aman jain
aman jain Nov 25, 2017

Shree 1008 munisubratnath jinendray

Shree 1008 munisubratnath jinendray

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*चाहत का फल* *1. बच्चे :चाहते थे कि उनका कोई स्कूल न हो और वह सारा दिन खेल सकें। *(और यह हो गया)* *2. महिला : चाहती थी कि उनके पति उनके साथ समय बिताते हुए घर के हर काम में हाथ बटाएं। *(और यह हो गया)* *3. पति : मैं इस ट्रैफिक से परेशान हूँ और चाहता हूँ कि मैं घर पर रहूँ और कोई काम भी न करूँ और वेतन भी घर बैठे पाऊँ । *(और यह हो गया)* *4. नौकरीपेशा महिलाएं : काश मैं अपने बच्चों के साथ कुछ क्वालिटी टाइम बिता पाऊं। *(और यह हो गया)* *5. विद्यार्थी : काश मैं परीक्षा के लिए अध्ययन नहीं करता और एग्जाम टल जाए। *(और यह हो गया)* *6. वृद्ध माता-पिता : काश हमारे बच्चे रोज़ व्यस्त होने के बजाय हमारे साथ अधिक समय बिता पाते ? *(और यह हो गया)* *7. कर्मचारी : मैं नौकरी से तंग आ चूका हूँ। मुझे एक ब्रेक की जरूरत है। *(और यह हो गया)* *8. व्यापारीः* हमारा कोई जीवन नहीं है, काश घर बैठकर टीवी देख सकते। *(और यह हो गया)* *9. पृथ्वी : मैं सांस नहीं ले पा रही। काश, मुझे इस सारे प्रदूषण और अराजकता से निज़ात मिले। *(और यह हो गया)* *निष्कर्षः* अब आप ऐसे में ईश्वर से क्या शिकायत करेंगे ? आपने जो चाहा, वह हो गया। अतः आगे से सोच-समझकर मांगे क्योंकि आप जो चाहते हैं, ईश्वर पल भर में पूरा कर सकते हैं। 🙏🙏🙏

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वो जिनसे परमात्मा प्यार करता है... एक संत हुआ करते थे । उनकी इबादत या भक्ति इस कदर थीं कि वो अपनी धुन में इतने मस्त हो जाते थे की उनको कुछ होश नहीं रहता था । उनकी अदा और चाल इतनी मस्तानी हो जाती थीं । वो जहाँ जाते , देखने वालों की भीड़ लग जाती थी। और उनके दर्शन के लिए लोग जगह -जगह पहुँच जाते थे । उनके चेहरे पर नूर साफ झलकता था । वो संत रोज सुबह चार बजे उठकर ईश्वर का नाम लेते हुए घूमने निकल जाते थे। एक दिन वो रोज की तरह अपने मस्ति में मस्त होकर झूमते हुए जा रहे थे। रास्ते में उनकी नज़र एक फ़रिश्ते पर पड़ी और उस फ़रिश्ते के हाथ में एक डायरी थीं । संत ने फ़रिश्ते को रोककर पूछा आप यहाँ क्या कर रहे हैं ! और ये डायरी में क्या है ? फ़रिश्ते ने जवाब दिया कि इसमें उन लोगों के नाम है जो खुदा को याद करते है । यह सुनकर संत की इच्छा हुई की उसमें उनका नाम है कि नहीं, उन्होंने पुछ ही लिया की, क्या मेरा नाम है इस डायरी में ? फ़रिश्ते ने कहा आप ही देख लो और डायरी संत को दे दी । संत ने डायरी खोलकर देखी तो उनका नाम कही नहीं था । इस पर संत थोड़ा मुस्कराये और फिर वह अपनी मस्तानी अदा में रब को याद करते हुए चले गये । दूसरे दिन फिर वही फ़रिश्ते वापस दिखाई दिये पर इस बार संत ने ध्यान नहीं दिया और अपनी मस्तानी चाल में चल दिये।इतने में फ़रिश्ते ने कहा आज नहीं देखोगे डायरी । तो संत मुस्कुरा दिए और कहा, दिखा दो और जैसे ही डायरी खोलकर देखा तो, सबसे ऊपर उन्ही संत का नाम था इस पर संत हँस कर बोले क्या खुदा के यहाँ पर भी दो-दो डायरी हैं क्या ? कल तो था नहीं और आज सबसे ऊपर है । इस पर फ़रिश्ते ने कहा की आप ने जो कल डायरी देखी थी, वो उनकी थी जो लोग ईश्वर से प्यार करते हैं । आज ये डायरी में उन लोगों के नाम है, जिनसे ईश्वर खुद प्यार करता है । बस इतना सुनना था कि वो संत दहाड़ मारकर रोने लगे, और कितने घंटों तक वही सर झुकाये पड़े रहे, और रोते हुए ये कहते रहे ए ईश्वर यदि में कल तुझ पर जरा सा भी ऐतराज कर लेता तो मेरा नाम कही नहीं होता । पर मेरे जरा से सबर पर तु मुझ अभागे को इतना बड़ा ईनाम देगा । तू सच में बहुत दयालु हैं तुझसे बड़ा प्यार करने वाला कोई नहीं और बार-बार रोते रहें ।। देखा दोस्तों ईश्वर की बंदगी में अंत तक डटे रहो, सबर रखो क्योंकि जब भी ईश्वर की मेहरबानी का समय आएगा तब अपना मन बैचेन होने लगेगा लेकिन तुम वहा डटे रहना ताकि वो महान प्रभु हम पर भी कृपा करें । "🙏🙏

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मदर्स डे🌹🌹🌹 🌞मां के लिए लिखने के लिए कोई शब्द ही नहीं मिलते ।जहां पर पूरी हो जाए शब्दों की सीमा, बस वही तो है मां। मां से बड़ा त्यागी और तपस्वी इस धरती पर मिलना दुर्लभ ही है ।जब बच्चा पेट में होता है तो उसी समय से एक मां को अपने खानपान पर अंकुश रखना होता है। बच्चा पेट में आने और दुग्धपान करने की अवधि तक एक मां कभी भी अपनी रूचि के अनुसार भोजन नहीं कर सकती। अब उसे क्या खाना और क्या नहीं खाना, यह अपने बच्चे के हित और अहित को ध्यान में रखकर ही करना होता है। 🌞और इतना ही नहीं, जीवन पर्यंत एक मां अपने बच्चे के हिसाब से रसोई में कुछ पकाती है । बच्चे के जन्म के बाद एक मां जीवन भर के लिए यह भुला देती है उसकी भी कोई पसंद नापसंद है। अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं की बलि देकर भी एक नारी मां बन पाती है ।अपने बच्चे से एक मां के लगाव को इन बातों से समझा जा सकता है, जब बच्चे का मां का हंसना- मां का हंसना, बच्चों का रोना- मां का रोना, बच्चों का सोना -मां का सोना, बच्चों का जगाना- मां का जगाना और तो और बच्चों का खाना ही मां का खाना भी बन जाता है। 🌞मां की अपनी कोई खुशी नहीं होती अपितु अपने बच्चों की खुशी में ही एक मां की खुशी होती है ।मां की आंखों का आंसू हमारे सभी पुण्य कर्मों को भी अपने साथ बहाकर ले जाता है ।आओ! इस मातृ दिवस पर हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं कि हमारे कारण कभी मां-बाप की आंखें गीली ना हो। 🙏मातृत्व दिवस पर सभी माताओं के चरणों में प्रणाम करते हुए आप सभी को मातृत्व दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाइयां।

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बचपन की एक रात बहुत याद आती है। हैप्पी मदर्स डे 🌹🙏🙋🙋 🎂🎂🎂🎂🎂💐💐 उस रात को मेरे पेट में बहुत दर्द हो रहा था। सारे दिन की थकी हारीं माँ सो रही थी, मेरा टसकना सुनकर माँ जाग उठी। मुझे प्यार से सीने सलगाया, नमक अजवान का चूरन दिया, सारी रात जाग कर मुझे सीने से लगाए रखा। अब मैं जवान हो गया हूँ... मेरी शादी भी हो गई है। एक रात फिर मेरे पेट में भयंकर दर्द उठा। दर्द के मारे टसकने लगा। मेरी पत्नी की नींद टूट गई, कहने लगी- "रात में भी सोने नहीं देते। पेट को भी रात में ही दुखना था। किसी तरह रात निकालो, सुबह डॉक्टर को दिखला देना।" रात कैसे निकले...? सहमता सा माँ को उठाया। माँ ने अपनी ममता की कोख में सुलाया, नमक अजवान का चूरन दिया, पेट पर नारियल का तेल लगाया। पेट का दर्द कम हो गया और मुझे नींद आ गई। माँ ने उलाहना दिया- " क्यों बहु को उठाया?? बेचारी सारे दिन काम करके सोई है। मुझे पहले ही उठा लेता।" यह तो माँ की ममता है, इसकी न कोई समता है। जब मेरी पत्नी माँ बनेगी, तो क्या वह भी अपने बच्चे को सुबह ही डॉक्टर को दिखलाएगी माँ तो माँ ही होती है। अपनी औलाद का दर्द जितना माँ की ममता को होता है, किसी को नहीं होता। . आपको हर किसी से ज्यादा प्यार करने वाली माँ ही होती है। 🌺🍀

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रामायण पवित्र ग्रंथ है। इसकी कथा जितनी आदर्श है उसके पात्र उतने ही प्रेरणादायी। क्या आप रामायण के सभी पात्रों को जानते हैं, नहीं, तो यह जानकारी आपके लिए है। प्रस्तुत है रामायण के प्रमुख पात्र और उनका परिचय ... दशरथ – रघुवंशी राजा इन्द्र के मित्र कौशल के राजा तथा राजधानी एवं निवास अयोध्या कौशल्या – दशरथ की बड़ी रानी,राम की माता सुमित्रा - दशरथ की मंझली रानी,लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न की माता कैकयी - दशरथ की छोटी रानी, भरत की माता सीता – जनकपुत्री,राम की पत्नी उर्मिला – जनकपुत्री, लक्ष्मण की पत्नी मांडवी – जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री,भरत की पत्नी श्रुतकीर्ति - जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री,शत्रुघ्न की पत्नी राम – दशरथ तथा कौशल्या के पुत्र, सीता के पति लक्ष्मण - दशरथ तथा सुमित्रा के पुत्र,उर्मिला के पति भरत – दशरथ तथा कैकयी के पुत्र,मांडवी के पति शत्रुघ्न - दशरथ तथा सुमित्रा के पुत्रश्रुतकीर्ति के पति,मथुरा के राजा लवणासूर के संहारक शान्ता – दशरथ की पुत्री,राम भगिनी बाली – किष्किन्धा (पंपापुर) का राजा,रावण का मित्र तथा साढ़ू,साठ हजार हाथियों का बल सुग्रीव – बाली का छोटा भाई,जिनकी हनुमान जी ने मित्रता करवाई तारा – बाली की पत्नी,अंगद की माता, पंचकन्याओं में स्थान रुमा – सुग्रीव की पत्नी,सुषेण वैद्य की बेटी अंगद – बाली तथा तारा का पुत्र । रावण – ऋषि पुलस्त्य का पौत्र, विश्रवा तथा पुष्पोत्कटा का पुत्र कुंभकर्ण – रावण तथा कुंभिनसी का भाई, विश्रवा तथा पुष्पोत्कटा का पुत्र कुंभिनसी – रावण तथा कुुंंभकर्ण की भगिनी,विश्रवा तथा पुष्पोत्कटा की पुत्री विश्रवा - ऋषि पुलस्त्य का पुत्र, पुष्पोत्कटा-राका-मालिनी का पति विभीषण – विश्रवा तथा राका का पुत्र,राम का भक्त पुष्पोत्कटा – विश्रवा की पत्नी,रावण, कुंभकर्ण तथा कुंभिनसी की माता राका – विश्रवा की पत्नी,विभीषण की माता मालिनी - विश्रवा की तीसरी पत्नी,खर-दूषण,त्रिसरा तथा शूर्पणखा की माता । त्रिसरा – विश्रवा तथा मालिनी का पुत्र,खर-दूषण का भाई एवं सेनापति शूर्पणखा - विश्रवा तथा मालिनी की पुत्री, खर-दूषण एवं त्रिसरा की भगिनी,विंध्य क्षेत्र में निवास । मंदोदरी – रावण की पत्नी,तारा की भगिनी, पंचकन्याओं में स्थान मेघनाद – रावण का पुत्र इंद्रजीत,लक्ष्मण द्वारा वध दधिमुख – सुग्रीव का मामा ताड़का – राक्षसी,मिथिला के वनों में निवास,राम द्वारा वध। मारिची – ताड़का का पुत्र,राम द्वारा वध (स्वर्ण मृग के रूप में)। सुबाहू – मारिची का साथी राक्षस,राम द्वारा वध। सुरसा – सर्पों की माता। त्रिजटा – अशोक वाटिका निवासिनी राक्षसी, रामभक्त,सीता की अनुरागी त्रिजटा विभीषण की पुत्री थी। प्रहस्त – रावण का सेनापति,राम-रावण युद्ध में मृत्यु। विराध – दंडक वन में निवास,राम लक्ष्मण द्वारा मिलकर वध। शंभासुर – राक्षस, इन्द्र द्वारा वध, इसी से युद्ध करते समय कैकेई ने दशरथ को बचाया था तथा दशरथ ने वरदान देने को कहा। सिंहिका(लंकिनी) – लंका के निकट रहने वाली राक्षसी,छाया को पकड़कर खाती थी। कबंद – दण्डक वन का दैत्य,इन्द्र के प्रहार से इसका सर धड़ में घुस गया,बाहें बहुत लम्बी थी,राम-लक्ष्मण को पकड़ा राम-लक्ष्मण ने गड्ढा खोद कर उसमें गाड़ दिया। जामवंत – रीछ,रीछ सेना के सेनापति। नल – सुग्रीव की सेना का वानरवीर। नील – सुग्रीव का सेनापति जिसके स्पर्श से पत्थर पानी पर तैरते थे,सेतुबंध की रचना की थी। नल और नील – सुग्रीव सेना मे इंजीनियर व राम सेतु निर्माण में महान योगदान। (विश्व के प्रथम इंटरनेशनल हाईवे “रामसेतु”के आर्किटेक्ट इंजीनियर) शबरी – अस्पृश्य जाति की रामभक्त, मतंग ऋषि के आश्रम में राम-लक्ष्मण का आतिथ्य सत्कार। संपाती – जटायु का बड़ा भाई,वानरों को सीता का पता बताया। जटायु – रामभक्त पक्षी,रावण द्वारा वध, राम द्वारा अंतिम संस्कार। गुह – श्रंगवेरपुर के निषादों का राजा, राम का स्वागत किया था। हनुमान – पवन के पुत्र,राम भक्त,सुग्रीव के मित्र। सुषेण वैद्य – सुग्रीव के ससुर । केवट – नाविक,राम-लक्ष्मण-सीता को गंगा पार कराई। शुक्र-सारण – रावण के मंत्री जो बंदर बनकर राम की सेना का भेद जानने गए। अगस्त्य – पहले आर्य ऋषि जिन्होंने विन्ध्याचल पर्वत पार किया था तथा दक्षिण भारत गए। गौतम – तपस्वी ऋषि,अहिल्या के पति,आश्रम मिथिला के निकट। अहिल्या - गौतम ऋषि की पत्नी,इन्द्र द्वारा छलित तथा पति द्वारा शापित,राम ने शाप मुक्त किया,पंचकन्याओं में स्थान। ऋण्यश्रंग – ऋषि जिन्होंने दशरथ से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया था। सुतीक्ष्ण – अगस्त्य ऋषि के शिष्य,एक ऋषि। मतंग – ऋषि,पंपासुर के निकट आश्रम, यहीं शबरी भी रहती थी। वशिष्ठ – अयोध्या के सूर्यवंशी राजाओं के गुरु। विश्वामित्र – राजा गाधि के पुत्र,राम-लक्ष्मण को धनुर्विद्या सिखाई थी। शरभंग – एक ऋषि, चित्रकूट के पास आश्रम। सिद्धाश्रम – विश्वमित्र के आश्रम का नाम। भारद्वाज – वाल्मीकि के शिष्य,तमसा नदी पर क्रौंच पक्षी के वध के समय वाल्मीकि के साथ थे,मां-निषाद’ वाला श्लोक कंठाग्र कर तुरंत वाल्मीकि को सुनाया था। सतानन्द – राम के स्वागत को जनक के साथ जाने वाले ऋषि। युधाजित – भरत के मामा। जनक – मिथिला के राजा। सुमन्त – दशरथ के आठ मंत्रियों में से प्रधान । मंथरा – कैकयी की मुंह लगी दासी,कुबड़ी। देवराज – जनक के पूर्वज-जिनके पास परशुराम ने शंकर का धनुष सुनाभ (पिनाक) रख दिया था। मय दानव - रावण का ससुर और उसकी पत्नी मंदोदरी का पिता मायावी --मय दानव का पुत्र और रावण का साला, जिसका बालि ने वध किया था मारीच --रावण का मामा सुमाली --रावण का नाना माल्यवान --सुमाली का भाई, रावण का वयोवृद्ध मंत्री नारंतक - रावण का पुत्र,मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण रावण ने उसे सागर में प्रवाहित कर दिया था। रावण ने अकेले पड़ जाने के कारण युद्ध में उसकी सहायता ली थी। दधिबल - अंगद का पुत्र जिसने नारंतक का वध किया था। नारंतक शापित था कि उसका वध दधिबल ही करेगा। अयोध्या – राजा दशरथ के कौशल प्रदेश की राजधानी,बारह योजन लंबी तथा तीन योजन चौड़ी नगर के चारों ओर ऊंची व चौड़ी दीवारों व खाई थी,राजमहल से आठ सड़कें बराबर दूरी पर परकोटे तक जाती थी। साभार संकलन 🙏पं.प्रणयन एम पाठक🙏 जय श्री राम 🚩

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