kusum
kusum Jun 5, 2018

suprabhat g

Jai shri radhe krishn

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Manoj manu May 30, 2020

🚩🙏🌺राधे राधे जी 🌺🌿🙏 आत्म चिंतन :- प्रतेक शुरुआत का पहला कदम उठता है और वही कदम अनेक कदमों के साथ में नयी मंज़िल तक के सफ़र को पूरा करने बाला होता है, अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उस प्रक्रिया में हमने क्या और कितना प्राप्त किया और अपनाया, किसी साधक के लिए किसी भी प्रकार के ज्ञान की प्राप्ति के लिए उसके अपने चुनाव होते हैं -अपने साधन होते हैं , पर ज्ञान तो अनंत है,कभी बाहरी तो कभी आँतरिक, अब प्रश्न सामने आता है कि हम कैसे बाहरी और आंतरिक ज्ञान प्राप्त करें, कैसे अपने जीवन को सार्थक करें, -पहली बात तो यह कि हमें वर्तमान की स्वयं के मन भावों एवं क्षमताओं को समझना होगा, -फिर अपनी प्राथमिकतायें तय करनी होंगी , -अब इनकी प्राप्ति के लिए उचित समय पर उचित साधन के साथ जुड़ना होगा, -वह अपने आराध्य अपने गुरु या फिर कोई मंत्र या फिर कोई भाव या कोई क्रिया भी हो सकता है, -किसी भी प्रकार के भ्रम से बाहर आना होगा, -वास्तविक स्थिति और सत्य को हर हाल में स्वीकार करके आगे बढना होगा, -अब आगे बढ़ने की बात आती है तो -किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह बहुत महत्व पूर्ण है कि हमको स्वयं के साथ -साथ अपने साधन पर पूर्ण विश्वास रखना होगा, -निरंतरता रखना और पूर्ण समर्पण करना होगा, -केवल अपनी क्रिया अपने कर्म पर ध्यान रखना होगा, -किभी उपलब्धि की प्राप्ति के लिए हर हाल में धैर्य रखना होगा , -अपने मन की संकल्प की शक्ति को -निरंतन स्वयं के द्धारा चुनौती देते रहने होगी, -निरंतन स्वयं से मिलना होगा -अपने मन से -अपने भावों से,आत्म मंथन करते रहना होगा, -न्यूनतम में अधिकतन की प्राप्ति को वरीयता देनी होगी, अनावश्यक चीज़ों को छोड़ना होगा , इस समस्त प्रकिया में जो ज्ञान की प्राप्ति होगी वही हमें आगे की राह भी दिखाती जायेगी, और हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पायेंगे,🌺🌿 🙏🌺जय जय श्री राधे जी 🌺🙏

+171 प्रतिक्रिया 19 कॉमेंट्स • 26 शेयर
b singh Jun 1, 2020

+5 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 27 शेयर
Sunita Pawar Jun 1, 2020

चाणक्य के 15 अमर वाक्य | 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ 1) दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है। 2) हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है, यह कड़वा सच है। 3) अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो। छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो। सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो।आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है।" 4) दूसरों की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी। 5) किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं। 6) अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे दंश भले ही न हो पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए। 7) कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो... मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ? इसका क्या परिणाम होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा? 8) भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये, इस पर हमला कर दो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो। 9) काम का निष्पादन करो, परिणाम से मत डरो। 10) सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है, पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है।" 11) ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है. अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ। 12) व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं। 13) ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं, उन्हें दोस्त न बनाओ, वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे। समान स्तर के मित्र ही सुखदायक होते हैं। 14) अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक समान उपयोगी है। 15) शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है।शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है। शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य दोनों ही कमजोर है. राजा भोज ने कवि कालीदास से दस सर्वश्रेष्ट सवाल किए- 1- दुनिया में भगवान की सर्वश्रेष्ठ रचना क्या है? उत्तर- ''मां'' 2- सर्वश्रेष्ठ फूल कौन सा है? उत्तर- "कपास का फूल" 3- सर्वश्र॓ष्ठ सुगंध कौन सी है? उत्तर- वर्षा से भीगी मिट्टी की सुगंध । 4-सर्वश्र॓ष्ठ मिठास कौन सी? - "वाणी की" 5- सर्वश्रेष्ठ दूध- "मां का" 6- सबसे काला क्या है? "कलंक" 7- सबसे भारी क्या है? "पाप" 8- सबसे सस्ता क्या है? "सलाह" 9- सबसे महंगा क्या है? "सहयोग" 10-सबसे कडवा क्या है? ऊत्तर- "सत्य". वो डांट कर अपने बच्चो को अकेले मे रोती है? वो माँ है और माँ एसी ही होती है । जितना बडा प्लाट होता है, उतना बडा बंगला नही होता. जितना बडा बंगला होता है, उतना बडा दरवाजा नही होता. जितना बडा दरवाजा होता है, उतना बडा ताला नही होता. जितना बडा ताला होता है, उतनी बडी चाबी नही होती. परन्तु चाबी पर पुरे बंगले का आधार होता है। इसी तरह मानव के जीवन मे बंधन और मुक्ति का आधार मन की चाबी पर ही निर्भर होता है। है मानव! तू सबकुछ कर पर किसी को परेशान मत कर, जो बात समझ न आऐ उस बात मे मत पड़! पैसे के अभाव मे जगत 1% दूखी है, समझ के अभाव मे जगत 99% दूखी है. आज का श्रेष्ठ विचार:- यदि आप धर्म करोगे तो भगवान से आपको माँगना पड़ेगा, लेकिन यदि आप कर्म करोगे तो भगवान को देना पड़ेगा..! 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

+15 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 25 शेयर
Sunita Pawar Jun 1, 2020

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 01 जून 2020* ⛅ *दिन - सोमवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076)* ⛅ *शक संवत - 1942* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - ग्रीष्म* ⛅ *मास - ज्येष्ठ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - दशमी शाम 02:57 तक तत्पश्चात एकादशी* ⛅ *नक्षत्र - हस्त 02 जून रात्रि 01:03 तक तत्पश्चात चित्रा* ⛅ *योग - सिद्धि दोपहर 01:18 तक तत्पश्चात व्यतिपात* ⛅ *राहुकाल - सुबह 07:25 से सुबह 09:05 तक* ⛅ *सूर्योदय - 05:57* ⛅ *सूर्यास्त - 19:14* *⛅वाराणसी काशी अनुसार* *⛅सूर्योदय-05:08* *⛅सूर्यास्त-18:43* ⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - गंगा दशहरा समाप्त* 💥 *विशेष - 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷 ➡ *01 जून 2020 सोमवार को दोपहर 02:58 से 02 जून मंगलवार को दोपहर 12:04 तक एकादशी है ।* 💥 *विशेष - 02 जून मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।* 🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।* 🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* 🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।* 🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।* 🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।* 🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।* 🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।* 🙏🏻 *प्रेरणामूर्ति भारती श्रीजी* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷 🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें .......विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l* 🙏🏻 *Sureshanandji* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷 🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के जो दिन चावल खाता है... तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है...ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा* 🙏🏻 *- पूज्य श्री* 🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞 🌷 *व्यतिपात योग* 🌷 🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।* 🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।* 🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।* 💥 *विशेष ~ व्यतिपात योग - 01 जून 2020 सोमवार को दोपहर 01:19 से 02 जून सुबह 09:53 तक व्यतीपात योग है।* 🙏🏻 *कथा स्रोत - (स्वामी सुरेशानन्द जी के सत्संग से)* 🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~*j 🌞 🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏

+35 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 27 शेयर

+328 प्रतिक्रिया 45 कॉमेंट्स • 70 शेयर
Swami Lokeshanand Jun 1, 2020

दो भाई थे। पर दोनों के स्वभाव में जमीन आसमान का अंतर था। एक संत सेवी था, दूसरा वेश्यागामी। एक रात वह संत सेवी भाई, संत की सेवा करके घर आ रहा था। रास्ते में उसके पैर में एक खूंटी गड़ गई। बड़ा गहरा जख्म हो गया और बहुत खून बह गया। वह बड़ी मुश्किल से घर पहुँचा। उसी रात वेश्यालय से लौट रहे, वेश्यागामी भाई को, रास्ते में लाखों रुपए का हीरों का हार पड़ा मिला। रात में वेश्यागामी भाई कहने लगा- मैं तो पहले से ही कहता था कि कुछ नहीं रखा इन संतों में। अब देख लिया? तुम यहाँ दर्द से कराह रहे हो, मैं ऐश कर रहा हूँ। दोनों ने विचार किया कि किसी जानकार के पास चलना चाहिए। और सुबह होते ही वे एक ज्योतिषी के पास गए। अपना परिचय दिए बिना ही दोनों की जन्मपत्रियाँ ज्योतिषी के आगे रख दी। ज्योतिषी ने पहले संतसेवी की पत्री उठाई। उसे पढ़कर पत्री एक तरफ रख दी, और बोले- ये पत्री मेरे पास क्यों ले आए हो? यह तो कल रात मर गया होगा। और वेश्यागामी की पत्री देखी तो बोले- यह किस देश के राजा की पत्री है? मेरा सौभाग्य है जो ऐसी पत्री मेरे पास आई। लोकेशानन्द कहता है कि यही सत्कर्म और दुष्कर्म का फल है। वर्तमान का सत्कर्म, पूर्वजन्म के पाप को काट कर, सूली का सूल बना देता है। और वर्तमान का दुष्कर्म, पूर्वजन्म के पुण्य को नष्ट कर, सम्राट को भी सामान्य मनुष्य बना देता है। हमें समझना होगा कि अपनी वर्तमान अवस्था के जिम्मेदार हम स्वयं ही हैं। आपकी परिस्थिति आपके कर्म का ही फल है। अपनी भूल दूसरे पर मत लादो, न तो ईश्वर पर, न ही भाग्य पर। आपका ही पाप चक्रवृद्धि ब्याज सहित आप पर आ गिरता है। तब कोई ताकत उसे रोक नहीं पाती। वायु तो निरंतर बहती है, जिस जहाज का पाल खुला हो, वह वायु का उपयोग कर आगे बढ़ जाए। पर जिसका पाल खुला नहीं है, वह वायु को दोष क्यों दे? योंही ईश्वर की कृपा तो निरंतर बरसती है, जिसके पास सत्कर्म हो, वह कृपा का उपयोग कर आगे बढ़ जाए। पर जिसके पास सत्कर्म नहीं है, वह ईश्वर को दोष क्यों दे? सदा भगवान और संत की सेवा करते रहो। यही एकमात्र सत्कर्म है।

+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 12 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB