ओर ले चले। बुढ़िया ने प्रार्थना की, बहुत रोई-चिल्लाई लेकिन राजा के सैनिक नहीं माने। गाय व बछडे के चले जाने से बुढ़िया को बहुत दु:ख हुआ। उस दिन उसने कुछ नहीं खाया और भूखी-प्यासी सारी रात सूर्य भगवान से गाय व बछडे को लौटाने के लिए प्रार्थना करती रही।
गाय देखकर राजा बहुत खुश हुआ। सुबह जब राजा ने सोने का गोबर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उधर सूर्य भगवान को भूखी-प्यासी बुढ़िया को इस तरह प्रार्थना करते देख उस पर बहुत दया आई। उसी रात सूर्य भगवान ने राजा को स्वप्न में कहा- राजन्! बुढ़िया की गाय व बछडा तुरंत लौटा दो, नहीं तो तुम पर विपत्तियों का पहाड टूट पडेगा। तुम्हारे राज्य में भूकम्प आएगा। तुम्हारा महल नष्ट हो जाएगा।
सूर्य भगवान के स्वप्न से बुरी तरह भयभीत राजा ने प्रात: उठते ही गाय और बछडा बुढ़िया को लौटा दिया। राजा ने अपनी तरफ से भी बहुत-सा धन देकर बुढ़िया से अपनी गलती के लिए क्षमा माँगी। राजा ने पडोसन और उसके पति को उनकी इस दुष्टता के लिए दंड भी दिया।
इसके बाद राजा ने राज्य में घोषणा करवाई कि सभी स्त्री-पुरुष रविवार का व्रत करें। जनता ने भी ऐसा ही किया। रविवार का व्रत करने से सभी लोगों के घर धन-धान्य से भर गए। चारों ओर खुशहाली छा गई।

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कामेंट्स

Mani Rana Dec 24, 2017
. nice ji Radhe Radhe ji good afternoon ji

Babbu Dixit Dec 25, 2017
जय माता दी रविवार व्रत कथा की जय

Amit Singh Dec 25, 2017
@babbu.dixit सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

Amit Singh Dec 25, 2017
@fateshkumarthaiyat सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

Amit Singh Dec 25, 2017
@ulavahitesh सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

Amit Singh Dec 25, 2017
@manirana सभी भारतीयों को तुलसी पूजन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं। आपके जीवन में सुख-समृद्धि लावे।

🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *********|| जय श्री राधे ||********* 🌺🙏 *महर्षि पाराशर पंचांग* 🙏🌺 🙏🌺🙏 *अथ पंचांगम्* 🙏🌺🙏 *********ll जय श्री राधे ll********* 🌺🌺🙏🙏🌺🌺🙏🙏🌺🌺 *दिनाँक -: 28/03/2020,शनिवार* चतुर्थी, शुक्ल पक्ष चैत्र """""""""""""""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल) तिथि ----------चतुर्थी 24:17:07 तक पक्ष ---------------------------शुक्ल नक्षत्र ----------भरणी 12:50:51 योग ---------विश्कुम्भ 17:51:33 करण -------वाणिज 11:16:40 करण ------विष्टि भद्र 24:17:07 वार -------------------------शनिवार माह ------------------------------चैत्र चन्द्र राशि --------मेष 19:29:10 चन्द्र राशि ---------------------वृषभ सूर्य राशि ----------------------मीन रितु ----------------------------वसंत आयन --------------------उत्तरायण संवत्सर -----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर) -------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक)------2076 शाका संवत ----------------1942 वृन्दावन सूर्योदय -----------------06:15:07 सूर्यास्त -----------------18:33:28 दिन काल --------------12:18:20 रात्री काल -------------11:40:31 चंद्रोदय -----------------08:34:01 चंद्रास्त -----------------22:03:10 लग्न ----मीन 13°40' , 343°40' सूर्य नक्षत्र ---------उत्तराभाद्रपदा चन्द्र नक्षत्र -------------------भरणी नक्षत्र पाया --------------------स्वर्ण *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* लो ----भरणी 12:50:51 अ ----कृत्तिका 19:29:10 ई ----कृत्तिका 26:06:17 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================= सूर्य=मीन 13°22 ' उ o भा o, 4 ञ चन्द्र =मेष 23°23 ' भरनी ' 4 लो बुध = कुम्भ 16°50 ' शतभिषा' 3 सी शुक्र= मेष 29°55, कृतिका ' 1 अ मंगल=मकर 03°30' उ o षा o ' 3 जा गुरु=धनु 29°50 ' उ oषाo , 1 भे शनि=मकर 05°43' उ oषा o ' 3 जा राहू=मिथुन 09°32 ' आर्द्रा , 1 कु केतु=धनु 09 ° 32 ' मूल , 3 भा *🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩* राहू काल 09:20 - 10:52 अशुभ यम घंटा 13:57 - 15:29 अशुभ गुली काल 06:15 - 07:47 अशुभ अभिजित 11:59 -12:49 शुभ दूर मुहूर्त 07:54 - 08:43 अशुभ 💮चोघडिया, दिन काल 06:15 - 07:47 अशुभ शुभ 07:47 - 09:20 शुभ रोग 09:20 - 10:52 अशुभ उद्वेग 10:52 - 12:24 अशुभ चर 12:24 - 13:57 शुभ लाभ 13:57 - 15:29 शुभ अमृत 15:29 - 17:01 शुभ काल 17:01 - 18:33 अशुभ 🚩चोघडिया, रात लाभ 18:33 - 20:01 शुभ उद्वेग 20:01 - 21:29 अशुभ शुभ 21:29 - 22:56 शुभ अमृत 22:56 - 24:24* शुभ चर 24:24* - 25:51* शुभ रोग 25:51* - 27:19* अशुभ काल 27:19* - 28:46* अशुभ लाभ 28:46* - 30:14* शुभ 💮होरा, दिन शनि 06:15 - 07:17 बृहस्पति 07:17 - 08:18 मंगल 08:18 - 09:20 सूर्य 09:20 - 10:21 शुक्र 10:21 - 11:23 बुध 11:23 - 12:24 चन्द्र 12:24 - 13:26 शनि 13:26 - 14:27 बृहस्पति 14:27 - 15:29 मंगल 15:29 - 16:30 सूर्य 16:30 - 17:32 शुक्र 17:32 - 18:33 🚩होरा, रात बुध 18:33 - 19:32 चन्द्र 19:32 - 20:30 शनि 20:30 - 21:29 बृहस्पति 21:29 - 22:27 मंगल 22:27 - 23:25 सूर्य 23:25 - 24:24 शुक्र 24:24* - 25:22 बुध 25:22* - 26:21 चन्द्र 26:21* - 27:19 शनि 27:19* - 28:17 बृहस्पति 28:17* - 29:16 मंगल 29:16* - 30:14 *नोट*-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥ रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥ अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । *💮दिशा शूल ज्ञान-------------पूर्व* परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l इस मंत्र का उच्चारण करें-: *शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l* *भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll* *🚩 अग्नि वास ज्ञान -:* *यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,* *चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।* *दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,* *नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्* *नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।* 4 + 7 + 1 = 12 ÷ 4 = 0 शेष मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l *💮 शिव वास एवं फल -:* 4 + 4 + 5 = 13 ÷ 7 = 6 शेष क्रीड़ायां = शोक ,दुःख कारक *🚩भद्रा वास एवं फल -:* *स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।* *मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।* प्रातः 11:14 से रात्रि 24:17 तक स्वर्ग लोक = शुभ कारक *💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮* * नवरात्रि चतुर्थ दिवस कूष्मांडा पूजन *💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮* राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञः पापं पुरोहितः । भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्यपापं गुरुस्तथा ।। ।।चा o नी o।। राजा को उसके नागरिको के पाप लगते है. राजा के यहाँ काम करने वाले पुजारी को राजा के पाप लगते है. पति को पत्नी के पाप लगते है. गुरु को उसके शिष्यों के पाप लगते है. *🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩* गीता -: मोक्षसन्यासयोग अo-18 ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽजुर्न तिष्ठति।, भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारुढानि मायया॥, हे अर्जुन! शरीर रूप यंत्र में आरूढ़ हुए संपूर्ण प्राणियों को अन्तर्यामी परमेश्वर अपनी माया से उनके कर्मों के अनुसार भ्रमण कराता हुआ सब प्राणियों के हृदय में स्थित है॥,61॥, *💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮* देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।। विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।। 🐏मेष व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। जुए-सट्टे व लॉटरी से दूर रहें। व्यवसाय मनोनुकूल रहेगा। विरोधी सक्रिय रहेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। किसी अपने का व्यवहार समझ नहीं आएगा। सुख के साधनों पर खर्च होगा। किसी बड़ी समस्या से निजात मिलेगी। 🐂वृष फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखें। कर्ज लेना पड़ सकता है। अपेक्षित कार्यों में विलंब होने से मन खिन्न रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। शत्रुभय रहेगा। परिवार की चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निरंतरता रहेगी। अपरिचित व्यक्ति से सावधान रहें। 👫मिथुन संतान पक्ष की चिंता रहेगी। विरोधी सक्रिय रहेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यात्रा मनोनुकूल रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। आय व रोजगार में वृद्धि होगी। मित्र व संबंधी सहायता को आगे आएंगे। मेहमानों पर व्यय होगा। जल्दबाजी न करें। 🦀कर्क घर-बाहर तनाव रहेगा। लोगों से प्रतिकूलता रहेगी। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकार वृद्धि हो सकती है। मनोनुकूल तबादला हो सकता है। आय में निरंतरता रहेगी। अपेक्षित कार्य पूरे होंगे। 🐅सिंह तंत्र-मंत्र में रुचि बढ़ेगी। किसी मार्गदर्शक का सहयोग मिलेगा। लोगों की बातों में न आएं। कोर्ट व कचहरी में दबदबा बना रहेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। व्यवसाय में वृद्धि होगी। जल्दबाजी न करें। थकान महसूस होगी। भाग्य का साथ मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। 🙎कन्या चोट व दुर्घटना से हानि संभव है। पुराना रोग परेशान कर सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अज्ञात भय रहेगा। नया कार्य प्रारंभ करने की योजना टालें। यात्रा में जल्दबाजी न करें। घर-बाहर अशांति रहेगी। धैर्य रखें। आय बनी रहेगी। ⚖तुला भागदौड़ अधिक रहेगी। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य अनुकूल रहेंगे। शत्रुओं का पराभव रहेगा। अधिकार प्राप्ति के योग हैं। परिवार के सदस्यों का सहयोग मिलेगा। व्यवसाय लाभदायक चलेगा। प्रसन्नता रहेगी। आंखों में पीड़ा हो सकती है। 🦂वृश्चिक कष्ट, भय या तनाव का वातावरण बन सकता है। लेन-देन में सावधानी रखें। मकान, दुकान व जमीन खरीदने की योजना बनेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। धनहानि हो सकती है। आय में वृद्धि होगी। जोखिम लेने का साहस कर पाएंगे। रुके कार्य पूर्ण होंगे। 🏹धनु विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। पार्टी व पिकनिक का आनंद प्राप्त होगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। नौकरी में अनुकूलता प्राप्त होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। रोजगार में वृद्धि होगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। शुभ समय। 🐊मकर परिवार के साथ मनोरंजक यात्रा हो सकती है। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। क्रोध व आलस्य पर नियंत्रण रखें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। 🍯कुंभ मेहनत की अधिकता से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। बुरी खबर मिल सकती है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। अपेक्षित कार्यों में विलंब होने से तनाव रहेगा। विवेक व धैर्य का प्रयोग करें। लाभ होगा। जोखिम व जमानत के कार्य बिलकुल न करें। 🐟मीन घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। मेहनत का फल मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। पारिवारिक सदस्यों व मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। कोई बड़ी समस्या दूर हो सकती है। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। जल्दबाजी न करें। महत्वाकांक्षाएं बढ़ेंगी। प्रयास अधिक करें। 🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏 🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

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नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की आज होती है पूजा, ये है विधि और कथा 🔱🚩🐅 नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है. इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. असुरों का संहार करने के लिए मां दुर्गा ने इस रूप को धारण किया था. आइए जानते हैं पूजन विधि और कथा. नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की आज होती है पूजा, ये है विधि और कथा 2020: नवरात्रि के तृतीय दिवस यानि तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. मां चंद्रघंटा को परम शांतिदायक और कल्याणकारी माना गया है. इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है. इसीलिए इन्हें मां चंद्रघंटा कहा जाता है. अन्य विशेषताओं की बात करें तो इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान है. मां चंद्रघंटा देवी के दस हाथ हैं. इनके हाथों में शस्त्र-अस्त्र विभूषित हैं. इनकी सवारी सिंह है. नवरात्रि में मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति नवरात्रि में मां चंद्रघंटा की पूजा विधि पूर्वक करता है उसे अलौकिक ज्ञान की प्राप्ति होती है. इस देवी की पूजा और उपासना से साहस और निडरता का बोध होता है. जो व्यक्ति मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं उन्में मां सौम्यता और विनम्रता का भी आर्शीवाद प्रदान करती हैं. मां चंद्रघंटा की पूजा करने से रोग से भी मुक्ति मिलती है. दुर्गा चालीसा का पाठ करने से भक्तों की हर मुराद होती है पूरी, मां दुर्गा होती हैं प्रसन्न पूजा विधि पूजा प्रारंभ करने से पहले मां चंद्रघंटा को केसर और केवड़ा जल से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें सुनहरे रंग के वस्त्र पहनाएं. इसके बाद मां को कमल और पीले गुलाब की माला चढ़ाएं. इसके उपरांत मिष्ठान, पंचामृत और मिश्री का भोग लगाएं. मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने का मंत्र या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:। माता चंद्रघंटा की कथा पौराणिक कथा के अनुसार जब दैत्यों का आतंक बढ़ने लगा तो मां दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का अवतार लिया. उस समय असुरों का स्वामी महिषासुर था जिसका देवताओं से भंयकर युद्ध चल रहा था. महिषासुर देव राज इंद्र का सिंहासन प्राप्त करना चाहता था. उसकी प्रबल इच्छा स्वर्गलोक पर राज करने की थी. उसकी इस इच्छा को जानकार सभी देवता परेशान हो गए और इस समस्या से निकलने का उपाय जानने के लिए भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सामने उपस्थित हुए. देवताओं की बात को गंभीरता से सुनने के बाद तीनों को ही क्रोध आया. क्रोध के कारण तीनों के मुख से जो ऊर्जा उत्पन्न हुई. उससे एक देवी अवतरित हुईं. जिन्हें भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल और भगवान विष्णु ने चक्र प्रदान किया. इसी प्रकार अन्य देवी देवताओं ने भी माता के हाथों मेें अपने अस्त्र सौंप दिए. देवराज इंद्र ने देवी को एक घंटा दिया. सूर्य ने अपना तेज और तलवार दी, सवारी के लिए सिंह प्रदान किया. इसके बाद मां चंद्रघंटा महिषासुर के पास पहुंची. मां का ये रूप देखकर महिषासुर को ये आभास हो गया कि उसका काल आ गया है. महिषासुर ने मां पर हमला बोल दिया. इसके बाद देवताओं और असुरों में भंयकर युद्ध छिड़ गया. मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का संहार किया. इस प्रकार मां ने देवताओं की रक्षा की.

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Nitin Kharbanda Mar 27, 2020

तुलसी कौन थी? तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था. वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी. एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा``` - स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर``` आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये। सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता । फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है। भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है? उन्होंने पूँछा - आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये। सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे सती हो गयी। उनकी राख से एक पौधा निकला तब भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में बिना तुलसी जी के भोग स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में किया जाता है। देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !

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Rudra sharma Mar 27, 2020

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🌹🌹जय हो मां भवानी🚩🚩 नवार्ण मंत्र' दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी दुर्गा की नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नौ शक्तियां जागृत होकर नौ ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नौ शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ 'नौ' तथा अर्ण का अर्थ 'अक्षर' होता है। अतः नवार्ण नौ अक्षरों वाला वह मंत्र है । नवार्ण मंत्र- 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै ।' नौ अक्षरों वाले इस नवार्ण मंत्र के एक-एक अक्षर का संबंध दुर्गा की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है। नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ' ऐं ' है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध दुर्गा की पहली शक्ति शैलपुत्री से है, जिसकी उपासना 'प्रथम नवरात्रि' को की जाती है। दूसरा अक्षर ' ह्रीं ' है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है, जिसकी पूजा दूसरे नवरात्रि को होती है। तीसरा अक्षर ' क्लीं ' है, जो मंगल ग्रह को नियंत्रित करता है।इसका संबंध दुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा से है, जिसकी पूजा तीसरे नवरात्रि को होती है। चौथा अक्षर 'चा' है जो बुध को नियंत्रित करता है। इनकी देवी कुष्माण्डा है जिनकी पूजा चौथे नवरात्री को होती है। पांचवां अक्षर 'मुं' है जो गुरु ग्रह को नियंत्रित करता है। इनकी देवी स्कंदमाता है पांचवे नवरात्रि को इनकी पूजा की जाती है। छठा अक्षर 'डा' है जो शुक्र ग्रह को नियंत्रित करता है। छठे नवरात्री को माँ कात्यायिनी की पूजा की जाती है। सातवां अक्षर 'यै' है जो शनि ग्रह को नियंत्रित करता है। इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। आठवां अक्षर 'वि' है जो राहू को नियंत्रित करता है । नवरात्री के इस दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। नौवा अक्षर 'च्चै ' है। जो केतु ग्रह को नियंत्रित करता है। नवरात्री के इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है,, जय माता दी अज्ञात

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Swami Lokeshanand Mar 27, 2020

गजब बात है, भगवान गर्भ में आए, भीतर उतर आए तो ज्ञान, भक्ति और कर्म तीनों पुष्ट हो गए। दशरथजी के चेहरे पर तो तेज आ ही गया, बाहर भी सब ओर मंगल ही मंगल छा गया, अमंगल रहा ही नहीं। देखो, जड़ को पानी देने से फूल पत्ते अपने आप छा जाते हैं, जलपात्र में नमक डाल दें तो सब जलकणों में नमक आ जाता है, यों भगवान को मना लें तो सब अनुकूल हो जाते हैं। वर्ना भीतर पढ़ाई न हो तो लाख चश्मा बदलो, पढ़ा कैसे जाए? विवेकानन्द जी कहते थे, ये दुनिया कुत्ते की दुम है, संत पकड़े रहे तो सीधी रहे, छोड़ते ही फिर टेढ़ी। ध्यान दो, दुनिया बार बार बनती है, बार बार मिटती है, पर ठीक नहीं होती, दुनिया बदलते बदलते कितने दुनिया से चले गए, दुनिया है कि आज तक नहीं बदली। जिन्हें भ्रम हो कि दुनिया आज ही बिगड़ी है, पहले तो ठीक थी, वे विचार करें कि हिरण्याक्ष कब हुआ? हिरण्यकशिपु, तारकासुर, त्रिपुरासुर, भस्मासुर कब हुए? देवासुर संग्राम कब हुआ? दुनिया तो ऐसी थी, ऐसी है, और रहेगी भी ऐसी ही। आप इसे बदलने के चक्कर में पड़ो ही मत, आप इसे यूं बदल नहीं पाओगे। आप स्वयं बदल जाओ, तो सब बदल जाए। जो स्वयं काँटों में उलझा है, जबतक उसके स्वयं के फूल न खिल जाएँ, वह क्या खाक किसी दूसरे के जीवन में सुगंध भरेगा? हाँ, उसे छील भले ही दे। जबतक भगवान आपके भीतर न उतर आएँ, अपना साधन करते चलो, दूसरे पर ध्यान मत दो। आप दूसरे को ठीक नहीं कर सकते, दूसरा आपको भले ही बिगाड़ डाले। लाख समस्याओं का एक ही हल है, भगवान को भीतर उतार लाओ। अब विडियो देखें- मंगल भवन अमंगल हारी https://youtu.be/_BF-H0AmPK4

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💎💎💎 ⚜🕉⚜ 💎💎💎 *🙏ॐ श्रीगणेशाय नम:🙏* *🙏शुभप्रभातम् जी🙏* *इतिहास की मुख्य घटनाओं सहित पञ्चांग-मुख्यांश ..* *📝आज दिनांक 👉* *📜 27 मार्च 2020* *शुक्रवार* *🏚नई दिल्ली अनुसार🏚* *🇮🇳शक सम्वत-* 1941 *🇮🇳विक्रम सम्वत-* 2077 *🇮🇳मास-* चैत्र *🌓पक्ष-* शुक्लपक्ष *🗒तिथि-* तृतीया-22:14 तक *🗒पश्चात्-* चतुर्थी *🌠नक्षत्र-* अश्विनी-10:10 तक *🌠पश्चात्-* भरणी *💫करण-* तैतिल-09:06 तक *💫पश्चात्-* गर *✨योग-* वैधृति-17:15 तक *✨पश्चात्-* विश्कुम्भ *🌅सूर्योदय-* 06:16 *🌄सूर्यास्त-* 18:36 *🌙चन्द्रोदय-* 08:01 *🌛चन्द्रराशि-* मेष-दिनरात *🌞सूर्यायण-* उत्तरायन *🌞गोल-* उत्तरगोल *💡अभिजित-* 12:01 से 12:51 *🤖राहुकाल-* 10:54 से 12:26 *🎑ऋतु-* वसन्त *⏳दिशाशूल-* पश्चिम *✍विशेष👉* *_🔅आज शुक्रवार को 👉 चैत्र सुदी तृतीया 22:14 तक पश्चात् चतुर्थी शुरु , मनोरथ तृतीया व्रत , अरुन्धती व्रत पूजन , गणगौरी तीज , गणगौर व्रत पूजन (राज.) , सौभाग्य शयन तृतीया , सरहुल ( बिहार ) , माँ चंद्रघंटा व्रत , पूजन , साँय दोलारूढ शिवगौरी पूजन , मन्वादि 3 , वैधृति पुण्यं , सर्वार्थसिद्धियोग / कार्यसिद्धियोग 10:09 तक , सर्वदोषनाशक रवि योग 10:09 से , मूल संज्ञक नक्षत्र 10:10 तक , दसलक्षण (1/3) प्रारम्भ (जैन , चैत्र शुक्ल 3 से 12 तक ) , मेवाड़ उत्सव प्रारम्भ 3 दिन , श्री मतस्य जयन्ती , छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती (तिथि अनुसार , कन्फर्म नहीं ) , पंडित कांशीराम स्मृति दिवस , सर सैयद अहमद खान स्मृति दिवस व विश्व रंगमंच / नाटक (स्टेज कलाकार ) / विश्व थियेटर दिवस।_* *_🔅कल शनिवार को 👉 चैत्र सुदी चतुर्थी 24:19 तक पश्चात् पंचमी शुरु , वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत ( मासिक ) , दमनक / वरद चतुर्थी व्रत , माँ कुष्मांडा व्रत / पूजन , शुक्र वृष राशि में 15:39 पर , सर्वदोषनाशक रवि योग 12:52 तक , विघ्नकारक भद्रा 11:18 से 24:18 तक , मेला गणगौर ( दूसरा दिन ) , गुरु अंगद देव ज्योति ज्योत / स्मृति दिवस (परम्परानुसार ) , श्री गोरखप्रसाद गणितज्ञ जयन्ती , चौ. बंसीलाल स्मृति दिवस व राष्ट्रीय नौवहन दिवस।_* *🎯आज की वाणी👉* 🌹 *पिण्डजप्रवरारूढा* *चण्डकोपास्त्रकैर्युता।* *प्रसादं तनुते मह्यं* *चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥* *भावार्थ👉* _पिंडज प्राणियों में श्रेष्ठ अर्थात् सिंह पर सवार, भयानक व शत्रुओं के संहार के लिए सन्नद्ध अस्त्रों से सुसज्जित विख्यात चंद्रघंटा देवी की कृपा मुझ पर छाई रहे ।_ 🌹 *27 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ👉* 1668 – इंग्लैंड के शासक चार्ल्स द्वितीय ने बंबई को ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंपा। 1721 – फ्रांस और स्पेन ने मैड्रिड समझौते पर हस्ताक्षर किये। 1794 – अमेरिकी कांग्रेस ने देश में नौसेना की स्थापना की स्वीकृति दी। 1841 – पहले स्टीम फायर इंजन का सफल परीक्षण न्यूयार्क में किया गया। 1855 – अब्राहम गेस्नर ने केरोसिन (मिट्टी के तेल) का पेटेंट कराया। 1871 – पहला अंतरराष्ट्रीय रग्बी मैच स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के बीच खेला गया, जिसे स्काॅटलैंड ने जीता। 1884 – बोस्टन से न्यूयार्क के बीच पहली बार फोन पर लंबी दूरी की बातचीत हुयी। 1899 – इंग्लैंड और फ्रांस के बीच पहला अंतरराष्ट्रीय रेडियो प्रसारण इतालवी आविष्कारक जी मारकोनी द्वारा किया गया। 1901 – अमेरिका ने फिलीपीन्स के विद्रोही नेता एमिलियो एग्विनाल्डो को अपने कब्जे में लिया। 1933 – जापान ने लीग अाॅफ नेशंस से खुद को अलग कर लिया। 1944 – लिथुआनिया में दो हजार यहूदियों की हत्या कर दी गयी। 1953 – ओहियो के कोन्निओट में ट्रेन हादसे में 21 लोग मारे गये। 1956 – अमेरिकी सरकार ने कम्युनिस्ट अखबार डेली वर्कर को जब्त कर लिया। 1961 – पहला विश्व रंगमंच दिवस मनाने की शुरुआत हुई। 1964 – अलास्का में 8.4 की तीव्रता वाले भूकंप से 118 लोगों की मौत। 1975 – ट्रांस-अलास्का पाइपलाइन सिस्टम का निर्माण शुरू किया गया। 1977 – टेनेरीफ़ में दो जंबो विमान हवाई पट्टी पर टकराने से दुनिया की सबसे भयानक विमान दुर्घटना हुई थी, जिसमें 583 लोग मारे गए। 1977 – यूरोपियन फ़ाइटर एअरक्राफ़्ट यूरोफाइटर ने पहली उड़ान भरी। यूरोफाइटर को भविष्य का लड़ाकू विमान कहा गया था। 1982 – ए.एफ़.एम. अहसानुद्दीन चौधरी बांग्लादेश के नौवें राष्ट्रपति नियुक्त किए गए। 1989 – रूस में पहली बार स्वतंत्र चुनाव हुए थे। इन चुनावों में कई दिग्गज कम्यूनिस्ट नेता हार गए। 2000 - रूस में 52.52 प्रतिशत मत प्राप्त कर रूस के कार्यवाहक राष्ट्रपति ब्लादीमीर ब्लादीमिरोविच पुतिन ने राष्ट्रपति चुनाव जीता। 2002 – इजरायल के नेतन्या में आत्मघाती हमले में 29 लोग मारे गये। 2003 - रूस ने घातक टोपोल आर एस-12 एम बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। 2003 - मान्टो कार्लो में 12वीं अम्बर शतरंज प्रतियोगिता के फ़ाइनल राउंड में 1.5 अंक की जीत से विश्वनाथन आनंद ने तीसरा ख़िताब जीता। 2006 - यासीन मलिक ने कश्मीर में जनमत संग्रह कराये जाने की मांग की। 2008 - केन्द्र सरकार ने अल्पसंख्यक बहुल 90 ज़िलों में आधारभूत ढ़ाचे के विकास और जीवन स्तर में व्यापक सुधार के लिए 3,780 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी। 2008 - उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियन्त्रण विधेयक 'यूपीकोका' को राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने मंजूरी प्रदान की। 2008 - अंतरिक्ष यान एंडेवर पृथ्वी पर सफलतापूर्वक सुरक्षित लौटा। 2010 - भारत ने उड़ीसा के चांदीपुर में बालसोरा जिले में परमाणु तकनीक से लैस धनुष और पृथ्वी 2 मिसाइल का सफल परीक्षण किया। 2011 - जापान के भूकम्प प्रभावित इलाके फुकुशिमा में स्थित क्षतिग्रस्त परमाणु ऊर्जा संयंत्र के एक इकाई में रेडियोधर्मी विकिरण सामान्य से एक करोड़ गुना अधिक पाये जाने के बाद वहाँ से कर्मचारियों को हटा लिया गया। 2011 - फ्रांस के विमानों ने लीबियाइ राष्ट्रपति मुअम्मर गद्दाफी की समर्थक सेना के पाच विमानों और दो हेलीकाप्टरों को नष्ट कर दिया। 2019 - भारत पृथ्‍वी की निचली कक्षा में उपग्रहभेदी प्रक्षेपास्‍त्र ए-सैट का सफल परीक्षण करके अंतरिक्ष महाशक्ति बना । 2019 - कश्मीर को अलग देश बताने की फेसबुक ने सुधारी गलती, मांगी माफी। 2019 - हरियाणा की महिला और पुरुष दोनों टीमों ने जीती रिंगबॉल नेशनल चैंपियनशिप की ट्राॅफी। *27 मार्च को जन्मे व्यक्ति👉* 1915 - पुष्पलता दास - भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता , सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी। 1923 - लीला दुबे - एक प्रसिद्ध मानव विज्ञानी और नारीवादी विद्वान। 1936 - बनवारी लाल जोशी, भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो दिल्ली के उपराज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश, मेघालय और उत्तराखंड के राज्यपाल रह चुके । *27 मार्च को हुए निधन👉* 1898 – भारत के मुसलमानों के लिए आधुनिक शिक्षा की शुरूआत करने वाले सर सैयद अहमद खान का निधन। इन्होंने मुहम्मदन एंग्लो-ओरिएण्टल कॉलेज की स्थापना की जो आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम से प्रसिद्ध है। 1915 - पंडित कांशीराम, ग़दर पार्टी के प्रमुख नेता और देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे। 1968 - यूरी गागरीन, भूतपूर्व सोवियत संघ के विमान चालक और अंतरिक्षयात्री। 2000 - प्रिया राजवंश - भारतीय हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री। *27 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉* 🔅 मेवाड़ उत्सव प्रारम्भ 3 दिन । 🔅 श्री मतस्य जयन्ती । 🔅 छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती (तिथि अनुसार , कन्फर्म नहीं ) । 🔅 पंडित कांशीराम स्मृति दिवस । 🔅 सर सैयद अहमद खान स्मृति दिवस । 🔅 विश्व रंगमंच / नाटक (स्टेज कलाकार ) / विश्व थियेटर दिवस। *कृपया ध्यान दें जी👉* *यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है ।* 🌻आपका दिन *_मंगलमय_* हो जी ।🌻 ⚜⚜ 🌴 💎 🌴⚜⚜

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