Santosh Soni
Santosh Soni Jun 7, 2018

श्री कृष्ण. शरणममः श्री गोविंद शरणमम

संतोष सोनी बाराँ राजस्थान जय श्री कृष्ण

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Renu Singh May 27, 2020

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sanjay Awasthi May 27, 2020

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dinesh patidar May 27, 2020

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Manoj manu May 27, 2020

🚩🙏🌹हरि ऊँ -राधे राधे जी 🌿🌺🙏 भक्ति धारा :-एक बार बृंदावन में एक मंदिर के बाहर कुछ साधू एक बड़ा सुंदर भजन गा रहे थे - 🌺"हो नयन हमारे अटके बिहारी जी के चरण कमलों में " 🌿- हो नयन हमारे अटके बिहारी जी के चरण कमलों में " -बार -बार वे यही दुहराये जा रहे थे,तभी वहाँ से एक राहगीर का निकलना हुआ,भजन बहुत ही सुंदर था ,तो वह कुछ देर वहीं बैठकर भजन सुनता रहा,और कुछ समय बाद आगे को चला गया और एक स्थान पर बैठकर अपनी आँखें बंद करके वह भी भजन गाने लगा -- 🌹"हो नयन बिहारी जी के अटके ,हमारे चरण कमलों में " --बार- बार बस यही गाये जा रहा था, कुछ देर बाद वह अपनी आँखें खोलता है और अपने सामने साक्षात् बिहारी जी को देखता है, वो बड़ी सोच में पड जाता कि बडे -बड़े सिद्ध महात्माओं को ही बिहारी जी के दर्शन होते हैं और मैं तो कुछ भी नहीं, जरूर कोई भृम हो रहा है मुझे, लेकिन बिहारी जी तो सब कुछ समझते -जानते हैं, वे बोले मैं ही तुम्हारे बिहारी जी हूँ, मैंने बड़े -बड़े संत महात्मा मेरी भक्ति में लीन देखे पर तुम्हारे जैसा कोई नहीं देखा, तुमने तो मेरे नयन अपने चरण कमलों में ही अटका रखे हैं भैया, -फिर भला मैं कैसे तुमको दर्शन नहीं देता बस तुम्हारा ये समर्पण भाव मुझे मजबूर कर गया और मुझे आना पड़ा तुम्हें दर्शन देने के लिए, ऐसे ही तो हैं अपने बिहारी जी शब्द और भाषा से परे बस केवल और केवल मन के समर्पण भाव में रमण करते हैं वे तो, बोलिए बृंदावन बिहारी लाल की जय 🌺🙏 🌹"भाव के भूखे हैं प्रभु जी भाव ही बस सार है, 🌿भाव से अर्पण करो तो एक पुष्प भी स्वीकार है, " 🌺🌿प्रेम पूर्वक बोल दीजिए -राधे राधे 🌺🌿🙏

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🕉गणपतये नमः 🌹🌹🙏🙏 *जीवन को सफल बनाने के लिए सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक न्यायकारी आनन्दमय ईश्वर का ध्यान करें।*💐 केवल रोटी कपड़े मकान से व्यक्ति का जीवन पूरा ठीक-ठाक नहीं चलता। *रोटी कपड़े के अतिरिक्त मनुष्य को शांति आनंद उत्साह निर्भयता सेवा परोपकार दान दया आदि गुणों की भी आवश्यकता होती है।* यदि किसी के जीवन में ये सब गुण हों, तो वह संपूर्ण आनंदित जीवन जी सकता है। यदि इन गुणों की कमी हो, तो वह केवल भोगवादी बनकर रह जाता है। इतने से आत्मा की तृप्ति नहीं हो पाती। लोग भूल जाते हैं कि हम आत्मा हैं। अविद्या के कारण लोग प्रायः शरीर को ही आत्मा समझते हैं। इसलिए केवल शरीर की आवश्यकताएं पूरी करने, और भौतिक सुख भोगने में ही जीवन का सारा समय खर्च कर देते हैं। ऐसे लोगों को बुढ़ापे में या मृत्यु के समय पर बहुत पश्चाताप होता है। तो इस पश्चाताप से बचने के लिए बचपन से व्यक्ति को तैयारी करनी चाहिए। बचपन से ही वह संसार की वस्तुओं को ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न करे, कि इस संसार में भौतिक वस्तुओं का सुख कुछ ही देर तक मिलता है, उसके बाद वह छूट जाता है, लगातार नहीं मिलता। पूर्ण तृप्तिदायक रूप में नहीं मिलता। सांसारिक सुख को भोगने पर भी मन में इच्छा तीव्र होती जाती है, वह शांत नहीं हो पाती, जिसके कारण आत्मा में बेचैनी बनी रहती है। और उसी बेचैनी या अशांति का परिणाम यह होता है, कि व्यक्ति झूठ छल कपट धोखा अन्याय शोषण अत्याचार लूटमार आतंकवाद इत्यादि अपराध करनेवाला बन जाता है। इन समस्याओं से बचने के लिए यदि आप सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक न्यायकारी आनंदस्वरूप परमात्मा का ध्यान करें, तो आपका जीवन संतुलित, सफल और आनंदित होगा। *जय श्रीकृष्ण*🌹👏👏👏

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pandat Priyanka May 27, 2020

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