devi lakshmi
devi lakshmi Mar 30, 2020

🙏🏻JAI MATA DI🙏🏻

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कामेंट्स

Dr. SEEMA SONI Mar 30, 2020
🙏🌹जय माता दी। ॐ नमः शिवाय 🌹🙏 माता रानी और भोलेबाबा का आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे गुड आफ्टरनून मेरी प्यारी बहना जी 🙏🌹🙏

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Mar 30, 2020
Good Afternoon My Sweet Sister ji 🙏🙏 Jay Mata di Mata Rani ji Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏 Aapka Har Din Shub Mangalmay Ho ji Aap Hamesha Khush Rahe ji 🙏🙏🌹🔔🔔🕉️🕉️🕉️🌹🌹🌹.

Edward dora Mar 30, 2020
jai mata di 🌹🌹🌹❤️❤️🥀🌹🙏🙏

Mavjibhai Patel Mar 30, 2020
जय हो जय श्री राधे राधे राधे राधे राधे राधे जय श्री कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा शुभ दोपहर वंदन आदरणीय दीदी सादर प्रणाम केम छो जय हो pryagraj

विलास पटारे पाटील Mar 30, 2020
शुभ दुपार वंदन राम राम जी 🙏🙏 जय माता दी 🌿🕉️🙏🌺🙏🕉️🌿🌿🕉️🙏🌺🌺🙏🕉️🌿🌿🕉️🙏🌺🌺🙏🕉️🌿🌿🕉️🙏🌺🌺🙏🕉️🌿🌿🕉️🙏🌺🌺

champalal m kadela May 10, 2020

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किshan May 9, 2020

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Sunita Pawar May 10, 2020

*■◆●🌹*मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं*🌹 💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕💕 माँ- दुःख में सुख का एहसास है, माँ - हरपल मेरे आस पास है। माँ- घर की आत्मा है, माँ- साक्षात् परमात्मा है। माँ- आरती, अज़ान है, माँ- गीता और कुरआन है। माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है, माँ- उस रब का ही एक रूप है। माँ- तपती धूप में साया है, माँ- आदि शक्ति महामाया है। माँ- जीवन में प्रकाश है, माँ- निराशा में आस है। माँ- महीनों में सावन है, माँ- गंगा सी पावन है। माँ- वृक्षों में पीपल है, माँ- फलों में श्रीफल है। माँ- देवियों में गायत्री है, माँ- मनुज देह में सावित्री है। माँ- ईश् वंदना का गायन है, माँ- चलती फिरती रामायन है। माँ- रत्नों की माला है, माँ- अँधेरे में उजाला है, माँ- बंदन और रोली है, माँ- रक्षासूत्र की मौली है। माँ- ममता का प्याला है, माँ- शीत में दुशाला है। माँ- गुड सी मीठी बोली है, माँ- ईद, दिवाली, होली है। माँ- इस जहाँ में हमें लाई है, माँ- की याद हमें अति की आई है। माँ- मैरी, फातिमा और दुर्गा माई है, माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है। माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है। अंत में मैं बस एक पुण्य का काम करता हूँ, दुनिया की सभी माँओं को दंडवत प्रणाम करता हूँ। 🙏 *हैपी मदर्स डे* 🙏

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त्रिसंध्या संध्या उस समय को कहते हैं जब एक समय जा रहा होता है और दूसरा समय आ रहा होता है । जैसे सूर्योदय से कुछ समय पूर्व रात्रि जा रही होती है और दिन आ रहा होता है । ऐसे ही दोपहर में जब सूर्य चढ़ते-चढ़ते उतरने लगता है लगभग 12:00 बजे का समय वह भी संध्या होती है ।दोपहर म् पूर्वान्ह । मध्यान्ह । अपराह्न । ये तीन काल होते हैं । ठीक ऐसे ही शाम को जब दिन छुप रहा होता है और रात्रि आ रही है होती है उसको भी संध्या कहते हैं । इस प्रकार दिन में तीन संध्या होती है एक प्रातः वाली एक दोपहर वाली और एक शाम वाली संध्या का समय भजन के लिए, उपासना के लिए बहुत ही उपयुक्त माना गया है । वैष्णव लोग त्रिकाल संध्या करते हैं । जैसे काल भी तीन हैं भूत वर्तमान और भविष्य ऐसे ही संध्याएं भी तीन हैं । संध्या का समय शांत होता है, नीरव होता है । जो जा रहा होता है वह भी शांत होता है और जो आ रहा होता है वह भी शांत होता है । अतः हम वैष्णवजन को प्रयास करके त्रिकाल संध्या के समय अवश्य थोड़ा-थोड़ा भजन बन पड़े तो करना चाहिए । अन्यथा नाम के लिए तो कोई देश, कोई काल कोई परिस्थिति की अपेक्षा नहीं है । कभी भी, कैसे भी कर सकते हैं । जिनका मन अधिक चंचल हो, मन न लगता हो वह प्रयास करके इन तीनों संध्याओं में यदि कुछ भजन करें । कुछ उपासना करें , कुछ ध्यान लगाएं , कुछ नाम करें तो उनकी चंचलता अपेक्षाकृत जल्दी ठीक हो सकती है । संध्याओं का अपना एक महत्त्व है । उसका लाभ उठाना चाहिए । समस्त वैष्णव जन को राधादासी का प्रणाम जय श्री राधे जय निताई LBW- Lives Born Works at Vrindabn

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kamlash May 10, 2020

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