murlidhargoyal39
murlidhargoyal39 Oct 12, 2017

आराधिका कृष्ण-कन्हैया की

आराधिका कृष्ण-कन्हैया की

आराधिका हूँ

दर्द के कोहरे में लिपटी साधिका हूँ
साँवरे मैं तो तुम्हारी राधिका हूँ ।
ले गये जीवन की सारी कामनाएँ
कह रही है प्रीत बस आराधिका हूँ ।

बंसरी में लय मधुर जब लाओगे तो
याद बचपन की सुखद जब पाओगे तो
फिर वही यमुना कदम्ब औ रासलीला
क्या मुझे पहचान लोगे आओगे तो ।

माँ यशोदा नंद बाबा राह तकते
वो दही माखन खिलाने रोज रखते
हो गयी है मौन सारी गोपिकाएँ
ग्वाल बाल सखा अब नहीं दूध चखते

है पड़ा सूना ये मधुबन कुँज गलियाँ
अब नहीं भाते किसी को रंगरलियाँ
है निरत सब कर्मरत बस साँस ढोते
अब नहीं श्रृंगारते कोई पुष्प कलियाँ

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कामेंट्स

pt bk upadhyay Oct 12, 2017
अच्छी कविता है। साधु साधु

Parm Krishna Dec 13, 2018

Pranam Jyot Flower +63 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 364 शेयर
Parm Krishna Dec 12, 2018

Milk Flower Water +77 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 195 शेयर

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