मायमंदिर फ़्री कुंडली
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♥️♥️♥️पिता दिवस की आप सभी भक्तों को शुभकामनाएं ♥️♥️♥️ 🙏🌷🌷🌷🌷🌷आपका परिवार हमेशा खुश रहे आप पर उज्जैन महाकाल ज्योतिर्लिंग की कृपा करें जय महाकाल की🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏

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sarita ramanuj shukla Jun 16, 2019
पतृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂

देश में कब दिखेगा चंद्र ग्रहण? याद रहे कि आशंकि चंद्र ग्रहण हमेशा पृथ्वी की बाह्य छाया के अधीन आने से ही शुरू होता है। इस बार चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 57 मिनट 56 सेकंड की होगी। चंद्रमा 16-17 जुलाई की मध्य रात्रि को 12:13 बजे को पृथ्वी की बाहरी छाया और 1:31 बजे केंद्रीय छाया के अधीन आ जाएगा। रात के तीन बजे चंद्र ग्रहण का सबसे ज्यादा असर दिखेगा जब चांद के सबसे बड़े हिस्से पर पृथ्वी की छाया पड़ेगी और वह काला दिखने लगेगा। चांद 4:29 बजे पृथ्वी के आंतरिक या केंद्रीय छाया से जबकि 5:47 बजे बाह्य छाया से बाहर आ जाएगा। आंशिक चंद्रग्रहण का असर स्पष्ट है कि पृथ्वी की छाया चांद के छोटे से हिस्से पर ही पड़ने के कारण आंशिक चंद्र ग्रहण लगता है। यही वजह है कि चांद का वही छोटा हिस्सा ही हमें काला दिखाई देता है। भारत में कहां-कहां दिखेगा? देश के पश्चिमी हिस्से और केंद्रीय इलाकों में चंद्रग्रहण की पूरी घटना देखी जा सकेगी। देश के पूर्वी इलाके के लोगों को अहले सुबह करीब-करीब उस समय दिखेगा जब चंद्र अस्त होने लगता है। चंद्रमा बिहार, असम, बंगाल और ओडिशा में ग्रहण की अवधि में ही अस्त हो जाएगा।

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जो दक्ष होता है उसी को दक्षिणा दी जाती है | दक्ष वह होता है जिसके पास अक्ष होता है | अक्ष वह होता है जो कभी क्षय नहीं होता है | क्षय जो नहीं होता है वह भगवान् है | भगवान् वह है जो ज्ञान वाला है | ज्ञान वाला केवल गुरु होता है | गुरु ही दक्ष होता है और उसी के पास अक्ष यानी आखें भी होती हैं | गुरु एक तरफ परमात्मा होता है और दूसरी तरफ शिष्य पर अक्ष यानी नज़र रखता है की शिष्य क्या कर रहा है ? क्यूंकि गुरु को उस शिष्य को भी तो दक्ष बनाना है | इस कार्य में गुरु दक्ष है इसलिए गुरु को शिष्य गुरु दक्षिणा देता है | शिष्य अपनी मर्जी से गुरूदक्षिणा समर्पित करते हुए गुरू से गुरूमंत्र दीक्षा प्राप्त कर सकता है l इसके लिये गुरू शिष्य से पहिले से ही नियोजित न्यौच्छावर राशी नही मांगता है क्युके यह कर्म गुरू के लिये पाप होता है जिसे ग्यान को बेचना कह सकते है और जो गुरू येसा साहस करते है वह शास्त्र,उपनिषद और गुरूमंडल का अपमान करते है l उन्हे इस पाप कर्म का दंड मिलता है जिसके कारण उनके शिष्य हमेशा मंत्र साधना मे असफल होते है और गुरू से सदैव दुरी रखते है l येसे गुरूओ से दुर रहे जो सिर्फ स्वयम का पेट भरने हेतु शिष्यो के धन पर निर्भर रहेते है क्युके इसमे सबसे ज्यादा नुकसान शिष्य का होता है और वह येसे गुरू का त्याग करने के बाद अध्यात्मिक जीवन का आनंद उठाना बंद कर देता है l मंत्र-तन्त्रो को पाखंड मानकर हमेशा के लिये छोड देता है जिससे वह जिवन के समस्त प्रकार के सुखो का नाश कर देता है l जो साधक/साधिका नाथ सांप्रदाय से प्रामानिकता के आधार पर गुरूदीक्षा ग्रहण करना चाहते है उनका "शाबर मंत्र विग्यान परिवार मे स्वागत है",जरुरी नही है के इससे पहिले आपने किसी अन्य गुरू से दीक्षा प्राप्त की हो तो आप नाथसांप्रदाय मे दीक्षा प्राप्त नही कर सकते हो,आप चाहे पहिले से किसी गुरू से दिक्षीत हो फिर भी नाथसांप्रदाय मे गुरूदीक्षा प्राप्त कर सकते है l यह सांप्रदाय गुरूशक्ती पर चलता है और इसमे सबसे ज्यादा गुरू का महत्व है lइस सांप्रदाय मे गुरूमंत्र का स्वरुप शाबर-गुरूमंत्र होता है जिसमे प्रचन्ड़ शक्ती होती है और जिससे प्रत्येक शाबर मंत्रो को सिद्ध करने की अदभुत क्षमता एवं चेतना प्राप्त होती है lजैसे ज्यादा तर शाबर मंत्रो मे लिखा होता है "ओम नमो आदेश गुरूजी को आदेश...... और ......मेरी भक्ती गुरू की शत्की" तो इससे समज मे आता है के शाबर मंत्र सिद्धी सफलता हेतु गुरू का महत्व सबसे ज्यादा होता है l नाथसांप्रदाय मे शाबर-गुरूमंत्र दीक्षा ग्रहण करने हेतु सम्पर्क करे और जीवन को सही दिशा मे लेकर जाये,नाथसांप्रदाय प्राचीन सांप्रदाय है इसमे आपका कल्याण अवश्य ही होगा l वॉटसअप 6353771243

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champalal m kadela Jul 16, 2019

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Shanti Pathak Jul 16, 2019

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