RAVI KUMAR
RAVI KUMAR Sep 1, 2017

"माता अंजना को कैसे मिली मुक्ति वानर अवतार से"

"माता अंजना को कैसे मिली मुक्ति वानर अवतार से"

ब्रह्मा जी के महल में हजारों सेविकाएं थीं, जिनमें से एक थीं अंजना। अंजना की सेवा से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें मनचाहा वरदान मांगने को कहा। अंजना ने हिचकिचाते हुए उनसे कहा - कि "उन पर एक तपस्वी साधु का श्राप है , अगर हो सके तो उन्हें उससे मुक्ति दिलवा दें"। ब्रह्मा ने उनसे कहा - कि "वह उस श्राप के बारे में बताएं, क्या पता वह उस श्राप से उन्हें मुक्ति दिलवा दें"।
अंजना ने उन्हें अपनी कहानी सुनानी शुरू की। अंजना ने कहा - " बालपन में जब मैं खेल रही थी तो मैंने एक वानर को तपस्या करते देखा, मेरे लिए यह एक बड़ी आश्चर्य वाली घटना थी, इसलिए मैंने उस तपस्वी वानर पर फल फेंकने शुरू कर दिए। बस यही मेरी गलती थी, क्योंकि वह कोई आम वानर नहीं बल्कि एक तपस्वी साधु थे। मैंने उनकी तपस्या भंग कर दी और क्रोधित होकर उन्होंने मुझे श्राप दे दिया, कि जब भी मुझे किसी से प्रेम होगा तो मैं वानर बन जाऊंगी"। मेरे बहुत गिड़गिड़ाने और माफी मांगने पर उस साधु ने कहा - कि "मेरा चेहरा वानर होने के बावजूद उस व्यक्ति का प्रेम मेरी तरफ कम नहीं होगा" ।
अपनी कहानी सुनाने के बाद अंजना ने कहा - कि "अगर ब्रह्म देव उन्हें इस श्राप से मुक्ति दिलवा सकें तो वह उनकी बहुत आभारी होंगी"। ब्रह्म देव ने उन्हें कहा - कि "इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए अंजना को धरती पर जाकर वास करना होगा, जहां वह अपने पति से मिलेंगी। शिव के अवतार को जन्म देने के बाद अंजना को इस श्राप से मुक्ति मिल जाएगी ।"

ब्रह्मा की बात मानकर अंजना धरती पर चली गईं और एक शिकारन के तौर पर जीवन यापन करने लगीं। जंगल में उन्होंने एक बड़े बलशाली युवक को शेर से लड़ते देखा और उसके प्रति आकर्षित होने लगीं। जैसे ही उस व्यक्ति की नजरें अंजना पर पड़ीं, अंजना का चेहरा वानर जैसा हो गया। अंजना जोर - जोर से रोने लगीं, जब वह युवक उनके पास आया और उनकी पीड़ा का कारण पूछा, तो अंजना ने अपना चेहरा छिपाते हुए उसे बताया कि वह बदसूरत हो गई हैं। अंजना ने उस बलशाली युवक को दूर से देखा था, लेकिन जब उसने उस व्यक्ति को अपने समीप देखा तो पाया कि उसका चेहरा भी वानर जैसा था ।
अपना परिचय बताते हुए उस व्यक्ति ने कहा - कि "वह कोई और नहीं वानर राज केसरी हैं जो जब चाहें इंसानी रूप में आ सकते हैं।" अंजना का वानर जैसा चेहरा उन दोनों को प्रेम करने से नहीं रोक सका और जंगल में केसरी और अंजना ने विवाह कर लिया ।
भगवान शिव के भक्त होने के कारण केसरी और अंजना अपने आराध्य की तपस्या में मग्न थे। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। अंजना ने शिव को कहा - कि "साधु के श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें शिव के अवतार को जन्म देना है, इसलिए शिव बालक के रूप में उनकी कोख से जन्म लें।" " तथास्तु, कहकर शिव अंतर्ध्यान हो गए। इस घटना के बाद एक दिन अंजना शिव की आराधना कर रही थीं और किसी दूसरे कोने में महाराज दशरथ, अपनी तीन रानियों के साथ पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए यज्ञ कर रहे थे। अग्नि देव ने उन्हें दैवीय "पायस" दिया जिसे तीनों रानियों को खिलाना था लेकिन इस दौरान एक चमत्कारिक घटना हुई, एक पक्षी उस पायस की कटोरी में थोड़ा सा पायस अपने पंजों में फंसाकर ले गया और तपस्या में लीन अंजना के हाथ में गिरा दिया। अंजना ने शिव का प्रसाद समझकर उसे ग्रहण कर लिया और कुछ ही समय बाद उन्होंने वानर मुख वाले हनुमान जी को जन्म दिया। हनुमान जी के जन्म के बाद अंजाना को श्राप से मुक्ति मिल जाती है।

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कामेंट्स

S.B. Yadav Sep 1, 2017
JAI MAA ANJNA JAI BAJRANGBALI JAI SHRI RAM

Balbir singh Feb 24, 2020

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Vijay motwani Feb 24, 2020

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Rajkumar Agarwal Feb 24, 2020

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Vandana Singh Feb 24, 2020

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Rajkumar Agarwal Feb 24, 2020

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sandeep sharma Feb 24, 2020

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Priti Kumari Feb 24, 2020

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panditshayam999 Feb 24, 2020

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