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My Mandir Mar 3, 2018

शनिदेव आरती दर्शन, शनि हनुमान मंदिर खराड़ी, पुणे से।

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कामेंट्स

Rajeev sharma Mar 10, 2018
जय शनि महाराज,जय शनि देव

हीरालाल पारीक Mar 13, 2018
इसको पढ़कर आप सभी के मन में कई तरह के प्रश्न पैदा होंगे, वे स्वाभाविक भी है क्योंकि गत सैकड़ो वर्षो से जो परिपाटी चली आ रही है हमको उसी की जानकारी है। इसीलिए ऐसे प्रश्न होना स्वाभाविक है कि इतने वर्षो से किसी ने क्यों नहीं बताया, इतने बड़े-बड़े संत विद्वान धर्मगुरुओं ने कभी क्यों नहीं इस विषय का चिंतन किया, भगवान तो सर्व शक्तिमान है वे कही पर भी अस्त्र शस्त्र रख सकते है आदि आदि बातें मन में पैदा होंगी। इसपर मेरा निवेदन है कि भगवान कोई भी कार्य नियम विरुद्ध नहीं करते है। आप सभी पढ़े लिखे लोग है , में जो फार्मूला बताता हु जो कभी बदला नही जा सकता है , उससे आप स्वयं देख ले कि आपके घरों में, मंदिरों में, जिन देवी-देवताओं की पूजा कर रहे है वो सही है या गलत है। आप स्वयं निर्णय करें। 1. गणित का अकाट्य सिद्धांत है जिसपर संसार के समस्त विज्ञानों की खोज है। वो इस प्रकार है। + × + = + - × - = + + × - = - - × + = - विज्ञान के अनुसार पुरुष (देवता) का दाहिना अंग + (पॉजिटिव/सकारात्मक) होता है एवम् बायां अंग - (नेगेटिव/नकारात्मक) होता है। इसके अनुसार देवता के बायें हाथ में शस्त्र एवम् दाहिने हाथ से आशीर्वाद एवम् मंगलकारी वस्तु होनी चाहिए। इसी प्रकार स्त्री (देवी) का दाहिना अंग - (नेगेटिव/नकारात्मक) होता है एवम् बायां अंग + (पॉजिटिव/सकारात्मक) होता है। इसी तरह देवी के बायें हाथ से आशीर्वाद व शुभ मंगलकारी वस्तु एवम् दाहिने हाथों में शस्त्र होने चाहिए। तब तो वो मूर्ती + (पॉजिटिव/सकारात्मक) होगीस व उसकी पूजा का फल सकारात्मक होगा तथा इसके विपरीत होने पर पूजा का फल - ( नेगेटिव/नकारात्मक) होगा। आप स्वयं देख ले कि आपके पूजाघर एवम् जिन मंदिरों में आप दर्शन करने जाते हो वहा की मूर्तियां सही है क्या? आप पायेगे कि अधिकांश मूर्तियाँ इसके विपरीत है। 2. हम सभी कहते है की- लक्ष्मीनारायन, सीताराम, राधा कृष्ण, गौरीशंकर, माता-पिता आदि। यानि पहले लक्ष्मी, सीता, गौरी, राधा और माता आदि का स्थान पहले होना चाहिए लेकिन मंदिरों में घरों में जिनकी आप पूजा करते हो वहां नारायण, राम, शंकर एवम् कृष्ण आदि पहले है। ( दक्षिण भारत में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में सीतारामजी के सेकड़ों प्राचीन मंदिर मौजूद है।) इन विपरीत मूर्तियों की पूजा के कारण ही प्रत्येक परिवार मे कुछ ना कुछ समस्याएं अवश्य ही है और हिन्दू धर्म के कमज़ोर होने का यही मुख्य कारण है। मेरी बात आप लोगो को अटपटी जरूर लगी होगी लेकिंन ये शत प्रतिशत सही हैं आप स्वयं देख सकते हो। अगर समस्याओ से छुटकारा चाहते हो एवम् जीवन में शान्ति चाहते हो और तांत्रिकों व पाखंडवाद के चंगुल से बचना चाहते हो तो स्वयं विचार कर सुधार करे। आगे हरि इच्छा सबसे सादर जय सिया राम।

Neetu koshik Jan 25, 2020

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Sanjay Singh Jan 25, 2020

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aaradhya Jan 26, 2020

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Sanjay Singh Jan 25, 2020

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SHANTI PATHAK Jan 25, 2020

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N.D. PALIWAL Jan 25, 2020

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