Astro FC varma pune
Astro FC varma pune Feb 25, 2021

🌱🌱कच्ची हल्दी के 10 सेहतमंद गुण🌱🌱 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 🏡हल्दी के खास गुणों से अमूमन हर कोई परिचित होता है। भारतीय खाने की हल्दी के बिना कल्पना करना भी मुश्किल है। हल्दी का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने में, सूजन कम करने में और शरीर के शोधन में हजारों सालों से उपयोग किया जा रहा है। इसमें पाया जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्स और वोलाटाइल तेल कैंसर रोग से लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं। 🏡सर्दियों के मौसम में हल्दी की गांठ का उपयोग सबसे अधिक लाभदायक है और यह समय हल्दी से होने वाले फायदों को कई गुना बढ़ा देता है क्योंकि कच्ची हल्दी में हल्दी पाउडर की तुलना में ज्यादा गुण होते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कच्ची हल्दी के इस्तेमाल के दौरान निकलने वाला रंग हल्दी पाउडर की तुलना में काफी ज्यादा गाढ़ा और पक्का होता है। 🏡कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है। इसे ज्यूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, अचार के तौर पर, चटनी बनाकर और सूप में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। 🏡🏡हल्दी के 10 गुण 🏡1. कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं। यह खासतौर पर पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ साथ उन्हें खत्म भी कर देती है। यह हानिकारक रेडिएशन के संपर्क में आने से होने वाले ट्यूमर से भी बचाव करती है। 🏡2. हल्दी में सूजन को रोकने का खास गुण होता है। इसका उपयोग गठिया रोगियों को अत्यधिक लाभ पहुंचाता है। यह शरीर के प्राकृतिक सेल्स को खत्म करने वाले फ्री रेडिकल्स को खत्म करती है और गठिया रोग में होने वाले जोडों के दर्द में लाभ पहुंचाती है। 🏡3. कच्ची हल्दी में इंसुलिन के स्तर को संतुलित करने का गुण होता है। इस प्रकार यह मधुमेह रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है। इंसुलिन के अलावा यह ग्लूकोज को नियंत्रित करती है जिससे मधुमेह के दौरान दी जाने वाली उपचार का असर बढ़ जाता है। परंतु अगर आप जो दवाइयां ले रहे हैं बहुत बढ़े हुए स्तर (हाई डोज) की हैं तो हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह अत्यंत आवश्यक है। 🏡4. शोध से साबित हो चका है कि हल्दी में लिपोपॉलीसेच्चाराइड नाम का तत्व होता है इससे शरीर में इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। हल्दी इस तरह से शरीर में बैक्टेरिया की समस्या से बचाव करती है। यह बुखार होने से रोकती है। इसमें शरीर को फंगल इंफेक्शन से बचाने के गुण होते है। 🏡5. हल्दी के लगातार इस्तेमाल से कोलेस्ट्रोल सेरम का स्तर शरीर में कम बना रहता है। कोलेस्ट्रोल सेरम को नियंत्रित रखकर हल्दी शरीर को ह्रदय रोगों से सुरक्षित रखती है। 🏡6. कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी सेप्टिक गुण होते हैं। इसमें इंफेक्शन से लडने के गुण भी पाए जाते हैं। इसमें सोराइसिस जैसे त्वचा संबंधि रोगों से बचाव के गुण होते हैं। 🏡7. हल्दी का उपयोग त्वचा को चमकदार और स्वस्थ रखने में बहुत कारगर है। इसके एंटीसेप्टीक गुण के कारण भारतीय संस्कृति में विवाह के पूर्व पूरे शरीर पर हल्दी का उबटन लगाया जाता है। 🏡8. कच्ची हल्दी से बनी चाय अत्यधिक लाभकारी पेय है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। 🏡9. हल्दी में वजन कम करने का गुण पाया जाता है। इसका नियमित उपयोग से वजन कम होने की गति बढ़ जाती है। 🏡10. शोध से साबित होता है कि हल्दी लीवर को भी स्वस्थ रखती है। हल्दी के उपयोग से लीवर सुचारु रुप से काम करता रहता है। 🏚️✔️Note-- ध्यान दें हल्दी विस्मयकारी गुणों से भरपूर है परंतु कुछ लोगों पर इसके विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। जिन लोगों को हल्दी से एलर्जी है उन्हें पेट में दर्द या डायरिया जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को कच्ची हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह ले लेनी चाहिए। इससे खून का थक्का जमना भी प्रभावित हो सकता है जिससे रक्त का बहाव बढ़ जाता है अत: अगर किसी की सर्जरी होने वाली हो तो उन्हें कच्ची हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए।

🌱🌱कच्ची हल्दी के 10 सेहतमंद गुण🌱🌱
🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

🏡हल्दी के खास गुणों से अमूमन हर कोई परिचित होता है। भारतीय खाने की हल्दी के बिना कल्पना करना भी मुश्किल है। हल्दी का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने में, सूजन कम करने में और शरीर के शोधन में हजारों सालों से उपयोग किया जा रहा है। इसमें पाया जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्स और वोलाटाइल तेल कैंसर रोग से लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं। 

🏡सर्दियों के मौसम में हल्दी की गांठ का उपयोग सबसे अधिक लाभदायक है और यह समय हल्दी से होने वाले फायदों को कई गुना बढ़ा देता है क्योंकि कच्ची हल्दी में हल्दी पाउडर की तुलना  में ज्यादा गुण होते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कच्ची हल्दी के इस्तेमाल के दौरान निकलने वाला रंग हल्दी पाउडर की तुलना में काफी ज्यादा गाढ़ा और पक्का होता है।

🏡कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है। इसे ज्यूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, अचार के तौर पर, चटनी बनाकर और सूप में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है। 

🏡🏡हल्दी के 10 गुण

🏡1. कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं। यह खासतौर पर पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ साथ उन्हें खत्म भी कर देती है। यह हानिकारक रेडिएशन के संपर्क में आने से होने वाले ट्यूमर से भी बचाव करती है। 

🏡2. हल्दी में सूजन को रोकने का खास गुण होता है। इसका उपयोग गठिया रोगियों को अत्यधिक लाभ पहुंचाता है। यह शरीर के प्राकृतिक सेल्स को खत्म करने वाले फ्री रेडिकल्स को खत्म करती है और गठिया रोग में होने वाले जोडों के दर्द में लाभ पहुंचाती है। 

🏡3. कच्ची हल्दी में इंसुलिन के स्तर को संतुलित करने का गुण होता है। इस प्रकार यह मधुमेह रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है। इंसुलिन के अलावा यह ग्लूकोज को नियंत्रित करती है जिससे मधुमेह के दौरान दी जाने वाली उपचार का असर बढ़ जाता है। परंतु अगर आप जो  दवाइयां ले रहे हैं बहुत बढ़े हुए स्तर (हाई डोज) की हैं तो हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह अत्यंत आवश्यक है।

🏡4.  शोध से साबित हो चका है कि हल्दी में लिपोपॉलीसेच्चाराइड नाम का तत्व होता है इससे शरीर में इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। हल्दी इस तरह से शरीर में बैक्टेरिया की समस्या से बचाव करती है। यह बुखार होने से रोकती है। इसमें शरीर को फंगल इंफेक्शन से बचाने के गुण होते है। 

🏡5. हल्दी के लगातार इस्तेमाल से कोलेस्ट्रोल सेरम का स्तर शरीर में कम बना रहता है। कोलेस्ट्रोल सेरम को नियंत्रित रखकर हल्दी शरीर को ह्रदय रोगों से सुरक्षित रखती है। 

🏡6. कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी सेप्टिक गुण होते हैं। इसमें इंफेक्शन से लडने के गुण भी पाए जाते हैं। इसमें सोराइसिस जैसे त्वचा संबंधि रोगों से बचाव के गुण होते हैं। 

🏡7. हल्दी का उपयोग त्वचा को चमकदार और स्वस्थ रखने में बहुत कारगर है। इसके एंटीसेप्टीक गुण के कारण भारतीय संस्कृति में विवाह के पूर्व पूरे शरीर पर हल्दी का उबटन लगाया जाता है। 

🏡8. कच्ची हल्दी से बनी चाय अत्यधिक लाभकारी पेय है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। 

🏡9. हल्दी में वजन कम करने का गुण पाया जाता है। इसका नियमित उपयोग से वजन कम होने की गति बढ़ जाती है।

🏡10. शोध से साबित होता है कि हल्दी लीवर को भी स्वस्थ रखती है। हल्दी के उपयोग से लीवर सुचारु रुप से काम करता रहता है।

🏚️✔️Note-- ध्यान दें
हल्दी विस्मयकारी गुणों से भरपूर है परंतु कुछ लोगों पर इसके विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। जिन लोगों को हल्दी से एलर्जी है उन्हें पेट में दर्द या डायरिया जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को कच्ची हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह ले लेनी चाहिए। इससे खून का थक्का जमना भी प्रभावित हो सकता है जिससे रक्त का बहाव बढ़ जाता है अत: अगर किसी की सर्जरी होने वाली हो तो उन्हें कच्ची हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए।

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कामेंट्स

JAI MAA VAISHNO Feb 25, 2021
JAI SHREE RAM PARIVAR KI JAI SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE SHREE RADHE

sima Feb 25, 2021
vajan kam karne ke liye ise kaise istemal karna ho

prakash patel Feb 27, 2021
🌸 Face Book group 🌸 https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ 🏥 એક્યુપ્રેશર અને ઘરેલુ ઉપચાર..

Mrs. Seema Valluvar May 10, 2021

गिलोय एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई। इसका वानस्पिक नाम( Botanical name) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (tinospora cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं। आइए_जानते_हैं_गिलोय_के_फायदे गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं। ठीक करती है बुखार अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है। गिलोय के फायदे – डायबिटीज के रोगियों के लिए गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है। पाचन शक्ति बढ़ाती है यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है। कम करती है स्ट्रेस गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है। बढ़ाती है आंखों की रोशनी गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं। अस्थमा में भी फायदेमंद मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा। गठिया में मिलेगा आराम गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है। अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है। बाहर निकलेगा कान का मैल कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा। कम होगी पेट की चर्बी गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है। खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है…. जवां रखती है गिलोय गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है। बालों की समस्या भी होगी दूर अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी। गिलोय का प्रयोग ऐसे करें :-- अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है… गिलोय जूस गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है। काढ़ा चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं। पाउडर यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें। गिलोय वटी बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें। साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।खांड के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं। साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय न दें। एक निवेदन :-- अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जंहा भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय वरदान है।

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शास्त्रों में स्वच्छता के सूत्र हमारे पूर्वज अत्यंत दूरदर्शी थे। उन्होंने हजारों वर्षों पूर्व वेदों व पुराणों में महामारी की रोकथाम के लिए परिपूर्ण स्वच्छता रखने के लिए स्पष्ट निर्देश दे कर रखें हैं- 1. लवणं व्यञ्जनं चैव घृतं तैलं तथैव च । लेह्यं पेयं च विविधं हस्तदत्तं न भक्षयेत् ।। - धर्मसिन्धू ३पू. आह्निक नामक, घी, तेल, चावल, एवं अन्य खाद्य पदार्थ चम्मच से परोसना चाहिए हाथों से नही। 2. अनातुरः स्वानि खानि न स्पृशेदनिमित्ततः ।। - मनुस्मृति ४/१४४ अपने शरीर के अंगों जैसे आँख, नाक, कान आदि को बिना किसी कारण के छूना नही चाहिए। 3. अपमृज्यान्न च स्न्नातो गात्राण्यम्बरपाणिभिः ।। - मार्कण्डेय पुराण ३४/५२ एक बार पहने हुए वस्त्र धोने के बाद ही पहनना चाहिए। स्नान के बाद अपने शरीर को शीघ्र सुखाना चाहिए। 4. हस्तपादे मुखे चैव पञ्चाद्रे भोजनं चरेत् ।। पद्म०सृष्टि.५१/८८ नाप्रक्षालितपाणिपादो भुञ्जीत ।। - सुश्रुतसंहिता चिकित्सा २४/९८ अपने हाथ, मुहँ व पैर स्वच्छ करने के बाद ही भोजन करना चाहिए। 5. स्न्नानाचारविहीनस्य सर्वाः स्युः निष्फलाः क्रियाः ।। - वाघलस्मृति ६९ बिना स्नान व शुद्धि के यदि कोई कर्म किये जाते है तो वो निष्फल रहते हैं। 6. न धारयेत् परस्यैवं स्न्नानवस्त्रं कदाचन ।I - पद्म० सृष्टि.५१/८६ स्नान के बाद अपना शरीर पोंछने के लिए किसी अन्य द्वारा उपयोग किया गया वस्त्र(टॉवेल) उपयोग में नही लाना चाहिये। 7. अन्यदेव भवद्वासः शयनीये नरोत्तम । अन्यद् रथ्यासु देवानाम अर्चायाम् अन्यदेव हि ।। - महाभारत अनु १०४/८६ पूजन, शयन एवं घर के बाहर जाते समय अलग- अलग वस्त्रों का उपयोग करना चाहिए। 8. तथा न अन्यधृतं (वस्त्रं धार्यम् ।। - महाभारत अनु १०४/८६ दूसरे द्वारा पहने गए वस्त्रों को नही पहनना चाहिए। 9. न अप्रक्षालितं पूर्वधृतं वसनं बिभृयाद् ।। - विष्णुस्मृति ६४ एक बार पहने हुए वस्त्रों को स्वच्छ करने के बाद ही दूसरी बार पहनना चाहिए। 10. न आद्रं परिदधीत ।। - गोभिसगृह्यसूत्र ३/५/२४ गीले वस्त्र न पहनें। सनातन धर्म ग्रंथो के माध्यम से ये सभी सावधानियां समस्त भारतवासियों को हजारों वर्षों पूर्व से सिखाई जाती रही है। इस पद्धति से हमें अपनी व्यग्तिगत स्वच्छता को बनाये रखने के लिए सावधानियां बरतने के निर्देश तब दिए गए थे जब आज के जमाने के माइक्रोस्कोप नही थे। लेकिन हमारे पूर्वजों ने वैदिक ज्ञान का उपयोग कर धार्मिकता व सदाचरण का अभ्यास दैनिक जीवन में स्थापित किया था। आज भी ये सावधानियां अत्यन्त प्रासंगिक है। यदि हमें ये उपयोगी लगती हो तो इनका पालन कर सकते हैं। सनातन संस्कृति 🚩

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prakash patel May 10, 2021

🏡 आंख के रोग, पेट में कृमि, दाद होने पर गोमूत्र का प्रयोग... 💎 🏡 आंख के रोग आंख के धुंधलेपन एवं रतौंधी में काली बछिया के मूत्र को तांबे के बर्तन में गर्म करें। चौथाई भाग बचने पर छान लें और उसे कांच की शीशी में भर लें। उससे सुबह-शाम आंख धोएं। 🏡 पेट में कृमि आधा चम्मच अजवाइन के चूर्ण के साथ 4 चम्मच गोमूत्र 1 सप्ताह सेवन करें और कब्ज की समस्या होने पर हरड़ के चूर्ण के साथ गोमूत्र सेवन करें। 🏡 दाद होने पर गोबर और गोमूत्र का उपयोग दोनों आन्तरिक और बाहरी तरह से अच्छा होता है। बाहरी स्थिति में दाद, खाज, खुजली, दाग, धब्बे आदि में, गोमूत्र लगाने के बाद, 10 से 15 मिनट सूर्य की रोशनी दिखाकर धो देना चाहिए इससे सभी तरह के चर्म रोग दूर होते हैं। शरीर में ज्यादा खुजली होने पर गाय माता के मूत्र की मालिश करें| दाद होने पर, गोमूत्र में धतूरे के पत्तों को पीसकर उबालें और गाढ़ा होने पर लगाने से दाद को दूर किया जा सकता है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/

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sn.vyas May 9, 2021

*सूंघने की शक्ति खत्म होने पर* मैथी की चाय बनाकर उचित समय तक प्रयोग करने से खोई हुई गन्ध शक्ति धीरे धीरे सुधर कर पूर्ववत हो जाती है । स्वाद व गन्ध का लोप होने पर मैथी में उन्हें पुनः स्थापन करने का गुण है । लम्बे समय तक म्युकस या किसी तरह की गंदगी भर जाने के कारण गन्ध की सम्वेदन शीलता उत्तपन्न करने वाले ज्ञान तंतु वाले भाग में सम्वेदन तंतु अकार्यक्षम हो जाते है और उस भाग में म्युकसजमा हो जाने से नाक की गंध शक्ति लुप्त हो जाती है । मैथी की चाय के नित्य प्रयोग से म्युकस निकल जाने से वह ठीक हो जाती है। चाय बनाने की विधि - इसके लिए 5 gm (एक चम्मच) मैथी दाना दरदरा कूटा हुआ । 200 gm एक गिलास पानी मे डाल कर धीमी आंच पर उबलने रख दे । जब पानी 150 gm बचे बर्तन को आग से उतार कर छान लें और चाय की तरह घूंट घूंट कर गर्म गर्म पिये इसमे अन्य कुछ न मिलाये दिन में तीन बार सेवन करे सुबह दोपहर रात को खाना से आधा घण्टा पहले ले कुछ दिनों के निरंतर प्रयोग से समस्या ठीक हो जाएगी । अगर कोई ऐसे न ले सके तो थोड़ा गर्म दूध व देशी खांड या शहद मिला कर पिये ।परन्तु शहद मिलाते समय काढ़ा गर्म न हो गुनगुना हो केवल। Note- इस प्रयोग को गर्म तासीर , पित्त प्रकति , रक्त पित्त, खूनी बबासीर, नकसीर, मूत्र में रक्त, शरीर से कही से खून आता हो , कमजोर दुबले, low शुगर वाले रोगी चिकित्सक की देख रेख में ही प्रयोग करें। वैद्य गुरुवेंद्र सिंह संजीवनी आयुर्वेदिक उपचार केंद्र ललितपुर 9466623519 7985817113

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prakash patel May 10, 2021

💎 अर्जुन के फायदे.... . पौधे का परिचय श्रेणी : औषधीय समूह : कृषि योग्य वनस्पति का प्रकार : वृक्ष वैज्ञानिक नाम : अर्जुन तेर्मिनालिया सामान्य नाम : अर्जुन पौधे की जानकारी उपयोग : इसे हद्य रोग के उपचार के लिए एक पारंपरिक आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। घाव, रक्त स्त्राव और अल्सर के उपचार में इसका उपयोग किया जाता है। इसकी पत्ती का रस पेचिश और कान के दर्द का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है।🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ यह औषधि हद्य की मांसपेशिया को ताकत देती है और हद्य की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित रखती है। इसे अस्थमा के उपचार के लिए लाभदायक माना जाता है। यह औषधि हद्य संबधी कार्य को बढ़ावा देती है और रक्त चाप को समान्य रखती है। उपयोगी भाग : छाल उत्पादन क्षमता : 45 कि.ग्रा./हेक्टेयर/3 वर्ष सूखी छाल उत्पति और वितरण : यह वृक्ष संपूर्ण भारत वर्ष में मुख्यत: उप हिमालयी इलाकों और पूर्वी भारत में पाया जाता है। यह आमतौर पर पश्चिम बंगाल, दक्षिण और मध्य भारत में नदी के किनारे या नदी के किनारों की सूखी मेढ़ो में मिलता है। इसे बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, पेंच टाइगर रिर्जव और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में व्यापक रूप से उगाया जाता है। वितरण : प्राचीन काल से यह एक परंपरागत आयुर्वेदिक औषधि है। भाव प्रकाश (आयुर्वेदिक पाठ) के अनुसार यह औषधि मधुर, शीतलता प्रदान करने वाली, पित्त को कम करने वाली और उत्तेजक के रुप में उपयोग की जाने वाली है। वर्गीकरण विज्ञान, वर्गीकृत कुल : काम्ब्रेऐसी आर्डर : म्यर्तलेस प्रजातियां : टी. अर्जुन वितरण : प्राचीन काल से यह एक परंपरागत आयुर्वेदिक औषधि है। भाव प्रकाश (आयुर्वेदिक पाठ) के अनुसार यह औषधि मधुर, शीतलता प्रदान करने वाली, पित्त को कम करने वाली और उत्तेजक के रुप में उपयोग की जाने वाली है। आकृति विज्ञान, बाह्रय स्वरूप स्वरूप : यह बड़े आकार का सदाबहार पर्णपाती वृक्ष है। छाल चिकनी भूरे रंग की मोटी, कोमल और अंदर लाल रंग की होती है।💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ इसका तना मजबूत होता है जिस पर झूलती हुई शाखायें होती है जो एक मुकुट की तरह छत्र बनाती है। पत्तिंया : पत्तियां आयताकार और शक्वाकार, 4-6 इंट लंबी, 2-3 इंच चौड़ी, शीर्ष पर हरी और नीचे भूरी होती है। फूल : इसके फूल हल्के पीले रंग के होते है जो मार्च से जून माह के दौरान आते है। फल : फल अरोमिल, 2.5 से 5 से.मी. के रेशेदार काष्टीय होते है। फल सितम्बर से नवंबर माह के बीच आते है जो 5 भागों मे विभाजित रहते है। परिपक्व ऊँचाई : इसकी ऊँचाई 60-85 फीट तक पहुँचती है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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prakash patel May 9, 2021

ગોખરુ ઓસ્ટિઓ આથ્રાઈટીસમાં સારું પરિણામ આપતું ઔષધ : કુપોષણ, કમરનો દુ:ખાવો, ઓસ્ટિઓ આથ્રાઈટીસ વગેરેમાં સારું પરિણામ આપે છે શહેરીજનો ગોખરુથી અજાણ છે, પણ ગામડામાં સીમમાં જે લોકો ફરતાં હોય છે, તેઓ ગોખરુથી અજાણ નથી. એમાંના ઘણાંને ગોખરુના કાંટા વાગ્યા હોય, તેઓને તો ખાસ ગોખરૂ યાદ રહી જાય છે. આમ, પીડા આપતું આ ગોખરુ ઘણા લોકોની પીડા, દર્દ, વ્યાધિને દૂર કરનારું એક ઔષધ પુરવાર થયું છે. 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ ગોખરુ: પ્રકૃતિમાં ગોખરુ ઠંડુ છે. શરીરની ઉષ્મા - ગરમીને તત્કાળ દૂર કરનારું છે. જેમનું શરીર તપેલું રહેતું હોય તેમને માટે તો ગોખરુ ઉનાળામાં પણ હેમાળા (હિમાલય) જેવું લાગે છે ગુણમાં ઠંડુ હોવા છતાં બળકારક એટલે કે શરીરમાં શક્તિ - સ્ફુર્તિનો સંચાર કરે છે. વિના કારણે કે કારણસર લાગતો થાક દૂર કરે છે ગોખરું પૌષ્ટિક છે. કુપોષણ: આજે કુપોષણ શબ્દો મીડિયામાં ખૂબ સાંભળવા મળે છે. કારણ કે સમગ્ર ભારતમાં કુપોષણથી પીડાતા લોકોની સંખ્યા વધારે છે. એમાં પણ બાળકો અને સ્ત્રીઓ આ કુપોષણની સમસ્યાનું નિવારણ ઝડપથી કરવું હોય તો ગોખરુ, અશ્વગંધા, શતાવરી જેવી ઔષધિઓના પાક બનાવી આપવા જોઈએ. કમરનો દુ:ખાવો: કમરના દુ:ખાવાનાં અનેક કારણો હોય છે. જેમ કે યુ.ટી.આઈ. (Urinary track Inmdection) સ્ત્રીઓમાં સફેદ પાણી પડવું, સ્ત્રીઓની માસિકની અનિયમિતતા, ખોરાકનું બરાબર પાચન ન થવાને કારણે પેદા થતો આમ Undihested Food Particles જે કમરના સાંધામાં પહોંચીને દુ:ખાવો પેદા કરે છે, પથરી થવી. આ બધા કારણોને લીધે થતા કરના દુ:ખાવામાં ગોખરુ ખૂબ ઉપયોગી છે. આર્યભિષકમાં કમરના દુ:ખાવા માટે ગોખરુ અને સૂંઠના ઉકાળાને સફળ ઔષધ ગણ્યું છે. રીત: ગોખરુ પાંચ ગ્રામ, સૂંઠ ૧ ગ્રામ, એક કપ દૂધ, એક કપ પાણીને ધીમા તાપે ઉકાળવા મૂકવું. પાણી બળી જાય ત્યારે તેમાં થોડી સાકર નાખીને પીવું. પ્રોસ્ટેટ એન્લાર્જમેન્ટ: પ્રોસ્ટેટ એન્લાર્જમેન્ટની સમસ્યા ખાસ કરીને ૪૦-૪૫ વર્ષ પછીથી થતી પુરુષોની સમસ્યા છે. આધુનિક તબીબી શાસ્ત્ર આ સમસ્યાના ઉકેલ માટે સર્જરી કરાવવાનું સૂચન કરે છે. સર્જરી કરાવ્યા પછી ઘણી એવી વ્યક્તિઓ જોવા મળી છે કે તેમને યુરિન પર કોઈ કન્ટ્રોલ રહેતો નથી. જેમ નાનાં બાળકોને ડાયપર પહેરાવવામાં આવે છે એ પ્રમાણે મોટી ઉંમરની વ્યક્તિઓને ડાયપર પહેરવું પડતું હોય છે. ગોખરુ સાથેની કેટલીક ઔષધિઓના સમન્વયથી પ્રોસ્ટેટ એન્લાર્જમેન્ટની સમસ્યાનું નિવારણ થઈ શકે છે. રસાયણપૂર્ણ + હળદર: જેમાં ગળો, ગોખર, આમળા અને હળદરને સરખાભાગે લઈ તેમાંથી 3-3 ગ્રામ પાવડર જમ્યા પહેલાં પાણી સાથે ફાકી જવો. આનાથી પ્રોસ્ટેટનો સોજો દૂર થાય છે અને PSA રિપોર્ટ પણ નોર્મલ થઈ જાય છે. રાસાયણિક વિશ્લેષણ: ગોખરું નું રાસાયણિક વિશ્લેષણ કરતાં તેમાં ગ્લુકોઝ, એમિનો એસિડ્સ, ક્લોરોજેનીન, એસ્ટ્રાગેલીન, સ્ટીગ્માસ્ટેરોલ, ફ્યુરોગ્લુકોસાઈડ જેવા તત્ત્વો છે. તાજેતરમાં થયેલાં સંશોધન અનુસાર ગોખરુ ઓસ્ટિઓ આથ્રાઈટીસમાં સારું પરિણામ આપતું ઔષધ પુરવાર થયું છે. પેશાબમાં લોહી પડવું: શરદઋતુ કે ગરમીની ઋતુમાં અથવા તો જેમની પ્રકૃતિ પિતની હોય, ગરમી ખોરાક વધારે ખાતા હોય. જેમને પથરી થયેલી હોય કે જેમનાં રક્તમાં પિત્તની માત્ર વધી જતાં અધોગામી રક્તપિત્તની સમસ્યા થઈ હોય તેમને માટે ગોખરુ અને શતાવરીનો ક્ષીરપાક ખૂબ ઉપયોગી છે. 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ બનાવવાની રીત: ગોખરું ત્રણ ગ્રામ, શતાવરી ત્રણ ગ્રામ, સાકર, દસ ગ્રામ, એક કપ દૂધ અને એક પાણી.ઉપર્યુક્ત તમામ ઔષધિઓને ધીમા તાપે ઉકાળવા મૂકવી, પાણી બળી જાય ત્યારે ગાળીને ઠંડુ પાડી દિવસમાં બે વાર પીવું. આ ક્ષીરપાકથી પેશાબ માર્ગે આવતું લોહી બંધ થાય છે. પથરી પણ ધીમે ધીમે તૂટીને બહાર નીકળવા માંડે છે. ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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prakash patel May 8, 2021

💎तरबूज के फायदे.... गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तरबूज खाना शुरू हो जाता है, क्योंकि गर्मियों के मौसम में तरबूज का सेवन बहुत लाभकारी होता है। तरबूज जोकि बाहर से देखने में थोड़ा कड़क और अंदर से एकदम नरम होता है, जिसमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। तरबूज मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन फाइबर और विटामिन जिसमें A, B और C पाए जाते हैं। यह मिनरल का अच्छा स्रोत माना जाता है। तरबूज खाने से आपको ढेर सारे स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ गर्मी से राहत प्राप्त होगी क्योंकि तरबूज शरीर को ठंडक प्रदान करता है। इसमें बीटा केरोटिन के साथ साथ एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। तरबूज में आयरन कैल्शियम मैग्नीशियम फास्फोरस और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज तत्व मौजूद होते हैं जो आपको कई प्रकार की बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। तरबूज के औषधीय गुण वजन घटाने में लाभदायक: तरबूज में सिट्रयूलाइन नमक तत्व होता है, जो शरीर में फैले वसा को कम करने में मदद करता है। यह वसा की मात्रा को बढ़ोतरी देने वाले कोशिकाओं को कम करता है। तरबूज में पानी की अधिकता होने के कारण यह डाइटिंग में वजन कम करने का अच्छा स्रोत हो सकता है। 💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ पाचन नियमित्ता और कब्ज़ रोकथाम: तरबूज पानी और फाइबर सामग्री में उच्च होने के कारण कब्ज को रोकने और स्वस्थ पाचन तंत्र की नियमितता को बढ़ावा देने में मदद करता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाये: तरबूज में मौजूद विटामिन A और विटामिन C सेहत के लिए कभी लाभदायक होते हैं। विटामिन C की मात्रा होने से यह हमारे शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है, साथ ही विटामिन A होने के नाते आँखों को स्वस्थ और नजर में तीखा बनता है। शरीर को हाइड्रेट रखता है: तरबूज में 94% पानी होता है, तो यह शरीर में तरल पदार्थों की पूर्ति तो करेगा ही, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है। इसमें मौजूद सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम शरीर एवं त्वचा को हाइड्रेट रखने मदद करते हैं। जितना ज्यादा पानी पिओगे शरीर को निरोगी पाओगे। आँखों के लिए फायदेमंद: अगर आप नियमित रूप से तरबूज का सेवन करेंगे तो, अपनी आँखों को स्वस्थ और नजर में ज्यादा पाओगे। क्यूंकि तरबूज में मौजूद बीटा कैरोटीन और विटामिन A आँखों के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इस फल के सेवन करने से आप रतौंधी और मोतियाबिंद जैसे रोगों से बच सकते हो। दिल को मजबूत रखे: दिल तब ही स्वस्थ और फिट रहता है, जब उसमे सही तरह से शुद्ध खून का संचार होता है। तरबूज में पोटेशियम नमक पोषक तत्व खून को साफ़ और सही तरीके से प्रवाह में मदद करता है। जिससे दिल स्वस्थ और बिना किसी घबराहट के चलता है। इससे आपको किसी भी प्रकार की डर नहीं रहती है। ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल: तरबूज खाने वाले लोगो का ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल रहता है। तरबूज़ में 90 % पानी होने से ये शरीर की गर्मी को कम करता है। तरबूज़ में लाइकोपीन उच्च मात्रा में होता है जो दिल की बीमारी से बचाव में मदद कर सकता है। उच्च रक्तचाप के लिए: तरबूज में पोटेशियम, मैग्नीशियम और एमिनो एसिड प्रचुर मात्रा में होता है। जो हमारे शरीर की रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने और ब्लड के प्रभाव को सही करने में मदद करता है। मोटे लोगों में उच्च रक्तचाप को नियंत्रण करने में तरबूज का सेवन सफल हुआ है। रोजाना एक गिलास तरबूज का जूस पीकर आप अपने हाई ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल कर सकते हैं। त्वचा जवान रहती है: अगर आप अपनी त्वचा के कसाव को बरक़रार रखना चाहते हैं तो तरबूज का सेवन करें। क्यूंकि इसमें पानी की अधिकता और कैरिटोनॉयड्स एवं फ्लेवनॉयड्स नामक तत्व होते हैं, तो त्वचा को कसने में मदद करते हैं। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ मांसपेशियों में मददगार: तरबूज में पोटेशियम अच्छी मात्रा में होता है, जो शरीर में नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों की सेहत के लिए जरूरी है। इसके सेवन से मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है। साथ ही तरबूज और तरबूज का रस मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद करता है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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prakash patel May 8, 2021

💎 बहेड़ा के फायदे.... . पौधे का परिचय श्रेणी : औषधीय समूह : कृषि योग्य वनस्पति का प्रकार : वृक्ष वैज्ञानिक नाम : तेर्मिनालिया बेल्लेरिचा सामान्य नाम : बहेड़ा पौधे की जानकारी उपयोग : बहेड़ा बीज का तेल या पेस्ट सूजन और दर्द वाले स्थान पर लगाया जाता है। बीजों का तेल त्वचा रोगों और बालों की असमय सफेदी दूर करने में किया जाता है। फलों के टुकडों को पकाकर खाँसी, सर्दी, अस्थमा और गले बैठने पर चबाया जाता है। इसके चूर्ण का उपयोग बहते हुए खून को रोकने में किया जाता है।🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट अपनाये और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/groups/367351564605027/ जड़ी-बूटी के रूप में निकट द्दष्टि, अस्पष्टता, अपरिपक्व मोतियाबिंद जैसे विभिन्न नेत्र रोगों में प्रयोग किया जाता है। गिरी के काढ़े का उपयोग उल्टी में किया जाता है। उपयोगी भाग : फल उत्पादन क्षमता : 20-25 किलो फल/पूर्ण परिपक्व वृक्ष उत्पति और वितरण : यह मूल रुप से भारत का वृक्ष हैं। जो पश्चिम भारत के शुष्क क्षेत्रों को छोड़कर लगभग समस्त भारत में 1,000 मी. ऊँचाई तक के क्षेत्रों में मिलता हैं। यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महराष्ट्र में बहुतायत में पाया जाता है। वितरण : यह एक पर्णपाती वृक्ष है जो संपूर्ण भारत में पाया जाता है। पेड़ की ऊचाँई 30 मीटर होती है। छाल भूरे रंग की होती है इसे संस्कृत में विभिताकि, कार्शफाला, कालिद्रुम और हिन्दी में बहेड़ा के रूप में जाना जाता है। वर्गीकरण विज्ञान, वर्गीकृत कुल : काम्ब्रेटेसी आर्डर : मार्यटालेस प्रजातियां : टी बेल्लीरीका वितरण : यह एक पर्णपाती वृक्ष है जो संपूर्ण भारत में पाया जाता है। पेड़ की ऊचाँई 30 मीटर होती है। छाल भूरे रंग की होती है इसे संस्कृत में विभिताकि, कार्शफाला, कालिद्रुम और हिन्दी में बहेड़ा के रूप में जाना जाता है। आकृति विज्ञान, बाह्रय स्वरूप स्वरूप : यह एक विशाल पर्णपाती वृक्ष है। छाल नीले रंग की होती है जिसमें ददारे बनी होती है। पत्तिंया : पत्तियाँ अण्डाकार और शाखाओं के अंत में समूहों में होती है। पत्तियाँ लंबाई में 8 से 16 से.मी. और चौड़ाई में 6 से 10 से.मी. की होती है।💎 खूबसूरत त्वचा, वजन कम करने के & हर गंभीर बिमारी के एक्यूप्रेशर पॉइंट की जानकारी के लिए हमारा संपर्क करें। ✅और हर गंभीर बिमारी मिटाये। https://www.facebook.com/એક્યુપ્રેશર-પ્લેનેટ-101139925132263/ फूल : फूल तीव्र आक्रामक गंध के साथ पीले – हरे रंग के होते है। मई के महीने में फूल खिलते है। फल : फल अण्डाकार भूरे रंग के होते है। गिरी मीठे किन्तु नशीली होती है। फल व्यास में 1.5 से 2.5 से.मी. के होते है। परिपक्व ऊँचाई : परिपक्व वृक्ष की ऊचाँई 20-25 मी. होती है। ☘️सभी जानकारी, घरेलू और आयुर्वेदिक चिकित्सा के इस इलाज केवल शैक्षिक हेतु के लिए है.. उपचार के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह ले। 🌀 एक्यूप्रेशर 🔑ट्रीटमेंट की जानकारी के लिए 📞👉 +91 9974592157 🌀 MSG 👉 +91 7016609049 हमारा संपर्क करें। और हर गंभीर बिमारी मिटाये।

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